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भारत का लक्ष्य इस वर्ष एक ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात करना : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल


दिल्ली /सत्ता संदेश

निर्यात लक्ष्य एक राष्ट्रीय मिशन; लगभग 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते बाजार पहुंच को बढ़ावा देंगे: श्री पीयूष गोयल

श्री पीयूष गोयल ने व्यवसायों से आयात रुझानों पर दृष्टि रखने, अवसरों की पहचान करने, आयात प्रतिस्थापन में देश की मदद करने की अपील की

स्वदेशी को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए श्री पीयूष गोयल ने घरेलू उत्पादों की सहायता करने का आग्रह किया

बढ़ती खपत अवसर प्रदान करती है, लेकिन आयात में वृद्धि को रोकने के लिए घरेलू उद्योग को आगे आना होगा; युवाओं और स्टार्टअप की अधिक भागीदारी की आवश्‍यकता : श्री पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत ने इस वर्ष एक ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यही आत्मनिर्भर भारत की सच्ची पहचान होगी। नई दिल्ली में भारतीय व्यापार महोत्सव की वेबसाइट लॉन्च समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, इस वर्ष निर्यात 863 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि हुई है, जो वर्तमान वैश्विक परिवेश में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

श्री गोयल ने कहा कि यह केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र का लक्ष्य है और केंद्र सरकार इसे अर्जित करने के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में लगभग 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की दिशा में प्रयास किए गए हैं। इससे भारतीय वस्तुओं को उन बड़े बाजारों में तरजीही पहुंच मिलेगी जहां प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क पर भारतीय सामान बेचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ये समझौते धीरे-धीरे लागू होंगे और ओमान के साथ एफटीए पहली जून से लागू हो सकता है। कागजी कार्रवाई के लिए लंबित अन्य अंतिम रूप दिए गए एफटीए भी बाद में लागू हो जाएंगे।

श्री पीयूष गोयल ने हितधारकों से वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार पोर्टल के माध्यम से आयात रुझानों का अध्ययन करने और घरेलू विनिर्माण तथा आयात प्रतिस्थापन के अवसरों की पहचान करने का आग्रह किया। उन्होंने देश में आयात की जा रही वस्तुओं पर निरंतर दृष्टि रखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ऐसे रुझान भारतीय व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं। श्री गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय को विदेशों से भारत में आने वाले उत्पादों को उजागर करते हुए इन अवसरों को अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयात प्रतिस्थापन और निर्यात विकास के दो प्रमुख पहलू हैं और मंत्रालय उन क्षेत्रों को भी प्रदर्शित करेगा जहां भारत की शक्ति और क्षमता है ताकि व्यवसाय इन अवसरों का लाभ उठा सकें।

श्री पीयूष गोयल ने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने और स्वदेशी भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विदेशी वस्तुओं के प्रति थोड़ी सी भी प्राथमिकता घरेलू उद्योग को कमजोर कर सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है और उपभोग बढ़ रहा है, भारत के लिए अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करना आवश्यक है, अन्यथा आयात इस कमी को पूरा करेगा। श्री गोयल ने व्यवसायों और उपभोक्ताओं से देश के भीतर आपूर्तिकर्ता और ग्राहक बनकर एक-दूसरे की सहायता करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि यदि भारतीय स्वदेशी मेला जैसी पहलों के माध्यम से इस भावना को मजबूत किया जाता है, तो यह भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने वाले एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में परिवर्तित हो सकता है।

श्री गोयल ने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में भारत अभी भी विदेशी देशों पर बहुत हद तक निर्भर है। उन्होंने राजकोट, जालंधर, लुधियाना, बटाला और पुणे सहित औद्योगिक समूहों से आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री ने चिकित्सा उपकरणों के बढ़ते घरेलू उत्पादन को भी रेखांकित किया और विशाखापत्तनम में निर्मित सीटी स्कैन मशीन को उदृत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को अधिक अपनाने से मांग बढ़ेगी और परिचालन का परिमाण भी बढ़ेगा।

श्री गोयल ने कहा कि भारत को केवल विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने मात्र से आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को निरंतर बड़ी उपलब्धियों के लिए प्रयासरत रहना चाहिए, नए विचार उत्पन्न करने चाहिए और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा परिकल्पित अमृत काल के दौरान विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर निरंतर कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उद्योगों, व्यवसायों और नागरिकों के उत्साह के साथ-साथ 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भावना से यह विश्वास मिलता है कि विश्‍व की कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती। भारत मंडपम में आयोजित हो रहे भारतीय स्वदेशी मेले का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल स्वयं भारत की विविधता को दर्शाता है, क्योंकि यहाँ उपयोग की जाने वाली सामग्री और उत्पाद देश के विभिन्न कोनों से आए हैं।

श्री गोयल ने गुणवत्ता और उत्पादकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी देश में गुणवत्ता मानकों में सुधार और उत्पादकता में वृद्धि चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता और पैकेजिंग के बिना भारत वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और इसके निर्यात में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

कृषि और मत्स्य पालन सेक्‍टरों की क्षमता को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि किसानों और मछुआरों के उत्पादों सहित भारत का कृषि निर्यात लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन सेक्‍टरों में मूल्यवर्धन का स्तर अभी भी कम है। उन्होंने कहा कि यदि युवा उद्यमी मूल्यवर्धित सेक्‍टरों में प्रवेश करें और लघु, मध्यम एवं वृहत्तर स्तर पर प्रसंस्करण और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करें तो अपार संभावनाएं हैं।

श्री गोयल ने कहा कि जब भारत निर्यात-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाता है, तो गुणवत्ता मानक स्वाभाविक रूप से बेहतर होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्वदेशी उत्पाद निर्यात-योग्य हो जाएं, तो लोग विदेशी वस्तुओं की ओर रुख नहीं करेंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और परिचालन के दायरे का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री गोयल ने कहा कि सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की परिभाषा का विस्तार किया गया है और अब 500 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले उद्यम एमएसएमई के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उद्यमों को और अधिक विकसित होते देखना चाहती है और उनके साथ खड़ी है।

उन्होंने आयोजकों से आग्रह किया कि वे भारतीय व्यापार महोत्सव में देश भर से विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को आमंत्रित करें। कार्यक्रम में 1,000 व्यवसायों की भागीदारी का हवाला देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य से 25 महिला उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए, जिससे अकेले ही लगभग 700-750 प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग और बढ़ती खपत व्यापारियों, उद्योगों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असीम अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सावधान किया कि यदि घरेलू उद्योग देश की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो आयात इस कमी को पूरा करेगा।

उन्होंने इस पहल में युवा उद्यमियों, स्टार्टअप्स और देश भर के युवाओं सहित अगली पीढ़ी को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयात प्रतिस्थापन और वर्तमान में आयात किए जा रहे उत्पादों से संबंधित अवसरों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि लोग घरेलू विनिर्माण की संभावनाओं को समझ सकें।

श्री गोयल ने भारतीय स्वदेशी मेले में रुपे कार्ड और यूपीआई संचालित करने वाली एनपीसीआई को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि यूपीआई का व्यापक उपयोग हो रहा है, जबकि रुपे कार्ड का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने मेले के पूरे परिसर में 50 से 100 कियोस्क स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां आगंतुक आधार और अन्य पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके रुपे डेबिट कार्ड प्राप्त कर सकें और यूपीआई या रुपे कार्ड के माध्यम से सभी लेनदेन डिजिटल रूप से कर सकें।

श्री गोयल ने कहा कि इस पहल के लिए बैंकों को एक साथ लाने से भारत की भुगतान प्रणालियों के व्यापक अंगीकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत मंडपम नियमित रूप से प्रदर्शनियों और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन करता है। ऐसी पहल से अधिक लोगों को पूरे देश में रुपे और यूपीआई को अपनाने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की छोटी-छोटी पहल भारत की अमृतकाल यात्रा को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेंगी और जनभागीदारी के माध्यम से समृद्ध और विकसित भारत की राह को सुदृढ़ करेंगी। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति एक कदम आगे बढ़ाता है, तो देश 140 करोड़ कदम आगे बढ़ता है।

श्री गोयल ने सभी हितधारकों से भारतीय व्यापार महोत्सव को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया और कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

भारतीय व्यापार महोत्सव 12 अगस्त – 15 अगस्त 2026 तक चलेगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की

दिल्ली/ सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा तथा महासागर-आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की अपनी उपयोगिता और महत्ता है तथा भारत स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी श्री चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक, सीईएल के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वदेशी प्रणालियों के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग पहलों की भी शुरुआत हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन के संचालन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सुविधा स्वदेशी विनिर्माण तथा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रति देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में सीईएल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा निर्मित किया गया था तथा देश का पहला सौर संयंत्र भी वर्ष 1979 में इसी संगठन द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इतनी अग्रणी उपलब्धियों के बावजूद उस समय सीईएल के योगदान को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब यह संस्था पुनः राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रासंगिकता प्राप्त कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी संस्था से लाभ अर्जित करने वाली और राजस्व उत्पन्न करने वाली मिनी रत्न कंपनी के रूप में सीईएल का परिवर्तन संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव दृढ़ नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन तथा संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

मंत्री ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण 24 अप्रैल 2025 को जारी किया गया था, एक माह के भीतर सफल बोलीदाता का चयन कर लिया गया और एक वर्ष से भी कम समय में विनिर्माण सुविधा का संचालन प्रारंभ हो गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, जो भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है तथा उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहलों का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योग साझेदारी के माध्यम से व्यावसायीकरण और जन उपयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूर्ण रूप से स्वदेशी बन चुकी है और कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है तथा यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास में परिवर्तित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

रक्षा मंत्रालय–भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के बीच 1,476 करोड़ का रक्षा सौदा

दिल्ली/सत्ता संदेश

रक्षा मंत्रालय ने हैदराबाद स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ भारतीय सेना के लिए 1,476 करोड़ रुपये की लागत से पांच ग्राउंड-बेस्ड (ज़मीन पर स्थित) मोबाइल (एक से दूसरे स्थान तक ले जाये जाने में सक्षम) इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जो न्यूनतम 72 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से युक्‍त होंगे। स्वदेशी डिजाइन के आधार पर विकास और निर्माण श्रेणी (बाय इंडिया-इंडिजिनली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) के तहत इस अनुबंध पर आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-दो में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गए।

इस प्रणाली से भारतीय सेना की इकाइयों का आधुनिकीकरण होगा और यह देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तंत्र को सुदृढ़ बनाएगा। यह अनुबंध रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मेक-इन-इंडिया के प्रति प्रतिबद्धता और पुष्‍ट करता है।

खाद्य सुरक्षा से खाद्यान्नों के मामले में नेतृत्व की ओर: खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पीएलआई योजना का परिवर्तनकारी प्रभाव
  • श्री अविनाश जोशी

खाद्यान्नों से जुड़ी भारत की कहानी में एक निर्णायक मोड़

भारत आज अपने आर्थिक सफर के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अब जबकि हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की दिशा में अग्रसर है, विकास को सिर्फ उत्पादन की मात्रा से ही नहीं, बल्कि हमारे द्वारा सृजित मूल्य के आधार पर भी मापना होगा।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की तुलना में बहुत कम क्षेत्र ही ऐसे हैं, जहां इस प्रकार का बदलाव बिल्कुल साफ नजर आता है।

भारत खाद्यान्नों, फलों, सब्जियों, दूध और समुद्री उत्पादों के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक है। दशकों तक, हमारे कृषि संबंधी सामर्थ्य ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। फिर भी, इस उपज का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से बेहद ही सीमित मूल्यवर्धन के साथ सीधे खेत से बाजार तक पहुंचता रहा।

आज भारत के कृषि उत्पादन का महज 12-13 प्रतिशत हिस्सा ही प्रसंस्करण से गुजरता है। उत्पादन और प्रसंस्करण के बीच का यही अंतर भारतीय अर्थव्यवस्था में उपलब्ध सबसे बड़े अवसरों में से एक है।

इसलिए, खाद्यान्नों से जुड़ी भारत की यात्रा का अगला चरण बिल्कुल स्पष्ट है: कृषि की प्रचुर संपदा को उच्च मूल्य वाले एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य उत्पादों में परिवर्तित करना।

पीएलआई योजना के पीछे की परिकल्पना

इस अवसर को पहचानते हुए, भारत सरकार ने मार्च 2021 में कुल 10,900 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन पर आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) की शुरुआत की।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) द्वारा इस योजना को 2021-22 से 2026-27 तक की छह साल की अवधि के लिए लागू किया जा रहा है।

इस योजना के पीछे का मूल विचार सरल लेकिन ठोस है: खाद्य प्रसंस्करण क्षमता, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग के विस्तार में निवेश करने वाली कंपनियों को पुरस्कृत करना। कुल मिलाकर, यह योजना इन-स्टोर ब्रांडिंग, अंतरराष्ट्रीय खुदरा श्रृंखलाओं में शेल्फ स्पेस और वैश्विक विपणन अभियानों में निवेश करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके भारत में खाद्य उत्पादन से जुड़ी वैश्विक स्तर की कई चैंपियन कंपनियां तैयार करती है।

रणनीतिक डिजाइन: एक आधुनिक खाद्य इकोसिस्टम का निर्माण

पीएलआईएसएफपीआई योजना की संरचना को सावधानीपूर्वक को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित रखा गया है।

1. उच्च क्षमता वाले खाद्य क्षेत्रों को प्रोत्साहन देना

पहला घटक पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) और खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद जैसी प्रमुख खाद्य श्रेणियों में उत्पादन बढ़ाने पर केन्द्रित है।

ये श्रेणियां वैसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत घरेलू खपत और निर्यात क्षमता, दोनों में तेजी से विस्तार कर सकता है।

2. नवाचार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भागीदारी को प्रोत्साहन देना

दूसरा घटक एमएसएमई द्वारा विकसित नवोन्मेषी और जैविक खाद्य उत्पादों को समर्थन प्रदान करता है। लघु एवं मध्यम उद्यम भारत के खाद्य क्षेत्र की रीढ़ हैं और समावेशी विकास हेतु  आधुनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ उनका जुड़ाव बेहद जरूरी है।

पोषक अनाज (मिलेट) से संबंधित नवाचार: परंपरा को आधुनिक बाजारों से जोड़ना

वर्ष 2023 में, अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज (मिलेट्स) वर्ष के उपलक्ष्य में, मंत्रालय ने पीएलआई योजना के तहत एक विशेष पहल की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) और खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) उत्पादों में मिलेट्स के उपयोग को प्रोत्साहित करना था।

मिलेट्स जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी, अत्यधिक पौष्टिक और भारत की कृषि परंपराओं में गहराई से जुड़े हुए हैं।

आधुनिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में मिलेट्स का समावेश करके, यह योजना पोषण संबंधी सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी कृषि को एक साथ बढ़ावा देती है।

बदलाव से जुड़े आंकड़े

पीएलआई योजना के तहत बहुत ही कम समय में हासिल की गई प्रगति उद्योग जगत की ओर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और इस नीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

अब तक:

• इस योजना के तहत 165 कंपनियों को मंजूरी दी गई है।

• इनमें से 68 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं, साथ ही बड़ी कंपनियों के 40 संविदा निर्माता भी शामिल हैं।

• कुल मिलाकर 9,207 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है।

• प्रति वर्ष लगभग 35 लाख मीट्रिक टन की नई प्रसंस्करण और संरक्षण संबंधी क्षमता सृजित की गई है।

• इस योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3.29 लाख रोजगार सृजित हुए हैं।

ध्यान रखने लायक बात यह है कि इस योजना का मूल लक्ष्य 25 लाख रोजगार सृजित करना था। इस क्षेत्र ने पहले ही इस लक्ष्य का 131 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया है।

पीएलआई समर्थित कंपनियों द्वारा प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों की बिक्री में भी 2019-20 से 13.23 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

(निर्यात में वृद्धि दर 2019-20 से 7.41 प्रतिशत की है)

विभिन्न पीएलआई योजनाओं के बीच एक चमकता सितारा

उत्पादन पर आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के 14 क्षेत्रों को कवर करती है। इनमें से, खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित पीएलआई सबसे प्रभावशाली योजनाओं में से एक बनकर उभरी है।

कुल पीएलआई सब्सिडी वितरण में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का हिस्सा मात्र 8 से 9 प्रतिशत ही होने के बावजूद, इसने तमाम पीएलआई योजनाओं के तहत सृजित किए गए कुल रोजगारों में से लगभग 42 प्रतिशत रोजगार सृजित किए हैं।

अब तक, इस योजना के तहत कुल 2715 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है। यह कुल परिव्यय का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है।

यह साबित करता है कि खाद्य प्रसंस्करण भारत के मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम में सबसे अधिक रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों में से एक है।

उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली के अनुरूप बदलाव

भारत के जनसांख्यिकीय परिवर्तन का असर खाद्य उद्योग पर भी पड़ रहा है।

युवा और शहरीकरण की ओर अग्रसर आबादी की बढ़ती मांगें इस प्रकार हैं:

• खाद्य संबंधी सुविधाजनक उपाय

• स्वच्छ पैकेजिंग

• सुरक्षित और पौष्टिक खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) उत्पाद

बेंगलुरु, मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों में काम करने वाले पेशेवर अक्सर पकाने के लिए तैयार (रेडी-टू-कुक) या खाने के लिए तैयार (रेडी-टू-ईट) वैसे गुणवत्तापूर्ण भोजन की तलाश में रहते हैं जो उनकी तेज रफ्तार जीवनशैली के अनुरूप हो।

खाद्य सुरक्षा से खाद्य नेतृत्व की ओर

भारत की प्रचुर कृषि संपदा इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हमारे सामने इस प्रचुर संपदा को सतत आर्थिक मूल्य में बदलने की चुनौती है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना इस बदलाव को गति देने में सहायक साबित हो रही है और खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर खाद्यानों के मामले में नेतृत्व का सपना शीघ्र ही साकार होने वाला है।

(लेखक आईएएस अधिकारी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव हैं)

भारत का दूसरा सबसे बड़ा टाटा स्टील प्लांट पंजाब में कार्यशील, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में रखा था नींव पत्थर और आज किया उद्घाटन

2700 युवाओं को सीधे तौर पर और 10 हजार युवाओं को अप्रत्यक्ष तौर पर मिलेगा रोजगार: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पंजाब के युवाओं को अब घर में ही मिल रही हैं नौकरियां, देश छोड़कर विदेश जाने की नहीं कोई जरूरत: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पिछली सरकारों की गलत नीतियों के कारण उद्योग पंजाब से बाहर गए, हम उद्योग-समर्थक नीतियों से उन्हें वापस ला रहे हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

हमने टाटा समूह से पश्चिमी देशों में रहने वाले पंजाबियों के लिए उड़ानें शुरू करने का अनुरोध किया है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

आप’ के नेतृत्व वाली सरकार के अधीन पंजाब में औद्योगिक पुनर्जीवन को भरपूर बढ़ावा मिला है क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में भारत के दूसरे सबसे बड़े प्लांट का उद्घाटन किया, जो निर्णायक नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। देश में पहली बार हजारों नौकरियों के वादे और ग्रीन ऊर्जा-संचालित स्टील उत्पादन शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों को घेरते हुए जोर देकर कहा कि जो उद्योग कभी गलत नीतियों के कारण पंजाब से बाहर गए थे, वे अब उद्योग-समर्थक शासन के अधीन वापस आ रहे हैं। 3200 करोड़ रुपये की लागत से लुधियाना में स्थापित यह प्लांट पंजाब की औद्योगिक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।

टाटा स्टील के दूसरे सबसे बड़े प्लांट का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “यह एक यादगार दिन है क्योंकि राज्य के आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा देने का इतिहास रचा गया है। आज पंजाब भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने इस इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस-आधारित प्लांट के माध्यम से ग्रीन ऊर्जा का उपयोग करके स्टील उत्पादन शुरू किया है। यह पंजाब के लिए ऐतिहासिक और विशेष दिन है क्योंकि टाटा स्टील ने सीधे तौर पर 2600 से 2700 परिवारों और अप्रत्यक्ष रूप से 8000-10000 परिवारों के भविष्य को रोशन करने की जिम्मेदारी ली है। यह विश्व स्तरीय प्लांट अत्याधुनिक ग्रीन ऊर्जा तकनीक से लैस है।”

टाटा स्टील टीम को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, “टाटा स्टील जैसी कंपनी का किसी राज्य में निवेश करना उसके भविष्य में विश्वास और भरोसे को दर्शाता है। टाटा स्टील की मौजूदगी स्पष्ट संदेश देती है कि पंजाब औद्योगिक विकास के अगले चरण के लिए तैयार है। यह निवेश केवल एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि पंजाब के युवाओं, हमारे इंजीनियरों, हमारे कुशल कर्मचारियों और पंजाब के निर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने का सुनहरा अवसर है।”

भविष्य के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पंजाब हमेशा उद्यमियों की धरती रहा है और लुधियाना जैसे शहर उनकी उद्यमशीलता, कड़ी मेहनत और निर्माण शक्ति के लिए विश्व स्तर पर जाने जाते हैं। टाटा स्टील प्लांट जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ हम अपनी विरासत को और मजबूत कर रहे हैं और पंजाब को भविष्य निर्माण के लिए तैयार कर रहे हैं। यह भारत में टाटा स्टील का पहला इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस-आधारित प्लांट है, जो दर्शाता है कि पंजाब केवल निवेश ही नहीं, बल्कि आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार निवेश भी आकर्षित कर रहा है। ऐसा उत्पादन दक्षता, स्थिरता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की वैश्विक दिशा को दर्शाता है।”

सरकार के औद्योगिक दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने जोर देकर कहा, “हम चाहते हैं कि पंजाब भारत के सबसे पसंदीदा औद्योगिक स्थलों में से एक बने। हम चाहते हैं कि कंपनियां पंजाब को केवल एक बाजार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक निर्माण भागीदार के रूप में देखें। टाटा समूह वैश्विक स्तर पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है और रतन टाटा ने हमेशा इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है।”

निजी उदाहरण साझा करते हुए उन्होंने कहा कि रतन टाटा ने मानसून के दौरान आवारा कुत्तों को संघर्ष करते देख बॉम्बे हाउस में डॉग शेल्टर शुरू किया था। उन्हें “देश का बेटा” बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब उनका निधन हुआ तो पूरे देश ने राष्ट्र निर्माण और देश का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा करने के लिए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पंजाब ग्रीन ऊर्जा के माध्यम से स्टील उत्पादन शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है।

अपनी जापान यात्रा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “जापान जैसे देश पहले ही बड़े पैमाने पर ग्रीन ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं और यह प्रोजेक्ट दर्शाता है कि पंजाब भविष्य में निवेश कर रहा है। पंजाब का मजबूत हवाई, रेल और सड़क संपर्क इसे व्यापार के लिए आदर्श स्थान बनाता है। हमने टाटा समूह के साथ यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के लिए अधिक उड़ानें शुरू करने का मुद्दा उठाया है।”

पंजाब की विरासत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य गुरुओं, संतों, पीरों, शहीदों और देशभक्तों की पवित्र धरती है, जहां नफरत के बीज को छोड़कर हर बीज उग सकता है। पंजाब ने खाद्य और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसे देश का “अन्नदाता” और “खड़ग भुजा” का दर्जा प्राप्त है। इस प्लांट के साथ राज्य भर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इस प्रोजेक्ट के स्तर को उजागर करते हुए उन्होंने आगे कहा, “आज हम इतिहास लिख रहे हैं क्योंकि टाटा न केवल पैसा निवेश कर रहा है, बल्कि अपनी साख भी पंजाब के नाम कर रहा है। 115 एकड़ में फैले इस प्लांट में निवेश 2600 करोड़ रुपये से बढ़कर 3200 करोड़ रुपये हो गया है और यह 100 प्रतिशत स्टील स्क्रैप को कच्चे माल के रूप में उपयोग करेगा, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल रहेगा। टाटा समूह के छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में यूनिट कार्यरत हैं और इनमें 10 लाख से अधिक लोग काम करते हैं। पंजाबी ईमानदारी और समर्पण भावना से काम करने में विश्वास रखते हैं, जिन्होंने हमेशा उद्योग और कर्मचारियों के बीच संबंधों को मजबूत किया है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा रहा है।”

उपलब्धियों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, “पिछले चार वर्षों के दौरान 1.58 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे युवाओं के लिए पांच लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। हमारा दृष्टिकोण सरल है—स्थिर नीतियां, तेज फैसले और मजबूत औद्योगिक साझेदारी। राज्य सरकार को बाधाएं खड़ी करने की बजाय निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाना चाहिए।”

अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब निवेश का स्वागत करने के लिए तैयार है और उन उद्योगों का समर्थन करता है जो रोजगार पैदा करते हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। हर नई फैक्ट्री और निवेश राज्य को रोजगार सृजन के और करीब ले जाता है। जब उद्योग बढ़ते हैं तो पंजाब बढ़ता है और जब पंजाब बढ़ता है तो देश बढ़ता है। जब उद्योग रोजगार पैदा करते हैं तो युवाओं को राज्य में ही अवसर मिलते हैं, जो पंजाब को मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से उच्च औद्योगिक विकास की ओर ले जाते हैं। पंजाब वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ रहा है।”

सहयोग की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “औद्योगिक विकास हमेशा एक साझेदारी होता है। जब सरकार और उद्योग विश्वास और स्पष्टता के साथ मिलकर काम करते हैं तो परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं और बेहतर परिणाम देती हैं।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह प्रोजेक्ट पंजाब के औद्योगिक विकास की कहानी में एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगा और अन्य कंपनियों को भी पंजाब में निवेश के लिए प्रेरित करेगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टाटा स्टील और उद्योग जगत को पूरा सहयोग देने का आश्वासन देते हुए कहा कि वे पंजाब की प्रगति में भागीदार हैं। उन्होंने कहा, “यह परियोजना राज्य के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पंजाब को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने और आर्थिक प्रगति को गति देने में सहायक होगी। वह दिन दूर नहीं जब पंजाब न केवल कृषि बल्कि उद्योग के क्षेत्र में भी देश का नेतृत्व करेगा।”

इससे पहले उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा, हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा तथा अन्य उपस्थित थे