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जल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर 1 जून को राष्ट्रीय कार्यशाला, भूजल संरक्षण पर होगा फोकस

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Ministry of Jal Shakti के तहत 1 जून को जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को लेकर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में नीति निर्माता, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक, स्टार्टअप और विशेषज्ञ शामिल होकर जल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतत भूजल प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और वर्षा जल संचयन जैसे विषयों पर व्यावहारिक समाधान तलाशना है। साथ ही जल संरक्षण के लिए आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा की जाएगी।

आयोजकों के अनुसार, देश में बढ़ते जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए यह कार्यशाला बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें ऐसे नवाचारों और नीतिगत सुझावों पर चर्चा होगी, जो आने वाले समय में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के कई हिस्सों में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता और अनियमित वर्षा के कारण जल संकट गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में तकनीक आधारित समाधान, डेटा विश्लेषण और सामुदायिक भागीदारी जल प्रबंधन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यशाला में स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए नए तकनीकी मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग सिस्टम, जल पुनर्चक्रण तकनीक और वर्षा जल संचयन के आधुनिक तरीके शामिल हैं। इसके अलावा, जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के आयोजन नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर लागू होने वाली योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं। कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव भविष्य की जल नीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

जल क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए जल सुरक्षा एक दीर्घकालिक चुनौती है, जिसे केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, निजी क्षेत्र की भागीदारी और आम जनता की सहभागिता से ही प्रभावी ढंग से हल किया जा सकता है।

नहरी पानी का उपयोग 78 प्रतिशत से अधिक होना पंजाब की कृषि के लिए एक अच्छा प्रयास है : परमवीर सिंह एडवोकेट

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के सक्षम नेतृत्व में राज्य में कृषि को फिर से लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के वाइस चेयरमैन परमवीर सिंह एडवोकेट ने विचार साझा करते हुए बताया कि पंजाब में सिंचाई के लिए नहरी पानी से जुड़े जो कार्य चल रहे हैं, उनकी देखरेख मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।

2022 में जब मान सरकार ने कार्यभार संभाला था, उस समय पिछली सरकारों के कार्यकाल में केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का ही उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। मान सरकार पिछले चार वर्षों से खेतों की सिंचाई सीधे नहरी पानी से सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसके तहत टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों और कच्ची नालियों (कस्सियों) की मरम्मत की गई है। सैकड़ों किलोमीटर नई कच्ची नालियां और पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब अब 78 प्रतिशत से अधिक नहरी पानी का उपयोग कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ महीनों में इस आंकड़े को 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाना है।

इस पहल से पंजाब की भूमि को कई लाभ हुए हैं। राज्य के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पंजाब का भूजल स्तर लगभग 2 मीटर ऊपर आया है। पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार दर्ज किया गया सुधार है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर मोटरें कम चलने के कारण बिजली की भारी बचत हुई है, जिसे अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नहरी पानी के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रयासों के कारण पंजाब तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। नहरी पानी की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाया है।