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Punjab : MGNREGA कर्मचारियों की मांगों पर विचार करेगी मान सरकार, मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दिया भरोसा

पंजाब के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने खन्ना में MGNREGA कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी जायज मांगों और लंबित मुद्दों के समयबद्ध समाधान का आश्वासन दिया।

खन्ना / चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने MGNREGA कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों को उनकी जायज मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने और लंबित मुद्दों का समयबद्ध समाधान करने का आश्वासन दिया है। खन्ना में यूनियन प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के दौरान मंत्री ने कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर उचित कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और उनकी जायज मांगों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और उनके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीण विकास में MGNREGA कर्मचारियों की भूमिका अहम

कैबिनेट मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को लागू करने और सरकारी सुविधाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में MGNREGA कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गांवों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में इन कर्मचारियों का योगदान अहम है।

उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। राज्य में ग्रामीण विकास, रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने और नागरिकों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

वित्तीय मामलों पर वित्त विभाग से होगी चर्चा

तरुणप्रीत सिंह सौंद ने यूनियन प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। संबंधित विभागों के साथ चर्चा कर उचित कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जिन मांगों का संबंध नीतिगत फैसलों या वित्तीय मामलों से है, उनके व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान तलाशने के लिए वित्त विभाग के साथ भी विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार यूनियनों के साथ सकारात्मक बातचीत जारी रखते हुए जायज मांगों का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान करने की दिशा में काम करेगी।

यूनियन के पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में MGNREGA कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सेवक सिंह, चेयरमैन अमनदीप कुमार, वित्त सचिव रमनदीप सिंह, हरविंदर सिंह, बंटी बैंस, किशोर कुमार और जगदेव सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

लुधियाना: मुल्लांपुर दाखा में भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता सेमिनार, रिश्वत की शिकायत के लिए हेल्पलाइन जारी

मुल्लांपुर दाखा में विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार विरोधी सेमिनार आयोजित कर लोगों को जागरूक किया। जानें रिश्वत की शिकायत के लिए WhatsApp और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की लुधियाना रेंज की ओर से 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक विजिलेंस अवेयरनेस वीक-2026 मनाया जा रहा है। इसके तहत नगर काउंसिल मुल्लांपुर दाखा में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूक करना और समाज में ईमानदारी, पारदर्शिता तथा सुशासन को बढ़ावा देना है।

एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो, लुधियाना रेंज वरिंदर सिंह बराड़ के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मुल्लांपुर दाखा में आयोजित सेमिनार के दौरान इंस्पेक्टर एस. कुलजिंदर सिंह ग्रेवाल, रीडर एसआई अनिल कुमार, नगर काउंसिल के ईओ हैप्पी कुमार जिंदल और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।

इस अवसर पर विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने तथा ईमानदारी, पारदर्शिता और अच्छे प्रशासन के उच्च मानकों को बनाए रखने की शपथ ली। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं और रिश्वतखोरी को खत्म करने के प्रयासों में सहयोग दें।

विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी सरकारी काम करने के बदले रिश्वत मांगता है, अपने पद का दुरुपयोग करता है, सरकारी दस्तावेजों या कामकाज में धोखाधड़ी करता है अथवा भ्रष्टाचार के माध्यम से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इसके अलावा, यदि कोई निजी व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के नाम पर काम करवाने के बदले रिश्वत मांगता है, तो इसकी सूचना भी संबंधित विभाग को दी जा सकती है।

सेमिनार के दौरान लोगों को भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत दर्ज करवाने के लिए पंजाब सरकार की एंटी-करप्शन एक्शन लाइन के WhatsApp नंबर 9501-200-200 और विजिलेंस ब्यूरो के टोल-फ्री नंबर 1800-1800-1000 की जानकारी दी गई।

विजिलेंस ब्यूरो ने लोगों से अपील की कि वे रिश्वत लेने और देने से बचें तथा भ्रष्टाचार से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। जागरूकता अभियान के दौरान संदेश दिया गया कि ईमानदारी और जनसहयोग के माध्यम से ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

Bhagwant Mann News: धूरी में CM मान ने युवाओं को किया प्रेरित, बोले- मेहनत और पढ़ाई पर दें ध्यान

धूरी के देश भगत कॉलेज में युवा मेले को संबोधित करते हुए CM भगवंत मान ने 70 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां देने का दावा किया और युवाओं को मेहनत व शिक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी।

धुरी / पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब को शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी और युवाओं के लिए रोजगार एवं करियर के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने युवाओं को बिना रिश्वत और सिफारिश के योग्यता के आधार पर 70,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान धूरी विधानसभा क्षेत्र के गांव बरड़वाल स्थित देश भगत कॉलेज में आयोजित क्षेत्रीय युवा मेले में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं को शिक्षा, कड़ी मेहनत और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसे जनप्रतिनिधियों की जरूरत है, जो लोगों की समस्याओं और उनके दुख-दर्द को समझें।

70 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां देने का दावा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने युवाओं से कहा कि वे अपनी पढ़ाई और मेहनत पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने 70,000 से अधिक सरकारी नौकरियां बिना रिश्वत और सिफारिश के योग्यता के आधार पर दी हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर युवा मेले से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि युवाओं का उत्साह और उनकी कलात्मक प्रतिभा देखकर उन्हें अपने शुरुआती दिनों की याद आ गई। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। जीतने वालों को विनम्र रहना चाहिए, जबकि हारने वालों को निराश होने के बजाय और मेहनत करनी चाहिए।

39 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

देश भगत कॉलेज में आयोजित युवा मेले में 39 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान चार चरणों में 60 विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

भगवंत मान ने कहा कि इन गतिविधियों के जरिए पंजाब की युवा पीढ़ी की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और प्रतिभा सामने आती है। उन्होंने युवा मेले आयोजित करने में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला और उसके युवा कल्याण विभाग के योगदान की भी सराहना की।

शिक्षा के साथ कला और संस्कृति भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। संगीत, नृत्य, थिएटर, साहित्य और लोक कलाओं जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, भावनात्मक समझ, आपसी सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करती हैं।

उन्होंने कहा कि एक प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए युवाओं का सर्वांगीण विकास जरूरी है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी सांस्कृतिक और कलात्मक प्रतिभा को भी आगे बढ़ाना चाहिए।

‘रंगला पंजाब’ के निर्माण पर जोर

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब को ‘रंगला पंजाब’ बनाने का सपना तभी साकार हो सकता है, जब युवाओं को ज्ञान, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और जीवन में स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, लगातार मेहनत करने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाले मंच युवाओं को भविष्य में सक्षम नेतृत्वकर्ता और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करते हैं।

मुख्यमंत्री के संबोधन में शिक्षा, रोजगार, युवा प्रतिभा और सांस्कृतिक गतिविधियों को पंजाब के विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया।

Guru Ramdas Ji Parkash Purab: अमृतसर एयरपोर्ट पर फूलों की सेवा शुरू, देश-विदेश से आने वाली संगतों का होगा भव्य स्वागत

श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर अमृतसर एयरपोर्ट में फूलों की सेवा शुरू हुई। 25 से 30 प्रकार के फूलों से सजावट और संगतों के भव्य स्वागत की तैयारी।

अमृतसर / सत्ता संदेश

चौथे पातशाह साहिब श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व को समर्पित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फूलों की सेवा शुरू कर दी गई है। इस विशेष अवसर पर हवाई अड्डे को 25 से 30 प्रकार के खूबसूरत फूलों से सजाया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से अमृतसर पहुंचने वाली संगतों और यात्रियों का भव्य स्वागत किया जा सके।

गुरु साहिब के चरणों में अरदास करने के बाद फूलों की सजावट की सेवा आरंभ की गई। सेवादारों के अनुसार, हवाई अड्डे के अराइवल और डिपार्चर एरिया के साथ-साथ इमिग्रेशन काउंटरों तथा अन्य प्रमुख स्थानों को भी फूलों से सजाया जा रहा है।

हवाई अड्डे पर गुरु साहिबान के स्वरूप और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब का विशाल मॉडल भी स्थापित किया गया है, जो यहां पहुंचने वाली संगतों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

दिल्ली और कोलकाता से आए कारीगर भी सेवा में जुटे

इस सेवा में देश-विदेश से लाए गए 25 से 30 प्रकार के फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सेवादारों, श्रद्धालुओं और दिल्ली व कोलकाता से आए कारीगरों के सहयोग से सजावट का कार्य किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य अमृतसर पहुंचने वाली संगतों का फूलों की खुशबू और सुंदर सजावट के बीच स्वागत करना तथा उन्हें श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व की खुशियों से जोड़ना है।

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी होगी फूलों की सेवा

सेवादारों ने बताया कि फूलों की सेवा केवल श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीमित नहीं रहेगी। अमृतसर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हॉल में भी यह सेवा जारी रहेगी।

प्रकाश पर्व के अवसर पर होने वाले कीर्तन और मुख्य धार्मिक कार्यक्रमों तक इस सेवा को जारी रखने की योजना है। इस तरह अमृतसर पहुंचने वाली संगतों का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया जाएगा।

श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व को समर्पित यह पहल श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना को दर्शाती है। फूलों से सजा हवाई अड्डा गुरु नगरी अमृतसर पहुंचने वाली संगतों के स्वागत को विशेष और यादगार बनाने का प्रयास है।

Punjab Stubble Burning: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90% कमी, जानिए भगवंत मान सरकार की रणनीति

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और मध्य प्रदेश के आंकड़े।

नई दिल्ली / चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा तेज हो जाती है और पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब का नाम प्रमुखता से सामने आता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े राज्य में पराली प्रबंधन के प्रयासों और घटनाओं में आई कमी की ओर संकेत करते हैं।

पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में राज्य में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 474 घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, 2026 का आंकड़ा अभी तक की अवधि का है, इसलिए इसकी तुलना पूरे वर्ष के आंकड़ों से सीधे नहीं की जानी चाहिए।

मध्य प्रदेश में पंजाब से अधिक मामले

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के CREAMS कार्यक्रम की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश 118 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर रहा। पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि मेंकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश को 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है. इसके लिए भारत सरकार लगभग ₹415 करोड़ का अनुदान देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में इसे अहम कदम बताते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि इससे हिमाचल के युवाओं को अपने ही राज्य में मेडिकल की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे. साथ ही, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा तेजी से लिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए जेपी नड्डा ने बताया कि हिमाचल सरकार से 23 जून 2026 को प्रस्ताव मिला था. इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री से भी इस विषय पर चर्चा हुई और अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है.

कहां पर कितनी सीटों को मिली है मंजूरी?

जेपी नड्डा ने कहा, “केंद्र सरकार ने हिमाचल के प्रस्ताव पर तेजी से काम करते हुए सभी 320 सीटों को मंजूरी दी है. अब हम राज्य सरकार से भी उम्मीद करते हैं कि वह इसी तेजी से जरूरी कदम उठाए, ताकि प्रदेश के युवाओं और आम लोगों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके.” इन 320 नई सीटों में शिमला के लिए 91, टांडा और हमीरपुर के लिए 57-57, मंडी के लिए 55, नाहन के लिए 32 और चंबा के लिए 28 सीटें शामिल हैं. इनसे सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, कैंसर सहित कई अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने ₹15,000 करोड़ की लागत से अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई यूजी और पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है. हिमाचल प्रदेश में 320 नई पीजी सीटों की स्वीकृति भी इसी योजना का हिस्सा है.

‘समय से शुरू करने पूरे किए जाएं जरूरी काम’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल सरकार से आग्रह किया कि वह इन सभी 320 सीटों को समय पर शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके. उन्होंने राज्य में केंद्र सरकार की मदद से चल रही अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत बताई.

जेपी नड्डा ने कहा कि चंडीगढ़बद्दी और भानुपल्लीबिलासपुर जैसी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में राज्य सरकार की हिस्सेदारी और जमीन से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाना चाहिए. इसी तरह, केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, “हिमाचल के लोगों के हित से जुड़े विकास कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए. केंद्र सरकार प्रदेश के विकास के लिए हर संभव सहयोग दे रही है. हमारी अपेक्षा है कि राज्य सरकार भी इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दे और इन्हें समय पर पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए.”

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता स्पष्ट है—हिमाचल का विकास और हिमाचल के हर परिवार का कल्याण.”

पंजाब में किसी भी दिन पराली जलाने की घटनाओं की संख्या दहाई तक नहीं पहुंची, जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन ऐसे रहे, जब घटनाओं का आंकड़ा दहाई में दर्ज किया गया।

वर्ष 2025 के आंकड़े भी इस अंतर को स्पष्ट करते हैं। छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 33,028 घटनाओं में से मध्य प्रदेश में 17,067, उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 मामले दर्ज हुए। इन आंकड़ों के आधार पर पराली जलाने की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित मानने के बजाय दूसरे कृषि प्रधान राज्यों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

भगवंत मान सरकार की पराली प्रबंधन नीति

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को सब्सिडी देने पर जोर दिया है। सरकार की रणनीति का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और अगली फसल की बुवाई भी समय पर हो सके।

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, वर्ष 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें 14,384 सुपर सीडर, 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक शामिल हैं।

इन मशीनों की मदद से खेतों में पराली को मिट्टी में मिलाने, अवशेषों को इकट्ठा करने और पराली का वैकल्पिक उपयोग करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी सुविधा मिल सकती है।

किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी

पराली प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों तथा पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक भी आधुनिक मशीनों की सुविधा पहुंचाना है। महंगी कृषि मशीनें खरीदना हर किसान के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में सामूहिक मशीन केंद्रों के माध्यम से किसान जरूरत के अनुसार मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन की 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, तकनीकी सहायता देने और फसल अवशेषों के वैकल्पिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में भी क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनरी के लिए करीब 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी।

पराली से कमाई के रास्ते तलाश रहे किसान

पराली को केवल कृषि अपशिष्ट मानने के बजाय उससे आमदनी के अवसर तलाशने पर भी काम हो रहा है। पंजाब में कुछ किसान पराली को इकट्ठा करके बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के लिए बेच रहे हैं।

संगरूर के एक किसान द्वारा लगभग 12 हजार क्विंटल पराली बेचकर करीब 16 लाख रुपये की आय अर्जित करने का उदाहरण सामने आया है। हालांकि, इस तरह की कमाई पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन लागत और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। फिर भी, यह मॉडल किसानों के लिए फसल अवशेषों के आर्थिक इस्तेमाल की संभावनाएं दिखाता है।

पराली जलाने पर रोक के लिए किसानों का सहयोग जरूरी

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच सीमित समय, मजदूरी का खर्च, मशीनों की उपलब्धता और पराली हटाने की लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान केवल जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। किसानों को किफायती मशीनें, तकनीकी सहायता और पराली के उपयोग के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी सरकार की नीतियों, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता और किसानों के सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है। हालांकि, इस बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए हर सीजन में प्रभावी निगरानी, किसानों तक सुविधाओं की पहुंच और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी होगा।

दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर होने वाली बहस के बीच पंजाब के आंकड़े यह भी बताते हैं कि पराली प्रबंधन की चुनौती बहुआयामी है और इसका समाधान राज्यों के साझा प्रयासों, किसानों के सहयोग तथा व्यावहारिक कृषि नीतियों से ही संभव है।

नाभा में ड्रग्स के खिलाफ स्टिंग करने वाले BJP नेता वरिंदर बिट्टू पर केस दर्ज, भादसों थाने के बाहर BJP का धरना

नाभा में ड्रग्स के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने वाले BJP नेता वरिंदर बिट्टू पर केस दर्ज होने के बाद बीबा जय इंदर कौर की अगुवाई में भादसों थाने के बाहर प्रदर्शन हुआ। BJP ने निष्पक्ष जांच की मांग की।मुख्य हेडिंग (H1)

नाभा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : चेतन मेहता, नाभा

पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई और इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में है। नाभा में ड्रग्स के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने वाले BJP नेता वरिंदर बिट्टू और उनके कुछ साथियों के खिलाफ पुलिस की ओर से नया मामला दर्ज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने थाना भादसों के बाहर धरना देकर विरोध जताया।

मिली जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले BJP नेता वरिंदर बिट्टू ने नाभा क्षेत्र में कथित ड्रग तस्करी के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस दौरान तीन लोगों को नशीले पदार्थों और नशीले कैप्सूलों के साथ पकड़े जाने का दावा किया गया था। इसके बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस मामले में आम आदमी पार्टी से जुड़े एक नेता का नाम भी सामने आया था, जिसके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की थी।

अब वरिंदर बिट्टू और उनके कुछ साथियों के खिलाफ एक अन्य मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। BJP नेताओं का आरोप है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने और कथित तस्करों के मामले को सामने लाने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। नेताओं के मुताबिक, वरिंदर बिट्टू के विरोध प्रदर्शन के दौरान पानी की टंकी पर चढ़ने और BJP कार्यकर्ताओं की ओर से सड़क जाम किए जाने को लेकर पुलिस ने नया केस दर्ज किया है।

इस कार्रवाई के विरोध में BJP नेता बीबा जय इंदर कौर की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता थाना भादसों के बाहर एकत्र हुए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में वरिंदर बिट्टू सहित अन्य BJP नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

प्रदर्शन के बाद थाना भादसों के प्रभारी ने विरोध कर रहे BJP नेताओं के साथ बैठक की। BJP नेताओं के अनुसार, थाना प्रभारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की दोबारा जांच SSP पटियाला के समक्ष करवाई जाएगी।

BJP नेता बीबा जय इंदर कौर और वरिंदर बिट्टू ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि वरिंदर बिट्टू ने कथित ड्रग तस्करी का मामला सामने लाकर पुलिस को कार्रवाई के लिए सौंपा था, लेकिन अब उनके और उनके साथियों के खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया गया है। BJP नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस की भूमिका और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, BJP नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

अब देखना होगा कि SSP पटियाला के स्तर पर प्रस्तावित दोबारा जांच में क्या सामने आता है और इस मामले में पुलिस प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।

Punjab Stubble Burning: पराली जलाने के मामलों में 2022 के मुकाबले करीब 90% गिरावट, मशीनों पर सब्सिडी से बढ़ा विकल्प

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए 2026 के आंकड़े, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और पराली प्रबंधन की योजनाएं।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। इस बहस में पंजाब का नाम प्रमुखता से आता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी की ओर इशारा करते हैं। पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2025 में इनकी संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

हालांकि, चालू सीजन में पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 22 अक्टूबर तक 510 घटनाएं दर्ज की गई थीं। ऐसे में पराली प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे उपायों के साथ मौजूदा सीजन की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।

मध्य प्रदेश में पंजाब से ज्यादा घटनाएं

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS कार्यक्रम के 6 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश में 118, पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं सामने आईं।

ये आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में धान की खेती का विस्तार, फसल कटाई का समय और अवशेषों के प्रबंधन की उपलब्ध सुविधाएं इस चुनौती को प्रभावित करती हैं। हालांकि, अलग-अलग तारीखों और निगरानी प्रणालियों के आंकड़ों की तुलना करते समय उनके स्रोत और गणना के तरीके को ध्यान में रखना आवश्यक है।

कृषि मशीनों पर सब्सिडी से किसानों को मदद

पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कृषि मशीनों पर सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को पात्रता के अनुसार 80 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है।

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में किसानों ने 21 हजार से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें सुपर सीडर की संख्या सबसे अधिक रही है। इसके अलावा मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल ड्रिल, बेलिंग मशीन और स्ट्रॉ रेक जैसी मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है।

इन मशीनों की मदद से किसान पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाने, उसके बीच अगली फसल की बुवाई करने या उसे इकट्ठा करके दूसरे उपयोगों के लिए भेजने जैसे विकल्प अपना सकते हैं।

पराली प्रबंधन के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना

पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के मद में 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को तकनीकी सहायता देने और पराली के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।

इससे पहले 2025 के सीजन में आधुनिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए लगभग 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सरकारी प्रयासों का उद्देश्य किसानों को ऐसे व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे धान की कटाई के बाद खेतों को समय पर गेहूं की बुवाई के लिए तैयार किया जा सके।

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय

किसानों के सामने पराली प्रबंधन की चुनौती केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय कम मिलता है। ऐसे में खेत से पराली हटाने, मशीनों का इंतजाम करने और अवशेषों को दूसरी जगह पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह चुनौती अधिक हो सकती है।

इसलिए पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए निगरानी और कानूनी कार्रवाई के साथ सस्ती मशीनों की उपलब्धता, साझा मशीन केंद्रों और किसानों को समय पर तकनीकी सहायता देना भी महत्वपूर्ण है।

बायोगैस और बायो-CNG में भी संभावनाएं

धान की पराली का उपयोग बायोगैस, बायो-CNG, बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है। यदि किसानों को पराली के लिए नियमित खरीदार, उचित कीमत और किफायती परिवहन की सुविधा मिलती है, तो फसल अवशेष उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन सकते हैं।

हालांकि, इससे होने वाली आय पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन खर्च और संबंधित परियोजनाओं की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे विकल्पों को बड़े स्तर पर विकसित करना पराली प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

किसानों की भागीदारी के बिना संभव नहीं समाधान

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों के मुकाबले आई कमी के पीछे सरकारी योजनाओं, कृषि मशीनों की उपलब्धता, निगरानी और किसानों की भागीदारी जैसे कई कारक महत्वपूर्ण हैं। केवल किसी एक योजना को इसका पूरा श्रेय देना उचित नहीं होगा।

आगे की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पराली प्रबंधन के विकल्प हर किसान तक समय पर पहुंचें और उनका उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक बना रहे। इसके साथ ही चालू सीजन के आंकड़ों की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि पिछले वर्षों में दर्ज सुधार को आगे भी बनाए रखा जा रहा है या नहीं।

अमृतसर में विधायक जीवनजोत कौर के PA पर केस, दुकानदार से मारपीट का आरोप

अमृतसर ईस्ट की विधायक जीवनजोत कौर के PA मनिंदर सिंह पर दुकानदार से मारपीट का आरोप है। ₹4.50 लाख के लेनदेन के विवाद में पुलिस ने FIR दर्ज की।

अमृतसर / सत्ता संदेश

पंजाब के अमृतसर में अमृतसर ईस्ट की विधायक जीवनजोत कौर के निजी सहायक (PA) मनिंदर सिंह के खिलाफ एक दुकानदार से मारपीट करने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता अश्वनी कुमार का आरोप है कि 17 अक्टूबर को रामबाग चर्च के सामने स्थित बाजार में उन्हें घेरकर पीटा गया और किरच से उनके पेट पर दो वार किए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गांव पाखरपुरा निवासी 43 वर्षीय अश्वनी कुमार इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर को बाजार में उनकी मुलाकात सुच्चा सिंह, उसके बेटे राणा, हरप्रीत सिंह, दामाद मनिंदर सिंह और एक अन्य व्यक्ति से हुई। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और फिर हमला कर दिया गया।

पेट पर किरच से वार करने का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, राणा और सुच्चा सिंह ने उन्हें पकड़ लिया, जबकि मनिंदर सिंह और एक अन्य व्यक्ति ने उनके साथ मारपीट की। अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि हरप्रीत सिंह ने किरच से उनके पेट के दाईं ओर दो वार किए, जिससे वह घायल हो गए और खून बहने लगा।

घटना के बाद उन्हें पहले सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें गुरु नानक अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद उन्हें 108 एंबुलेंस के जरिए अमनदीप अस्पताल में भर्ती कराया गया।

₹4.50 लाख के लेनदेन को लेकर विवाद

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बहन के जेठ सुच्चा सिंह को 4.50 लाख रुपये उधार दिए थे। उनके मुताबिक, रकम वापस मांगने को लेकर विवाद चल रहा था। अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि इसी रंजिश के चलते उन पर हमला किया गया।

पुलिस ने इन धाराओं के तहत दर्ज की FIR

थाना ए डिवीजन के एएसआई भरतराज सिंह के अनुसार, घायल के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 190, 191(3) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच की जा रही है।

फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कर्मचारियों की हड़ताल जारी, सरकार से वार्ता बेनतीजा रहा

पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कर्मचारियों की सरकार से वार्ता बेनतीजा रही। करीब 2,000 बसें प्रभावित, शुक्रवार को CM आवास और विधानसभा की ओर कूच का ऐलान।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के साथ पंजाब सरकार की बैठक बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को यूनियन के चक्का जाम के कारण करीब 2,000 बसों का संचालन प्रभावित रहा, जिससे पंजाब के भीतर और दूसरे राज्यों में जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यूनियन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास और पंजाब विधानसभा की ओर कूच करने का ऐलान किया है।

यूनियन लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने, पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस केस वापस लेने और परिवहन विभाग में नई बसें खरीदने की मांग कर रही है। यूनियन का कहना है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। सरकार और यूनियन के बीच अगली बैठक 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

2,000 बसें बंद, यात्रियों को हुई परेशानी

परिवहन विभाग में करीब 2,900 बसें हैं, लेकिन बुधवार को हड़ताल के कारण लगभग 2,000 बसें विभिन्न रूटों पर नहीं चलीं। इसका असर दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ा। कई यात्री बस अड्डों पर घंटों बसों का इंतजार करते रहे।

विभाग की कुछ बसें लोकल रूटों पर चलती रहीं, लेकिन वहां भी कई सेवाएं प्रभावित हुईं। बसों का संचालन बाधित होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

29 अक्टूबर को होगी अगली बैठक

यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल के अनुसार, कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा और परिवहन सचिव वरुण रूजम के साथ यूनियन की बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने बताया कि सरकार ने मांगों पर विचार करने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय मांगा है और इसी दिन अगली बैठक बुलाई गई है।

गिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने 15 अक्टूबर तक मांगों के संबंध में अधिसूचना जारी करने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

शुक्रवार को CM आवास और विधानसभा की ओर कूच

यूनियन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास और पंजाब विधानसभा की ओर कूच करने का फैसला लिया है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध के दायरे में लाना, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करना, पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस लेना और विभाग में नई बसें शामिल करना है।

अब 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर नजर रहेगी। यदि सरकार और यूनियन के बीच सहमति नहीं बनती, तो बस सेवाओं को लेकर यात्रियों की परेशानियां आगे भी बनी रह सकती हैं।

लुधियाना में दिवाली से पहले अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग का अभियान, तस्करी रोकने के लिए लगेंगे सरप्राइज नाके

लुधियाना में दिवाली से पहले आबकारी विभाग ने अवैध और तस्करी की शराब के खिलाफ अभियान शुरू किया। सरप्राइज नाके, संयुक्त छापेमारी और हेल्पलाइन नंबर जारी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

दिवाली के त्योहार को देखते हुए लुधियाना ईस्ट और वेस्ट रेंज के आबकारी विभाग ने जिलेभर में अवैध, नकली और तस्करी की शराब के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत संदिग्ध स्थानों की जांच, संवेदनशील रास्तों पर अचानक नाकेबंदी और पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी की जाएगी। आबकारी विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे शराब केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें।

आबकारी विभाग के सहायक आयुक्तों के अनुसार, त्योहारों के दौरान अवैध और तस्करी की शराब की आपूर्ति बढ़ने की आशंका रहती है। इसे रोकने के लिए अधिकारियों को खुद फील्ड में उतरकर अभियान का नेतृत्व करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की टीमें खाली इमारतों, सुनसान शेड, गोदामों, फार्महाउसों, ढाबों और नदियों व नहरों के किनारे स्थित संदिग्ध स्थानों की सघन जांच करेंगी।

इसके अलावा झुग्गी-बस्तियों, ईंट-भट्टों, मजदूर कॉलोनियों और प्रवासी श्रमिकों के इलाकों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए संवेदनशील मार्गों पर सरप्राइज नाके लगाए जाएंगे। इस कार्रवाई में पुलिस विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अनधिकृत स्रोतों से सस्ती कीमत पर मिलने वाली शराब नकली या अवैध तरीके से तैयार की गई हो सकती है। ऐसी शराब का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, आंखों की रोशनी जाने और यहां तक कि मौत का कारण बन सकता है। इसलिए लोगों को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या स्थान से शराब नहीं खरीदनी चाहिए।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध या तस्करी की शराब बनाने, रखने, परिवहन करने अथवा बेचने वाले व्यक्तियों के खिलाफ पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आबकारी विभाग ने नागरिकों से भी अभियान में सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या तस्करी से संबंधित जानकारी मिलती है, तो वह विभाग की हेल्पलाइन 98759-61127 पर सूचना दे सकता है। इसके अलावा संबंधित आबकारी अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है।

विभाग के अनुसार, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। दिवाली के दौरान अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने के लिए विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और जिम्मेदारी से सहयोग करने की अपील की है।