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उत्तराखंड से दिल्ली-NCR तक भूकंप के झटके, चमोली रहा केंद्र; नोएडा-मुरादाबाद में भी महसूस हुई कंपन

देहरादून / नई दिल्ली / सत्ता संदेश

उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन की सतह से करीब 13 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

भूकंप के झटके मंगलवार रात करीब 10:24 बजे महसूस किए गए। उत्तराखंड में गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में लोगों ने धरती में कंपन महसूस किया। बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ सहित कई क्षेत्रों में झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नोएडा में भी महसूस हुई धरती में कंपन

दिल्ली-NCR के नोएडा में भी मंगलवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। शहर के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। सेक्टर-122 निवासी भूषण शर्मा के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी और कंपन कुछ सेकेंड तक ही महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि उस समय वह परिवार के साथ खाना खा रहे थे और डाइनिंग टेबल पर रखा सामान हिलने लगा।

वहीं, सेक्टर-122 की निवेदिता ने बताया कि वह बेड पर आराम कर रही थीं, तभी अचानक बेड हिलने लगा। इसके बाद उन्हें भूकंप आने का अहसास हुआ।

मुरादाबाद में घरों से बाहर निकले लोग

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी भूकंप के झटकों के बाद लोगों में घबराहट देखी गई। धरती हिलने का अहसास होते ही कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। कुछ समय तक लोगों के बीच भूकंप को लेकर चर्चा होती रही। आसपास के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए जाने की सूचना सामने आई।

क्यों आता है भूकंप?

भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल है। पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या उनके बीच दबाव बढ़ता है, तो भूगर्भ में ऊर्जा जमा होने लगती है।

जब यह दबाव एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है तो चट्टानों और प्लेटों में हलचल या टूटने की स्थिति पैदा हो सकती है। इस दौरान निकलने वाली ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में धरती की सतह तक पहुंचती है और हमें भूकंप के झटकों के रूप में महसूस होती है।

क्या होता है भूकंप का केंद्र और तीव्रता?

भूकंप के फोकस या हाइपोसेंटर को पृथ्वी के अंदर वह स्थान कहा जाता है, जहां से भूकंपीय ऊर्जा निकलती है। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को एपिसेंटर (भूकंप का केंद्र) कहा जाता है।

एपिसेंटर से दूरी बढ़ने के साथ आम तौर पर भूकंप के कंपन का प्रभाव कम होता जाता है। हालांकि भूकंप का असर केवल तीव्रता पर ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई, स्थानीय भूगर्भीय संरचना और भूकंपीय तरंगों की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।

रिक्टर स्केल पर कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की मैग्नीट्यूड को मापने के लिए रिक्टर स्केल का पारंपरिक रूप से उल्लेख किया जाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में कई मामलों में Moment Magnitude Scale (Mw) का भी इस्तेमाल किया जाता है। मैग्नीट्यूड से भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा का अंदाजा लगाया जाता है।

भूकंप की तीव्रता जितनी अधिक होती है, सामान्य तौर पर उसके प्रभाव और नुकसान की संभावना भी उतनी ही बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप कितनी गहराई पर आया, उसका केंद्र कहां था, प्रभावित क्षेत्र की जमीन कैसी है और वहां बनी इमारतें कितनी मजबूत हैं।

फिलहाल उत्तराखंड के चमोली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके उत्तराखंड के कई जिलों के साथ-साथ दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए।