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आढ़तियों ने ब्यास पुल पर लगाया जाम, जलालपुर मंडी से लिफ्टिंग न होने पर जताया रोष

आज बेट क्षेत्र के आढ़तियों ने टांडा हरगोबिंदपुर रोड स्थित ब्यास पुल पर धरना देकर सड़क जाम कर दी। आढ़तियों का कहना है कि जब तक मंडियों से फसल की लिफ्टिंग नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

इस मौके पर बेट क्षेत्र के सभी आढ़ती एकजुट होकर धरने में शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य मंडियों से फसल की लिफ्टिंग हो चुकी है, लेकिन जलालपुर मंडी से अभी तक लिफ्टिंग नहीं की गई, जिससे उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

आढ़तियों ने कहा कि यह समस्या किसानों और मजदूरों के लिए बेहद परेशानी का कारण बन रही है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल की लिफ्टिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

यह जाम करीब एक घंटे तक लगातार लगा रहा। मौके पर पहुंचे एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने आढ़तियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को एसडीएम टांडा और डीसी होशियारपुर के ध्यान में लाकर जल्द समाधान करवाया जाएगा।

बातचीत के बाद सड़क से जाम हटा दिया गया, लेकिन आढ़तियों का धरना अभी भी जारी है।

विधायक संगोवाल और चेयरमैन गिल ने बहादुरके अनाज मंडी का किया दौरा

लुधियाना/ सत्ता संदेश

विधायक जीवन सिंह संगोलवाल और चैयरमैन गिल ने बहादुरके अनाज मंडी का दौरा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्द है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम जनता की सरकार ने पिछले 4 वर्षों में पंजाब को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया है, जिसके चलते अब खाद्य आपूर्तिकर्ताओं ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि सरकार ने किसानों द्वारा उगाई गई फसलों की बाजारों में खरीद के लिए पर्याप्त व्यवस्था की है।

ये शब्द गिल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बहादुर के दाना मंडी में खरीद प्रबंधों पर चर्चा करते हुए गिल विधायक जीवन सिंह संगोवाल और लुधियाना मार्केट कमेटी के चेयरमैन गुरजीत सिंह गिल ने व्यक्त किए। इस मौके पर उन्होंने किसानों की समस्याएं भी सुनीं.

अध्यक्ष गिल ने आगे कहा कि किसानों की उपज का प्रत्येक दाना सुचारू और कुशल तरीके से खरीदा जाएगा और उसकी निकासी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है कि किसानों की उपज अनाज मंडियों से तुरंत उठाई जाए और कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने किसानों से गेहूं के अवशेष जलाने से भी परहेज करने की अपील की, क्योंकि यह पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है।