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Neet Paper Leak मामले में CBI ने कोर्ट में पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट, 13 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

दिल्ली / सत्ता संदेश

नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए गठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20 हजार पेज की चार्जशीट है. जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करना, भ्रष्टाचार और लोक परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध की धाराएं लगाई गई हैं.

CBI के मुताबिक चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज, 43 भौतिक साक्ष्य हैं. 12 मई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी. नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

92 ठिकानों पर छापेमारी

CBI ने 8 साइबर विशेषज्ञ समेत 72 अधिकारियों की टीम बनाई थी और महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त कर फोरेंसिक जांच की गई. CBI ने बताया कि फोरेंसिक, हैंडराइटिंग और शैक्षणिक रिपोर्ट से लीक की पुष्टि हुई है.

कुल 13 लोगों को किया गिरफ्तार

CBI के मुताबिक पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. पेपर लीक मामले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें NTA के 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट भी शामिल हैं. इसके साथ ही बिचौलियों और कोचिंग से जुड़े 2 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया. CBI ने बताया कि मनी ट्रेल की जांच चल रही है. कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज किया गया है.

अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी

राउज़ एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने CBI की चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लिया है. कोर्ट ने CBI को चार्जशीट के एनेक्सचर (Annexure) दाखिल करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है. कोर्ट ने नोट किया कि चार्जशीट में दस्तावेजों, बयानों और वस्तुओं की सूची संलग्न की गई है. कोर्ट ने CBI से पूछा कि चार्जशीट में जिन बयानों और अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, वह कहां हैं.

CBI ने चार्जशीट के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को दाखिल करने के लिए समय मांगा. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20,000 पृष्ठों के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को स्कैन किया जा रहा है. राउज़ एवेन्यू कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी पेपर लीक की सुनवाई, PM मोदी का फैसला

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई इसी कोर्ट में होगी. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। केस के तुरंत निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होगी।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिया गया है। हमारे लिए युवाओं से बढ़कर कुछ नहीं है। विद्यार्थियों के हित सुरक्षित करने के लिए ये एक बड़ा कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि दो दिन पहले यानी 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी नीट पेपर लीक मामले का जिक्र किया। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित कर बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर क्या कहा। रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे. पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी. उन्होंने इसे घोर पाप बताया। पीएम ने कहा कि मामला सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई. 13 लोगों को अरेस्ट किया गया। परीक्षा रद्द करने के बाद फिर से परीक्षा कराई गई। पीएम मोदी ने ये भी कहा कि आगे से कोई पेपर लीक न हो, इस बात का ध्यान रखा जाए।

पेपल लीक के मुद्दे पर संसद भी विरोध प्रदर्शन

बता दें कि पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहे थे कि वो इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, कुछ बोल नहीं रहे हैं, कोई बड़ा एक्शन नहीं ले रहे हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में अपनी चुप्पी 21 जुलाई को ही तोड़ दी थी। उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्ष दल इसका समर्थन कर रहे हैं. विपक्षी दल अलग से भी इसको लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। विपक्ष इस पर लगातार चर्चा की मांग कर रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

सोनम वांगचुक की हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीती 28 जून से आमरण अनशन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक द्वारा की जा रही भूख हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खण्डपीठ सुनवाई कर रही थी।

याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए। दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को वांगचुक को जबरन खाना खिलाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

बता दें कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनके भूख हड़ताल को 18 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। पार्टी संस्थापक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए।

वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, मांसपेशियों में दर्द है और उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं।

उधर, सीजेपी ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। सीजेपी ने देश भर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।

प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी को हाईकोर्ट में दी चुनौती
जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की कथित निरंतर निगरानी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि विरोध स्थल पर अंधाधुंध फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी टावर का संचालन असंवैधानिक घोषित किया जाए, साथ ही ऐसी निगरानी को निलंबित करने और सार्वजनिक प्रदर्शनों में निगरानी को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया जाए।