ब्रेकिंग न्यूज़
भारत की अगुवाई में BRICS का बड़ा फैसला, कृषि सहयोग को मिली नई दिशा

इंदौर / सत्ता संदेश

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन आज एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ जिसमें खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहनीय खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाले कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है।

बैठक का स्वरूपताकत और संदर्भ

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने सहयोगी मंत्रियों श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में मीडिया से चर्चा में कहा कि कृषि समूह की मंत्री स्तरीय तथा उससे पहले अधिकारी स्तरीय, दोनों बैठकें सानंद, सार्थक और सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। उन्होंने बताया कि सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया जिससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रश्न पर ब्रिक्स देशों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और गंभीरता है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है, इसलिए इनकी सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति के रूप में उभरी है।

उन्होंने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और ब्रिक्स के कृषि समूह की दोनों बैठकें- अधिकारी स्तर और मंत्री स्तर, इसी परिप्रेक्ष्य में इंदौर में संपन्न हुई हैं।

चार मुख्य प्राथमिकताएंकिसानखाद्य सुरक्षा और जलवायु

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विमर्श हुआ- दुनिया और ब्रिक्स देशों की खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) और पौष्टिक आहार,

ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियाँ, खाद्य प्रणालियों और कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और साझेदारी को मजबूत करना। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि भरपूर अनाज उपलब्ध हो, साथ ही पोषणयुक्त भोजन भी सभी तक पहुंचे और जो अन्नदाता किसान दुनिया को भोजन देता है, उसकी आजीविका सुरक्षित और बेहतर हो, इन्हीं सवालों को बैठक की सोच के केंद्र में रखा गया।

श्री चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान, जिन्हें कई देशों में फैमिली फार्मर्स भी कहा जाता है, उन पर विशेष फोकस रखते हुए एक अलग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उनकी कठिनाइयों, इनपुट्स की उपलब्धता, ऋण प्रवाह, उचित कीमत और बाजार से जुड़ाव पर विस्तार से चर्चा हुई।

इंदौर डिक्लेरेशन’: किसानकेंद्रित वैश्विक घोषणापत्र

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र तैयार हुआ, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इंदौर में अपनाए जाने के कारण इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घोषणा पत्र का केंद्र किसान है- किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेज़िलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता इस डिक्लेरेशन में दर्ज की गई है।

श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि यह दस्तावेज केवल सहमति का कागज़ नहीं है, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति, साझा उत्तरदायित्व और कृषि को माध्यम बनाकर अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य गढ़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदस्य देशों ने तय किया है कि इंदौर डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलों को ज़मीन पर उतारने के लिए मिलकर, सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे, ताकि इसके लाभ वास्तविक रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों और खाद्य प्रणालियों तक पहुंच सकें।

चार नई संस्थागत पहलेंनेटवर्क और फोरम

1. सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहली बड़ी पहल BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture की स्थापना है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त रिसर्च, अनुभव-साझेदारी और क्षमता निर्माण का प्लेटफॉर्म बनेगा, जिसके माध्यम से सदस्य देश एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकेंगे और जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दे सकेंगे।

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लंबे समय से प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर देता आया है, अत्यधिक रसायन प्रयोग से होने वाले खतरों के प्रति चेतावनी देता रहा है और अब ब्रिक्स देशों ने भी इसकी महत्ता को स्वीकार करते हुए इस नेटवर्क की स्थापना पर सहमति व्यक्त की है।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने जानकारी दी कि भारत में इस नेटवर्क के अंतर्गत प्राकृतिक खेती से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम (Indian Institute of Farming Systems Research) को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, जो संयुक्त रिसर्च, नॉलेज शेयरिंग और ट्रेनिंग में अहम योगदान देगा।

2. BRICS Network on Digital Agriculture

दूसरी प्रमुख पहल BRICS Network on Digital Agriculture की स्थापना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा। श्री चौहान ने कहा कि यह नेटवर्क आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृषि नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगा, जिससे विकसित हो रही तकनीकों को अधिक मजबूत बनाकर सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क का समन्वय भारत में IIT, दिल्ली द्वारा किया जाएगा, जबकि सभी सदस्य देश इसमें शामिल होकर अपने अनुभव, इनोवेशन और नीतिगत पहल साझा करेंगे, ताकि डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में सामूहिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।

3. Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems

तीसरी महत्वपूर्ण घोषणा Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems की स्थापना से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य किसानों के बीज संबंधी अधिकारों, देशी बीजों की विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना है। श्री चौहान ने कहा कि भारत जैसे देशों में सैकड़ों–हजारों वर्षों से खेती होती आई है और कई परंपरागत बीज, जो हमारी जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, आज अस्तित्व संकट का सामना कर रहे हैं; नई किस्में और हाइब्रिड बीज जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ–साथ देसी बीजों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यह फोरम इस बात पर काम करेगा कि परंपरागत बीज विलुप्त न हों, उनकी उपलब्धता बनी रहे, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में उनकी भूमिका को पहचाना जाए और किसानों के पारंपरिक ज्ञान को भी सहेज कर रखा जाए।

4. BRICS AgriN – Agro Input, Genetic Resources and Information Network

चौथी बड़ी पहल BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की स्थापना है, जो सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और अनुवांशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि यह नेटवर्क सूचना आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देगा, ताकि अलग-अलग देशों में उपलब्ध श्रेष्ठ किस्में, जेनेटिक संसाधन और इनपुट्स की जानकारी साझा हो सके और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि इससे उन देशों और किसानों को खास लाभ मिलेगा, जिन्हें अभी तक ऐसे संसाधनों और सूचनाओं की सीमित पहुंच ही मिल पाती थी।

पहले से चल रही पहलों को मजबूती और व्यापार पर फोकस

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले से स्थापित BRICS Agricultural Research Platform को और सुदृढ़ करते हुए एक सशक्त ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है, ताकि अनुसंधान केवल लैब तक सीमित न रहे, बल्कि तेजी से किसानों के खेत तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि नवाचारों का सीमित दायरे से बाहर निकलकर व्यापक प्रसार हो, अधिक से अधिक देशों और किसानों तक नई तकनीक व समाधान पहुंचें, यही इस हब का प्रमुख लक्ष्य होगा और यही असली ‘Lab to Land’ मॉडल है।

उन्होंने कहा कि कृषि व्यापार और सहयोग के क्षेत्र में निष्पक्ष, समतामूलक, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति ब्रिक्स देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत द्वारा आयोजित विशेष संवाद के माध्यम से BRICS Grain Exchange जैसी पहल पर विचार-विमर्श को नई गति दी गई।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि सदस्य देशों के बीच वन-टू-वन द्विपक्षीय बैठकों में भी कृषि व्यापार को आसान बनाने, कस्टम और अन्य बाधाओं को कम करने, रिसर्च और तकनीक के आदान-प्रदान तथा व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे आने वाले समय में आपसी व्यापार को नई दिशा मिलेगी।

जलवायु परिवर्तनएलनीनोकार्बन क्रेडिट और फूड लॉस

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब दुनिया जलवायु परिवर्तन के खतरों से जूझ रही है, ऐसे समय में रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि धरती केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है।

अल-नीनो के संभावित प्रभावों पर प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इसका असर भारत सहित एशिया-प्रशांत के कई देशों पर पड़ सकता है, लेकिन देश अपनी पूरी तैयारियां कर रहे हैं और ब्रिक्स देशों के बीच सूचनाओं के आदान–प्रदान और सहयोग के माध्यम से इन चुनौतियों का सामना करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई है।

कार्बन क्रेडिट के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसका एक स्थापित सिस्टम है और जो किसान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्बन क्रेडिट हासिल करते हैं, उन्हें लाभ मिलता है; जलवायु अनुकूल खेती, कार्बन-संवेदनशील नीतियां और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर इस दिशा में व्यावहारिक रास्ते हैं।

फूड लॉस पर तकनीकी चर्चाओं का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कटाई से लेकर बाजार तक जो खाद्य हानि होती है, उसे कैसे कम किया जाए और जो खाद्यान्न बचकर वेस्ट के रूप में कार्बन गैसों का उत्सर्जन बढ़ाता है, उसे कैसे रोका जाए- इन मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

खाद और इनपुट कीमतेंछोटे किसान और टेक्नोलॉजी

वैश्विक संकट, युद्ध और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण उर्वरकों की लागत बढ़ने और किसानों पर पड़ने वाले असर के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि किसानों को सस्ती दर पर ही खाद मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और DAP की बोरी 1350 रुपये की दर से ही उपलब्ध कराई जाती रहेगी, बढ़ी हुई लागत का पूरा अतिरिक्त भार केंद्र सरकार अपने ऊपर ले रही है और संकट की इस स्थिति में किसानों के साथ खड़ा रहना सरकार का धर्म है।

उन्होंने यह भी कहा कि पेस्टिसाइड और केमिकल फर्टिलाइजर के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से गंभीर खतरे पैदा होते हैं, इसलिए भारत प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रसायनों के संतुलित उपयोग पर मिशन मोड में काम कर रहा है, ‘खेत बचाओ’ जैसे अभियानों के जरिए जागरूकता बढ़ा रहा है और वैकल्पिक समाधानों को बढ़ावा दे रहा है।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और छोटे किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर उन्होंने कहा कि हर किसान महंगी मशीनरी नहीं खरीद सकता, इसलिए देश भर में Custom Hiring Centres और समूह आधारित मॉडल के माध्यम से मशीनरी किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जिससे छोटे किसान भी ड्रोन, आधुनिक औजार और अन्य उपकरणों का लाभ ले सकें।

युवामहिलाएं और नवाचारभविष्य की दिशा

श्री चौहान ने कहा कि युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़े बिना कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलाव संभव नहीं, इसलिए बैठक में इस पर विशेष चर्चा की गई और संयुक्त घोषणा में भी इसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारत में agri-startups, agri-business, agri-preneurship और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं के माध्यम से युवा तेजी से कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं, कई हजार स्टार्टअप सक्रिय हैं और त्वरित सफलता के उदाहरण भी सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि नवाचार और तकनीक के उपयोग में युवा सबसे अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए ब्रिक्स देशों के बीच अनुभव और नीतिगत पहल साझा करके इस प्रवृत्ति को और गति देने की आवश्यकता है, जिससे भविष्य की कृषि अधिक स्मार्ट, टिकाऊ और लाभकारी बन सके।

इंदौरवैश्विक कृषि कूटनीति का नया मंच

इंदौर की मेजबानी की विशेष प्रशंसा करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मालवा की परंपरा के अनुरूप यहां जिस आत्मीय आतिथ्य और सत्कार से प्रतिनिधियों का स्वागत हुआ, उससे सभी ‘गद्गद और प्रसन्न’ है; 56 दुकान, राजवाड़ा और मांडू की सैर उनके मन में लंबे समय तक स्मृति के रूप में अंकित रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए मेघदूत गार्डन में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ (वृक्षारोपण स्थल) की स्थापना की, इससे पहले यहां ग्लोबल पार्क और यूरो–रशियन पार्क भी स्थापित हो चुके हैं। चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और उनकी टीम, साथ ही भारत सरकार के कृषि विदेश, पशुपालन व मत्स्य, वाणिज्य, फूड प्रोसेसिंग, नीति आयोग सहित सभी विभागों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आयोजन ‘Whole of Government Approach’ और ‘Team India’ की सफलता का जीवंत उदाहरण है, जिसने ब्रिक्स देशों की इंदौर बैठक को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बना दिया।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं: अर्जुन राम मेघवाल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से समय-समय पर ऐसी मांगें उठती रही हैं।

मेघवाल ने कहा कि भारत के संविधान की व्यवस्था के अनुसार पशुपालन, कृषि और गोसंरक्षण से जुड़े कई विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण गोहत्या से संबंधित कानून देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं और राज्य सरकारें अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस विषय पर निर्णय लेती हैं।

राज्यों में अलग-अलग हैं कानून

कानून मंत्री ने बताया कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू है, जबकि कुछ राज्यों में अलग-अलग शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी जाती है। इसलिए इस विषय पर पूरे देश में एक समान कानूनी व्यवस्था वर्तमान में लागू नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अपने-अपने कानूनों और नीतियों के अनुसार इस विषय का प्रबंधन करती हैं और केंद्र सरकार के समक्ष इस समय ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिस पर विचार किया जा रहा हो।

लंबे समय से उठती रही है मांग

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध की मांग विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा वर्षों से उठाई जाती रही है। समर्थकों का तर्क है कि गाय का भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। वहीं इस विषय को लेकर अलग-अलग राज्यों और समुदायों में भिन्न दृष्टिकोण भी देखने को मिलते हैं।

संवैधानिक और राजनीतिक महत्व का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि गोसंरक्षण और गोहत्या से जुड़ा मुद्दा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में राज्यों को पशुधन संरक्षण और विशेष रूप से गायों एवं दुधारू पशुओं के संरक्षण के लिए प्रयास करने की सलाह दी गई है, लेकिन कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है, लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने अथवा पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने की दिशा में कोई औपचारिक पहल नहीं की जा रही है।

मेघवाल के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल केंद्र सरकार के एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है और इस विषय से जुड़े निर्णय राज्यों की नीतियों और कानूनों के अनुसार ही संचालित होते रहेंगे।

जल जीवन मिशन की पानी टंकी में भारी रिसाव, ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

जबलपुर/ सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुलोन गांव में Jal Jeevan Mission के तहत निर्मित पानी की टंकी में बड़े पैमाने पर रिसाव सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगी है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई पानी की टंकी से लगातार पानी रिस रहा है। कई स्थानों पर दरारें और सीपेज दिखाई देने के कारण लोगों को निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह है। उनका कहना है कि जिस परियोजना से गांव की पेयजल समस्या का समाधान होना था, वही अब सवालों के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और परियोजना में भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता तो नई टंकी में इतनी जल्दी रिसाव की समस्या सामने नहीं आती।

गांव के निवासियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को वास्तविक लाभ मिल सके।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। इस मिशन के तहत देशभर में जलापूर्ति ढांचे का निर्माण और विस्तार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण जलापूर्ति परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि जल भंडारण संरचनाओं में तकनीकी खामियां रह जाती हैं, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है बल्कि ग्रामीणों को भी अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का निरीक्षण करने और तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल कुलोन गांव के ग्रामीण जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि पानी की टंकी की खामियों को जल्द दूर कर उन्हें नियमित एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

सीसीपीए ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा परिणामों से संबंधित भ्रामक दावों के लिए कोचिंग संस्‍थान पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

संस्थान ने सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई

सीसीपीए ने दोहराया है कि कोचिंग सेवाओं का चयन करने से पहले उपभोक्ताओं को उचित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया है जिसमें उस पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर भ्रामक विज्ञापन देने के लिए 7,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।

मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ यह आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 में सफल हुए उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

यूपीएससी सीएसई 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (www.vajiramandravi.com) पर निम्नलिखित दावे प्रकाशित किए गए:

  • शीर्ष 10 में से रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • शीर्ष 50 में रैंक हासिल करने वाले 37 उम्‍मीदवार वाजीराम एंड रवि से हैं।
  • तथ्य: हर सालयूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वाजीराम एंड रवि के छात्र होते हैं।”
  • विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने निम्नलिखित बातें पाईं:
क्रम संख्यासंस्थान का दावासीसीपीए के निष्कर्ष
 शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।8 में से 7 उम्मीदवारों ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 शीर्ष 50 में 37 रैंक धारक37 उम्मीदवारों में से 29 ने केवल निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में ही नामांकन कराया था।
 “तथ्य: हर साल, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वजिराम एंड रवि के छात्र होते हैं।” 2021 में सफल उम्मीदवारों में से 86.36 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2022 में सफल उम्मीदवारों में से 78.31 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2023 में, सफल उम्मीदवारों में से 97.56 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।2024 में सफल उम्मीदवारों में से 71.69 प्रतिशत ने साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में नामांकन कराया।

उपर्युक्त महत्वपूर्ण जानकारी इन वर्षों में से किसी भी वर्ष संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं की गई थी।

सीसीपीए ने यह भी पाया कि आईजीपी एक ऐसा कार्यक्रम है जो तभी शुरू होता है जब कोई उम्मीदवार यूपीएससी सीएसई की प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं स्वतंत्र रूप से उत्तीर्ण कर लेता है। ये दोनों ही बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिनमें संस्थान का कोई शैक्षणिक योगदान नहीं होता। संस्थान ने व्यापक सशुल्क कोचिंग कार्यक्रमों के विज्ञापनों के साथ ऐसे उम्मीदवारों को प्रमुखता से प्रदर्शित करके, चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम का खुलासा किए बिना, यह भ्रामक धारणा बनाई कि ये उम्मीदवार उसके पूर्ण-स्तरीय कोचिंग कार्यक्रमों के छात्र हैं।

सीसीपीए ने पाया कि सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों का खुलासा न करना, जिसमें यह जानकारी भी शामिल है कि क्या उम्मीदवारों ने पूर्ण-अवधि के कक्षा कार्यक्रम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, परीक्षा श्रृंखला या अल्प अवधि के निःशुल्क साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया था, अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, क्योंकि यह संभावित उपभोक्ताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता से वंचित करता है। सीसीपीए ने माना कि विवादित विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत “भ्रामक विज्ञापन” की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, जो महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने पर रोक लगाती है। यह आचरण अधिनियम की धारा 2(9) का भी उल्लंघन पाया गया, जो उपभोक्ताओं को सूचित होने का अधिकार प्रदान करती है।

अब तक, सीसीपीए ने छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले कोचिंग संस्थानों पर 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।

(अंतिम आदेश निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखे जा सकते हैं: https://jagograhakjago.gov.in/CCPA_Orders/index.html )।

देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का लिया संकल्प

नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस में पहली बार रात तक चला मंथन, खेतों में उतरेगा कृषि प्रगति का मिशन

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्रियों का संकल्प: अपने खेतों में भी करेंगे प्राकृतिक खेती

कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा से समग्र कृषि विकास का संकल्प: ‘बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए’- श्री शिवराज सिंह

दो दिन हुआ गहन विमर्श, खेती के लिए नई दिशा: श्री शिवराज सिंह की पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप

धरती बचाओ, देश बचाओ: पूसा सम्मेलन में राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का श्री शिवराज सिंह ने किया आगाज़

केंद्र-राज्य-वैज्ञानिक एक मंच पर: खरीफ से पहले कृषि परिवर्तन का राष्ट्रीय खाका तैयार

नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में, देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे और देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का संकल्प लिया। यह केवल एक नियमित समीक्षा बैठक बनकर नहीं रही, बल्कि भारतीय कृषि के लिए संकल्प, समन्वय और ज़मीनी क्रियान्वयन का राष्ट्रीय मंच बनकर उभरी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने गहन विचार-विमर्श किया, जबकि दूसरे दिन भी श्री शिवराज सिंह चौहान पूरे समय रहे और उनकी मौजूदगी में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने पहली बार रात तक मंथन कर खरीफ, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे मुद्दों पर एक साझा दिशा तय की। सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर कृषि मंत्रियों ने केवल नीतिगत समर्थन तक सीमित न रहते हुए, अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि किसानों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी के पूसा संस्थान में 28 और 29 मई को संपन्न राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि को केवल उत्पादन के प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, पोषण, किसान आय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देख रही है। सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह ने किसानों को लाभ देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने पर राज्य सरकारों से जोर देकर कहा।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में पहले दिन देशभर से आए राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, फसल नियोजन, जल प्रबंधन और क्षेत्रवार चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया। इस दौरान प्रारंभिक संबोधन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान हॉल में पीछे की तरफ एक प्रतिभागी के रूप में पूरे समय बैठे। अगले दिन श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने इस विचार-मंथन को आगे बढ़ाते हुए इसे नीतिगत प्रतिबद्धता और साझा संकल्प का स्वरूप दिया।

सम्मेलन के समापन पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिभागियों की गंभीरता, तन्मयता और मनोयोग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इतने समर्पण के साथ अधिकारियों और मंत्रियों की भागीदारी बहुत कम अवसरों पर देखी है। उनका यह वक्तव्य सम्मेलन की उस भावना को रेखांकित करता है, जिसमें उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्वयं को केवल प्रशासक नहीं, बल्कि चिंतक, साधक और परिवर्तन के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया।

इस कॉन्फ्रेंस से उभरकर सामने आया सबसे सशक्त संदेश रहा- ‘खेत बचाओ’ ही भविष्य बचाने का मंत्र है। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि धरती, पर्यावरण, देश और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। इसी सोच के साथ सम्मेलन में संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष बल दिया गया। श्री शिवराज सिंह का संदेश साफ था कि रासायनिक उर्वरकों के पूर्ण निषेध की बात नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक आवश्यकता के अनुसार, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरण और संस्थागत अभियान चलाया जाए। यही कारण है कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को केंद्र, राज्य, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक समुदाय का साझा राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात प्रमुखता से सामने आई।

इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए समन्वित तंत्र, मॉनिटरिंग व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं के गठन की बात भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा, ताकि यह केवल अपील बनकर न रह जाए, बल्कि एक परिणामकारी कार्यक्रम में बदले।

सम्मेलन की एक महत्त्वपूर्ण नई बात यह रही कि पहली बार राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सार्वजिनक रूप से, प्राकृतिक खेती को केवल प्रचारित करने की बजाय स्वयं अपने खेतों में भी अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। चूंकि अधिकांश कृषि मंत्री स्वयं खेती-किसानी से जुड़े हैं, इसलिए यह निर्णय प्रतीकात्मक न होकर व्यवहारिक महत्व रखता है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विचार यह रहा कि यदि नीति-निर्माता और जनप्रतिनिधि स्वयं छोटे स्तर पर भी प्राकृतिक खेती का मॉडल प्रस्तुत करेंगे, तो किसानों के बीच इसका संदेश अधिक विश्वसनीय और प्रेरक रूप में पहुंचेगा। गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का उल्लेख भी इसी संदर्भ में प्रासंगिक माना गया, वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने भी काफी देर तक सम्मेलन में सहभागिता कर एक विशेष सत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट हुआ कि खरीफ रणनीति अब केवल मौसमी तैयारी तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत, इनपुट लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन, और कृषि उत्पादन बढ़ाने के समग्र एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी एक ओर उत्पादन बढ़ाना है, तो दूसरी ओर संसाधनों की सेहत भी बचानी है। यही इस सम्मेलन की नीति-दृष्टि का केंद्रीय बिंदु बनकर उभरा। मंथन का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष था- नीतिगत निर्णयों को जन-अभियान में बदलने की संचार रणनीति। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सम्मेलन के समापन सत्र में इस बात पर बल दिया कि जो निर्णय और अभियान तय हुए हैं, उनकी जानकारी विभिन्न प्रचार-प्रसार माध्यम से लगातार किसानों और आमजन तक पहुंचाई जाए। इससे कृषि सुधार कार्यक्रमों को प्रशासनिक फाइलों से निकालकर जनसहभागिता वाले अभियान में बदला जा सकेगा।

सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कृषि प्रशासन में केवल योजनाओं की घोषणाभर नहीं, बल्कि साझा उत्तरदायित्व आधारित कार्य-संस्कृति विकसित करना चाहती है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ा लक्ष्य पाने के लिए बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए। यह पंक्ति इस सम्मेलन की मूल आत्मा बनकर उभरी, जहां मंत्री और अधिकारी दोनों ने अपने-अपने दायित्वों के निर्वहन में कोई कसर न छोड़ने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस को इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि यहां कृषि को विभागीय विषय से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय मिशन मोड में देखने का आग्रह सामने आया। ‘खेत बचाओ अभियान’, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती के प्रायोगिक मॉडल, और दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तय समयसीमा के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे यह मंथन आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित होगा।

सम्मेलन के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में सामूहिक संकल्प के साथ यह संदेश दिया गया कि जो कुछ इन दो दिनों के चिंतन में तय हुआ है, उसे ज़मीन पर उतारकर दिखाया जाएगा। यही इस राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है- विचार से संकल्प और संकल्प से क्रियान्वयन की ओर बढ़ता कृषि भारत।

वर्ष 2026-27 में प्रवेश के लिए गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, लुधियाना में हेल्प डेस्क स्थापित – डिप्टी कमिश्नर

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन, आई.ए.एस. ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंजाब राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड, चंडीगढ़ के माध्यम से किए जा रहे प्रवेश (Admissions) के लिए ऋषि नगर, छोटी हैबोवाल के पास स्थित एस.आर.एस. सरकारी बहु-तकनीकी (पॉलिटेक्निक) कॉलेज में एक हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्र इस हेल्प डेस्क पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना पंजीकरण (Registration) करवा सकते हैं।
प्रवेश के लिए योग्यता (Eligibility): प्रथम वर्ष डिप्लोमा (1st Year Diploma): 10वीं पास कर चुके छात्र इंजीनियरिंग डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं। द्वितीय वर्ष (Direct 2nd Year / Lateral Entry): आईटीआई (2 वर्षीय), 12वीं (वोकेशनल), या 12वीं (साइंस) पास छात्र सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।
सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में 7 डिप्लोमा स्ट्रीम उपलब्ध हैं: कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (Computer Science & Engineering), इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Information Technology), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Electrical Engineering), इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (Electronics & Communication Engineering), फैशन डिजाइनिंग (Fashion Designing), गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग (Garment Manufacturing), मॉडर्न ऑफिस प्रैक्टिस (Modern Office Practice)
छात्रवृत्ति और फीस में छूट (Scholarships): अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए: भारत/पंजाब सरकार द्वारा संचालित डॉ. अंबेडकर पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत, जिन छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से कम है, उन्हें केवल 1,133 रुपये की मामूली फीस देनी होगी। अन्य श्रेणियों के लिए: मुख्यमंत्री वजीफा (स्कॉलरशिप) योजना के तहत छात्रों को उनकी मुख्य योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर फीस में बड़ी राहत/लाभ दिया जाता है। संपर्क सूत्र और मार्गदर्शन सेल (Contact Details) विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों की जानकारी और मार्गदर्शन के लिए एक गाइडेंस सेल का गठन किया गया है, जो श्रीमती रूपिंदर कौर (विभागाध्यक्ष) और डॉ. पवन कुमार (वरिष्ठ व्याख्याता) की देखरेख में काम कर रहा है: मोबाइल नंबर: 98158-95547, लैंडलाइन नंबर: 0161-2303223
कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए सुरक्षित होस्टल की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ पारिवारिक और अनुशासित माहौल है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास (Personality Development) के लिए बेहतरीन खेल के मैदान और सांस्कृतिक गतिविधियों (Cultural Activities) का भी विशेष प्रबंध है।
डिप्टी कमिश्नर ने लुधियाना जिले और आसपास के युवाओं से पंजाब सरकार की इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।

श्री सौरभ विजय, सीईओ यूआईडीएआई, ने क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़, का दौरा किया और आधार सेवा वितरण तंत्र की समीक्षा की

चंडीगढ़, / सत्ता संदेश

श्री सौरभ विजय, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), ने आज यूआईडीएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ का दौरा किया ताकि क्षेत्र में क्षेत्रीय कार्यालय और आधार सेवा वितरण पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन की समीक्षा की जा सके।

इस दौरे के दौरान, श्री सौरभ विजय ने क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विस्तृत बातचीत की और क्षेत्र में चल रही विभिन्न आधार-संबंधी पहलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आधार सेवाओं के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की और पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।

सीईओ ने परिचालन कार्यप्रवाह की समीक्षा की और आधार नामांकन, अपडेटेशन, प्रमाणीकरण पारिस्थितिकी तंत्र, शिकायत निवारण तंत्र और जागरूकता पहलों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने निवासी अनुभव में सुधार करने और क्षेत्र में आधार सेवाओं की पहुंच और विश्वसनीयता को मजबूत करने पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

कर्मचारियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान, श्री सौरभ विजय ने अधिकारियों को निवासियों को निर्बाध और सुरक्षित पहचान सेवाएँ प्रदान करने के विज़न की ओर समर्पण के साथ काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

अपने दौरे के हिस्से के रूप में, श्री सौरभ विजय ने क्षेत्रीय कार्यालय आने वाले निवासियों से भी बातचीत की और आधार-संबंधी सेवाओं के साथ उनके अनुभव के बारे में पूछा। निवासियों ने नामांकन और अद्यतन प्रक्रियाओं के बारे में अपनी प्रतिक्रिया साझा की, और सीईओ ने हर निवासी के लिए सरल, सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त सेवा वितरण सुनिश्चित करने के प्रति यूआईडीएआई की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सीईओ ने आगे आधार सेवा केंद्र (एएसके), चंडीगढ़ का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने आधार नामांकन, जनसंख्या संबंधी अपडेट, बायोमेट्रिक अपडेट, और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रियाओं सहित एंड-टू-एंड निवासी सेवा प्रक्रियाओं की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र के कार्यकलापों का अवलोकन किया और सेवा वितरण प्रथाओं व परिचालन व्यवस्थाओं के संबंध में कर्मचारियों से बातचीत की।

आधार सेवा केंद्र के दौरे के दौरान, श्री सौरभ विजय ने आधार सेवाएँ प्राप्त कर रहे निवासियों से भी बातचीत की और केंद्र में प्रतीक्षा समय, सेवा पहुँच और समग्र अनुभव के बारे में प्रतिक्रिया ली। उन्होंने निवासी-अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और समयपरक तथा कुशल सेवा वितरण सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

उन्होंने यह ज़ोर दिया कि आधार निवासियों के लिए विभिन्न कल्याण योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच सुगम बनाकर अच्छे शासन और जीवन की सहजता को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहता है। उन्होंने सभी आधार-संबंधी गतिविधियों में डेटा सुरक्षा, सेवा अखंडता और परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने के महत्व पर और बल दिया।

यह दौरा आधार को सुदृढ़ करने के प्रति यूआईडीएआई की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है

मांग में अचानक और तेज़ी से वृद्धि के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) हरियाणा में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित कर रही

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) – इंडियनऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल – देश भर में परिचालन और लॉजिस्टिक्स समन्वय जारी रखे हुए हैं ताकि कई क्षेत्रों में ईंधन की मांग में अचानक और तीव्र वृद्धि के बावजूद पेट्रोल (एमएस), डीजल (एचएसडी) और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

हाल के दिनों में, ओएमसी ने कई राज्यों में मौसमी कृषि गतिविधियों और कटाई कार्यों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की उल्लेखनीय रूप से अधिक खपत देखी है। अन्य आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में कम कीमत के कारण खुदरा ग्राहकों के सार्वजनिक क्षेत्र के खुदरा आउटलेट्स की ओर रुख करने और संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के खुदरा ईंधन आउटलेट्स की ओर स्पष्ट रुझान के कारण भी अतिरिक्त मांग का दबाव उत्पन्न हुआ है।

सार्वजनिक क्षेत्र की ओएमसी अपने टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्रों और खुदरा आउटलेट्स के व्यापक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति बनाए हुए हैं। आपूर्ति दल, परिवहन नेटवर्क, टर्मिनल संचालन और चुनिंदा खुदरा आउटलेट्स बाजारों में निर्बाध उत्पाद आवागमन और समय पर पुनःपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 24×7 कार्यरत हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां निर्बाध ईंधन आपूर्ति के लिए राज्य प्रशासन के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए हुए हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां स्टॉक की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही हैं और बढ़ी हुई मांग को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए रसद और वितरण योजना पर घनिष्ठ समन्वय स्थापित कर रही हैं।

अनिल कुमार सिंह, राज्य स्तरीय समन्वयक, हरियाणा, नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सामान्य खरीदारी जारी रखें और अनावश्यक रूप से घबराकर खरीदारी करने से बचें। उपभोक्ताओं से यह भी अनुरोध है कि वे ईंधन की उपलब्धता से संबंधित सटीक जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

मेजर जनरल भारत महतानी को एन सी सी निदेशालय हेडक्वार्टर से कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर तैनात किया गया है।

भारत / सत्ता संदेश

मेजर जनरल भारत महतानी अभी एन सी सी निदेशालय में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़  के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने 1 नवंबर, 2025 को यह प्रतिष्ठित कमान संभाली थी, और निवर्तमान अधिकारी, मेजर जनरल जगदीप सिंह चीमा से पारंपरिक बैटन लिया था।      7 महीने के सफल और प्रभावशाली कार्यकाल के बाद, यह जनरल ऑफिसर बेंगलुरु में कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर कमान संभालने जा रहे हैं।

मेजर जनरल भारत महतानी अपने नए पद पर व्यापक अनुभव लेकर आए हैं। एन सी सी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल का पद संभालने से पहले, उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, झारखंड और बिहार सब-एरिया में और पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। अपनी विशिष्ट सेवा के लिए, उन्हें GOC-in-Chief, पश्चिमी कमान प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है।

उनके प्रभावशाली कार्यकाल, नेतृत्व और युवा विकास में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए, एन सी सी निदेशालय ने इस जनरल ऑफिसर के लिए एक औपचारिक विदाई समारोह आयोजित किया।

युवती से लूट की वारदात CCTV में कैद, चाकू दिखा बदमाशों ने छीना बैग देर रात काम से घर लौट रही युवती को बाइक सवार लुटेरों ने बनाया निशाना

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में देर रात एक युवती के साथ लूट की वारदात सामने आई है। गुरु अर्जुन देव नगर की डाकखाना वाली गली नंबर 8 में दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने चाकू की नोक पर युवती से बैग लूट लिया। पूरी घटना इलाके में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।


जानकारी के मुताबिक 27 मई की देर रात युवती काम से घर लौट रही थी। इसी दौरान दो बाइक पर आए चार बदमाशों ने उसे घेर लिया। CCTV फुटेज में दिखाई दे रहा है कि एक बदमाश ने चाकू दिखाकर युवती का बैग छीनने की कोशिश की। युवती ने बैग बचाने का प्रयास किया, लेकिन बदमाशों ने उसे धक्का देकर बैग छीन लिया और मौके से फरार हो गए। जिस घर के CCTV कैमरे में यह वारदात कैद हुई, वहां रहने वाली महिला ने बताया कि उसने रात के समय युवती की चीखें सुनी थीं। बाद में उसके पति ने CCTV फुटेज चेक की तो पता चला कि बाइक सवार बदमाशों ने सुनसान गली में लूट की वारदात को अंजाम दिया।


इलाका वासियों का कहना है कि यहां पहले भी स्नैचिंग की कई घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में पुलिस गश्त ना के बराबर है, जिसके कारण नशेड़ी और बदमाश बेखौफ होकर घूम रहे हैं। उधर थाना डिवीजन नंबर 7 के एसएचओ गगनदीप ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश जारी है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लुधियाना से गुरमीत सिंह की रिपोर्ट