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भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (2021, 2022, 2023 और 2024 बैच) ने आज (20 अप्रैल, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने इन अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश के विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सार्वजनिक सेवा में शामिल हुए हैं। राष्ट्र एक विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय रेलवे और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के युवा अधिकारी होने के नाते, वे ऐसी भूमिकाओं में कदम रख रहे हैं जो लाखों नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके निर्णय और कार्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव डालेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी ढांचा ही आधुनिक राष्ट्रों की नींव है। रेल और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं हैं; वे आर्थिक विस्तार, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के उपकरण हैं। जब कोई रेल किसी दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई राजमार्ग किसी दूरस्थ क्षेत्र से जुड़ता है, तो इससे उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के अपार अवसर खुल जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है, व्यापार को बढ़ावा देता है, निवेश आकर्षित करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह क्षेत्रों और लोगों को करीब लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि केवल आंकड़े ही सफलता का पैमाना नहीं होते। उनके काम की असली कसौटी यह है कि इससे लोगों के जीवन में कितना सुधार होता है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता जैसे लोक सेवा के मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियां और कठिन निर्णय लेने के क्षण अवश्य आएंगे। ऐसे क्षणों में, उनके मूल्य ही उनका मार्गदर्शन करेंगे। राष्ट्रपति ने उन्हें हमेशा जिज्ञासु बने रहने, सीखते रहने और नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि उनके लिए गए निर्णय, उनके निर्धारित मानक और उनका समर्पण अमिट छाप छोड़ेगा। वे केवल प्रशासक ही नहीं, बल्कि प्रगति के सूत्रधार और आम लोगों के भरोसे के संरक्षक भी हैं।

नये रेलवे स्टेशन का नाम आनंद दिघे के नाम पर रखा जाना चाहिए: शिवसेना सांसद

ठाणे, 17 मार्च (भाषा) शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने महाराष्ट्र के ठाणे और मुलुंड के बीच बनने वाले नये रेलवे स्टेशन का नाम पार्टी के दिवंगत नेता आनंद दिघे के नाम पर रखे जाने की मांग की है।

ठाणे के सांसद म्हस्के के कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नये स्टेशन के निर्माण के लिए 250 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है और प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है।

विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की ओर से सांसद ने सोमवार को संसद में कहा, “ठाणे और मुलुंड के बीच बनने वाले नये स्टेशन का नाम ‘धर्मवीर आनंद दिघे स्टेशन’ रखा जाना चाहिए।”

आनंद दिघे शिवसेना के वरिष्ठ नेता और शिंदे के मार्गदर्शक थे।

उन्होंने यात्रियों की समस्याओं को लेकर कहा कि ठाणे की लगभग 26 लाख आबादी के लिए रेलवे परिवहन प्रमुख साधन बना हुआ है और इस स्टेशन के बनने से ठाणे रेलवे स्टेशन पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।

सांसद ने ठाणे स्टेशन के व्यापक उन्नयन के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पेश 949 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की भी शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया।

उन्होंने ठाणे स्टेशन पर आपातकालीन चिकित्सा क्लिनिक को पुनः खोलने और कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई वरिष्ठ नागरिकों की रियायतों को बहाल करने सहित अन्य कई मांगें भी उठाईं।