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SAIL ने CSR के तहत स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम स्थापित करने के लिए EdCIL संग MoU किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन, देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक और महारत्न कंपनी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और शिक्षा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम एडसिल लिमिटेड ने सेल के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 26 मई, 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, SAIL के परिचालन क्षेत्रों के आसपास स्थित स्कूलों में ‘स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम्स’ स्थापित किए जाएंगे।

इस सहयोग का उद्देश्य समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना और सीखने के परिणामों को और आगे ले जाना है। यह परियोजना सीधे तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल विकास लक्ष्य-4 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य अन्य बातों के साथ-साथ सभी के लिए समावेशी, न्यायसंगत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सीखने के अवसर सुनिश्चित करना है।

सेल और एडसिल के बीच इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर SAIL के निदेशक, के. के. सिंह की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर SAIL और एडसिल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

WHO-ICHI फ्रेमवर्क और पारंपरिक चिकित्सा स्वास्थ्य संहिता पर दो दिवसीय परामर्श बैठक संपन्न

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) चिकित्सा पद्धतियों के लिए स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीएचआई) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड (एनएचआईसी) के विकास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और परामर्शदात्री चर्चा का आयोजन किया। यह आयोजन 25-26 मई को ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) और दाता समझौते के बाद इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को डब्ल्यूएचओ के आईसीएचआई ढांचे से जोड़ना है। इसका लक्ष्य एएसयू नैदानिक ​​हस्तक्षेपों के लिए विश्व स्तर पर मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग शब्दावली विकसित करना है, ताकि सीमा पार डेटा आदान-प्रदान को सक्षम बनाया जा सके, नैदानिक ​​अनुसंधान को मजबूत किया जा सके और बीमा एकीकरण सहित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा दिया जा सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप हस्तक्षेप वर्गीकरणों के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने, दस्तावेज़ीकरण नियमों को मजबूत करने और डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र में अंतरसंचालनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

उद्घाटन एवं तकनीकी सत्र

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत के स्वागत भाषण के साथ उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ। अपने संबोधन में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को सुदृढ़ करने में मानकीकृत हस्तक्षेप शब्दावली के महत्व पर चर्चा की।

डब्ल्यूएचओ के तकनीकी अधिकारी डॉ. नेनाद कोस्टांजेक समेत डब्ल्यूएचओ डेटा मानक और सूचना विज्ञान टीम के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने एएसयू हस्तक्षेप वर्गीकरण को वैश्विक स्वास्थ्य सूचना विज्ञान मानकों के साथ संरेखित करने के लिए भविष्य के रोडमैप और तकनीकी आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया।

इस दो दिवसीय बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें मसौदा दस्तावेजों की विस्तृत तकनीकी समीक्षा, जांच-पड़ताल के अलावा विशेषज्ञ परामर्श भी शामिल रहा। तीनों अनुसंधान परिषदों के लगभग 30 वैज्ञानिकों के साथ-साथ आईटीआरए, एआईआईए, नियम और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।

तैयार अंतिम प्रारूप जुलाई 2026 में होने वाली आगामी डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई एएसयू अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला का आधार बनेगा।