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भारत-बेल्जियम की ‘स्ट्रैटिजक दोस्ती’, व्यापार से लेकर ऱक्षा संवाद तक हुई कई समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और बेल्जियम ने अपने आपसी संबंधों को नई गति देने के मकसद से पहली ‘भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता’ (Strategic Dialogue) आयोजित की। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने की.दोनों देश अपने आपसी संबंधों को और अधिक संस्थागत, व्यापक और परिणाम-उन्मुख बनाने पर सहमत हुए।

यह रणनीतिक वार्ता, भारत-यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के भीतर नियमित राजनीतिक बातचीत के लिए एक नए मंच के रूप में काम करेगी. बैठक में व्यापार और निवेश, ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव), इनोवेशन और टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी, रक्षा और सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यूरोप के साथ भारत की साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान है और यह रणनीतिक वार्ता दोनों देशों की पूरक ताकतों को ठोस नतीजों में बदलने का जरिया बनेगी. वहीं, बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने कहा कि मार्च 2025 में होने वाला बेल्जियम का आर्थिक मिशन दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश और इनोवेशन भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं.

‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन

दोनों देश नियमित उच्च-स्तरीय बैठकें करने पर सहमत हुए. साथ ही, 2026 के लिए प्रस्तावित उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान विभिन्न प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया. रणनीतिक वार्ता के साथ-साथ ‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारत, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों के उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

दोनों देशों के इन नेताओं ने किया प्रतिनिधित्व

भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया. बेल्जियम का प्रतिनिधित्व फ्लैंडर्स के मंत्री-अध्यक्ष (Minister-President) मैथियास डाइपेंडेल और वालोनिया के मंत्री-अध्यक्ष एड्रियन डोलिमोंट ने किया.

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर फोकस

बिजनेस फोरम में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक के समापन पर, भारत और बेल्जियम ने भविष्य-उन्मुख, महत्वाकांक्षी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया.

रक्षा से कृषि और मेडिकल से ब्रह्मोस मिसाइल तक, भारत-इंडोनेशिया में इन समझौतों पर लगी मुहर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया दौरे पर राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान रक्षा, कृषि और खनिज सहित 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इसमें इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति भी शामिल है. पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे है

पीएम मोदी, प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है. मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया. गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें (पीएम मोदी) इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान से भी नवाजा गया.

प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए इंडोनेशिया और राष्ट्रपति सुबियांतो का आभार जताया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे हैं. ये सम्मान कोरोड़ों भारतीयों का सम्मान है. दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, इंडस्ट्री जैसे कई समझौतों पर मुहर लगी. इंडोनेशिया की सेना को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति करने संबंधी समझौते पर दोनों ने हस्ताक्षर किए. कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों में डील हुई. खनिज-इस्पात आपूर्ति में समझौते हुए, चिकित्सा उत्पाद में डील हुई.

हम हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं- PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि 2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नई उड़ान ले रही है. हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा…हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं. हमारे देशों के बीच बढ़ता विश्वास हमारी रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है. आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हुए समझौते से भारत की किफायती दवाइयां इंडोनेशिया को और सहजता से उपलब्ध होंगी. हम इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की क्षमता निर्माण में भी योगदान देंगे. भारत में विकसित किए गए गेहूं के बीज की आपूर्ति से, इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी. हम एक दूसरे के साथ सतत खेती और कृषि प्रौद्योगिकी में सर्वोत्तम प्रथाएं भी साझा करेंगे.

‘इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस’

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. हमारे युवाओं में तकनीक के प्रति स्वाभाविक रुझान है. हमें अपने युवाओं के बीच एआई, टेलिकॉम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए आज एक अहम समझौता किया है. हम दोनों देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं. हम इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु का कैंपस खोलने जा रहे हैं.

भारत-इंडोनेशिया के बीच 14 अहम समझौते

  1. अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार
  2. मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन में सहयोग
  3. खनिज एवं स्टील सप्लाई चेन
  4. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग
  5. समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार
  6. आपदा प्रबंधन सहयोग
  7. दूरसंचार तकनीक और सेवाएं
  8. अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
  9. स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग
  10. चुनाव आयोगों के बीच सहयोग
  11. ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग
  12. एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग
  13. SAIL और Krakatau Steel का संयुक्त उद्यम
  14. रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन

इसके अलावा भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री संरक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया. दोनों देशों ने स्टील सप्लाई चेन के लिए मिनरल्स और टेक्नोलॉजी पर समझौते पर हस्ताक्षर किए. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में कल यानी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया गया.

Pm Modi Indonesia President Prabowo Subianto..

2018 के बाद पहली PM मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा

साल 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है. ​इस यात्रा से भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूती मिलेगी. दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बढ़ेगी. बता दें कि दोनों देश समंदर में सुरक्षा, साझा सैन्य अभ्यास और डिफेंस इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं.

3 दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं जापान की प्रधानमंत्री, 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सनाए तकाइची भारत दौरे पर पहुंची। पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्टपति भवन में उनका भव्य और उल्लास के साथ स्वागत किया है। पीएम सनाए तकाइची भारत के 16वें वार्षिक समारोह में शामिल होंगी। इस समारोह के बाद दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपने- अपने सम्मानित मंत्रियों और उनके प्रतिनिधिमंडल से परिचय करवाया।

दिल्ली और टोक्यो के बीच आएगी मजबूती

इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जापान की पीएम का स्वागत किया था.साथ ही इस दौरे को दिल्ली और टोक्यो के बीच वैश्विक साझेदारी और खास रणनीतिक के लिए अहम कदम बताया. विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूरा भारत जापान की पीएम का गर्मजोशी के साथ स्वागत करता है, जो एक आधिकारिक दौरे के लिए दिल्ली आई हैं. बीते बुधवार को इसी तरह से राज्य के मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी ताकाइची का भव्य स्वागत किया.

किन-किन क्षेत्रों पर होगी चर्चा?

इस दौरे को आने वाले समय में भारत और जापान के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो खास रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करेगा. इन तीन दिनों के दौरे पर दोनों देश आर्थिक सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने साथ ही सप्लाई, नई तकनीक, रक्षा तंत्र, समु्द्री सुरक्षा और निवेश पर भी चर्चा होगी.

16वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, तकाइची ने कहा कि दोनों देशों को अपनी-अपनी खूबियों का इस्तेमाल करके साथ मिलकर और मजबूत व समृद्ध बनना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि कई रणनीतिक मुद्दों पर दोनों नेताओं की सोच एक जैसी थी और वे सहयोग के तीन मुख्य क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर सहमत हुए, जिनमें रणनीतिक संबंधों को और गहरा करना भी शामिल है. उन्होंने कहा, जापान का अपडेटेड ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) विज़न प्रधानमंत्री मोदी की ‘महासागर’ (MAHASAGAR) पहल से काफी हद तक मेल खाता है, तकाइची ने कहा कि दोनों देश समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियमों पर आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे.

रक्षा मंत्री वियतनाम और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे


दिल्ली /सत्ता संदेश

सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी और समुद्री सहयोग को सशक्त बनाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को प्रोत्साहन देने पर ध्यान: श्री राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 18 से 19 मई, 2026 तक वियतनाम और 19 से 21 मई, 2026 तक दक्षिण कोरिया की आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। अपनी यात्रा से पहले एक पोस्ट में, रक्षा मंत्री ने इन दोनों एशियाई देशों की यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों के और अधिक प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।

रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। वियतनाम के राष्ट्रपति की 5 से 7 मई, 2026 तक भारत यात्रा के दौरान इस व्यापक रणनीतिक साझेदारी को उन्नत करते हुए इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर ले जाया गया था। श्री राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

रक्षा मंत्री की 8 से 10 जून, 2022 के दौरान की पिछली यात्रा में भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी को लेकर 2030 तक के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण बयान पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह दृष्टिकोण वक्तव्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए एक स्पष्ट और परिभाषित मार्ग को दर्शाता है। दोनों लोकतांत्रिक देशों का क्षेत्र की शांति और समृद्धि में साझा हित है।

श्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती (19 मई, 2026) के अवसर पर हो रही है। रक्षा मंत्री हो ची मिन्ह समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

दक्षिण कोरिया की अपनी यात्रा के दौरान, श्री राजनाथ सिंह कोरिया गणराज्य के रक्षा मंत्री श्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों मंत्री दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर विचार-विमर्श करेंगे। वे साझा हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के मंत्री श्री ली योंग-चेओल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।

कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत द्वारा समर्थन देने का निर्णय भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस तैनात करके युद्ध में शांति और सद्भाव लाने के उद्देश्य से लिया गया था। तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवा करते हुए, इस यूनिट ने दो लाख से अधिक रोगियों का इलाज किया और लगभग 2,500 ऑपरेशन किए, साथ ही कई नागरिकों का भी उपचार किया। भारत का दूसरा प्रमुख योगदान तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता करना था, जो संयुक्त राष्ट्र को भारत का एक प्रस्ताव था और जिसे बहुमत से स्वीकार किया गया था। इसके अनुसार, युद्धोत्तर चरण में, 5,230 सैनिकों वाली भारतीय सेना की कस्टोडियन फोर्स ने लगभग 2,000 युद्धबंदियों का शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन किया।

शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए, 21 मई को दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन किया जाएगा, जिसमें दक्षिण कोरिया के मंत्री श्री क्वोन ओह-यूल भी शामिल होंगे।

भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ का स्वाभाविक तालमेल और साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।