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दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संस्कृति का सम्मान, गायक अनूप जलोटा को मिली मानद सदस्यता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के प्रसिद्ध भजन गायक Anup Jalota को South Africa में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया है। भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (UPDES) ने उन्हें अपनी मानद सदस्यता देकर सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह सोमवार को जोहानिसबर्ग में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

संगठन की ओर से कहा गया कि अनूप जलोटा ने अपने संगीत और भजनों के माध्यम से दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक संगीत को नई पहचान दिलाई है। उनके गीतों और भक्ति संगीत ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी गहरी छाप छोड़ी है। इसी योगदान को देखते हुए उन्हें यह विशेष सम्मान दिया गया।

समारोह के दौरान अनूप जलोटा ने भारतीय प्रवासी समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति को जीवित रखने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है और भारतीय भक्ति संगीत आज भी विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रहा है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिली। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने कहा कि अनूप जलोटा जैसे कलाकार भारतीय संस्कृति के सच्चे दूत हैं, जिन्होंने अपनी कला से देश की पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान न केवल कलाकारों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि विदेशों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जो वर्षों से भारतीय परंपराओं और त्योहारों को संजोए हुए है।

ODI वर्ल्ड कप 2027: क्या मेजबान देश ही हो जाएगा टूर्नामेंट से बाहर? आईसीसी नियमों ने फंसाया पेचीदा पेंच

स्पोर्टस डेस्क : अगले साल के आखिर में होने वाले वनडे विश्व कप 2027 के आयोजन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी संयुक्त रूप से साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया के पास है, लेकिन एक पेचीदा गणित के कारण मेजबान नामीबिया पर ही बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।

आईसीसी नियमों का चक्रव्यूह : आमतौर पर मेजबान टीमों को टूर्नामेंट में सीधी एंट्री मिलती है, लेकिन आईसीसी के नियमों के अनुसार केवल ‘फुल मेंबर’ देश ही सीधी एंट्री पा सकते हैं। साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे फुल मेंबर होने के नाते क्वालीफाई कर चुके हैं, लेकिन नामीबिया एक ‘एसोसिएट मेंबर’ है, जिसे क्वालीफायर खेलकर अपनी जगह बनानी होगी।

क्या है नामीबिया की मौजूदा स्थिति?

आईसीसी लीग 2: नामीबिया फिलहाल इस लीग की अंक तालिका में 5वें नंबर पर है।

प्रदर्शन: टीम ने 28 में से केवल 10 मैच जीते हैं और उसके पास महज 22 अंक हैं।

अगली चुनौती: जुलाई में नामीबिया का मुकाबला नीदरलैंड्स और नेपाल से होगा। विश्व कप क्वालीफायर के अंतिम दौर में पहुंचने के लिए उसे टॉप-4 में जगह बनानी होगी, जो फिलहाल काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

अगर नामीबिया टॉप-4 में नहीं आ पाती है, तो उसे क्वालीफायर प्लेऑफ के कठिन रास्ते से गुजरना होगा। ऐसे में यह पहली बार हो सकता है कि कोई मेजबान देश ही अपने घर में होने वाले वर्ल्ड कप का हिस्सा न बन पाए।

विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है: दक्षिण अफ्रीकी मंत्री

जोहानिसबर्ग, 10 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप मंत्री जुको गोडलिम्पी ने सोमवार को प्रिटोरिया में उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो अब पतन के कगार पर है।

गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और ‘सीआईआई-इंडिया बिजनेस फोरम’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का जन्म उस वैश्विक व्यापार प्रणाली के ढांचे के बीच हुआ, जिसे पश्चिमी देशों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा, “प्रमुख शक्तियों द्वारा आकार दी जा रही दुनिया में भारत उभरता हुआ लोकतंत्र है।”

भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की उसकी योजनाओं पर मंत्री ने कहा कि भारत अब एक अलग और खास स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाएगा, जहां वह सिर्फ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चलने के बजाय एक नयी वैश्विक व्यवस्था के सह-निर्माता की भूमिका निभाने का दायित्व भी संभालेगा।”

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की उस व्यवस्था में भारत एक सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब उसे इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक मुख्य भागीदार की भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था अब पतन के कगार पर है।”

गोडलिम्पी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं।

मंत्री ने कहा, “हम विकास, औद्योगीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार में रणनीतिक साझेदार हैं।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इन दोनों देशों को “टेरिबल ट्विन्स” (खतरनाक जोड़ी) कहा जाता है क्योंकि इनके प्रतिनिधि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों में बदलाव लाने के लिए हमेशा मुखर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “वैश्विक विकास से संबंधित सभी चर्चाओं में दक्षिण अफ्रीका और भारत निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित ग्लोबल साउथ के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और इस बात पर भी बल देते हैं विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना कि अधिक आर्थिक शक्ति वाले देशों के विचारों को।”