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Chabahar port strike : अमेरिका ने चाबहार को बनाया निशाना, तनाव का माहौल

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग की आंच चाबहार बंदरगाह तक पहुंच चुकी है। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अमेरिकी सेना की एयर स्ट्राइक के बाद चाबहार और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

पश्चिम एशिया में संकट कितना गहरा?

गुरूवार को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक भी किया जाना है, ऐसे में अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया में संकट गहराने लगा है। दोनों पक्षों की तरफ से आक्रामक बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है।

अमेरिका ने ईरान के चाबहार पर हमला किया, संघर्ष पर ट्रंप क्या बोले?

दरअसल, अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश दूसरे दिन भी एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है। यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। 

90 ईरानी ठिकानों पर हमले, अमेरिकी सेना क्या बोली?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम (CENTCOM) ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

इन हमलों के बाद अमेरिका ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक दल के खिलाफ हालिया आक्रामकता अनुचित हैं। इसके लिए ईरान जवाबदेह है। अमेरिकी हमलों से पहले मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर कथित तौर पर ईरान की सेना ने हमले किए। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेगा, तो इसके अंजाम ‘बहुत खराब’ होंगे।

ईरान ने अमेरिका पर पलटवार करने के लिए कुवैत और बहरीन में उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ट्रंप के आक्रामक बयान के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार गालिबाफ ने कहा, अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि धमकाना और वादे तोड़ना बीते दिनों की बात हो चुकी है।

ट्रंप ने क्यों कहा- ईरान के साथ वार्ता समय की बर्बादी?

यह भी महत्वपूर्ण है कि ईरान में अमेरिकी सेना के ताजा हमलों से पहले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ मौजूदा हालात में बातचीत करना उन्हें समय की बर्बादी लगता है। तल्ख अंदाज में ट्रंप ने तेहरान के नेताओं को बेवकूफ भी बताया था। उन्होंने शांति समझौते को लेकर भी कहा कि ईरान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया, ऐसे में उन्हें लगता है कि समझौता टूट चुका है। तेहरान की तरफ से भी अमेरिका को दो-टूक जवाब दिया गया है।

ईरान-अमेरिका युद्ध: 500 मिसाइलें, 2,000 ड्रोन और भीषण पलटवार; अमेरिका ने तबाह किए ईरान के 17 जहाज और 2,000 ठिकाने

इंटरनेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में चल रहा सैन्य संघर्ष अब चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) के अधिकारी ब्रैड कूपर ने एक बड़ा दावा किया है कि ईरान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में अमेरिका ने भीषण पलटवार किया है, जिसमें ईरान को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है।

ईरान का बड़ा हमला और अमेरिका की कार्रवाई: अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और 2,000 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए हैं। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने सबमरीन समेत 17 ईरानी जहाजों को नष्ट कर दिया है और ईरान के भीतर लगभग 2,000 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड-कंट्रोल सेंटरों को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।

खामेनेई की मौत और नेतृत्व का संकट: 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो चुकी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लिए बिना नहीं रुकेगा और अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनके सीधे निशाने पर हैं।

होर्मुज की खाड़ी में सन्नाटा: ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि आज अरब की खाड़ी, होर्मुज की खाड़ी या ओमान की खाड़ी में एक भी ईरानी जहाज मौजूद नहीं है। हालांकि, डर के कारण अन्य देशों के जहाजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और कोई भी जहाज आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना का पलटवार आने वाले कुछ और दिनों तक जारी रहेगा।

भारत पर असर और नौसेना अलर्ट: मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष के बीच भारतीय नौसेना भी पूरी तरह अलर्ट पर है। ओमान की खाड़ी में INS सूरत को तैनात किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके।