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एक्सप्लेनर: चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी में NASA, कैसे बनेगा ‘लूनर बेस’?

NASA अब सिर्फ चांद पर इंसानों को भेजने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वहां स्थायी बेस बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की यह महत्वाकांक्षी योजना भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रयोगों और मंगल मिशन की तैयारी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। सवाल यह है कि आखिर चांद पर बेस क्यों बनाया जा रहा है, यह कैसे काम करेगा और इंसानों के लिए वहां रहना कितना चुनौतीपूर्ण होगा?

क्यों जरूरी है चांद पर बेस?

NASA का मानना है कि चांद भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक “स्टॉपओवर स्टेशन” बन सकता है। पृथ्वी की तुलना में चांद का गुरुत्वाकर्षण काफी कम है, इसलिए वहां से अंतरिक्ष यान लॉन्च करना आसान और कम खर्चीला होगा। वैज्ञानिकों का उद्देश्य चांद पर लंबे समय तक इंसानों को सुरक्षित रखने की तकनीक विकसित करना है, ताकि भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजा जा सके।

आर्टेमिस मिशन की क्या भूमिका?

चांद पर बेस बनाने की योजना Artemis Program के तहत आगे बढ़ रही है। इस मिशन का उद्देश्य इंसानों को दोबारा चांद पर उतारना और वहां टिकाऊ उपस्थिति स्थापित करना है। NASA आने वाले वर्षों में चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) क्षेत्र में बेस स्थापित करने की योजना बना रहा है, क्योंकि वहां पानी के बर्फीले भंडार मिलने की संभावना है।

चांद पर इंसान कैसे रहेंगे?

लूनर बेस में विशेष मॉड्यूल बनाए जाएंगे, जहां अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे। इनमें ऑक्सीजन, बिजली, पानी और तापमान नियंत्रण जैसी सुविधाएं होंगी। वैज्ञानिक सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए करने की योजना बना रहे हैं। चांद की मिट्टी यानी ‘रेगोलिथ’ का उपयोग निर्माण सामग्री के रूप में भी किया जा सकता है।

सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

चांद पर वातावरण नहीं है, जिससे वहां अत्यधिक गर्मी और ठंड का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा अंतरिक्ष विकिरण (Radiation), उल्कापिंडों का खतरा और सीमित संसाधन बड़ी चुनौती हैं। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जो अंतरिक्ष यात्रियों को इन खतरों से सुरक्षित रख सके।

दुनिया की नजर चांद पर क्यों?

सिर्फ NASA ही नहीं, बल्कि China, Russia और कई अन्य देश भी चांद मिशनों पर तेजी से काम कर रहे हैं। चांद को भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज संसाधनों और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र माना जा रहा है।

भविष्य की अंतरिक्ष दुनिया की शुरुआत

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चांद पर स्थायी बेस बन जाता है, तो यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष युग का सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है। इससे अंतरिक्ष पर्यटन, वैज्ञानिक खोजों और दूसरे ग्रहों पर मानव मिशनों का रास्ता खुल सकता है।

NASA की गंभीर चेतावनी: एस्टेरॉयड के हमले से तबाह हो सकते हैं दुनिया के कई शहर, मचेगा ‘भूचाल’

इंटरनेशनल डेस्क : नासा (NASA) की ग्रह रक्षा अधिकारी (Planetary Defense Officer) केली फास्ट ने पृथ्वी के लिए एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार, अंतरिक्ष में हजारों ऐसे एस्टेरॉयड्स मौजूद हैं जो कभी भी पृथ्वी से टकरा सकते हैं और जिनसे बचाव का फिलहाल कोई पुख्ता उपाय नजर नहीं आ रहा है।

15,000 अनदेखे एस्टेरॉयड्स का खतरा: वैज्ञानिक केली फास्ट ने बताया कि पृथ्वी के पास लगभग 15,000 ऐसे एस्टेरॉयड्स हैं जिन्हें अभी तक देखा नहीं गया है। इनमें से प्रत्येक एस्टेरॉयड में एक पूरे शहर को तबाह करने की क्षमता है। उन्होंने इन मध्यम आकार के पिंडों को “शहर-नाशक” (city-killers) करार दिया है, जो क्षेत्रीय स्तर पर गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं।

ट्रैकिंग में आ रही हैं मुश्किलें : रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 25,000 एस्टेरॉयड्स पृथ्वी के करीब से गुजरते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को उनमें से केवल 40% के सटीक स्थान की जानकारी है। सबसे शक्तिशाली दूरबीनों से भी इनका पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि ये सूर्य के प्रकाश को परावर्तित (reflect) नहीं कर पाते।

भविष्य की तैयारी: इस खतरे से निपटने के लिए नासा अगले साल एक ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट सर्वेयर अंतरिक्ष दूरबीन’ लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह दूरबीन थर्मल सिग्नेचर का उपयोग करके उन अंधेरे एस्टेरॉयड्स और धूमकेतुओं का पता लगाएगी जो अब तक छिपे हुए थे। वैज्ञानिक ने स्पष्ट किया कि एस्टेरॉयड्स के हम तक पहुंचने से पहले उन्हें ढूंढना और उन्हें नष्ट करने की तकनीक विकसित करना मानव जाति के लिए बहुत जरूरी है।