ब्रेकिंग न्यूज़
1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”

दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है।

एक जून से शुरू हो रहे महीनेभर चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए केंद्रीय कृषि ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस खेत को बचाने, लागत को संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने रसायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन-सी फसल लें, कहाँ फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर किसान को स्थिति-विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए KVKs को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है, साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें KVK, ICAR संस्थान, AICRP केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ICAR संस्थानों और KVKs की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी।

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनावों में 2,926 उम्मीदवार मैदान में

तिथि: 14 APR 2026 by PIB Delhi

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।

  1. पश्चिम बंगाल राज्य (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, जिसके लिए 29 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, 9 अप्रैल, 2026 थी, जबकि पश्चिम बंगाल (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 10 अप्रैल, 2026 थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 13 अप्रैल, 2026 दोपहर 3:00 बजे तक थी ।
  2. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद, पश्चिम बंगाल के लिए उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नामविधानसभा क्षेत्रों (एसी) की संख्याउम्मीदवारों की कुल संख्यानामांकन वापस लेने के बाद
1.पश्चिम बंगाल (चरण-I)1521,478
2.पश्चिम बंगाल (चरण-II)1421,448
  1. निर्वाचन अधिकारी (आरओ) चुनाव संचालन नियमावली, 1961 के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करेंगे ।
  2. आरओ प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकनजांच और उम्मीदवारी वापस लेने से संबंधित सभी चुनाव पत्रों और कार्यवाही को एक सीलबंद पैकेट/लिफाफे में सील के साथ अपनी निगरानी में रखेंगे ।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप पर “अपने उम्मीदवार को जानें” टैब से अपने उम्मीदवारों का विवरण देख सकते हैं, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यताएं, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और देनदारियां शामिल हैं, और उनके शपथपत्र डाउनलोड कर सकते हैं ।
  4. इसके अतिरिक्‍त, ईसीआई की पहल के अनुरूप, ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और उनके विवरण, जिनमें क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न शामिल हैं, मतदाताओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में अंकित होंगे।
उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की


केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, पूर्व सांसदों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है: लोक सभा अध्यक्ष

बाबासाहेब की दूरदर्ष्टि ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए: लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली, 14 अप्रैल, 2026: भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे; राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश; सांसदों, पूर्व सांसदों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके उपरांत लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला; केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे, सांसदों एवं पूर्व सांसदों ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) द्वारा संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपनी प्रतिभा, समर्पण और दृढ़ निष्ठा के बल पर अपने जीवन की प्रत्येक चुनौती को अवसर में परिवर्तित किया।उन्होंने आगे  कहा कि उनका जीवन, उनके आदर्श, उनके विचार तथा राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हम सभी के लिए चिरस्थायी प्रेरणा है।

 डॉ. अम्बेडकर के प्रमुख योगदानों का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार तथा बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार जैसे प्रगतिशील प्रावधानों ने एक सशक्त भारत की नींव रखी, जो न केवल भारत के लोकतंत्र को बल्कि विश्व के अन्य लोकतंत्रों को भी निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

भारत के युवाओं को बाबासाहेब  के विचारों का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए श्री बिरला ने उन्हें सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के 

साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिभा, कौशल, नवाचार और समर्पण भारत को और अधिक सशक्त तथा विकसित बनाएंगे।

इस अवसर पर श्री बिरला ने X पर अपने  संदेश में कहा कि, “बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है।विषम परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने तमाम ऊँचाइयों को छुआ तथा अपने अदम्य साहस, कठोर परिश्रम और शिक्षा के बल पर न केवल स्वयं को स्थापित किया, बल्कि करोड़ों वंचितों और शोषितों के लिए आशा की नई किरण बन गए।

उन्होंने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के मूल्यों को जीवन का ध्येय बनाया और इन्हीं आदर्शों को भारत के संविधान में समाहित कर राष्ट्र को एक सशक्त दिशा प्रदान की।

बाबासाहेब हमारे राष्ट्र के वह विशिष्ट रत्न हैं, जिनके जीवन व कार्यों ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए।

संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसा दूरदर्शी दस्तावेज देश को दिया, जो आज भी लोकतंत्र की मजबूत नींव है और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता हैउनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, जागरूकता और संगठित प्रयासों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

आज जब हम विकसित और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर हैं, बाबासाहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका संघर्ष और दर्शन हमें अन्याय, असमानता और भेदभाव के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

डॉ. अम्बेडकर का प्रेरणादायी जीवन और उनके आदर्श सदैव हमें एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।”

खेल खेलने से होने वाले फायदे

खेल खेलने से व्यक्ति को एक नहीं बल्कि अनेकों फायदे होते हैं जोकि निम्नलिखित हैं –

  • बहुत से रोगों से बचाव होता है जैसे कि मोटापा, हृदय की समस्या, मधुमेह, गठिया रोग इत्यादि।
  • व्यक्ति अनुशासित, समय का पाबंद, धैर्यवान और शालीन बनता है।
  • अपनी रुचि के अनुसार जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से खेल खेलता है तो उसका गुस्सा कम होता है और उसका चिड़चिड़ापन भी खत्म हो जाता है।
  • शारीरिक तंदुरुस्ती बनती है और मानसिक तौर पर व्यक्ति को आराम मिलता है। 
  • शरीर के सभी अंगों को खेल शारीरिक तौर पर बेहतर बनाते हैं जिसकी वजह से शरीर मजबूत बनता है।
  • खेल खेलने से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और साथ ही उसका दिमाग भी तेज़ होता है।
  • मनुष्य के काम करने का तरीका अच्छा होता है और वह हर काम को लगन के साथ करता है।  
  • खेल से शारीरिक ताकत बढ़ती है और शारीरिक समन्वय भी बना रहता है।
अंबेडकर जयंती 2026 की अनंत शुभकामनाएं!

भारतीय संविधान के शिल्पकार, समाज सुधारक और महान अर्थशास्त्री डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबा साहेब) की जयंती 14 अप्रैल को पूरे देश में ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। बाबा साहेब ने न केवल भारत को उसका संविधान दिया, बल्कि जातिवाद और असमानता के खिलाफ एक वैचारिक क्रांति की शुरुआत की। उनके कार्यों ने न केवल भारत में सामाजिक न्याय की दिशा बदल दी, बल्कि पूरी दुनिया में मानवाधिकारों और समानता के लिए प्रेरणा दी।

बाबासाहेब अंबेडकर के 10 अमूल्य विचार, जो आज भी दुनिया बदल सकते हैं

  1. शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो:
  2. संविधान निर्माता के प्रति सम्मान:
  3. समानता का संदेश:
  4. ज्ञान और शक्ति:
  5. भक्ति और श्रद्धा:
  6. शॉर्ट और पावरफुल:
  7. बदलाव का संदेश:
  8. महिलाओं और वंचितों के लिए:
  9. एकजुटता के लिए:
  10. सत्य और न्याय:

अंबेडकर जयंती 2026 की अनंत शुभकामनाएं!

गर्मियों में तरबूज खाने के 7 बेहतरीन फायदे।

सत्ता सन्देश हेल्थ डेस्क :-तरबूज का सेवन गर्मियों में आपको कूल और हाइड्रेटेड रखने का सबसे आसान तरीका है। इसलिए, इसे अपने आहार में जरूर शामिल करें। गर्मियों में तरबूज खाने के 7 बेहतरीन फायदे जैसे की-

  • डिहाइड्रेशन से बचाव: तरबूज में करीब 92% पानी होता है। गर्मियों में ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। तरबूज खाने से यह कमी पूरी होती है और हम हाइड्रेटेड रहते हैं। पानी की पर्याप्त मात्रा हमें ठंडक भी देती है और हमें ताजगी का एहसास कराती है।
  • एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन: तरबूज में विटामिन ए, विटामिन सी और लाइकोपीन जैसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। विटामिन ए आंखों के लिए और विटामिन सी स्किन के लिए फायदेमंद होता है।
  • पाचन में सुधार: तरबूज में पानी और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। यह कब्ज की समस्या से भी राहत दिलाता है और पेट को साफ रखता है। इसलिए, तरबूज खाना पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है।
  • किडनी स्टोन से बचाव: तरबूज में सिट्रुलिन नामक तत्व होता है, जो किडनी स्टोन बनने से रोकता है। सिट्रुलिन मूत्र के पीएच स्तर को संतुलित रखता है, जिससे पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। इस प्रकार, तरबूज किडनी के लिए भी फायदेमंद है।
  • मसल रिकवरी में सहायक: गर्मियों में व्यायाम करने के बाद तरबूज खाने से हमारी मसल्स की रिकवरी जल्दी होती है। तरबूज में सिट्रुलिन होता है, जो प्रोटीन सिंथेसिस को बढ़ाता है और मसल्स के दर्द को कम करता है। साथ ही, इसमें विटामिन सी और ए भी होते हैं, जो मसल्स की रिकवरी में मदद करते हैं।
  • शरीर को ठंडा रखना: तरबूज का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसका 92% पानी हमारे शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और गर्मी में राहत दिलाता है। तरबूज खाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और हम ताजगी महसूस करते हैं।
  • सुरक्षित सेवन: तरबूज का सेवन करते समय ध्यान रखें कि इसे धोकर और छिलका हटाकर खाएं। इससे किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचा जा सकता है। हालांकि, तरबूज का अधिक सेवन पेट की समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही खाएं।
ईरान युद्ध

(सत्ता संदेश – इंटरनेशनल डेस्क) ईरान और अमेरिका के बीच लगभग छह सप्ताह से जारी युद्ध फिलहाल रुक गया है, लेकिन इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल रहने के बाद स्थायी शांति की संभावनाएं अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप की नई धमकी में होर्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी लगाने का भी जिक्र है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। ट्रंप की यह चेतावनी पुरानी रणनीति को दोहराती नजर आ रही है। कुछ महीने पहले चीन के खिलाफ भी उन्होंने इसी तरह का दबाव बनाया था, जब उन्होंने चीनी निर्यात पर भारी कटौती और 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। अब ईरान के मामले में भी ट्रंप बातचीत के लिए दबाव बनाने का वही तरीका अपना रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के लेखक मनजीत बोपाराय की किताब “काफ़िर ही पवित्र मनुष्य”

प्रो. गुरभजन सिंह गिल और उनके साथियों ने लॉन्च की

लुधियाना, 28 फरवरी (सत्ता संदेश) ब्रिसबेन (ऑस्ट्रेलिया) के समझदार पंजाबी लेखक एस. मनजीत सिंह बोपाराय की नई बड़े फ़ॉर्मेट वाली किताब “काफ़िर ही पवित्र मनशाह” आज लुधियाना में पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल और उनके साथियों ने शहीद भगत सिंह नगर, लुधियाना में लॉन्च की।
मनजीत सिंह बोपाराय के क्लासमेट एस. कुलदीप सिंह गिल (सरे) कनाडा ने प्रो. गुरभजन सिंह गिल और बलविंदर सिंह बोपाराय को इस किताब की कॉपी दीं।
इस मौके पर बोलते हुए, प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि लुधियाना ज़िले के एक गांव के रहने वाले एस. मनजीत सिंह बोपाराय हालांकि लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं, लेकिन उन्होंने पंजाब में रहते हुए ही लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पहली किताब, “ज्योतिष झूठ बोलता है” की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका अंग्रेजी और हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
उन्होंने यह किताब “काफिर ही पवित्र मानव” तीन वैज्ञानिक लोगों, शहीद भगत सिंह, स्टीफन हॉकिंग और रिचर्ड डॉकिन्स के चित्रों के साथ पहले पृष्ठ पर लिखी है, जिनकी सोच ने अज्ञानता के कोहरे को दूर किया और दुनिया को ज्ञान दिया। यह किताब उन नायकों, योद्धाओं और शहीदों को समर्पित है जिन्होंने हजारों सालों से सच को पेश करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जिंदा जलाए गए, कैमरे में गोली मार दी गई, जघन्य यातनाएं झेलीं और इक्कीसवीं सदी में भी मारे जा रहे हैं, जेलों में डाले जा रहे हैं लेकिन फिर भी सच को पेश करना बंद नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा कि मंजीत मेरे कलम मित्र हैं जिनकी हर रचना को पढ़ना मैं अपना सौभाग्य समझता हूं उनके सामाजिक कामों में, “सिख गेम्स” ऑस्ट्रेलिया का दो बार प्रेसिडेंट बनना, ऑस्ट्रेलिया से 700 से ज़्यादा डेड बॉडीज़ को पंजाबी कम्युनिटी की मदद से अलग-अलग समय और जगहों पर भारतीय परिवारों तक पहुंचाना और हर जगह नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अपने साथियों के साथ डटकर खड़े रहना उनके शौक का हिस्सा है।
यह भी गर्व की बात है कि मेरे प्यारे राइटर सरबजीत सोही और साथियों के साथ, वह क्वींसलैंड में लिटरेरी और कल्चरल एक्टिविटीज़ के बड़े सपोर्टर और लीडर हैं।
गवर्नमेंट कॉलेज करमसर (रारा साहिब) में पढ़ाई के बाद से, उनके जीवन का हर पल लोगों की भलाई के लिए समर्पित रहा है।
किताब के बारे में जानकारी देते हुए कुलदीप सिंह गिल ने बताया कि इसे चिंतन प्रकाशन लुधियाना ने पब्लिश किया है। इस किताब के बारे में शहीद भगत सिंह जी के भतीजे प्रो. जगमोहन सिंह, कनाडा में रहने वाले मशहूर स्कॉलर डॉ. पिरथीपाल सिंह सोही, बलबीर चंद लोंगोवाल और सरबजीत सोही के कीमती कमेंट्स हैं। मनजीत बोपाराय ने भी इस किताब को बनाने के प्रोसेस के बारे में एक चैप्टर लिखा है। जाने-माने पत्रकार बलविंदर सिंह बोपाराय ने यह किताब देखने के बाद एक कीमती बात कही कि वैसे तो मैं खुद बचपन से अमृतधारी सिख रहा हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि ये पुरानी लिखी हुई बातें भी, जो नए रास्ते पर चलती हैं, इंसानी दिमाग के विकास में बहुत मदद करती हैं और बातचीत को जन्म देती हैं।
किताब के लेखक मनजीत सिंह बोपाराय ने वीडियो कॉल से जुड़ते हुए कहा कि मुझे यह किताब लिखने में पंद्रह साल से ज़्यादा लगे हैं। यह सिर्फ़ इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि इंटरनेट के ज़रिए साइंटिफिक मटीरियल और साइंटिफिक नतीजे मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के रैशनल मूवमेंट ने मेरी बढ़ती उम्र में मेरी सोच से जाल हटा दिए। बाद में, इंटरनेशनल लेवल पर मुझे वह संगत मिली जो हर चीज़ को लॉजिक की मदद से जांचती और परखती है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए अपनी कविता का एक हिस्सा पढ़कर अपनी बात साफ की, “अगर सुकरात कट्टरपंथियों के बीच न मरे होते, तो इंसान सदियों पहले चांद पर चढ़ गया होता। कोपरनिकस का मज़ाक न उड़ाया जाता, गैलीलियो सच नहीं बोलते, और न ही ब्रूनो आग में जलते।” उन्होंने सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया। किताब के डिस्ट्रीब्यूटर, शहीद भगत सिंह बुक सेंटर पंजाबी भवन, लुधियाना के डायरेक्टर मास्टर हरीश पखोवाल ने कहा कि इस किताब को देश और विदेश में बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

पत्रकारिता के ‘अर्जुन’ को भावभीनी श्रद्धांजलि

सत्य, साहस और संवेदनशीलता की एक युगांतकारी आवाज़

जालंधर, 28 फ़रवरी 2026
पत्रकारिता और साहित्य जगत ने आज एक ऐसी शख्सियत को खो दिया, जिसकी भरपाई संभव नहीं। वरिष्ठ पत्रकार, उपन्यासकार और कहानीकार अर्जुन शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर ने पूरे शहर और मीडिया जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है।

अर्जुन शर्मा केवल समाचार लिखने वाले पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे समाज की नब्ज़ पहचानने वाले संवेदनशील लेखक थे। उनकी लेखनी में सच्चाई की दृढ़ता और मानवीय मूल्यों की चमक दिखाई देती थी। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही, सामाजिक असमानताओं और आम जनमानस की पीड़ा को बेबाकी से उजागर किया।

उनकी रिपोर्टिंग में संतुलन, तथ्यों की मजबूती और निष्पक्षता स्पष्ट झलकती थी। वे मानते थे कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम है। यही कारण था कि वे हमेशा सत्य के पक्ष में खड़े रहे—चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।

युवा पत्रकारों के लिए वे प्रेरणा स्रोत और मार्गदर्शक थे। सहकर्मी उन्हें एक सरल, सौम्य और सहयोगी व्यक्तित्व के रूप में याद कर रहे हैं। उनकी मुस्कान और साहसिक विचार सदैव स्मरणीय रहेंगे।

उनका अंतिम संस्कार 1 मार्च 2026 को जालंधर में किया जाएगा, जहाँ शहर के गणमान्य नागरिक, पत्रकार, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।

सत्ता संदेश परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि

“सत्ता संदेश परिवार, स्वर्गीय अर्जुन शर्मा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
उनकी लेखनी और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बने रहेंगे।”

अर्जुन शर्मा भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके शब्द, उनके विचार और उनके सिद्धांत सदैव जीवित रहेंगे।

पंजाब भाजपा के कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी ने डॉ. ए.वी.एम. स्कूल को वाटर कूलर डोनेट किया

गर्मी के मौसम में विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

लुधियाना, 28 फरवरी: (सत्ता संदेश) गर्मियों के मौसम में स्कूली विद्यार्थियों को ठंडे पानी की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाजसेवी एवं पंजाब भाजपा के कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी ने आज डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निकट ईसा नगरी पुली, लुधियाना को एक नया वाटर कूलर दान किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए, देबी ने कहा कि स्कूल में पहले से कई वाटर कूलर उपलब्ध हैं, लेकिन लंबे समय से एक अतिरिक्त वाटर कूलर की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने बताया कि वे समय-समय पर स्कूल में आयोजित कार्यक्रमों में आते रहते हैं और यहां के प्रबंधन द्वारा डॉ. ए.वी.एम. एजुकेशनल सोसायटी के प्रमुख राजीव कुमार लवली के नेतृत्व में जरूरतमंद वर्ग के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने भविष्य में भी विद्यार्थियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. एवीएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल शहर के प्रमुख स्कूलों में से एक है। जहां संविधान निर्माता डॉ. बी आर अंबेडकर के चरण पड़े थे और यही कारण है कि वह स्कूल में बार-बार आते हैं और यहां वाटर कूलर डोनेट करने का फैसला किया।

राजीव कुमार लवली ने कहा कि डॉ. ए.वी.एम. एजुकेशनल सोसायटी का एकमात्र उद्देश्य संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलते हुए, समाज के हर वर्ग तक शिक्षा का प्रसार करना है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पहले से ठंडे पानी की व्यवस्था है, लेकिन गर्मियों में एक अतिरिक्त वाटर कूलर विद्यार्थियों की सुविधा को और बेहतर बनाएगा। उन्होंने इस पहल के लिए गुरदेव शर्मा देबी का आभार व्यक्त किया।

अंत में, स्कूल की प्रिंसीपल मनीषा गाबा ने समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थियों की ओर से गुरदेव शर्मा देबी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर वाइस प्रिंसिपल अमिता राजन, आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षिका जसविंदर, हर्ष कत्याल, नेहा मनचंदा और सोनिया भी उपस्थित रहीं।