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भीषण गर्मी में पानी के लिए संघर्ष, उमरिया के माली गांव में बच्चे रोज तय करते हैं कई किलोमीटर का सफर

उमरिया / सत्ता संदेश

Madhya Pradesh में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के उमरिया जिले के माली गांव में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि छोटे-छोटे बच्चों को भी पीने के पानी के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। गांव में पानी की कमी ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है और सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गांव के हैंडपंप और जलस्रोत सूख चुके हैं। ऐसे में गांव के लोग दूर-दराज के इलाकों से पानी लाने को मजबूर हैं। सुबह होते ही बच्चे बर्तन और डिब्बे लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। कई बार उन्हें तेज धूप में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है। कई परिवारों को दिनभर की जरूरत पूरी करने के लिए सीमित पानी में गुजारा करना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा बोझ पड़ रहा है, क्योंकि पानी लाने की जिम्मेदारी ज्यादातर उन्हीं के कंधों पर है।

गांव के लोगों ने बताया कि जल संकट के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय पानी भरने में समय बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। अत्यधिक गर्मी, कम बारिश और जल संरक्षण की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते प्रभावी जल प्रबंधन और संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और खराब हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि प्रभावित गांवों में पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है और नए जलस्रोत विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

भीषण गर्मी और जल संकट के बीच माली गांव की तस्वीर ग्रामीण भारत की उस कठिन वास्तविकता को सामने लाती है, जहां आज भी हजारों परिवार बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव के लोग अब प्रशासन से स्थायी जल समाधान और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।