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एएनआरएफ ने अभिसरण अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित करने के लिए 10 संस्थानों के चयन की घोषणा की

दिल्ली / सत्ता संदेश


सामाजिक चुनौतियों और सतत विकास के लिए अंतःविषयक समाधानों को बढ़ावा देने हेतु अभिसरण अनुसंधान सहयोग समितियां

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने जटिल और व्यवस्थागत चुनौतियों का समाधान करने के लिए बहु-विषयक अनुसंधान दृष्टिकोण हेतु सामाजिक विज्ञान और मानविकी प्रारूपों के भीतर वैज्ञानिक ज्ञान के गहन एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपने प्रमुख कार्यक्रमों में से एक, अभिसरण अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) कार्यक्रम के अंतर्गत दस अभिसरण अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) का चयन किया है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे अग्रणी केंद्र स्थापित करना है जो एकीकृत और अंतःविषयक अनुसंधान के माध्यम से जटिल सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने हेतु सामाजिक विज्ञान, मानविकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एक साथ लाते हैं।

विभिन्न विषयगत क्षेत्रों के अंतर्गत चयनित दस एएनआरएफ-सीओई की सूची निम्नलिखित है:

क्रम संख्यासंस्थान का नामपरियोजना का शीर्षकव्यापक विषयगत क्षेत्र
1भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गांधीनगरमानव-जलवायु अंतःक्रिया और पर्यावरण इतिहास केंद्र (सीएचआईईएच)पुरातत्व और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां
2राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान (एनआईएएस), बेंगलुरुपुरातत्व सामग्री, पुरातत्व धातु विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान और संरक्षण अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्रपुरातत्व और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ
3भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्राससंयोग- संस्कृत एआई संगीत और योग केंद्रपुरातत्व और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां
4राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) अगरतलाएआई की सहायता से पूर्वोत्तर भारतीय लोककथाओं का डिजिटल संकलन और वैश्विक प्रचार-प्रसार: मणिपुर और त्रिपुरा पर विशेष ध्यानडिजिटल मानविकी
5मानव विकास संस्थान (आईएचडी), दिल्लीपरिवर्तनकारी एआई और भारतीय श्रम बाजार: उच्च-उपयोग वाले चुनिंदा सेवा क्षेत्रों में जनरेटिव एआई के प्रभाव पर एक बहुविषयक अध्ययनडिजिटल मानविकी
6भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) धारवाड़ग्रामीण आजीविका एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-आरएलडी): ग्रामीण स्थिरता और अनुकूलता के लिए एकीकृत योजना का एक केंद्रग्रामीण विकास
7भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मूकारीगरों के डिजिटल सशक्तिकरण और आजीविका विकास पर उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-डीईएलडीए)ग्रामीण विकास
8भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुरउत्कृष्टता केंद्र: भाषा प्रदर्शन में अनुसंधान और हस्तक्षेप केंद्रस्वास्थ्य और मनोविज्ञान
9चाणक्य विश्वविद्यालयभाषा और जीवन जगत केंद्रसामाजिक मुद्दों के लिए उभरती प्रौद्योगिकियां
10पीएसजीआर कृष्णम्मल महिला महाविद्यालयअकादमिक-उद्योग साझेदारी के माध्यम से एक लचीले, टिकाऊ और स्मार्ट नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ते हुए, एमएसएमई को पारंपरिक से समकालीन प्रौद्योगिकियों में परिवर्तन की गति बढ़ाने के लिए एक तकनीकी-प्रबंधकीय प्रारूप तैयार करनाकम्प्यूटेशनल अर्थशास्त्र

इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक केंद्र के लिए एक ही संस्थान के भीतर या विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के अधीन विभिन्न शैक्षणिक, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित संगठनों या निजी संस्थानों के बीच अंतर्विषयक या अंतरविषयक सहयोग अनिवार्य है। इन केंद्रों से जुड़े सह-शोधकर्ता एक विविध नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये सभी 20 सहयोगी संस्थानों से आते हैंजिनमें राज्य विश्वविद्यालयकेंद्रीय विश्वविद्यालयभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)निजी विश्वविद्यालयकॉलेज और मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान शामिल हैं।

इस कार्यक्रम को शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों से शानदार प्रतिक्रिया मिली, जिसमें 945 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जो इसकी मजबूत प्रासंगिकता और राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है।

एएनआरएफ कन्वर्जेंस रिसर्च सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस प्रोग्राम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 से प्रेरणा लेता है, जो बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत एकीकरण का आह्वान करती है। यह विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप भी है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित, समावेशी, नवोन्मेषी और आत्मनिर्भर राष्ट्र में परिवर्तित करना है।

वैज्ञानिक ज्ञान और प्रासंगिक समझ के समायोजन के साथ, यह कार्यक्रम समग्र दृष्टिकोणों के माध्यम से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने का लक्ष्य रखता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और बिग डेटा एनालिटिक्स के इस युग में, इस प्रकार का समन्वय सामाजिक-आर्थिक प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त कर सकता है और सतत विकास लक्ष्यों को समर्थन प्रदान कर सकता है।

भारत और नॉर्वे के बीच नए द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई

दिल्ली /सत्ता संदेश


भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने नॉर्वे में स्वच्छ ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा, सतत विकास, भूविज्ञान और शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्रों में पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान एक ओर भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ हुए हैं वहीं, भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए 18 मई 2026 को ओस्लो में नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी के नेतृत्व में डीएसआईआर/सीएसआईआर की ओर से नॉर्वे के सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के क्षेत्रों में भारत-नॉर्वे संबंधों का विस्तार करना है तथा इसके साथ ही दोनों देशों में संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग सहभागिता, शैक्षणिक सहयोग तथा सतत विकास संबंधी पहलों को बढ़ावा देना है।

डीएसआईआर/सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच समझौता ज्ञापन का उद्देश्य अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और क्षमता विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते में जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य सहित वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं, सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान से जुड़ी यात्राओं, विशिष्ट कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यवस्था और समय-समय पर उनकी समीक्षा के लिए तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है।

सीएसआईआर ने नॉर्वे के प्रमुख स्वतंत्र अनुसंधान संगठन स्टिफ्टेल्सन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ) के साथ 2014 से जारी समझौता ज्ञापन के ढांचे के अंतर्गत सहयोग के लिए समझौते (2026-2029) पर भी हस्ताक्षर किए। यह समझौता जैव-आधारित प्रक्रियाओं और सामग्रियों, नवाचार केंद्रों, समुद्री ऊर्जा (जिसमें अपतटीय पवन और हाइब्रिड प्रणालियां शामिल हैं), कार्बन कैप्चर, भंडारण और उपयोग तथा अपशिष्ट को काम में लाने योग्य सामग्रियों में परिवर्तित करने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से अपशिष्ट बनने से रोकने और दीर्घकालिक व्यवस्था में परिवर्तन पर केंद्रित है।

सीएसआईआर के संस्थानों और एसआईएनटीईएफ के संस्थानों के बीच समुद्री ऊर्जा और अपतटीय पवन ऊर्जा के संबंध में एक विशिष्ट परियोजना के लिए सहयोग पर भी समझौता किया गया। इस समझौते में सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (सीएसआईआर-एसईआरसी), सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाएं (सीएसआईआर-एनएएल), सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईओ) और सीएसआईआर-चतुर्थ प्रतिमान संस्थान (सीएसआईआर-4पीआई) के साथ एसआईएनटीईएफ महासागर, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्यूनिटी शामिल हैं। इस सहयोग का उद्देश्य अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता को मजबूत करना तथा राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन और उसके अवशोषण में संतुलन बनाने से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में योगदान देना है। इस संयुक्त कार्यक्रम में तैरती हुई अपतटीय पवन प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा की समतुल्य लागत (एलसीओई) में कमी लाने, स्थिरता, पर्यावरण, सामाजिक और शासन संबंधी विषयों, मानकीकरण, पायलट प्रदर्शन, कौशल विकास तथा औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए सीएसआईआर की ओर से लगभग 341 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

डॉ. एन. कलाइसेल्वीमहानिदेशकसीएसआईआर और सचिवडीएसआईआर के साथ:

अ) प्रो. टोर ग्रांडेरेक्टरएनटीएनयूब) डॉ. एलेक्जेंड्रा बेच गोजर्वसीईओ स्टिफ्टेलसन सिंटेफ (एसआईएनटीईएफ)स) सुश्री ऐनी केजेर्स्टी फाह्लविककार्यकारी निदेशकनॉर्वे की अनुसंधान परिषदऔर द) डॉ. एंड्रियास ए फाफहुबरसीईओ एमराल्ड

सीएसआईआर, वैज्ञानिक और नवाचार संबंधी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनटीएनयू) के बीच “हरित परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी सहयोग” शीर्षक से संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह घोषणापत्र स्थिरता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, महासागर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और असैनिक तथा अवसंरचना संबंधी अभियांत्रिकी से जुड़ी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है। इस सहयोग में छात्रों और शिक्षकों की यात्राएं, संयुक्त अनुसंधान गतिविधियां, अकादमिक आदान-प्रदान, संगोष्ठियां और सहयोग संबंधी अकादमिक कार्यक्रम शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात यह हुई है कि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) ने एमराल्ड जियोमॉडलिंग के साथ भारत में बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भूविज्ञान पर आधारित समाधान प्राप्त करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग स्थापित करने के लिए पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण योजना, डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग, तकनीकी परामर्श सहायता और वैज्ञानिक कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल होगा।

ये समझौते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं और इनसे दोनों देशों के बीच सहयोग से अनुसंधान, नवाचार-आधारित सतत विकास और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए रूपरेखा” पर आधारित शोधपत्र पर जानकारी और सुझाव आमंत्रित

दिल्ली /सत्ता संदेश

एक प्रतिस्पर्धी वातावरण में तकनीकी में तेजी से परिवर्तन, जटिल कौशल मांग और संगठनात्मक नवाचार अर्थव्यवस्था में ज्ञान के बढ़ते महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इस संदर्भ में, अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का आकलन करना और इसमें हो रहे परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत उपायों की सिफारिश करना आवश्यक हो गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा विकसित करने का प्रयास कर रहा है। इस दिशा में पहले से कोई समान पहल न होने के कारण, यह प्रयास एक नई पहल है और इसमें विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में फरवरी 2025 में हुई एक बैठक की सिफारिशों के आधार पर, इस उद्देश्य के लिए एक तकनीकी सलाहकार समूह (टीएजी) का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता उस समय क्षमता विकास आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने की। इस समूह में विचार मंच, उद्योग निकायों, शिक्षाविदों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे। सितंबर 2025 में एक विचार-विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मूर्त संसाधनों का वर्गीकरण विकसित करना और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उनके योगदान को मापने के लिए संभावित मात्रात्मक संकेतकों और डेटा स्रोतों की पहचान करना था। टीएजी के सुझावों, विचार-विमर्श सत्र से प्राप्त विचारों और विशेषज्ञों के साथ हुई बाद की चर्चाओं के आधार पर, भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा पर एक आधार पत्र मंत्रालय में तैयार किया गया है। यह आधार पत्र https://mospi.gov.in/announcements पर उपलब्ध है।

इस शोधपत्र में निम्‍नलिखित चार अध्याय हैं:

अध्याय 1: ज्ञान और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था—अवधारणात्‍मक विचार

अध्याय 2: उपलब्ध पद्धतियाँ और मात्राएँ

अध्याय 3: भारत का पारंपरिक ज्ञान—आयाम एवं चुनौतियाँ, और

अध्याय 4: अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का मूल्यांकन; एक रूपरेखात्मक परिचय।

पहले अध्याय में ज्ञान के आयामों, उसके सृजन और विकास पर वैचारिक विचार-विमर्श किया गया है, साथ ही इसमें अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव से संबंधित हालिया चर्चाओं पर भी विचार किया गया है। दूसरे अध्याय में अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अकादमिक संसाधनों के मूल्यांकन के लिए उपलब्ध पद्धतियों का वर्णन किया गया है और ज्ञान के इन घटकों के मूल्यांकन के लिए कुछ मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। तीसरे अध्याय में भारतीय अर्थव्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका और विभिन्न कार्यों में इस पारंपरिक ज्ञान की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इसमें इसके संरक्षण, प्रलेखन और वर्गीकरण से संबंधित साहित्य और पहलों की समीक्षा की गई है और संबंधित मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। अध्याय 4 में अर्थव्यवस्था पर ज्ञान के प्रभाव को समझने के लिए साक्ष्यों को एक व्यापक ढांचे में समेकित करने का प्रारंभिक प्रयास किया गया है और इसके आवश्यक घटकों को परिभाषित किया गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सचिव श्री रतन पी. वाटल की अध्यक्षता में ज्ञान प्रणाली पर एक समिति का गठन किया है। इस समिति को अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक व्यावहारिक नीति पत्र तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। उपर्युक्त आधार पत्र ही व्यावहारिक नीति पत्र का आधार बनेगा।

सभी हितधारकों और आम जनता से परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत आधार पत्र पर टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। अपनी जानकारी 15 जून 2026 तक   maneesh.jindal@mospi.gov.in और neeraj.kumar007[at]nic[dot]in ईमेल पतों पर इस मंत्रालय को भेजी जा सकती हैं। इससे इस रूपरेखा को शीघ्र अंतिम रूप देने में सहायता मिलेगी।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 समावेशी शासन के लिए डेटा-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करता है

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

5,000 से अधिक टीमों की तरफ ससमाधान प्रस्तुत करने के साथ, यह डीपीआई इकोसिस्टम में सबसे बड़े डेटा नवाचार चुनौतियों में से एक बन गया

नई दिल्ली, 8 मई 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम में डिजिटल पहचान के क्षेत्र में छात्रों द्वारा किए गए उन बेहतरीन नवाचारों का उत्सव मनाया गया, जिनका उद्देश्य शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाना है।

डिजिटल पहचान डेटा के नवीन और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इस हैकाथॉन ने छात्रों और युवा पेशेवरों को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहां वे ऐसे बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और डेटा-आधारित समाधान विकसित कर सकें, जिनका लक्ष्य समावेशिता, कार्यकुशलता और शासन के परिणामों को बेहतर बनाना है।

लगभग 15,000 टीमों के पंजीकरण और 5,000 से ज़्यादा टीमों की तरफ से समाधान जमा करने के साथ, इस पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस तरह, यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) इकोसिस्टम में डेटा नवाचार के सबसे बड़े चैलेंज में से एक बन गया।

एक सख्त, कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद-जिसमें 5,000 से ज़्यादा प्रविष्टियों की जांच, 30 परियोजनाओं की शॉर्टलिस्टिंग और 15 फाइनलिस्ट टीमों का विस्तृत मूल्यांकन शामिल था-टॉप पांच टीमों को अंतिम समारोह में अपने समाधान पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, कोलकाता और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता की विजेता टीम ने यूआईडीएआई द्वारा साझा किए गए, इकट्ठा किए गए आधार नामांकन और अपडेट डेटासेट का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।

उनके काम से अलग-अलग क्षेत्रों, राज्यों और जनसांख्यिकीय समूहों में नामांकन के रुझानों और बायोमेट्रिक अपडेट के तरीकों के बारे में अहम जानकारी मिली, साथ ही सेवा देने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मिले।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्लेषण की बारीकियों को जनहित के मजबूत नजरिए के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नए प्रयोगों में नीतियों और कामकाज में सुधार को सीधे तौर पर मदद करने की क्षमता है; साथ ही उन्होंने शासन में सबको शामिल करने और कुशलता लाने के लिए डेटा के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के महत्व पर भी जोर दिया।

यूआईडीएआई के सीईओ ने इस पहल के लिए यूआईडीएआई के भविष्य के विजन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन को एक सालाना प्लेटफॉर्म के तौर पर संस्थागत रूप दिया जा सकता है, ताकि डिजिटल पहचान और सार्वजनिक डेटा के इस्तेमाल में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

हैकाथॉन के आने वाले संस्करणों में भी उम्मीद है कि इसमें सिर्फ छात्रों तक ही भागीदारी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शिक्षा जगत, शोधकर्ता, स्टार्ट-अप और अन्य गैर-शैक्षणिक योगदानकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे एक ज्यादा विविध और अलग-अलग विषयों वाला नवाचार इकोसिस्टम तैयार होगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026, यूआईडीएआई का मुक्त नवाचार, युवाओं को जोड़ने और प्रमाणों पर आधारित नीति-निर्माण के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है। प्रतिभागियों को असल दुनिया के डेटासेट पर काम करने का मौका देकर, इस पहल ने न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया, बल्कि ऐसे समाधानों को भी प्रोत्साहित किया जिनका सीधा असर जनता पर पड़े।

यूआईडीएआई ने हैकाथॉन की सफलता में योगदान देने के लिए सभी प्रतिभागियों, जूरी सदस्यों और साझेदारों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की।

भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।

विज्ञान को प्रयोगशाला से बाजार तक लाकर भारत के आर्थिक पुनर्जागरण को मिलेगी गति : जितेंद्र सिंह

दिल्ली/सत्ता संदेश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किए गए प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है, जिसका योगदान अनुसंधान से लेकर उद्योग, स्टार्टअप और राष्ट्रीय विकास तक विस्तारित हो रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान को अब “प्रयोगशालाओं से बाजारों की ओर और विचारों से प्रभाव की ओर” बढ़ना चाहिए, जो एक नई नीतिगत दिशा को दर्शाता है जो अनुसंधान को आर्थिक परिणामों के साथ एकीकृत करती है।

अंतरिक्ष क्षेत्र के तीव्र विस्तार का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निजी कंपनियों के लिए इसे खोलने के कुछ ही वर्षों के भीतर भारत में स्टार्टअप-आधारित नवाचार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे उपग्रह प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नई क्षमताएं उभर रही हैं। ये आर्थिक विकास और राष्ट्रीय तैयारियों दोनों में योगदान दे रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उद्योग जगत और निजी क्षेत्र से अलग-थलग रहकर कोई भी देश विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति नहीं कर सकता, और उन्होंने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी खुद की प्रौद्योगिकियों का तेजी से विकास कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर सुधारों, मजबूत संस्थागत ढांचों और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ, भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम आने वाले वर्षों में देश के आर्थिक विकास और वैश्विक नेतृत्व को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

तकनीक आधारित युग में भविष्य के लिए अनुसंधान और नवाचार जरुरी : राजनाथ सिंह

दिल्ली/सत्ता संदेश

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीव्र तकनीकी क्रांति के वर्तमान युग में भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और अप्रत्याशित नवाचार की रणनीति अपनाने के महत्व पर बल दिया। रक्षामंत्री ने 4 मई को प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह विचार व्‍यक्‍त किए।

उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में, युद्ध का स्वरूप महज तीन-चार सालों में टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन और सेंसर जैसे क्रांतिकारी उपकरणों में परिवर्तित हो गया। इसके अलावा, दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी वस्‍तुएं भी घातक हथियार बनती जा रही हैं।

रक्षामंत्री ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को आवंटित किया गया है और अब तक इन संस्थाओं ने बजट का 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की एक नई नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत विकास-सह-उत्पादन साझेदारों, विकास साझेदारों और उत्पादन एजेंसियों के लिए पहले लगने वाला 20 प्रतिशत शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, डीआरडीओ ने अब तक विभिन्न उद्योगों को 2,200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं।

रक्षा मंत्री ने रक्षा त्रिवेणी संगम- जहां प्रौद्योगिकीउद्योग और सैन्य शक्ति का संगम होता है विषय पर आधारित नॉर्थ टेक संगोष्ठी को नवाचार को बढ़ावा देने और भारत की तकनीकी एवं रक्षा तैयारियों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी हितधारकों को अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने में सक्षम बनाने के लिए ठोस सुझावों की आशा व्‍यक्‍त की। उन्होंने हितधारकों को विशेषज्ञता साझा करने और उभरते एवं अनछुए क्षेत्रों में सामूहिक रूप से क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए एक ज्ञान गलियारे के निर्माण का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारा सामूहिक प्रयास है कि हम आने वाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करें।

संगोष्ठी के भाग के रूप में, एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों, निजी रक्षा प्रौद्योगिकी फर्मों, स्टार्टअप्स और वर्दीधारी नवोन्मेषकों सहित विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत स्वदेशी समाधानों को प्रदर्शित किया गया। 284 कंपनियों ने अपने नवीनतम नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए।

NCC कैडेट्स ने मनाया विश्व रचनात्मकता दिवस, AI के जिम्मेदार उपयोग का दिया संदेश

लुधियाना/ सत्ता संदेश

विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन एनसीसी, लुधियाना के अंतर्गत एनसीसी कैडेट्स द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया गया। जीसीजी, केसीडब्ल्यू, एसडीपी और जीएचजी कॉलेज के कैडेट्स ने पोस्टर मेकिंग, भाषण एवं स्किट जैसी गतिविधियों में भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता फैलायी।


कार्यक्रम का विषय “Let AI be your tools, not your masters” रहा, जिसमें तकनीक के सही उपयोग पर जोर दिया गया। कैडेट्स ने रचनात्मक पोस्टरों के माध्यम से एआई के लाभ एवं हानियों, जैसे दुरुपयोग और अत्यधिक निर्भरता, को प्रस्तुत किया। भाषणों के माध्यम से आधुनिक तकनीक के संतुलित एवं नैतिक उपयोग पर बल दिया गया। एक लघु नाटक के जरिए डिजिटल युग में सतर्क रहने का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम ने कैडेट्स में नवाचार, रचनात्मकता एवं जागरूकता को बढ़ावा दिया।


कमांडिंग ऑफिसर, 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन एनसीसी, लुधियाना, कर्नल आर.एस. चौहान ने पीआई स्टाफ एवं 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन एनसीसी, लुधियाना यूनिट के साथ कैडेट्स के प्रयासों की सराहना की तथा उनके ज्ञान एवं सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रेरित किया।

सी-डॉट ने “साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म के सहयोगात्मक विकास” के लिए जंप्स ऑटोमेशन के साथ साझेदारी की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य साइबर जागरूकता पैदा करना और संगठनों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना है

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने सी-डॉट कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम (सीसीआरपी) के तहत जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और उद्यमों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवोन्‍मेषी गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म विकसित करना है।

एक समारोह के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदक, बोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना और पारंपरिक प्रशिक्षण को एक आकर्षक, संवादमूलक और प्रभावी शिक्षण अनुभव में बदलना है। इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर से बचाव और समय सीमा के भीतर संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित वास्तविक सिमुलेशन परिदृश्य शामिल होंगे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगठन साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

इस सॉल्‍यूशन में एक सशक्त पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग प्रणाली के साथ-साथ एक एआई-संचालित व्यवहार विश्लेषण इंजन शामिल होगा जो उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करेगा, चुनौती की जटिलता को गतिशील रूप से समायोजित करेगा और उभरते साइबर खतरों के साथ सामग्री को अपडेट रखेगा। इसे जंप्स ऑटोमेशन की एआई और स्वचालन विशेषज्ञता एवं सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार तथा सुरक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं के संयोजन से बनाया जाएगा।

यह भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सामाजिक प्रभाव डालने और साइबर सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित सी-डॉट सुविधाओं में संपूर्ण सत्यापन के साथ एक संरचित विकास, परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करेगी। इस प्लेटफॉर्म को भविष्य में उद्यमों के साथ एकीकृत करने के प्रावधानों के साथ एक वाणिज्यिक-स्तरीय एसएएएस सॉल्‍यूशन के रूप में तैनात किए जाने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने एक प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता मंच विकसित करने में इस सहयोग के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मनिर्भर भारत के विजन के प्रति सी-डॉट की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने, घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सक्षम बनाना है, जिससे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता और लचीलेपन की संस्कृति को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर श्री रोहन चंदक ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को संवादमूलक और प्रभावशाली बनाने में प्लेटफॉर्म की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक परिवर्तन लाना और मानव-संबंधित साइबर जोखिमों को कम करना है।

सी-डॉट के बारे में:

टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और तैनाती से जुड़ा है। सी-डॉट ने उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी के माध्यम से दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सी-डॉट सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम (सीसीआरपी) आरंभ किया है। इस सहयोगी अनुसंधान एवं विकास नीति ढांचे के तहत, सी-डॉट अपने नेतृत्व वाली परियोजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप, संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आमंत्रित करता है। फंडों के अतिरिक्‍त, सी-डॉट स्वदेशी अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सूत्रधार, एकीकरणकर्ता और संसाधन प्रदाता के रूप में कार्य करता है।

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के बारे में:

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी एक प्रौद्योगिकी सॉल्‍यूशन कंपनी है जिसकी एआई, स्वचालन और अनुकूलित उद्यम एआई सॉफ्टवेयर विकास में विशेषज्ञता है। कंपनी जटिल व्यावसायिक और सामाजिक चुनौतियों को हल करने के लिए नवोनमेषी, डेटा-संचालित समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

NIFTEM तंजावुर में दो दिवसीय ‘फूड बिजनेस स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम 2.0’ आयोजन

दिल्ली/सत्ता संदेश

खाद्य व्यवसाय प्रबंधन विभाग ने तंजावुर स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम) में 16 और 17 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय खाद्य व्यवसाय स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम 2.0 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यम संबंधी क्षमताओं को मजबूत करना और इच्छुक खाद्य उद्यमियों, छात्रों और प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप संस्थापकों को संरचित मार्गदर्शन प्रदान करना था।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों के ज्ञान को बढ़ाना और खाद्य व्यवसाय उद्यमिता में उनकी क्षमता का विकास करना था। इसका लक्ष्य आज के प्रतिस्पर्धी और नवाचार-प्रधान बाजार परिवेश में खाद्य उद्यम शुरू करने, प्रबंधित करने और उसका विस्तार करने से जुड़ी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। इस पहल का उद्देश्य देश में खाद्य स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता प्रणालियों, नियामक आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

देश भर से कुल 82 प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें महत्वाकांक्षी उद्यमी, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने में रुचि रखने वाले व्यक्ति और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम ने ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक संवादात्मक मंच प्रदान किया, जिससे प्रतिभागियों को खाद्य व्यवसाय इकोसिस्टम की बदलती गतिशीलता को समझने और उभरते अवसरों का पता लगाने में मदद मिली।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित सत्र में खाद्य व्यवसाय, अनुसंधान और उद्योग प्रथाओं में अनुभव रखने वाले विषय विशेषज्ञों और पेशेवरों ने व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में खाद्य व्यवसाय विकास के लिए आवश्यक विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल थी, जिसमें पैकेजिंग तकनीक, कॉर्पोरेट कानून, शासन और कराधान, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियां, मूल्य निर्धारण तकनीक तथा निर्यात के अवसर शामिल थे। प्रतिभागियों को उद्यमियों के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता प्रणालियों, इनक्यूबेशन सुविधाओं और प्रौद्योगिकियों से भी अवगत कराया गया।

सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, इन्वेंट्री नियंत्रण, खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और मशीनरी का चयन जैसे परिचालन और रणनीतिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, ग्राहक जुड़ाव, व्यावसायिक विचार सत्यापन और नए उत्पाद विकास पर भी जोर दिया गया। खाद्य सुरक्षा विनियम, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली, सार्वजनिक नीतियां और खाद्य स्टार्टअप को समर्थन देने वाली अनुदान योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।

इस कार्यक्रम ने सफल खाद्य व्यवसाय उद्यमों के विकास और उन्हें बनाए रखने के लिए आवश्यक तकनीकी, प्रबंधकीय और नियामक पहलुओं पर व्यापक जानकारी प्रदान की, जिससे प्रतिभागियों को तेजी से बढ़ते खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उद्यमशीलता के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आवश्यक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला।