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केंद्र का बड़ा एक्शन: 23 और व्यक्तियों को घोषित किया गया ‘आतंकवादी’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है. यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी आतंकी गतिविधि या उसके समर्थकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

मंत्रालय ने बताया कि ये व्यक्ति भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सहायता करने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने तथा आतंकवादियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं.

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और अन्य आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, ये कदम आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.

गृहमंत्रालय ने जिन 23 आतंकियों प्रतिबंधित किया है उनका विस्तृत डिटेल :

  • मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ्ती मसूद इलियास उर्फ मसूद इलियास उर्फ अबु मोहम्मद उर्फ एम. मसूद इलियास की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मौलाना मसूद अज़हर का विश्वासपात्र और कश्मीर में घुसपैठ का मुख्य समन्वयक है. वह सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने में सक्रिय है. उसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान में PDP कार्यालय के पास नाका पार्टी पर हुए हमले को अंजाम दिया था.
  • मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मनन उर्फ सज्जाद उर्फ हमज़ा उर्फ वाहिद ख़ान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है जो सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ कराता है. वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में शामिल रहा है. इसके अलावा, वह अयोध्या के आर.जे.बी. परिसर, नागपुर के आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों की टोह लेने में संलिप्त था.
  • मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान उर्फ अबू साद उर्फ साद जिमी की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह PoK में JeM का अमीर और सैन्य विंग का प्रमुख है. वह जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. वह मुज़फ्फराबाद में आतंकियों को जेहादी और सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए कैंप चलाता है.
  • हाफ़िज़ अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM) से संबंध रखता है. उसने नगरोटा सेना शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराई थी. उसने 1995/96 के दौरान अफगान युद्ध में भाग लिया था और वह आईएसआई (ISI) की मदद से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता है. वह JeM की शासी परिषद (शूरा) का सदस्य है.
  • अब्दुल्ला जिहादी उर्फ शाहनवाज़ उर्फ अल हिजामा की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मुफ्ती असगर खान का सह-षड्यंत्रकारी है और उत्तरी कश्मीर क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की सुविधा प्रदान करता है. उसने भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष फैलाने के प्रयास किए हैं. वह कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में स्थित कई लॉन्चिंग कैंपों का प्रबंधन संभालता था.
  • फ़िरदौस अहमद भट की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर है जो वर्ष 2018 में वैध दस्तावेजों के सहारे वाघा सीमा से पाकिस्तान चला गया था. वह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार विदेशी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित मार्ग का प्रबंधन करता है. इसके साथ ही, वह ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियार मुहैया कराने और दक्षिण कश्मीर के युवाओं को भड़काकर आतंक में भर्ती करने का काम करता है.
  • गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार उर्फ फरीद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखता है. उसने वर्ष 2001 से 2005 तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की थी. इसके बाद वह सितंबर 2008 में बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ. दिसंबर 2008 में उसे जम्मू से गिरफ्तार किया गया था और बाद में जुलाई 2019 में उसे पाकिस्तान वापस निर्वासित कर दिया गया.
  • हारून रशीद गनई उर्फ शुनू की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह मार्च 2018 में वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गया और वहां लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. वह कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकी रैंकों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति करता है.
  • बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – मुज़फ्फराबाद, PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंध रखता है. वह सीमा पार (पाकिस्तान/PoK) से बैठकर स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने की साजिश रचता है. इसके अलावा, वह कश्मीर घाटी में हथियारों, गोला-बारूद और रसद की अवैध आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल है.
  • आबिद कयूम लोन की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह फरवरी 2020 में अटारी चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान गया और वापस नहीं लौटा. वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने और लश्कर के लिए धन जुटाने का काम करता है. वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी करता है, जिससे प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है.
  • नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ अबू मनाज़िल की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – इस्लामाबाद, पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पार कर PoK चला गया था. उसने डोडा और किश्तवाड़ क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय युवाओं को भर्ती किया. वह ड्रोन का उपयोग करके सांबा और आर.एस. पुरा सेक्टर से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की खेप भेजने का मुख्य ऑपरेटर रहा है.
  • अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रौफ उर्फ हाफिज अब्दुर रौफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) / फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से संबंध रखता है. वह 1999 से लश्कर का एक वरिष्ठ नेता है और आतंकी हाफिज सईद की सीधी कमान के अधीन काम करता है. वह ‘फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’ (FIF) और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे धर्मार्थ संगठनों की आड़ में लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन और जनसमर्थन जुटाने का काम करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया है.
  • अशफाक अहमद उर्फ इशफाक अहमद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2000 में जैश में शामिल हुआ और बहावलपुर में ‘शुआबा हदीस’ और अल-रहमत ट्रस्ट (जैश का चैरिटी विंग) का प्रभारी है. उसे पाक-अधिकृत कश्मीर में जेहादी प्रशिक्षण मिला था. वह जनवरी 2016 के पठानकोट वायुसेना स्टेशन हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के ग्राहकों में से एक पाया गया था.
  • हाफिज खालिद वालीद उर्फ हाफिज खालिद नाइक उर्फ खालिद वालिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद है और वर्ष 2003 से लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है. वह जून 2016 में हुए पम्पोर हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ जवान शहीद हुए थे. अगस्त 2012 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था.
  • मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की उर्फ मौलाना इमदाद उर्फ इमदाद भाई उर्फ मौलाना इमददुल्लाह की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह जैश के कैदियों के विंग (शोबा-ए-असीरन) का अमीर और संगठन के कानूनी मामलों का प्रमुख है. वह मौलाना मसूद अज़हर और उसके डिप्टी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असघर का बेहद करीबी सहयोगी है. वह जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने में शामिल था.
  • मौलाना सैफुल्लाह खालिद उर्फ वलियुल उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ वाजिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से संबंध रखता है. वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग का महासचिव है और पहले मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) का अध्यक्ष रह चुका है. उसने लश्कर और जमात-उद-दावा के कई विंग्स (जैसे प्रचार विभाग, नियंत्रण और सुधार विंग) के प्रमुख के रूप में कार्य किया है. अप्रैल 2018 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी (SDGT) सूची में शामिल किया था.
  • मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ समामा इल्यास उर्फ वारिस अली की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्तमान में इस्लामाबाद (चट्टा बख्तावर) से लश्कर के ऑपरेशन कमांडर के रूप में काम कर रहा है. वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर घाटी में सक्रिय अन्य लश्कर कैडरों के साथ वित्तीय और साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) सहायता का समन्वय करता है. इसके खिलाफ श्रीनगर के CI कश्मीर पुलिस स्टेशन में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के अधीन मामला दर्ज है.
  • मौलाना यूसुफ ताईबी उर्फ मोहम्मद यूसुफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. यह LeT/JuD का एक केंद्रीय नेता है जो वर्तमान में संगठन के नियंत्रण और सुधार (दावत-ओ-इस्लाह) विंग से जुड़ा हुआ है. वह पूर्व में कराची स्थित LeT/JuD से संबद्ध संस्था ‘जामिया अल-दीरासत अल-इस्लामिया ट्रस्ट’ (JADIAT) का प्रभारी रह चुका है. वर्तमान में वह लाहौर के ‘अल-क़दसिया इस्लामिक सेंटर’ से जुड़ा है और पंजाब के सरगोधा मरकज़ में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश (खुतबा) देने का काम करता है.
  • ओवैस फारूज़ उर्फ ओवैस अहमद मीर उर्फ ओवैस फारूज़ मीर की राष्ट्रीयता भारत है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह अप्रैल 2018 में वैध भारतीय पासपोर्ट पर वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया और LeT के आतंकवादी रैंक में शामिल हो. जनवरी 2023 में उसके भाई फरज़ान फिरोज़ को श्रीनगर पुलिस ने 450 ग्राम हेरोइन (कीमत लगभग 9.95 लाख रुपये) और LeT के लेटर पैड के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ NIA कोर्ट, पुलवामा ने धारा 82 CrPC के अधीन उद्घोषणा आदेश जारी किया है.
  • क़ारी याक़ूब शेख उर्फ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख उर्फ याक़ूब शेख उर्फ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब उर्फ मोहम्मद याकूब की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (PMML) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह JuD का एक केंद्रीय नेता और उसकी केंद्रीय ‘दवाती टीम’ का सदस्य है. उसने 2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वह सऊदी अरब में लश्कर और JuD के लिए फंड इकट्ठा करने के मिशनों में प्रमुखता से शामिल रहा है. अगस्त 2012 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था.
  • राणा इफ्तिखार उर्फ राणा वलीद आतिफ उर्फ राणा इफ्तिखार हैदर उर्फ राणा इफ्तिखार अहमद उर्फ हैदर खान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह LeT प्रमुख हाफिज़ सईद का अत्यंत करीबी और उसके कश्मीर ऑपरेशन्स के वित्त (Finance) का मुख्य प्रबंधक है. वह मारे गए और भारतीय जेलों में बंद आतंकियों के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने वाले विंग ‘शोबा-ए-असीरन’ का प्रभारी है. वर्ष 1993 में जम्मू-कश्मीर के मेंढर सेक्टर में एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था और यह 2004 तक भारतीय जेल में बंद रहा.
  • वसीम नूर जाट उर्फ क़ारी वसीम की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. यह जैश का एक लॉन्चिंग कमांडर है जो कोटली व्यवस्था संभालता है. वह वर्ष 2021-22 के दौरान ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने की गतिविधियों में शामिल रहा है. उसे पहले अक्टूबर 2008 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वह 2012 से 2015 तक कोट भलवाल सेंट्रल जेल, जम्मू में बंद था, जहाँ से रिहा होने के बाद उसे पाकिस्तान निर्वासित कर दिया गया था.
  • मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ मुहांदीस उर्फ ज़ाकिर की राष्ट्रीयता पाकिस्तान (मूल रूप से भारतीय, वर्तमान में रावलपिंडी में सक्रिय) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / अल-कायदा / ISIS से संबंध रखता है. वह वर्ष 2012 के बेंगलुरु LeT साजिश मामले और 2013 के नांदेड़ LeT मामले का मुख्य मास्टरमाइंड और हैंडलर है, जिसमें दक्षिणपंथी राजनेताओं और पत्रकारों की लक्षित हत्याओं (Target Killings) की साजिश रची गई थी. वह वर्ष 2013 में आतंकी फरहतुल्लाह गोरी की मदद से पाकिस्तान भाग गया. जांच के अनुसार, वह रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले (2024), मंगलुरु कुकर विस्फोट और अल-हिंद ISIS मॉड्यूल मामले में एक ऑनलाइन हैंडलर के रूप में शामिल रहा है. वह सोशल मीडिया और यूट्यूब /टेलीग्राम चैनलों (जैसे ‘सवत अल हक’) पर राष्ट्र-विरोधी और जिहादी वीडियो के जरिए युवाओं को भर्ती करने का काम करता है.
घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव बड़ी चुनौती, जरूरत पड़ी तो और कड़े कानून सुझाए जाएंगे: न्यायमूर्ति नावलेकर

इंदौर / सत्ता संदेश

Madhya Pradesh के इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश Prakash Prabhakar Naolekar ने कहा कि अवैध घुसपैठ और उसके कारण होने वाला जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश के लिए एक “बहुत बड़ी चुनौती” बन चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं पाए गए, तो समिति और अधिक कड़े कानूनों की सिफारिश कर सकती है।

न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था पर अवैध घुसपैठ का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति और सामाजिक स्थिरता से जुड़े विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समिति विभिन्न राज्यों और संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटा रही है और इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव तेजी से हो रहे हैं तथा उसके पीछे क्या कारण हैं। समिति यह भी देख रही है कि मौजूदा कानून और प्रशासनिक व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए कितने प्रभावी हैं।

नावलेकर ने स्पष्ट किया कि यदि जांच और अध्ययन के दौरान यह महसूस हुआ कि मौजूदा कानूनी ढांचा पर्याप्त नहीं है, तो समिति केंद्र सरकार को “और कड़े कानून” बनाने का सुझाव दे सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सिफारिश का उद्देश्य संवैधानिक प्रावधानों और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होगा।

हाल के वर्षों में अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा देश की राजनीति और सुरक्षा बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। कई राज्यों में इस संबंध में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। केंद्र सरकार पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर अपनी चिंता जाहिर करती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है that जनसांख्यिकीय परिवर्तन का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। इसलिए किसी भी नीति या कानूनी कदम के लिए संतुलित और तथ्य आधारित दृष्टिकोण जरूरी होगा।

फिलहाल समिति विभिन्न पक्षों से राय और आंकड़े एकत्र कर रही है। आने वाले समय में इसकी सिफारिशें राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा- सीमा पार आतंकवाद की कीमत चुकानी होगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

India ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर “परिणाम” भुगतने पड़ते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसे पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद को विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि जब निर्दोष नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दोहराता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है तथा वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

BSF के जवानों का सम्मान, राष्ट्र के प्रति अडिग निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है

मोदी सरकार अगले एक साल में ड्रोन, राडार, आधुनिक कैमरा और तकनीकों से लैस ‘Smart Border Project’ लाकर अभेद्य बॉर्डर ग्रिड बनाएगी

त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए संकल्पित सरकारें हैं, BSF इनके साथ मिलकर काम करें

गृह मंत्री ने त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में BSF को जिला प्रशासनों, पुलिस थानों, पंचायत और पटवारियों के साथ मिलकर घुसपैठ रोकने के लिए काम करने के निर्देश दिए

बॉर्डर सिक्योरिटी आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है

मोदी सरकार का इंटरनल सिक्योरिटी का विजन – समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकना है, ‘नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ समाप्त होगी’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा साइबर थ्रेट्स, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन वॉरफेयर से निपटने के लिए ‘नई बॉर्डर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी’ लायेंगे

मोदी सरकार बॉर्डर पर ‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड’ खड़ी करने का रोडमैप तैयार कर रही है

वह जमाना चला गया, जब आतंकी हमले और नक्सलवादी बेखौफ नरसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं, यह नई डिफेंस डॉक्ट्रिन है, मोदी डॉक्ट्रिन है

मोदी जी ने High Powered Demography Mission की घोषणा की, जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा

हम भारत में Unnatural Demographic Change नहीं होने देंगे, एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे

दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार सभी CAPF जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लेकर आएगी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।  

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और  बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर लागू होगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’ तकनीक, अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि देश में अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाया जाएगा। इसमें हाई-टेक कैमरे, सेंसर, ड्रोन, रडार और रियल टाइम निगरानी प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे घुसपैठ, तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।

गृह मंत्री ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पारंपरिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित आधुनिक प्रणाली में बदला जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना से सीमा सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमता बढ़ने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

घुसपैठ रोकने के लिए भारत का बड़ा कदम, पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर बनेगी ‘स्मार्ट बॉर्डर’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि अवैध घुसपैठ और सीमा पार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भारत जल्द ही पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करेगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें हाई-टेक निगरानी प्रणाली, सेंसर, ड्रोन, कैमरे और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाना तथा घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना है।

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और आधुनिक तकनीक के जरिए सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

सरकार का मानना है कि नई तकनीक आधारित यह व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ पर राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की आने वाली फिल्म ‘धुरंधर 2’ कानूनी विवादों में घिर गई है। एक सैन्यकर्मी ने दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर फिल्म के कुछ दृश्यों पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ता (सैन्यकर्मी) का आरोप है कि फिल्म ‘धुरंधर 2’ में कई ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं जो सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाए जाने वाले गोपनीय ‘ऑपरेशनल’ तरीकों को उजागर करते हैं। याचिका में कहा गया है कि भले ही फिल्म निर्माताओं ने इसे ‘फिक्शन’ (काल्पनिक) बताया हो, लेकिन इस तरह के दृश्यों का सार्वजनिक होना देश की सुरक्षा के हित में नहीं है।

कोर्ट का रुख और निर्देश: इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि याचिका में उठाए गए मुद्दे ‘विचारणीय’ हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होतीं और उनका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए सेंसरशिप और दिशा-निर्देशों की आवश्यकता होती है।

हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को फिल्म के विवादित दृश्यों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सक्षम अधिकारी इस याचिका को एक प्रतिवेदन (representation) के रूप में स्वीकार करें और पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करें। इसी के साथ अदालत ने इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है।

‘भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा’: पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पीएम मोदी का कड़ा संदेश

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी (22 अप्रैल) पर जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। इस मौके पर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है।

आतंकियों के मंसूबे कभी नहीं होंगे कामयाब: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को राष्ट्र कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने लिखा, “एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा और आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे”। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।

भारतीय सेना का जवाब: ‘न्याय होकर रहेगा’ इस अवसर पर भारतीय सेना ने भी आतंकवादियों और उनके आकाओं को चेतावनी दी है। सेना ने स्पष्ट किया कि भारत के खिलाफ किसी भी घिनौनी हरकत का जवाब मिलना तय है और न्याय हमेशा मिलकर रहेगा। सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ का भी जिक्र किया, जिसके तहत पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों को ढेर कर दिया गया था।

पहलगाम हमले का काला दिन : गौरतलब है कि पिछले साल (2025) जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर यह कायरतापूर्ण हमला किया गया था। इस घटना में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर सीमा पार आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।

ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पर संगोष्ठी का आयोजन

मोहाली, 17 अप्रैल 2026: 17 अप्रैल को मुख्यालय विशेष महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल की पश्चिमी कमान चंडीगढ़ ने लखनौर (मोहाली) स्थित सिंदूर सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का केंद्र बिंदु ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा उनका सीमा प्रबंधन व राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव था। चर्चा में वर्तमान चेतावनियों, तस्करी और इनसे लड़ने हेतु सुरक्षा संस्थानों के मध्य दृढ समन्वय पर चर्चा की गयी।

इसमें सीमा सुरक्षा बल, बल मुख्यालय, नई दिल्ली, फील्ड फॉरमेशन, भारतीय सेना पश्चिमी कमान, भारतीय वायु सेना चंडीगढ़, पंजाब पुलिस, आई आई टी रोपड़, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, IISER मोहाली, नैनो साइंस सेंटर मोहाली, C-DAC मोहाली, NIELIT रोपड़ और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ सहित अन्य प्रमुख और विशिष्ठ संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।

संगोष्ठी में ड्रोन से होने वाली तस्करी, निगरानी और सीमा पार गतिविधियों से बढ़ते खतरों पर चर्चा की गयी। मुख्यतः, उन्नत ड्रोन पहचान और ड्रोन-रोधी प्रौधागिकयों की तैनाती, फोरेंसिक विश्लेषण क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने उभरते तकनीकी खतरों का मुकाबला करने के लिए एक सक्रिय और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और नवाचार, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को परिचालन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय सुरक्षा व ड्रोन खतरे के बदले परिदृश्य का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के साथ हुआ।

नई दिल्ली में सेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्न हुआ

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

द्विवार्षिक सेना कमांडरों का सम्मेलन (एसीसी) 16 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ। यह सम्मेलन 13 अप्रैल से शुरु हुआ था। सेना प्रमुख (सीओएएस) की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। कैबिनेट सचिव, रक्षा प्रमुख, रक्षा सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसबीए) अध्यक्ष के अलावा नौसेना प्रमुख सहित सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया। ‘भविष्य के लिए तैयार बल’ के रूप में विकसित होने की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय सेना ने वर्ष 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता” का वर्ष घोषित किया है।

सम्मेलन में आधुनिकीकरण, युद्ध अभियानों में प्रौद्योगिकी का समावेश, सैद्धांतिक और प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ परिचालन तत्परता बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक और वैश्विक स्तर पर मौजूदा परिचालन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, वरिष्ठ सेना नेतृत्व ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और प्रतिमानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) के उपयोग सहित परिचालन क्षमता संबंधी आवश्यकताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया।

विशिष्ट वक्ताओं ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरते वैश्विक, क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला। वैश्विक संघर्षों से प्राप्त सबकों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, वक्ताओं ने देश की रणनीतिक और सुरक्षा हितों की गारंटीकृत सुरक्षा के लिए कठोर शक्ति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतर-मंत्रालयी समन्वय, नागरिक और सैन्य संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के समन्वित राष्ट्रीय समाधान के लिए राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण पर जोर दिया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला संकट को देखते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और दीर्घकालिक रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।