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PGIMER Chandigarh ने पूरे किए 63 साल, स्थापना दिवस पर AI आधारित हेल्थकेयर के भविष्य का विजन पेश

PGIMER Chandigarh के 63वें स्थापना दिवस पर BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा। PGI में अब 3000 बेड की क्षमता और मरीजों की वेटिंग लिस्ट में लगातार कमी का दावा किया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में देश के प्रमुख संस्थानों में शामिल पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने उत्कृष्टता के 63 वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

पीजीआईएमईआर के NINE ऑडिटोरियम में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में डॉ. अलका राव, निदेशक IMTECH चंडीगढ़, पीजीआईएमईआर के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन, डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा, चिकित्सा अधीक्षक-सह-प्रमुख अस्पताल प्रशासन विभाग प्रो. अशोक कुमार, वित्तीय सलाहकार रविंदर सिंह सहित संस्थान के पूर्व एवं वर्तमान डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने मुख्य संबोधन में पीजीआईएमईआर को एक सच्ची राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए कहा कि संस्थान का योगदान केवल चंडीगढ़ या उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं में एआई को डॉक्टरों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी विशेषज्ञता और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाले एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार, एआई का सबसे प्रभावी उपयोग उन परिस्थितियों में हो रहा है जहां यह डॉक्टरों को हटाने के बजाय उन्हें बेहतर निर्णय लेने, अधिक जानकारी का विश्लेषण करने और मरीजों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में मदद कर रहा है।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि एआई अब केवल तकनीक का आकर्षण या फैशनेबल विषय नहीं रह गया है। यह स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों को इससे दूरी बनाने के बजाय जिम्मेदारी और समझदारी के साथ इसे अपनाना होगा।

उन्होंने बताया कि एआई क्लिनिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक साहित्य सहित बड़ी मात्रा में चिकित्सा संबंधी जानकारी का विश्लेषण करने में डॉक्टरों की मदद कर सकता है। इससे डॉक्टरों को आवश्यक जानकारी तेजी से उपलब्ध हो सकती है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई विशेषज्ञता का स्थान नहीं लेगा, बल्कि डॉक्टरों के पास उपलब्ध ज्ञान और सूचना की क्षमता को बढ़ाएगा।

चिकित्सा अनुसंधान में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से शोधकर्ता अब ऐसे प्रश्नों की जांच कर सकते हैं, जिन पर पहले काम करना बहुत महंगा या अत्यधिक समय लेने वाला होता था। उन्होंने कहा कि एआई के कारण स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं।

प्रो. चतुर्वेदी ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप हेल्थकेयर एआई विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पश्चिमी देशों के डेटा पर प्रशिक्षित एआई सिस्टम भारतीय मरीजों की रोग-प्रवृत्तियों, आबादी और स्वास्थ्य संबंधी वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए भारत को केवल एआई तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय भारतीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप अपने समाधान विकसित करने होंगे।

उन्होंने दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में एआई की बड़ी संभावनाओं का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि सर्जरी जैसे जटिल शारीरिक कार्यों के क्षेत्र में एआई को अभी और विकास की जरूरत है।

चिकित्सा शिक्षा के भविष्य पर बोलते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में केवल तथ्यों को याद करना पर्याप्त नहीं होगा। मेडिकल शिक्षा को क्लिनिकल निर्णय क्षमता, वैज्ञानिक साक्ष्यों के मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच और मरीजों के साथ प्रभावी संवाद पर अधिक ध्यान देना होगा।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एआई के भविष्य को लेकर कहा कि इसकी पहली पीढ़ी ने इंसानों को जानकारी खोजने में मदद की, अगली पीढ़ी निर्णय लेने में सहायता कर रही है और भविष्य की पीढ़ी इंसानों को कार्रवाई करने में मदद करेगी।

इससे पहले पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की बढ़ती क्षमता, मरीजों के बढ़ते विश्वास, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और लगातार कम होती वेटिंग लिस्ट पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा दो प्रमुख केंद्रों के उद्घाटन के बाद संस्थान की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के शुरू होने से पीजीआईएमईआर में 800 नए बेड जुड़े हैं। पहले संस्थान में करीब 2200 बेड थे, जो अब बढ़कर 3000 हो गए हैं।

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर का उद्देश्य केवल इलाज की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को आम मरीज की पहुंच में लाना है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मरीजों को मिलने वाले लाभ और अमृत फार्मेसी आउटलेट्स के जरिए उपलब्ध किफायती जेनेरिक दवाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के इलाज में मरीजों को करोड़ों रुपये की बचत हो रही है। संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद वेटिंग लिस्ट कम हो रही है, जो सेवा वितरण प्रणाली में सुधार और संस्थान की बढ़ती क्षमता का संकेत है।

पीजीआईएमईआर के निदेशक ने संस्थान की प्रगति का श्रेय डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक स्टाफ सहित पूरे पीजीआई परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संस्थान बुनियादी ढांचे, डायग्नोस्टिक सेवाओं, मानव संसाधन और अन्य उभरते स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग को और मजबूत करेगा।

उन्होंने विशेष रूप से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के साथ सहयोग और मार्गदर्शन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पीजीआईएमईआर देश में उभरते स्वास्थ्य और चिकित्सा संस्थानों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार है।

स्थापना दिवस समारोह के दौरान संस्थान के 35 कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, पीजीआईएमईआर निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन और डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने सम्मानित कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए।

सम्मानित होने वालों में हॉस्पिटल अटेंडेंट, सैनिटेशन स्टाफ, माली, सुरक्षा कर्मचारी, प्रशासनिक अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, टेक्निकल असिस्टेंट और नर्सिंग अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल रहे।

समारोह के अंत में डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके साथ ही पीजीआईएमईआर के 63वें स्थापना दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ।

पीजीआईएमईआर ने अपने 63 वर्षों के सफर में स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाई है। अब संस्थान का फोकस आधुनिक तकनीक, बढ़ती मरीज क्षमता और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों को अपनाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, किफायती और सुलभ बनाने पर है।

PGIMER की कार्डियक ट्रायेज सेवा से इमरजेंसी केयर हुआ बेहतर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर (ACC) में शुरू की गई समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट ने आपातकालीन हृदय देखभाल को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 9 मार्च से 29 जुलाई 2026 तक करीब पांच महीनों की अवधि में यूनिट ने 3,049 हृदय रोगियों का प्रबंधन किया।

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट विशेषज्ञतापूर्ण आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता केवल मरीजों की संख्या में नहीं, बल्कि ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करने में है, जिसमें मरीजों का तेजी से आकलन कर उनकी वास्तविक चिकित्सीय जरूरत के अनुसार उचित स्तर की देखभाल तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि नेहरू अस्पताल की मुख्य इमरजेंसी से स्वतंत्र रूप से विकसित इस कार्डियक इमरजेंसी सेवा ने मरीजों के केंद्रित मूल्यांकन, शीघ्र चिकित्सीय निर्णय और उचित सेवा तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है। इससे मुख्य इमरजेंसी पर मरीजों का दबाव कम करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी सहायता मिली है।

करीब आधे मरीजों को मूल्यांकन के बाद किया गया डिस्चार्ज

कार्डियोलॉजी विभाग, एडवांस्ड कार्डियक सेंटर के प्रोफेसर डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने समर्पित कार्डियक ट्रायेज प्रणाली की आवश्यकता को साबित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 3,049 मरीजों में से:

  • 1,108 मरीज (36.3%) को आगे के उपचार के लिए Coronary Care Unit (CCU) में स्थानांतरित किया गया।
  • 1,513 मरीज (49.6%) का उचित मूल्यांकन और उपचार करने के बाद OPD आधार पर डिस्चार्ज किया गया।
  • 298 मरीज (9.8%) को गैर-हृदय संबंधी आपात स्थितियों के उपचार के लिए नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में रेफर किया गया।
  • 85 मरीज (2.8%) को संबंधित कार्डियोलॉजी/CTVS OPD भेजा गया।
  • 30 मरीज (1%) को मूल्यांकन और स्थिरीकरण के लिए Heart Command भेजा गया।

डॉ. विजयवर्गीय के अनुसार, इस मॉडल ने मरीजों की प्रभावी चिकित्सीय श्रेणी तय करने, समय पर उपचार उपलब्ध कराने और बढ़ते आपातकालीन कार्यभार को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद की। इसमें आवश्यक मरीजों के लिए Primary PCI जैसी तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन भी शामिल रही।

26 Primary PCI प्रक्रियाएं, मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत

रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट के माध्यम से 26 Primary PCI प्रक्रियाएं कराई गईं। इससे तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन की जरूरत वाले मरीजों में समय पर रक्त प्रवाह बहाल करने में सहायता मिली।

मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कुल मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत रही। 9 मार्च से 29 जुलाई के बीच कुल 16 मौतें दर्ज की गईं।

जुलाई में 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह

यूनिट में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। मार्च में जहां करीब 100 मरीज प्रति सप्ताह आ रहे थे, वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह हो गई।

9 से 15 जुलाई के सप्ताह में मरीजों की संख्या 233 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा समर्पित कार्डियक ट्रायेज सेवा के बढ़ते उपयोग और इसकी आवश्यकता को दर्शाता है।

अनावश्यक भर्ती कम करने में मददगार मॉडल

PGIMER के अनुसार, इस अनुभव से सामने आया है कि केंद्रित कार्डियक ट्रायेज व्यवस्था से मरीजों के प्रवाह को बेहतर बनाने, अनावश्यक भर्ती को कम करने और गंभीर हृदय संबंधी मामलों में तेजी से चिकित्सीय निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट उच्च-भार वाले तृतीयक हृदय उपचार केंद्र के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल के रूप में उभर रही है। PGIMER का यह अनुभव देश के अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसी तरह की समर्पित कार्डियक इमरजेंसी और ट्रायेज सेवाएं विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

PGIMER में फहराया गया 110 फीट ऊंचा स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज, राज्यपाल ने बताया राष्ट्रसेवा का प्रतीक

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ ने अपनी विकास यात्रा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए संस्थान परिसर में 110 फीट ऊंचे स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

राष्ट्रगान की गरिमामयी धुन के बीच विशाल तिरंगे का अनावरण हुआ, जिसके साथ पूरा परिसर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव के रंग में रंग गया। समारोह में यूटी चंडीगढ़ के गृह सचिव मंदीप बराड़, PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन (अकादमिक) प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान) प्रो. संजीव हांडा, उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।

“PGIMER भारत की चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक”

अपने संबोधन में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि PGIMER भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अत्यंत सम्मानित संस्थान है। उन्होंने कहा कि 110 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना केवल संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के गौरव का प्रतीक है।

उन्होंने निदेशक प्रो. विवेक लाल और पूरे PGIMER परिवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्थान की दशकों की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों ने उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है।

देश-विदेश से इलाज के लिए आते हैं मरीज

राज्यपाल ने कहा कि आज उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी लाखों मरीज इलाज के लिए PGIMER आते हैं। यह संस्थान की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का सबसे बड़ा प्रमाण है।

अंगदान, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी PGIMER

उन्होंने अंगदान, प्रत्यारोपण और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में PGIMER की उपलब्धियों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि ROTTO North को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान संस्थान की उत्कृष्ट कार्यशैली को दर्शाती है। साथ ही चिकित्सा अनुसंधान में PGIMER का योगदान भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत कर रहा है।

तिरंगे के तीन रंगों से जोड़ा PGIMER की कार्यसंस्कृति

राज्यपाल ने कहा कि जिस प्रकार तिरंगे का केसरिया त्याग, श्वेत शांति और हरा रंग प्रगति का प्रतीक है, उसी प्रकार PGIMER के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी निस्वार्थ सेवा के माध्यम से इन मूल्यों को प्रतिदिन साकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि अशोक चक्र की तरह संस्थान भी अनुसंधान, नवाचार और उत्कृष्ट रोगी सेवा के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है।

नई स्वास्थ्य परियोजनाओं की भी सराहना

राज्यपाल ने संस्थान में संचालित एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर, शीघ्र शुरू होने वाले एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर तथा प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की सराहना करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं देश की तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देंगी।

SARATHI पहल बनी प्रेरणा

उन्होंने PGIMER की SARATHI (सारथी) पहल को जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि हजारों स्वयंसेवकों को मरीजों की सहायता से जोड़कर संस्थान ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसे देशभर के कई अस्पताल अपना रहे हैं।

प्रो. विवेक लाल बोले- नवाचार और करुणा हमारी पहचान

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि 110 फीट ऊंचा स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज भारत की एकता, त्याग और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का स्थायी प्रतीक रहेगा।

उन्होंने बताया कि एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर पूरी तरह संचालित हो चुका है, जबकि एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर भी जल्द ही पूरी क्षमता के साथ कार्य शुरू करेगा।

उन्होंने कहा कि PGIMER का उद्देश्य देशवासियों को अत्याधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। संस्थान नवाचार, अनुसंधान और करुणामयी स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से देश के विश्वास पर लगातार खरा उतरने का प्रयास करता रहेगा।

समारोह का समापन डीन (अकादमिक) प्रो. संजय जैन के धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

PM मोदी ने चंडीगढ़ में 4,700 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का किया उद्घाटन
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना सहित 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया
  • चंडीगढ़ में आज स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है; प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां इन परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है
  • प्रधानमंत्री ने कहा: स्वच्छता एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है
  • प्रधानमंत्री ने कहा: जब कोविड-19 महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को मदद देने वाला देश था
  • प्रधानमंत्री ने कहा: भारत में स्वास्थ्य सेवा अब विशेषाधिकार की जगह एक अधिकार बन रही है

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना शामिल हैं। राष्ट्र की प्रगति के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में शहर की अनूठी स्थिति को रेखांकित करते हुए, उन्होंने बेहतर जीवन शैली और सुगम जीवन सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रतिष्ठा पर बल दिया। क्षेत्र पर मां चंडी की दिव्य कृपा को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इसके निरंतर, सुनियोजित विकास के लिए सत्तारूढ़ प्रशासन की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। मोदी ने कहा, “चंडीगढ़ का विकास हमेशा से हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।”

प्रधानमंत्री ने डेढ़ साल पहले लागू किए गए देश की न्याय व्यवस्था के ऐतिहासिक और व्यापक सुधार को याद करते हुए दंडात्मक औपनिवेशिक कानूनों से न्यायोचित ढांचे की ओर हुए बदलाव  के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “भारतीय न्याय संहिता का कार्यान्वयन चंडीगढ़ से ही शुरू हुआ।”

शहरी परिदृश्य के आधुनिकीकरण के लिए किए गए वित्तीय निवेशों के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र, स्मार्ट यातायात प्रबंधन और डिजिटल शासन जैसी परिवर्तनकारी पहलों का उल्लेख किया। स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन पर निवासियों को बधाई देते हुए, उन्होंने इन भविष्योन्मुखी उन्नयनों को गति देने वाले भारी पूंजी निवेश के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “शहर को उच्च तकनीक वाला बनाने के इस मिशन पर ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।”

क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित विस्तृत दैनिक कार्यक्रम का विवरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने हरियाणा के जींद में अपने पूर्व कार्यक्रम और पंजाब के जालंधर की आगामी यात्रा के बारे में बताया। उन्होंने अपने चंडीगढ़ को दोनों पड़ोसी राज्यों को निर्बाध रूप से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और प्रशासनिक सेतु के रूप में प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने कहा, “हमारा चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब दोनों को प्रभावी ढंग से जोड़ता है।”

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शहरी विकास के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव पर बल देते हुए कहा कि शहर में हुए सुधार किस प्रकार हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पड़ोसी क्षेत्रों की आबादी के जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा वितरण में शहर की अपरिहार्य और केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “चिकित्सा सेवाओं के लिए, चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है।”

स्थानीय चिकित्सा संस्थान में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री ने तंत्रिका विज्ञान केंद्र, मातृ एवं शिशु केंद्र और गहन चिकित्सा अस्पताल ब्लॉक सहित कई महत्वपूर्ण नई सुविधाओं की जानकारी साझा की। श्री मोदी ने कहा, “इन परियोजनाओं से लाखों लोगों को और भी बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी।”

प्रधानमंत्री ने 2015 में संस्थान के दीक्षांत समारोह में अपनी पिछली यात्रा को याद करते हुए, पिछले एक दशक में हासिल की गई असाधारण क्षमता निर्माण की सराहना की। उन्होंने इस प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाने में लगे प्रशासनिक दल, शैक्षणिक कर्मचारियों और चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने कहा, “संस्थान की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए मैं यहां के प्रोफेसरों और युवा डॉक्टरों की बहुत सराहना करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वच्छता मानकों के बीच सीधा सम्‍बंध बताते हुए स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ को याद किया। उन्होंने करोड़ों शौचालयों के निर्माण से लेकर खुले में शौच की प्रथा के उन्मूलन तक लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों का विस्तृत विवरण दिया और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए शहर के प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “विभिन्न पहलें शुरू की गईं ताकि स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन जाए।”

प्रधानमंत्री ने असाधारण नागरिक समर्पण के लिए झाड़ू योद्धा के नाम से जाने जाने वाले स्थानीय सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की जमीनी स्तर पर स्वच्छता आंदोलन शुरू करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने इन प्रेरणादायक सामुदायिक प्रयासों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करने के सरकार के निर्णय पर गर्व व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “नई जागरूकता पैदा करने के लिए, हमारी सरकार ने उन्हें इस वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वच्छता को एक बार का आयोजन नहीं बल्कि निरंतर जीवनशैली का हिस्सा बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के कार्यक्रम में विशेष ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान को शामिल किया गया है। उन्होंने इस पहल को अपनाने के लिए स्थानीय नागरिकों की सराहना की और रोग निवारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छता अभियान देश भर में अनेक बीमारियों की रोकथाम में बेहद सहायक साबित हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने देश की स्वास्थ्य सेवा क्षमता को लेकर अतीत में फैली वैश्विक चिंताओं का उल्‍लेख करते हुए कई बार संकट के दौरान व्याप्त संदेह की तुलना करते हुए ऐतिहासिक कोरोना महामारी के दौरान देश के सक्रिय नेतृत्व के बारे में बताया। उन्होंने गर्वपूर्वक कहा कि सहायता मांगने के बजाय, देश ने सहायता प्रदान की और अब जटिल चिकित्सा उपचारों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन गया है। श्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ने भारत की क्षमता को पूरी तरह से बदल दिया और दुनिया के दृष्टिकोण में आमूलचूल परिवर्तन किया।”

इस क्रांतिकारी बदलाव का श्रेय बारह वर्षों के समर्पित नीतिगत क्रियान्वयन को देते हुए, प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सुविधाएं सभी के लिए मुहैया कराने और सभी नागरिकों के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल सुनिश्चित करने के मूलभूत संकल्प को याद किया। श्री मोदी ने कहा, “पिछले बारह वर्षों में देश की सफलता इसी संकल्प का प्रत्यक्ष परिणाम है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा अवसंरचना के देशव्यापी आक्रामक विस्तार का विवरण देते हुए 2014 के बाद 15 नए एम्स की मंजूरी, सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और विशिष्ट अस्पतालों की तेजी से बढ़ती संख्या के बारे में बताया। उन्होंने गर्व से चंडीगढ़ में होमी भाभा कैंसर अस्पताल के 2022 में उद्घाटन का उल्लेख किया, जो अब हजारों मरीजों की कुशलतापूर्वक सेवा कर रहा है। श्री मोदी ने कहा, “हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का तेजी से और व्यापक रूप से विस्तार किया है।”

जमीनी स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। इसके तहत गहन चिकित्सा केंद्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 17.5 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर वर्तमान में शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जांच और व्यापक स्वास्थ्य पैकेज प्रदान कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “प्रत्येक गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के तेजी से विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में डिजिटल तकनीक के क्रांतिकारी एकीकरण के बारे में बताते हुए, विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए ई-संजीवनी मिशन की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब कठिन यात्रा किए बिना आसानी से शीर्ष स्तर के विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं। श्री मोदी ने कहा, “आज देश भर में 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।”

इन व्यापक चिकित्सा सुधारों के जीवनरक्षक प्रभाव को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 90 प्रतिशत से अधिक प्रसव अत्यंत सुरक्षित संस्थागत व्यवस्थाओं में होते हैं। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए, जो मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की भारी गिरावट और देश भर में शिशु मृत्यु दर में भारी कमी को दर्शाते हैं। श्री मोदी ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं के इस व्यापक विस्तार के कारण शिशु मृत्यु दर में भी भारी कमी आई है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सम्‍बंधी प्रगति और सक्रिय स्वास्थ्य रणनीतियों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, प्रशासन के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर दोहरे ध्‍यानाकर्षण पर बल दिया। उन्होंने पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग प्रोत्साहन, एचपीवी टीकाकरण अभियान और यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी समग्र पहलों को संभावित स्वास्थ्य चुनौतियों से विशाल आबादी को सक्रिय रूप से सुरक्षित रखने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “इन अनेक महत्वपूर्ण प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन निरंतर सुरक्षित हो रहा है।”

तपेदिक के खिलाफ चलाए जा रहे सक्रिय राष्ट्रीय अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने समुदाय-आधारित टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत समय पर जांच और उपचार पर दिए जा रहे विशेष बल के बारे में विस्तार से बताया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने पिछले दशक में संक्रमण में 21 प्रतिशत की कमी और 90 प्रतिशत से अधिक उपचार कवरेज की उपलब्धि की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “जन की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अत्यधिक जागरूक बनाया जा रहा है।”

इस स्वास्थ्य सेवा क्रांति के प्राथमिक लाभार्थियों की पहचान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने समान चिकित्सा पहुंच के प्रति राष्ट्र के दृष्टिकोण में एक मौलिक दार्शनिक परिवर्तन पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अब विशेषाधिकार नहीं रहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार बन रही हैं।”

चिकित्सा शिक्षा में ऐतिहासिक रूप से चली आ रही बाधाओं को दूर करते हुए, प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक सीटों की गंभीर कमी का उल्‍लेख किया, जिसने पहले युवा छात्रों की आकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया था। उन्होंने घोषणा की कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, स्नातकोत्तर सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और हाल ही में स्थानीय संस्थान में एमबीबीएस कॉलेज को बहुप्रतीक्षित मंजूरी मिली है। श्री मोदी ने कहा, “यह व्यापक विस्तार प्रतिभाशाली युवाओं को शीर्ष संस्थानों में अध्ययन करने का अवसर देगा और देश को सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर प्रदान करेगा।”

प्रधानमंत्री ने शहर में मौजूद शिक्षा, इंजीनियरिंग और चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों के अनूठे संगम की प्रशंसा करते हुए, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में इसके तीव्र विकास की भविष्यवाणी की। इस शैक्षणिक यात्रा को गति देने के लिए, उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल का उद्घाटन और नए शोधार्थियों के आवास की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को उन्नत अनुसंधान के लिए सर्वोत्तम प्रयोगशालाएं और बेहतर संकाय उपलब्ध हों।”

प्रधानमंत्री ने कठोर शैक्षणिक वातावरण को तकनीकी प्रगति से सीधे जोड़ते हुए एआई, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक में प्रगति को गति देने के लिए एक मजबूत अनुसंधान तंत्र की परम आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय शिक्षकों और छात्रों पर अटूट विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “जब अनुसंधान वातावरण वास्तव में मजबूत होगा तभी नवाचार में तेजी आएगी।”

प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ अवसंरचना को आर्थिक समृद्धि का अंतिम खाका बताते हुए सरकार के नवीन समग्र विकास दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले नए राजमार्ग का उद्घाटन किया। इससे हवाई अड्डे की सड़क पर भीड़भाड़ कम होगी और क्षेत्रीय यात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करने हेतु ‘पीआर सेवन स्पर’ की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “इन सभी रणनीतिक विकास कार्यों से उद्योग और व्यापार को अभूतपूर्व गति प्राप्त होगी।”

क्षेत्रीय संपर्क के विषय को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने जालंधर में एक साथ रेलवे परियोजनाओं के शुभारंभ और जींद को सोनीपत से जोड़ने वाली देश की पहली स्वच्छ ईंधन से चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन के ऐतिहासिक शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने सतत, हरित परिवहन में इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि पर जनता को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छ ईंधन से चलने वाली यह ट्रेन देश के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।”

अपने सम्‍बोधन का समापन एक विकसित भारत के दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ करते हुए, प्रधानमंत्री ने भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों, परिवहन प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवा संरचनाओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लोगों को आश्वासन दिया कि वर्तमान प्रशासन आने वाली पीढ़ियों की सेवा करने वाली स्थायी संस्थाओं के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने कहा, “हमें ऐसे साहसिक निर्णय लेने होंगे जिनका अधिकतम लाभ हमारी आने वाली सभी पीढ़ियों तक सहजता से पहुंचे।”

PM मोदी PGIMER में 1200 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

  • एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर, एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर एवं क्रिटिकल केयर ब्लॉक उत्तर भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को देंगे नई दिशा
  • “जनता का बढ़ता विश्वास हमारी जिम्मेदारी को बढ़ाता है; इसका समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि अवसंरचना का विस्तार करना है।” – प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER ), चंडीगढ़ अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है। भारत के माननीय प्रधानमंत्री 17 जुलाई 2026 को दो अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं—एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर (एएनसी) और एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (AMCC)—का उद्घाटन करेंगे तथा क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) की आधारशिला रखेंगे। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत वाली ये परियोजनाएँ संस्थान के इतिहास में स्वास्थ्य अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तारों में से एक हैं।

इन नई सुविधाओं से न केवल चंडीगढ़ बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड तथा अन्य पड़ोसी राज्यों के उन लाखों मरीजों को लाभ मिलेगा, जो उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए पीजीआईएमईआर पर निर्भर हैं।

उद्घाटन से पूर्व अपने विचार व्यक्त करते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“ये परियोजनाएँ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी छलांग हैं। पीजीआईएमईआर सदैव प्रत्येक मरीज को उसकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इन सुविधाओं के शुरू होने से विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करने की हमारी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना भी जारी रहेगा।”

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर को देश की सबसे उन्नत न्यूरोलॉजिकल देखभाल सुविधाओं में से एक के रूप में विकसित किया गया है। इसमें अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, उन्नत गहन चिकित्सा इकाइयाँ तथा आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. विवेक लाल

“पीजीआई में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी की शुरुआत वर्ष 1967 में मात्र 50 बिस्तरों के साथ हुई थी। एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर के साथ यह संख्या बढ़कर 400 से अधिक बिस्तरों तक पहुँच रही है, जिनमें समर्पित आईसीयू और आपातकालीन सुविधाएँ शामिल हैं। यह एक परिवर्तनकारी कदम है, जिससे स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर, रीढ़ की बीमारियों, मिर्गी, ट्रॉमा और अन्य जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।”

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर में माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इसमें समर्पित आईसीयू, आधुनिक लेबर सुइट, विशेष नवजात सेवाएँ और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएँ होंगी।

प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“पीजीआईएमईआर ने भारत में कई नवजात सेवाओं की शुरुआत की है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर विशेष आईसीयू, उन्नत तकनीक और समर्पित स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।”

क्रिटिकल केयर ब्लॉक
नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला कोविड-19 महामारी से मिली सीख के बाद देश की आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रो. लाल ने कहा,
“महामारी ने हमें यह सिखाया कि क्रिटिकल केयर अवसंरचना कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। यह नया क्रिटिकल केयर ब्लॉक सुनिश्चित करेगा कि गहन चिकित्सा और वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले मरीजों को बिना अनावश्यक विलंब के समय पर उपचार मिल सके। यह भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।”

वर्तमान में पीजीआईएमईआर में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख मरीजों का पंजीकरण होता है तथा प्रतिदिन 10,000 से 15,000 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जाते हैं। संस्थान बढ़ती मरीज संख्या को बोझ नहीं, बल्कि जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक मानता है।

इस संदर्भ में निदेशक ने कहा, “अक्सर कहा जाता है कि पीजीआई पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी बढ़ रही है। पीजीआई लाखों लोगों के लिए आशा और विश्वास का केंद्र है। समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप अपनी अवसंरचना और सेवाओं का लगातार विस्तार करना है।”

निदेशक ने बताया कि पीजीआईएमईआर आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत अत्यधिक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ न्यूनतम या बिना किसी लागत के उपलब्ध कराता है।

संस्थान में अब तक 5,500 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इसके अलावा लिवर, हृदय, फेफड़े और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाएँ भी उपलब्ध हैं, जिनमें से कई अब आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। सेवाओं के विस्तार के कारण पात्र किडनी प्रत्यारोपण मरीजों की प्रतीक्षा अवधि में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

पीजीआईएमईआर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी राष्ट्रीय अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। संस्थान अब तक 40 लाख से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान कर चुका है तथा देशभर के 250 से अधिक चिकित्सा संस्थानों, जिनमें सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (एएफएमसी) और अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं, को शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करता है।

निदेशक ने संस्थान की अभिनव ‘सारथी’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मरीज सेवा में स्वयंसेवा के लिए प्रेरित करना है। यह कार्यक्रम एक छोटे स्वयंसेवी प्रयास से विकसित होकर हजारों युवाओं का जनआंदोलन बन चुका है, जो संस्थान में मरीजों की सहायता कर रहे हैं।

प्रो. लाल ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता का भी नाम है। ‘सारथी’ के माध्यम से युवा स्वयंसेवक सहानुभूति और सामुदायिक सेवा की भावना सीखते हैं तथा देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों की सहायता करते हैं। संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आधुनिक अस्पतालों का निर्माण करना।”

इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के शुरू होने के साथ पीजीआईएमईआर उन्नत, किफायती और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में अग्रसर होगा तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। यह उद्घाटन भारत सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने और उत्तर भारत के लाखों लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के सतत प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

PM Modi Chandigarh Visit: SPG ने संभाली सुरक्षा की कमान, 1200 पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे से पहले शहर हाई अलर्ट पर है। प्रधानमंत्री के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) और पीजीआई में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) ने सुरक्षा तैयारियों की कमान संभाल ली है।

सोमवार को एसपीजी की टीम ने दोनों कार्यक्रम स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया जबकि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर आतंकी हमले जैसी स्थिति से निपटने के लिए मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज आयोजित की। 

दौरे के दौरान चंडीगढ़ पुलिस के करीब 1200 जवान तैनात रहेंगे। इनके अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और अन्य अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां कार्यक्रम स्थलों, संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौराहों पर मोर्चा संभालेंगी।

एसपीजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को पीजीआई और पेक परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान प्रवेश एवं निकास मार्ग, वीवीआईपी मूवमेंट, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, सुरक्षा घेरा और अन्य संवेदनशील बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यूटी के मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद के साथ बैठक कर सुरक्षा तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, जिम्मेदारियों के बंटवारे और अंतिम तैयारियों को लेकर रणनीति तय की गई।

एयरपोर्ट पर मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज 

प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सोमवार को चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मल्टी एजेंसी मॉक एक्सरसाइज भी आयोजित की। अभ्यास के दौरान एयरपोर्ट पर आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति बनाई गई, ताकि विभिन्न एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखा जा सके। इस मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ, भारतीय सेना, पंजाब पुलिस, कस्टम विभाग और एयरपोर्ट पब्लिक हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टीमों ने हिस्सा लिया।

जल्द ही विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी होगी

वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से एडवाइजरी का पालन करने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की है।

एसपीजी ने सौंपा संयुक्त सिक्योरिटी एक्शन प्लान

एसपीजी ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा एक्शन प्लान साझा कर दिया है। इसके तहत कार्यक्रम स्थल, एयरपोर्ट, वीवीआईपी रूट, पार्किंग, प्रवेश द्वार और आसपास के क्षेत्रों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड, क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी), स्नाइपर और निगरानी टीमों की भी तैनाती रहेगी। पूरे सुरक्षा तंत्र पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

प्रधानमंत्री करेंगे दो सेंटरों का उद्घाटन, एक का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पीजीआई के दो बड़े सेंटरों का उद्घाटन करेंगे। वह एक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का शिलान्यास भी रखेंगे। पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सेंटरों से मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

उद्घाटन किए जाने वाले सेंटरों में एडवांस मैटरनल चाइल्ड केयर सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइन सेंटर शामिल हैं। प्रत्येक सेंटर में 300 बेड की सुविधा होगी। क्रिटिकल केयर ब्लॉक में 150 बेड होंगे, जिसका शिलान्यास किया जाएगा। इन सभी सुविधाओं पर लगभग 1250 करोड़ रुपये की लागत आई है। इन सेंटरों में अत्याधुनिक ओटी, वेंटिलेटर और स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा।

सेंटरों की सुविधाएं और आयुष्मान योजना

न्यूरोसाइन सेंटर में ओपीडी पहले से चल रही है। बाकी सुविधाएं अगले तीन से छह महीनों में शुरू होंगी। सिटी स्कैन की सुविधा अगस्त में शुरू होगी, जबकि एमआरआई की सुविधा जनवरी तक उपलब्ध हो जाएगी। मदर एंड चाइल्ड सेंटर में अभी आईपीडी बना है, ओपीडी ब्लॉक फेज टू में बनेगा। प्रोफेसर विवेक लाल ने आयुष्मान भारत योजना को दुनिया की सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवा पहल बताया। पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग खत्म हो गई है, और यह आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त में किया जा रहा है। डोनर मिलने के साथ ही ट्रांसप्लांट की डेट दे दी जा रही है।

PM की यात्रा से पहले PGIMER ने स्वास्थ्य सेवाओं की रुपरेखा पेश की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER ), चंडीगढ़ ने सोमवार को 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किए जाने वाले ऐतिहासिक स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं के महत्व से मीडिया को अवगत कराया।

कैरोन ब्लॉक के बोर्ड रूम में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इसे संस्थान की स्वास्थ्य उत्कृष्टता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा, “माननीय प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा पीजीआईएमईआर की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ये केवल नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत के करोड़ों लोगों तक उन्नत, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की हमारी क्षमता में एक परिवर्तनकारी छलांग का प्रतीक हैं।”

प्रधानमंत्री एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (AMCC) तथा एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर (ANC) का उद्घाटन करेंगे, साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत वाली ये परियोजनाएं उत्तर भारत में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा तथा उन्नत अनुसंधान को नई मजबूती प्रदान करेंगी।

रोगी सेवा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रो. लाल ने कहा, “हमारा मूल मंत्र हमेशा से केवल एक रहा है—रोगी सेवा, रोगी सेवा और रोगी सेवा। हमारी प्रत्येक नई सुविधा इसी उद्देश्य से विकसित की गई है कि हर मरीज को गरिमा, संवेदनशीलता और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक के साथ विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा सके।”

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में डीन (अकादमिक) प्रो. संजय जैन, उपनिदेशक (प्रशासन) श्री पंकज राय, न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अशोक कुमार, बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. वनीता जैन, अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विजय गोनी, प्रोफेसर इंचार्ज (इंजीनियरिंग) प्रो. समीर अग्रवाल, लेफ्टिनेंट कर्नल गुरविंदर सिंह भट्टी (एस.एच.ई.), एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव चौहान तथा अस्पताल प्रशासन विभाग से डॉ. रमन शर्मा एवं डॉ. विजय तड़िया उपस्थित रहे।

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर की जानकारी देते हुए निदेशक ने कहा, “₹505 करोड़ की लागत से निर्मित यह अत्याधुनिक केंद्र आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से सुसज्जित है। 300 बिस्तरों वाले इस केंद्र में अत्याधुनिक नवजात गहन चिकित्सा इकाइयां (NICU), मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तथा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे पीजीआईएमईआर की प्रतिवर्ष 6,000 से अधिक उच्च जोखिम वाली प्रसूतियों के प्रबंधन की क्षमता और सुदृढ़ होगी।”

इन्फोसिस फाउंडेशन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “उन्नत चिकित्सा उपकरणों की स्थापना के लिए ₹147 करोड़ का उदार सहयोग प्रदान करने पर हम इन्फोसिस फाउंडेशन के अत्यंत आभारी हैं। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की यह अनुकरणीय साझेदारी हमारी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगी तथा आने वाली पीढ़ियों तक मरीजों को लाभान्वित करेगी।”

300 बिस्तरों वाला एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोरेडियोलॉजी, न्यूरोएनेस्थीसिया, न्यूरोक्रिटिकल केयर तथा पुनर्वास सेवाओं को एक ही परिसर में समाहित करेगा। 61 गहन चिकित्सा बिस्तरों, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटरों तथा अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के उपचार को नई दिशा देगा।

इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. लाल ने कहा, “यह नया केंद्र उपचार में होने वाली देरी को कम करेगा, मरीजों के जीवित रहने की संभावना तथा दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल परिणामों में सुधार लाएगा और पीजीआईएमईआर को न्यूरोसाइंस शिक्षा, अनुसंधान एवं उन्नत उपचार के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।”

माननीय प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत लगभग ₹244 करोड़ की लागत से विकसित किए जाने वाले 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। कोविड-19 महामारी के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही यह सुविधा आपातकालीन तैयारियों तथा बहुविषयक क्रिटिकल केयर सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

पीजीआईएमईआर में बढ़ते मरीजों की संख्या पर टिप्पणी करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “पीजीआईएमईआर में आने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि इस संस्थान पर लोगों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। हम इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं कि निरंतर अपनी अवसंरचना और सेवाओं का विस्तार करें ताकि कोई भी मरीज गुणवत्तापूर्ण उपचार से वंचित न रहे।”

निदेशक ने आयुष्मान भारत योजना के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा, “इस योजना ने अनेक जटिल उपचारों और उन्नत शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को उन मरीजों के लिए भी आर्थिक रूप से सुलभ बनाया है, जो पहले वित्तीय बाधाओं के कारण इनका लाभ नहीं उठा पाते थे। अंग प्रत्यारोपण, कैंसर उपचार से लेकर जटिल हृदय एवं न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं तक, पीजीआईएमईआर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हुए मरीजों पर आर्थिक बोझ को न्यूनतम कर रहा है।”

उन्नत उपचार की किफायत पर बल देते हुए प्रो. लाल ने कहा, “आज पीजीआईएमईआर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं अत्यधिक महंगी होना आवश्यक नहीं हैं। आयुष्मान भारत योजना और हमारी अमृत फार्मेसियों के माध्यम से अनेक महंगी दवाएं पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग तीन सौवें हिस्से की लागत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे जीवनरक्षक उपचार जरूरतमंद मरीजों की पहुंच में आ सका है।”

प्रो. लाल ने भारत सरकार तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “ये ऐतिहासिक परियोजनाएं रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान तथा आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी और देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में पीजीआईएमईआर की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेंगी।”

मीडिया ब्रीफिंग का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें निदेशक ने रोगी सेवाओं, नई स्वास्थ्य अवसंरचना की तैयारियों तथा भविष्य की विस्तार योजनाओं से संबंधित मीडिया के प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उत्कृष्ट रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के प्रति पीजीआईएमईआर की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।