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PGIMER की कार्डियक ट्रायेज सेवा से इमरजेंसी केयर हुआ बेहतर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर (ACC) में शुरू की गई समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट ने आपातकालीन हृदय देखभाल को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 9 मार्च से 29 जुलाई 2026 तक करीब पांच महीनों की अवधि में यूनिट ने 3,049 हृदय रोगियों का प्रबंधन किया।

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट विशेषज्ञतापूर्ण आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता केवल मरीजों की संख्या में नहीं, बल्कि ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करने में है, जिसमें मरीजों का तेजी से आकलन कर उनकी वास्तविक चिकित्सीय जरूरत के अनुसार उचित स्तर की देखभाल तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि नेहरू अस्पताल की मुख्य इमरजेंसी से स्वतंत्र रूप से विकसित इस कार्डियक इमरजेंसी सेवा ने मरीजों के केंद्रित मूल्यांकन, शीघ्र चिकित्सीय निर्णय और उचित सेवा तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है। इससे मुख्य इमरजेंसी पर मरीजों का दबाव कम करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी सहायता मिली है।

करीब आधे मरीजों को मूल्यांकन के बाद किया गया डिस्चार्ज

कार्डियोलॉजी विभाग, एडवांस्ड कार्डियक सेंटर के प्रोफेसर डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने समर्पित कार्डियक ट्रायेज प्रणाली की आवश्यकता को साबित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 3,049 मरीजों में से:

  • 1,108 मरीज (36.3%) को आगे के उपचार के लिए Coronary Care Unit (CCU) में स्थानांतरित किया गया।
  • 1,513 मरीज (49.6%) का उचित मूल्यांकन और उपचार करने के बाद OPD आधार पर डिस्चार्ज किया गया।
  • 298 मरीज (9.8%) को गैर-हृदय संबंधी आपात स्थितियों के उपचार के लिए नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में रेफर किया गया।
  • 85 मरीज (2.8%) को संबंधित कार्डियोलॉजी/CTVS OPD भेजा गया।
  • 30 मरीज (1%) को मूल्यांकन और स्थिरीकरण के लिए Heart Command भेजा गया।

डॉ. विजयवर्गीय के अनुसार, इस मॉडल ने मरीजों की प्रभावी चिकित्सीय श्रेणी तय करने, समय पर उपचार उपलब्ध कराने और बढ़ते आपातकालीन कार्यभार को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद की। इसमें आवश्यक मरीजों के लिए Primary PCI जैसी तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन भी शामिल रही।

26 Primary PCI प्रक्रियाएं, मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत

रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट के माध्यम से 26 Primary PCI प्रक्रियाएं कराई गईं। इससे तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन की जरूरत वाले मरीजों में समय पर रक्त प्रवाह बहाल करने में सहायता मिली।

मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कुल मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत रही। 9 मार्च से 29 जुलाई के बीच कुल 16 मौतें दर्ज की गईं।

जुलाई में 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह

यूनिट में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। मार्च में जहां करीब 100 मरीज प्रति सप्ताह आ रहे थे, वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह हो गई।

9 से 15 जुलाई के सप्ताह में मरीजों की संख्या 233 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा समर्पित कार्डियक ट्रायेज सेवा के बढ़ते उपयोग और इसकी आवश्यकता को दर्शाता है।

अनावश्यक भर्ती कम करने में मददगार मॉडल

PGIMER के अनुसार, इस अनुभव से सामने आया है कि केंद्रित कार्डियक ट्रायेज व्यवस्था से मरीजों के प्रवाह को बेहतर बनाने, अनावश्यक भर्ती को कम करने और गंभीर हृदय संबंधी मामलों में तेजी से चिकित्सीय निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट उच्च-भार वाले तृतीयक हृदय उपचार केंद्र के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल के रूप में उभर रही है। PGIMER का यह अनुभव देश के अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसी तरह की समर्पित कार्डियक इमरजेंसी और ट्रायेज सेवाएं विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

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