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भाई को राखी बांधने की ख्वाहिश रह गई अधूरी, माछीवाड़ा साहिब में 21 वर्षीय विवाहिता की मौत

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

Report : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब इलाके में रविवार सुबह एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जहां 21 वर्षीय विवाहिता लक्ष्मी देवी अपने ससुराल में मृत मिली। घटना के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात लक्ष्मी देवी ने अपने ससुराल परिवार के सामने अपने मायके जाकर भाई को राखी बांधने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उसके ससुर ने लक्ष्मी की माता को फोन कर उसे मायके ले जाने के लिए आने की बात कही।

सुबह कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे परिजन

रविवार सुबह जब परिवार के सदस्यों ने देखा कि लक्ष्मी देवी काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं आई, तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिलने पर परिजनों ने दरवाजा तोड़ा।

कमरे के अंदर लक्ष्मी देवी को मृत अवस्था में पाया गया। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही माछीवाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बताया जा रहा है कि लक्ष्मी देवी का पति रोजगार के सिलसिले में दुबई गया हुआ है। उसे घटना की जानकारी दे दी गई है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लक्ष्मी देवी ने यह कदम क्यों उठाया। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

माछीवाड़ा साहिब से जसबीर सिंह अलबेला की रिपोर्ट।

सरहिंद में कांवड़ियों पर कहर बनकर टूटी तेज रफ्तार कार, 3 की मौत; एक गंभीर घायल

सरहिंद / सत्ता संदेश

Report : परमिंदर वर्मा

सरहिंद के पास जीटी रोड पर रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में गंगोत्री से पवित्र जल लेकर कोटकपूरा लौट रहे तीन कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य कांवड़िया गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा सरहिंद में दादा मोटर्स के नजदीक रात करीब सवा दो बजे हुआ।

हादसे में मृतकों की पहचान जिला फरीदकोट निवासी महेंद्रपाल, दीपक और जगदीश मित्तल के रूप में हुई है। वहीं घायल कांवड़िए की पहचान मुकेश कुमार के तौर पर हुई है। गंभीर रूप से घायल मुकेश कुमार को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

पीछे से तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर

मौके पर मौजूद जगसीर सिंह के मुताबिक, हादसे के समय छह कांवड़िए सरहिंद जीटी रोड से गुजर रहे थे। इनमें से चार कांवड़िए आगे चल रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आई एक कार ने आगे चल रहे कांवड़ियों को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीन कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे की सूचना मिलते ही सरहिंद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। थाना सरहिंद के सहायक थानेदार तिलक राज ने बताया कि पुलिस द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और तेज रफ्तार वाहन की भूमिका क्या रही, इसका पता लगाया जा रहा है।

पुलिस ने हादसे से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। वहीं तीन कांवड़ियों की मौत की खबर से परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

25 साल के हरजिंदर सिंह की हत्या के बाद हाईवे जाम, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

Report : गुरमीत सिंह

लुधियाना के टिब्बा रोड स्थित स्वतंत्र नगर इलाके में शुक्रवार रात हुई अंधाधुंध फायरिंग में 25 वर्षीय हरजिंदर सिंह की हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर रविवार को मृतक के परिजनों और इलाके के लोगों ने नेशनल हाईवे मेन जीटी रोड पर धरना देकर जाम लगा दिया। प्रदर्शन के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।

धरने की सूचना मिलते ही पुलिस के उच्चाधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया और हाईवे से धरना हटाने की अपील की। हालांकि, मृतक के परिजन और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

36 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर परिजनों में रोष

मृतक के परिवार का कहना था कि वारदात को 36 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिजनों ने पुलिस और पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि परिवार आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहता है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। गुस्साए कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस एनकाउंटर की मांग भी रखी।

परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। परिवार की ओर से यह तक कहा गया कि जरूरत पड़ी तो शव को नेशनल हाईवे पर रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।

पहले मारपीट की घटना का भी परिवार ने लगाया आरोप

मृतक के परिजनों ने दावा किया कि हरजिंदर सिंह के साथ पहले भी मारपीट की घटना हो चुकी थी। परिवार का आरोप है कि उस समय यदि पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की होती, तो शायद यह वारदात टाली जा सकती थी।

प्रदर्शनकारियों ने कथित पुलिस लापरवाही की भी जांच कराने और मामले में जिम्मेदार पुलिस कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग की।

फिलहाल पुलिस अधिकारियों ने परिवार और प्रदर्शनकारियों को आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

बनूड़ गोदाम में गोमांस मामले पर गौ रक्षा दल का अल्टीमेटम, 16 अगस्त तक कार्रवाई की मांग

राजपुरा/बनूड़ / सत्ता संदेश

Report : दीपक कुमार

राजपुरा के बनूड़ क्षेत्र में एक गोदाम पर हुई रेड के दौरान कथित तौर पर मिले गोमांस के सैंपलों की रिपोर्ट सामने आने के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए गौ रक्षा दल ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 16 अगस्त तक मामले में शामिल कथित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो गोदाम के बाहर जोरदार धरना शुरू किया जाएगा।

राजपुरा में गौ रक्षा दल के अध्यक्ष सतीश कुमार की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के नेताओं ने कहा कि मामले से जुड़े सैंपलों की रिपोर्ट सामने आने के बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।

गौ रक्षा दल ने कहा कि यदि 16 अगस्त तक कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन गोदाम के बाहर धरना देगा। नेताओं के मुताबिक, यह आंदोलन तब तक जारी रखने की चेतावनी दी गई है, जब तक मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।

प्रेस वार्ता में हिंदू सुरक्षा समिति और राष्ट्रीय हिंदू तख्त के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। संगठनों के नेताओं ने प्रशासन पर मामले को लंबित रखने का आरोप लगाया और कहा कि यदि जांच में साक्ष्य सामने आए हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

राष्ट्रीय हिंदू तख्त के अध्यक्ष शंकरानंद गिरी, जिन्होंने बनूड़ के गोदाम में हुई रेड के दौरान मामला दर्ज करवाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी, ने भी प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

इस दौरान गौ रक्षा दल अध्यक्ष सतीश कुमार के अलावा राजेश केहर, राजेश कौशिक, साहिल गोयल, कुलदीप सेठी और परमजीत पम्मा सहित कई हिंदू संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

संगठन ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और यदि आरोप जांच में प्रमाणित होते हैं तो गौ हत्या रोकथाम कानून समेत लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

गौ रक्षा दल ने स्पष्ट किया कि 16 अगस्त तक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक कार्रवाई या आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सुखबीर सिंह संधू का इकलौता ग़ज़ल कलेक्शन 53 साल बाद पब्लिश होगा

गुरभजन गिल

यह एक ऐसे सपने का पूरा होना है जिसके बारे में मैंने कभी इस रूप में सोचा भी नहीं था।
आज सुबह, यह प्रिंटवेल अमृतसर से प्रिंट होकर मेरे घर और लुधियाना के पंजाबी भवन में चेतना प्रकाशन पहुँच गया। कल यह सिंह ब्रदर्स अमृतसर, नवचेतन बुक डिपो बरनाला, पंजाब बुक सेंटर चंडीगढ़ और दूसरे बुक हाउस से मिलेगा।

इस किताब के बारे में कुछ कहने के बजाय, मैं डॉ. आत्मजीत का लिखा एक आर्टिकल अटैच कर रहा हूँ।
इसे पढ़ें और पढ़ते रहें।
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यह कोई रोल नहीं है, देसो

आत्मजीत

पचास से ज़्यादा सालों के बाद, गुरभजन गिल ने सुखबीर सिंह संधू की किताब ‘पायल’ की आवाज़ को फिर से ज़िंदा करके अच्छा काम किया है। पंजाबी लिटरेचर उनका एहसानमंद रहेगा। इस किताब ने मुझे तीन वजहों से अपनी ओर खींचा है। पहली, मैं इसके लेखक सुखबीर सिंह संधू जसबीर भुल्लर से भी जुड़ा हुआ हूँ क्योंकि मैं उनका बहुत करीबी रिश्तेदार हूँ। दूसरी वजह, इस किताब का नाम ‘पायल’ है। उन्होंने पायल को पाजेब या झंझर क्यों नहीं कहा? मैंने उनकी किसी ग़ज़ल में पायल शब्द नहीं पढ़ा, हालाँकि एक ग़ज़ल में ‘झंझर’ का इस्तेमाल हुआ है। वे लिखते हैं:

“मामला इत्तेफ़ाक है, कसूर न उसका है न मेरा,
न झंझर छंकदी ओसदी, न नीयत बदलदी मेरी”।

हालाँकि पायल और झंझर में कुछ फ़र्क है, लेकिन इस किताब के मामले में यह बेमतलब है क्योंकि उन्होंने किताब के नाम को किसी भी तरह से अपनी ग़ज़लों से जोड़ने की कोई जान-बूझकर कोशिश नहीं की है। यह किताब का एक अलग नाम है। हालाँकि, ‘झंझर’ शब्द को पंजाब ने बहुत प्यार दिया है। शिव कुमार का गाना है,
“मेरी झंझर तेरा नाम लेती है,

करे छन छन छन’।

नंद लाल नूरपुरी हम सबकी यादों में बसे हैं:

“गोरी दियां झंझरां बुलाऊंदिया पीयां’। लेकिन सुखबीर सिंह संधू की किताब का सिर्फ़ नाम ही नहीं है, बल्कि ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे खुद ही ‘पायल पब्लिशर्स’ के नाम से पब्लिश भी किया है। मेरी सोच इस नाम के पीछे इसलिए भी पड़ी है क्योंकि इंग्लैंड से लौटने के बाद उन्होंने तरनतारन में जो रेस्टोरेंट और होटल खोला था, उसका नाम भी ‘पायल’ ही था। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने अपनी सारी कविताएं पायल नाम की लड़की की जुदाई में ही कह दी हों। लेकिन मैं यह कहानी यह बताने के लिए लाया हूं कि अपने प्यार के पूरी तरह नाकाम होने के बावजूद, सुखबीर सिंह संधू एक ऐसे आशिक हैं जो पूरी शिद्दत, सच्चे, खुश और शिकायतों से बहुत ऊपर अपनी पत्नी के लिए समर्पित हैं।

यहां से तीसरी वजह सामने आती है जो मुझे सुखबीर संधू की शायरी से सबसे ज़्यादा जोड़ती है और वह है उनकी अकेलेपन की दुनिया और उनके आज के कवि शिव बटालवी की दुनिया में बहुत बड़ा फ़र्क। दोनों ही अकेलेपन के शायर हैं, एक ही ज़माने के थे, प्यार में हारे हुए थे, शराब के आदी थे और माझा की ज़मीन से ताल्लुक रखते थे। लेकिन शिव खुद को प्यार के खंडहरों का शिखर कहते हैं, खुद को एक अधूरे गीत और बुझे हुए दीये का सफ़र मानते हैं। उनके हिसाब से, उनकी सभी परेशानियों का इलाज मौत है; इसीलिए उनकी रचनाओं में मौत की तस्वीरें बार-बार उभरती हैं। वह मौत को पुकारते भी दिखते हैं। वह अपनी किस्मत और समाज को अपना दुश्मन मानते हैं। इस तरह, वह खुद को एक पीड़ित या विक्टिम और एक हारे हुए इंसान के तौर पर पेश करते हैं। उनकी खूबसूरत, सही भाषा और नई कल्पनाएँ उनकी चाहत के एहसास को बखूबी दिखाती हैं और बढ़ाती हैं।

कॉलेज के दिनों में, हम अक्सर अपने गाने वाले साथियों से संधू की मशहूर ग़ज़ल “उस बेवफ़ा दी याद वी रोइया वजहों की ना, बीत दिन दी फेर तमन्ना वजहों की ना” सुनते थे और कभी-कभी हम खुद भी इसे गुनगुनाते थे, हालाँकि हममें से किसी को भी इसके लिखने वाले का नाम नहीं पता था। मुझे यह जानकारी अभी गुरभजन गिल की किताब के री-पब्लिकेशन के मौके पर मिली है। नुसरत फतेह अली खान और नसीबो लाल जैसे महान सिंगर्स ने इसे अपनी आवाज़ दी है। इस ग़ज़ल का नैरेशन बहुत फ्रेश है। उनका हमसे यह पूछना कि बेवफाओं की याद में रोना चाहिए या नहीं, पुराने दिनों को याद करना चाहिए या नहीं, यह उनकी कमाल की पोएटिक टेक्निक है। लेकिन हमें सुखबीर संधू की बाकी ग़ज़लों का रिसेंटेशन भी यूनिक लगा। बेसिकली, वह भी तड़प के शायर हैं और जुदाई ही उनकी ग़ज़लों का मेन और मेन थीम है। उनकी कुछ कविताएँ देखें:

  • लाख दरवाज़े उठाए हैं, सौ ताले लगाए हैं
    लेकिन फिर भी, दर्द का एक दरवाज़ा, पल-पल खुद ही खुलता है
  • वो उसका हो गया था, फिर मेरे पास क्यों है
    मेरा दिल जा रहा है, मैं उसकी चौखट पर खड़ा हो जाऊंगा
  • लोग वो तमाशा देखेंगे जो उन्होंने कभी नहीं देखा
    जब मैं अपनी ही लाश लेकर गुज़रूंगा
  • जब ये तुम्हारा साथ छोड़ेगा, तभी मैं इसे रख पाऊंगा
    कहीं अपना दिल रखना मुश्किल नहीं है
  • आँखों में आँसू बन गए हैं,
    तुम्हें याद करने के मोड़
  • प्यार की मर्ज़ी मिले या न मिले,
    ये कीमत पूरी हो गई है।
    हारा हुआ इंसान अक्सर खुद को भगवान या रूहानियत के हवाले कर देता है या खुदकुशी के रास्ते पर चल पड़ता है। नंद लाल नूरपुरी ने दूसरा रास्ता चुना। लेकिन शिव कुमार ने अपने प्यार की नाकामी को वजूद के सवाल से जोड़कर अपने दर्द को रूहानी बना दिया। वो अपने प्यार को भगवान के बराबर रखकर पूजते हैं और अपने प्यार को सौ मक्का की तीर्थ यात्रा कहते हैं। इस तरह वो प्यार को सुल्तान बना देते हैं। लेकिन सुखबीर संधू अपने अलगाव की लड़ाई लड़ने के लिए रहस्य या आध्यात्मिकता का सहारा नहीं लेते; वे अपने हालात से अपनी ताकत से लड़ना चाहते हैं। सही मायने में, अल्बर्ट कैमस के ‘मिथ ऑफ़ सिसिफस’ के किरदार की तरह, वे ज़िंदगी की बेतुकी बातों से हार नहीं मानते, बल्कि उससे लगातार लड़ते रहते हैं। भले ही वे अपनी ज़िंदगी में शराब का सहारा लेते हैं, लेकिन अपने शायराना पलों में वे खुद भगवान बनने की राह पर निकल पड़ते हैं और पारंपरिक दैवीय ताकतों और उनके नुमाइंदों को सीधे चुनौती देते हैं।
  • तलाश करो, उस भगवान की जिसकी दैवीय परीक्षा मैं देख सकूं
    मैं क्या कहूं, भगवान के लिए, तलाश करो।
आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक : सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और विकसित भारत की मजबूत नींव

जगत प्रकाश नड्डा

भारत ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार किया है। सरकारी और निजी क्षेत्र में अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जांच केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यह सरकार की ऐसी नीतियों को दर्शाता है, जिनका केंद्र आम नागरिक की स्वास्थ्य सुरक्षा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए काम किया है। इन लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है कि देश में लोगों द्वारा अपनी जेब से स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी कमी आई है। यह खर्च पहले 65 प्रतिशत तक था, जो अब घटकर 43 प्रतिशत रह गया है।

जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात शिशु से लेकर बड़े अस्पताल में इलाज करा रहे कैंसर मरीज तक, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसेमंद, अच्छी गुणवत्ता वाले और किफायती चिकित्सा उपकरण बेहद जरूरी हो गए हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रही है। इसके लिए प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने, गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं बढ़ाने, बीमारियों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और आपात स्थिति से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर निवेश किया जा रहा है। जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, अब जोर एक आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक  क्षेत्र तैयार करने पर है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को और सस्ता, आसानी से उपलब्ध और किसी भी संकट के समय मजबूत बनाना है।

पहले ,भारत कई आधुनिक और जटिल चिकित्सा उपकरणों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर था। इन तकनीकों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तो हुआ, लेकिन इससे इलाज की लागत बढ़ी, आपूर्ति व्यवस्था पर बाहरी निर्भरता बनी रही और इन उपकरणों की पहुंच सीमित रही। इसी जरूरत को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 में देश के भीतर आधुनिक चिकित्सा उपकरण बनाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों को सस्ता बनाना और जांच की लागत कम करना है। सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के पूरे क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, चिकित्सा उपकरण पार्क और दवा एवं चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजना शामिल हैं।

इन पहलों से देश में चिकित्सा उपकरणों के निर्माण, नए शोध, निवेश और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत 50 से अधिक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है, जो वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि भारत धीरे-धीरे दुनिया के चिकित्सा तकनीक क्षेत्र में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर रहा है।

सिर्फ चिकित्सा उपकरणों का निर्माण केंद्र बनने के अलावा, भारत तेजी से आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपना भी रहा है, ताकि लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सके। आधुनिक जांच सुविधाओं, शरीर की अंदरूनी तस्वीर लेने वाली मशीनों, शरीर में लगाए जाने वाले चिकित्सा उपकरणों, गहन चिकित्सा की मशीनों और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती दर पर उपलब्ध कराने से मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होता है। साथ ही इलाज की गुणवत्ता और समय पर इलाज मिलने में भी सुधार होता है। देश में ही चिकित्सा उपकरण बनने से विदेशों से आयात पर निर्भरता घटती है, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होती है और लागत कम करने के अवसर बढ़ते हैं।

भारत का विश्व स्तर पर पहचान बना चुका दवा उद्योग, मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता, तेजी से फैलता डिजिटल ढांचा, तेजी से बढ़ता नए उद्यमों का क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन अगली पीढ़ी की चिकित्सा तकनीक विकसित करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चिकित्सा उपकरण के रूप में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर (एसएमडी) , इंटरनेट से जुड़े चिकित्सा उपकरण, रोबोट आधारित तकनीक और दूर से जांच जैसी नई तकनीकों में भारत के पास देश और दुनिया की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए नए समाधान विकसित करने के बड़े अवसर हैं।

जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां दुनिया के बाजार में विस्तार कर रही हैं, गुणवत्ता भी भारत में बने चिकित्सा उपकरणों की सबसे बड़ी पहचान बनती जा रही है। सरकार नियामक व्यवस्था को मजबूत करने, मान्यता प्राप्त जांच सुविधाओं का विस्तार करने, चिकित्सा उपकरणों की प्रभावशीलता से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है। इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता भी मजबूत होगी।

दुनिया के स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिकित्सा तकनीक  क्षेत्र तैयार करने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा देने वालों, नए उद्यमों और निवेशकों के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। जब प्रयोगशालाओं में तैयार विचार आसानी से कारखानों तक और वहां से मरीजों तक पहुंचते हैं, तभी नए आविष्कारों को वास्तविक लाभ में बदला जा सकता है। सरकार ऐसी स्थिर और पारदर्शी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे शोध, निवेश, तकनीकी साझेदारी और कारोबार करना आसान हो।

भारत जैसे-जैसे विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास एक-दूसरे को और मजबूत करेंगे। एक मजबूत चिकित्सा उपकरण उद्योग उच्च मूल्य वाले उत्पादन, कुशल रोजगार, निर्यात और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देगा। साथ ही इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सस्ती, आसानी से उपलब्ध और किसी भी संकट के समय अधिक मजबूत बनेंगी।

भारत का चिकित्सा तकनीक क्षेत्र एशिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है और दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। फिलहाल इसका आकार 15 से 16 अरब डॉलर है और यह करीब 12 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है। इस वजह से यह देश के सबसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्रों में से एक बन गया है।

विकसित भारत का लक्ष्य गुणवत्ता, नए आविष्कार और सभी को साथ लेकर चलने के आधार पर दुनिया में नेतृत्व करने पर जोर देता है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि नई चिकित्सा तकनीकें भारत की प्रमुख स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करें। इनमें माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग, आपातकालीन चिकित्सा, कैंसर, हृदय रोग और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत लगातार एक आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल भारत में चिकित्सा उपकरण बनाना नहीं है, बल्कि हर नागरिक को समय पर अच्छी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भारत को दुनिया के एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करना है।

(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं।)

जवाहर नवोदय विद्यालय के ऑनलाइन फॉर्म भरने की 10 अगस्त आखिरी तारीख
  • जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू में क्लास 6 में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन जारी है
  • अब तक 2195 बच्चों ने रजिस्टर किया है
  • ऑनलाइन फॉर्म भरने की आखिरी तारीख कल, 10 अगस्त है – प्रिंसिपल निशी गोयल
  • फॉर्म में 11 और 12 अगस्त को करेक्शन किए जा सकते हैं

लुधियाना / सत्ता संदेश

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू (लुधियाना) में एकेडमिक ईयर 2027-28 के लिए क्लास 6 में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम के ऑनलाइन फॉर्म का प्रोसेस जारी है और अब तक 2195 बच्चों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है।

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू की प्रिंसिपल निशि गोयल ने बताया कि फॉर्म भरने की आखिरी तारीख अब कल, 10 अगस्त, 2026 तक बढ़ा दी गई है, जबकि पहले आखिरी तारीख 07 अगस्त, 2026 तय की गई थी। उन्होंने कहा कि जो बच्चे ऑनलाइन अप्लाई करने से चूक गए थे, वे अब बढ़े हुए समय का फायदा उठा सकते हैं।

उन्होंने साफ किया कि जिन स्टूडेंट्स को लगता है कि उनके भरे हुए फॉर्म में कोई गलती है, वे 11 और 12 अगस्त को ऑनलाइन माध्यम से उसे ठीक कर सकते हैं।

प्रिंसिपल निशि गोयल ने आगे कहा कि जो एग्जामिनर फॉर्म भरना चाहता है, उसकी उम्र 01 मई, 2015 से 31 जुलाई, 2017 के बीच होनी चाहिए। एग्जामिनर ने किसी भी सरकारी, सरकारी मदद वाले या मान्यता प्राप्त स्कूल से क्लास 3, 4 और 5 पास की हो और स्टूडेंट लुधियाना जिले का रहने वाला हो। स्टूडेंट ने एकेडमिक सेशन 2026-27 के दौरान पांचवीं क्लास पास की हो। ऑनलाइन एप्लीकेशन भरने के लिए https://navodaya.gov.in लिंक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रिंसिपल धनांसु निशि गोयल ने एलिजिबल बच्चों के पेरेंट्स से अपील की है कि वे अपने बच्चों के ब्राइट फ्यूचर के लिए इस एग्जाम के लिए अप्लाई करें।

डॉ. AVM पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सेमिनार का आयोजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निकट ईसा नगरी पुली में मौसम में बदलाव के दौरान होने वाली वायरल बीमारियों के प्रति छात्रों को जागरूक करने के उद्देश्य से सी.एम.सी. अस्पताल के नर्सिंग विभाग के विद्यार्थियों और स्टाफ द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को डेंगू, मलेरिया, हैजा जैसी खतरनाक बीमारियों के कारणों, लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देना था। इस दौरान जागरूकता के लिए मॉडल, चार्ट और पोस्टर भी तैयार किए गए।

इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और प्रिंसिपल मनीषा गाबा ने सी.एम.सी. से आई टीम का स्वागत करते हुए कहा कि बदलते मौसम के साथ-साथ वायरल बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को शैक्षणिक शिक्षा देने के अलावा अपने आसपास की स्वच्छता और नैतिक गुणों के प्रति भी जागरूक किया जाता है, ताकि ये विद्यार्थी अपने समाज और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य को बेहतर ढंग से निभा सकें।

सेमिनार के दौरान अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों ने स्कूली बच्चों को जमा पानी में पैदा होने वाले मच्छरों के प्रति सावधान करते हुए बताया कि बीमारी को फैलने से पहले ही किस तरह रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर घरों की छतों और खुले स्थानों पर रखे गमलों, पुराने टायरों और कूलरों में जमा पानी डेंगू के मच्छरों के पनपने का कारण बनता है। इन बीमारियों से बचने के लिए हमें अपने घर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने की आवश्यकता है।

इस सेमिनार में स्कूल स्टाफ ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर अमिता राजन, हर्ष बाला, सोनिया, कामिनी, इशिता कत्याल, नवनीत कौर, जसवंत कौर, रूबी वर्मा, रीमा, गुरप्रीत बजाज, कुलदीप कौर, वंदना सूद, निशु, मंजू, हरजीत कौर, मुस्कान, हर्ष बाला और गुरलीन कौर सहित अन्य उपस्थित रहे।

Punjab में Indane XTRALITE NOW लॉन्च, 180 मिनट में LPG डिलीवरी का दावा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

नवाचार और ग्राहक-केंद्रित सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए इंडियन ऑयल के पंजाब राज्य कार्यालय (PSO) ने ‘इंडेन एक्ट्रालाइट नाउ’ ऑयल  के पंजाब राज्य कार्यालय (PSO) ने (Indane XTRALITE NOW) लॉन्च किया। जो वितरक के व्यवसायिक क्षेत्र में दिन के समय दिए गए ऑर्डर के लिए 180 मिनट के अंदर सुनिश्चचित डिलीवरी के साथ 10 किलो का एलपीजी सिलेंडर है।

यह नई पेशकश ग्राहकों को एक स्मार्ट, तेज और अधिक सुविधाजनक एलपीजी अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार की गई है।

प्रमुख लॉन्च कार्यक्रम मैसर्स मिल्खी इंडेन, जीरकपुर में आयोजित किया गया था, और इसका उद्घाटन आशुतोष गुप्ता, कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख, पंजाब राज्य कार्यालय द्वारा परमेश्वर, मुख्य महाप्रबंधक (एलपीजी), पंजाब राज्य कार्यालय, वरिष्ठ अधिकारियों, वितरकों और ग्राहकों की उपस्थिति में किया गया। क्षेत्र में इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ के पहले उपयोगकर्ताओं के रूप में पांच ग्राहकों को नामांकित किया गया। इसके साथ ही, यह उत्पाद पंजाब राज्य कार्यालय के तहत सात बाजारों, अर्थात् जीरकपुर, चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, सुनाम और शिमला में लॉन्च किया गया, जो पूरे क्षेत्र में इसके चरणबद्ध रोलआउट की शुरुआत का प्रतीक है।

सभा को संबोधित करते हुए, आशुतोष गुप्ता, कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख, पीएसओ ने कहा कि “इंडेन एक्ट्रालाइट नाउ नवाचार, सुरक्षा और ग्राहक के प्रति इंडियन ऑयल की प्रतिबद्दता को दर्शाता है। सुनिश्चित 180 मिनट की डिलीवरी और एक हल्के कम्पोजिट सिलेंडर के साथ हम एलपीजी को अपने उपभोक्ताओं के लिए सुलभ और सुविधाजनक बनाते हुए ग्राहक सेवा में नए मानक स्थापित कर रहे है।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री परमेश्वर, मुख्य महाप्रबंधक (एलपीजी), पीएसओ ने कहा कि नई पेशकश को आज के उपभोक्ताओं की बदलती उम्मीदों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह हमारे वितरक नेटवर्क के लिए व्यावसायिक अवसर पैदा करते हुए डिजिटल सुविधा और तेज डिलीवरी के साथ उन्नत कम्पोजिट सिलेंडर तकनीक को जोड़ती है।

10 किलोग्राम का इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ कम्पोजिट सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडरों की तुलना में 50% तक हल्का है, जिससे इसे उठाना और संभालना आसान हो जाता है। सिलेंडर में जंग-मुक्त बॉडी, एलपीजी स्तर की आसान दृश्यता के लिए पारदर्शी पट्टियां और उन्नत सुरक्षा विशेषताएं शामिल है।  ग्राहक न्यूनतम दस्तावेजों के साथ नया कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं, इंडियन ऑयल  वन ऐप (IndianOil ONE App) या www.cx.indianoil.in के माध्यम से बुकिंग कर सकते हैं, और दिन के समय 180 मिनट के भीतर अपना सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। यह पेशकश विशेष रूप से शहरी परिवारों, कामकाजी पेशेवरों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और छोटे परिवारों के लिए उपयुक्त है जो अधिक लचीलापन और सुविधा चाहते हैं।

पारंपरिक घरेलू एलपीजी कनेक्शनों के विपरीत, इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ त्वरित ऑनबोर्डिंग और एक्सप्रेस डिलीवरी के साथ एक परेशानी मुक्त और डिजिटल रूप से सक्षम ग्राहक अनुभव प्रदान करता है, जो नवाचार और सेवा उत्कृष्टता पर इंडियन ऑयल  के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

लॉन्च कार्यक्रम में नए एक्स्ट्रालाइट नाउ ग्राहकों और उत्कृष्ट डिलीवरी कर्मियों का सम्मान भी किया गया, जिसके बाद एक समर्पित एक्स्ट्रालाइट नाउ डिलीवरी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो नवीन, सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार एलपीजी समाधान देने की इंडियन ऑयल  की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ की शुरुआत के साथ इंडियन ऑयल की गति, सुविधा, तकनीक और विश्वास को मिलाकर घरेलू एलपीजी अनुभव को फिर से परिभाषित करना जारी रखे हुए है, जिससे ग्राहक की तुष्टि बढ़ रही है और ऊर्जा सेवा वितरण नें नए मानक स्थापित हो रहे है ।

बाइरैक निदेशक जितेंद्र कुमार ने IISER मोहाली में संभाला प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का कार्यभार

मोहाली / सत्ता संदेश

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) मोहाली को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि प्रतिष्ठित जैव-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) जितेन्द्र कुमार ने 03 अगस्त, 2026 से संस्थान में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है।

डॉ. कुमार जैव-प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण, उद्यमिता तथा विज्ञान नीति के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। आईआईएसईआर मोहाली से जुड़ने से पूर्व वे भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक)के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने भारत के जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाइरैक में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नीति निर्माण, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, वित्तपोषण तंत्र के विकास तथा जैव-प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्ट-अप्स के मार्गदर्शन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से देश में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार और उद्यमिता को उल्लेखनीय गति मिली।
बाइरैक से पूर्व वे बैंगलोर जैव नवाचार केंद्र के प्रबंध निदेशक भी रहे। यह केंद्र भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा कर्नाटक सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की संयुक्त पहल है। इस दायित्व के दौरान उन्होंने जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार तथा स्टार्ट-अप पारितंत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

डॉ. कुमार ने जैव-प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. की उपाधि सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमटेक), चंडीगढ़  से, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से संबद्ध है, प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय एट शिकागो तथा द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टोरल अनुसंधान किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी से प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं व्यावसायीकरण विषय में एमबीए भी प्राप्त किया, जो विज्ञान एवं नवाचार प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। वर्ष 2009 में भारत लौटने के पश्चात उन्होंने आईकेपी नॉलेज पार्क, हैदराबाद में उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने स्टार्ट-अप्स तथा नवाचार पारितंत्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।
अपने विशिष्ट व्यावसायिक जीवन के दौरान डॉ. कुमार ने जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार, अनुप्रयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रबंधन, इनक्यूबेशन तथा उद्यमिता के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने नवाचार पारितंत्र की स्थापना, अनेक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स के मार्गदर्शन, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय जैव-प्रौद्योगिकी तथा स्टार्ट-अप नीतियों के निर्माण तथा अनेक उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रमों का सफल नेतृत्व किया है। उनके योगदान का प्रमाण उनके वैज्ञानिक शोध-पत्रों, पेटेंटों, नीति निर्माण संबंधी पहलों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त अनेक सम्मान एवं पुरस्कारों से मिलता है।

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल त्रिपाठी ने डॉ. जितेन्द्र कुमार का स्वागत करते हुए कहा, “मैं डॉ. जितेन्द्र कुमार का भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में हार्दिक स्वागत करता हूँ। प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं व्यावसायीकरण के क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव न केवल भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली में, बल्कि पूरे ट्राइसिटी क्षेत्र और उससे आगे भी एक सशक्त एवं जीवंत उद्यमशीलता संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का पद ऐसे प्रतिष्ठित पेशेवरों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता की सर्वोच्च ऊँचाइयों को प्राप्त किया हो तथा जो अपने अनुभव एवं ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के इच्छुक हों।”

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के डीन (संकाय), प्रो. जसजीत सिंह बगला ने डॉ. कुमार का स्वागत करते हुए कहा, “हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि डॉ. जितेन्द्र कुमार प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में आईआईएसईआर मोहाली से जुड़े हैं। जैव-प्रौद्योगिकी नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्यमिता तथा विज्ञान नीति के क्षेत्र में उनका असाधारण नेतृत्व हमारे संस्थान के उस प्रयास को और अधिक सशक्त करेगा, जिसके माध्यम से मौलिक अनुसंधान को समाज एवं उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ा जा सके। नवाचार पारितंत्र के विकास तथा स्टार्ट-अप्स के संवर्धन में उनका अनुभव हमारे संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अनुप्रयुक्त अनुसंधान तथा उद्यमशीलता से संबंधित नई संभावनाओं से जोड़ने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।”

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में डॉ. कुमार संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा नवप्रवर्तकों के साथ मिलकर अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करेंगे, उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के मध्य सहयोग को सुदृढ़ करेंगे तथा वैज्ञानिक अनुसंधानों को समाज एवं उद्योग के लिए उपयोगी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित करने की दिशा में कार्य करेंगे।
उनकी नियुक्ति से भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के अनुप्रयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा नवाचार-आधारित शिक्षा को नई गति मिलने की अपेक्षा है।

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली को विश्वास है कि डॉ. कुमार की विशेषज्ञता एवं अनुभव के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्यमिता के क्षेत्रों में नए अवसर विकसित होंगे और संस्थान विज्ञान में उत्कृष्टता तथा उसके सामाजिक उपयोग के अपने उद्देश्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगा।