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जोधपुर को मिला नया एयरपोर्ट टर्मिनल, पीएम मोदी ने लॉन्च की संशोधित ‘उड़ान’ योजना

राजस्थान / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।

नए टर्मिनल का किया निरीक्षण

प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

480 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ टर्मिनल

यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

राजस्थान की विरासत और हरित निर्माण पर विशेष जोर

राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

संशोधित ‘उड़ान’ योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए का प्रावधान

पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित होंगे

योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। 

जैसलमेर के रामगढ़ में 20 किलोवाट आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का उद्घाटन, सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत होगी रेडियो पहुंच

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ में 20 किलोवाट क्षमता वाले आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम आकाशवाणी जयपुर परिसर से आयोजित किया गया।

नए ट्रांसमीटर के शुरू होने के साथ राजस्थान में एफएम ट्रांसमीटरों की कुल संख्या बढ़कर 39 हो गई है। रामगढ़ स्थित यह ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में रेडियो कवरेज उपलब्ध कराएगा और जैसलमेर जिले के करीब 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगा। इससे क्षेत्र के लोगों को सूचनात्मक, शैक्षिक और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में रेडियो प्रसारण को प्रासंगिक और प्रभावशाली बनाए रखने के लिए “डिजिटल फर्स्ट” और “हाइपर-लोकल” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने प्रसार भारती के अधिकारियों को इस दिशा में एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रसारण सेवाओं में स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और शिल्पकारों को अधिक स्थान देने पर भी जोर दिया, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच मिल सके और क्षेत्रीय पहचान को मजबूती मिले।

अश्विनी वैष्णव ने जयपुर में विकसित किए जा रहे आगामी एआई डेटा सेंटर का भी उल्लेख किया और इसे भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे संस्थान आज भी समाज की जड़ों से जुड़े हुए हैं और देश के दूरदराज क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान जमीनी स्तर की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।

नया एफएम ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्रों में आकाशवाणी और दूरदर्शन की पहुंच को मजबूत करेगा। यह पहल “कश्मीर से कच्छ” तक मजबूत प्रसारण अवसंरचना विकसित करने की परिकल्पना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में संचार और सूचना सेवाओं का विस्तार करना है।

कार्यक्रम में राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, जयपुर की सांसद मंजू शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वहीं जैसलमेर के सांसद उमेदराम बेनीवाल वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

जयपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू, 3000 से ज्यादा सैनिक हुए तैनात

जयपुर / सत्ता संदेश

जयपुर के मालवीय नगर स्थित नंदपुरी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर सोमवार सुबह एक बहुत बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा सड़क सीमा में आ रहे विभिन्न अतिक्रमणों को हटाने का अभियान भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में शुरू किया गया है।

मौके पर कई जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध ढांचों को ढहाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इस संवेदनशील कार्रवाई के दौरान जेडीए के कई वरिष्ठ अधिकारी ग्राउंड जीरो पर खुद मौजूद रहकर स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

जेडीए अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार जगतपुरा को जवाहर सर्किल से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को 80 फीट चौड़ा किए जाने की महत्वपूर्ण योजना है। इस सड़क सीमा के भीतर कई बड़े निर्माण आ रहे थे, जिन्हें हटाया जाना बेहद जरूरी था. इस कार्रवाई के तहत सड़क सीमा में आ रहे एक मस्जिद, एक मजार, एक सत्संग भवन और दो मंदिरों के ढांचे को हटाने का काम किया जा रहा है। धार्मिक संवेदनशीलता और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रविवार देर रात से ही पूरे नंदपुरी क्षेत्र में एहतियातन मजबूत बैरिकेडिंग कर दी गई थी ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

जयपुर में भजनलाल सरकार द्वारा अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसमें जेडीए ने नंदपुरी अंडरपास के पास सड़क सीमा में आ रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई के दौरान एक मस्जिद के 70 प्रतिशत हिस्से को भी गिरा दिया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मस्जिद का पिछला हिस्सा हुआ ध्वस्त, कार्रवाई का दायरा बड़ा

जयपुर के मालवीय नगर इलाके में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा की जा रही अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। जेडीए के प्रवर्तन दस्ते ने भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी में नूरानी मस्जिद के पिछले हिस्से को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। सड़क चौड़ीकरण के रास्ते (राइट ऑफ वे) में आ रहे इस पक्के निर्माण को हटाने के बाद अब बुलडोजरों का रुख मस्जिद के मुख्य हिस्से की ओर हो गया है।

सामने पहुंचे बुलडोजर और मलबे के लिए ट्रकों की कतार

मस्जिद के पिछले हिस्से में एक्शन पूरा होने के बाद, अब जेडीए के भारी-कम बुलडोजर और डंपर ट्रक नूरानी मस्जिद के ठीक सामने पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और मलबे के त्वरित निस्तारण के लिए मौके पर ही कई ट्रकों को कतारबद्ध तैनात किया है। रणनीति यह है कि मस्जिद का अगला हिस्सा और बाहरी अतिक्रमण ध्वस्त होते ही मलबे को तुरंत उठाकर मौके से बाहर ले जाया जा सके, ताकि मुख्य मार्ग बाधित न हो और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

डस्ट से न भड़के तनाव, पानी के टैंकरों से लगातार छिड़काव

इस संवेदनशील ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार के आक्रोश या अफवाह को फैलने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन बेहद सतर्क है। जेडीए अधिकारियों के अनुसार, भारी निर्माण ढहाने के कारण उड़ने वाली डस्ट (धूल के गुबार) से भी क्षेत्र में तनाव और दृश्यता की समस्या बढ़ने की आशंका थी। इसे नियंत्रित करने के लिए मौके पर पानी के विशेष टैंकर मंगवाए गए हैं। बुलडोजर कार्रवाई के साथ-साथ लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि धूल को हवा में उड़ने से तुरंत रोका जा सके।

आसपास के मकान छावनी में तब्दील इलाका

प्रशासन ने इस महा-अभियान के तहत सड़क सीमा को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करने के लिए मस्जिद के आसपास बने कई अवैध मकानों और पक्के ढांचों को पहले ही पूरी तरह तोड़ दिया है। वर्तमान में संवेदनशील नूरानी मस्जिद के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियां और 3,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। कानून-व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए जयपुर के चिन्हित थाना क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं और निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू की गई है।

नूरानी मस्जिद के पीछे ध्वस्तीकरण शुरू

जयपुर के मालवीय नगर इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान नूरानी मस्जिद के पीछे बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मस्जिद के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात कर दिया गया है और आसपास के पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। मस्जिद के दोनों ओर अतिक्रमण को ध्वस्त करने का काम तेजी से जारी है।

जयपुर के मालवीय नगर में जेडीए द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेजी से जारी है, जिसके चलते पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और किसी के भी प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सुरक्षा के मद्देनजर वहाँ रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई है, पुलिस के जवानों को भवनों की छतों पर तैनात किया गया है और पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही है। जेडीए की इस कार्रवाई के तहत अब से कुछ ही देर में दो मंदिरों, एक मस्जिद और एक मजार को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जाएगा।

24 घंटे के लिए बढ़ाई गई इंटरनेट बंदी

जेडीए की इस बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के मद्देनजर राजधानी जयपुर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। संभागीय आयुक्त वी. सरवण कुमार ने एक संशोधित आदेश जारी करते हुए जयपुर में इंटरनेट बंदी की अवधि को आगामी 24 घंटे के लिए और बढ़ा दिया है। अब जयपुर में 8 जून रात 12 बजे से लेकर 9 जून रात 12 बजे तक नेटबंदी पूरी तरह लागू रहेगी. प्रशासन के इस फैसले के बाद जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व के अधिकांश थाना क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. इस दौरान 2G, 3G, 4G, और 5G मोबाइल डेटा के साथ-साथ सभी सोशल मीडिया सेवाओं पर पूर्ण रोक रहेगी। व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम सहित अन्य सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म इस आदेश से प्रभावित रहेंगे। इसके साथ ओला ऊबर जैसे कैब और वाहन सुविधा प्रभावित रहेंगे। लोगों को पहले ही अन्य वाहन सुविधा के लिए सतर्क किया गया है। जरूरी दस्तावेज और टिकट अभी ही डाउनलोड करने के लिए कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय इलाके में कानून-व्यवस्था और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

ड्रोन कैमरों से निगरानी और धारा 163 लागू

पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मियों, आरएसी (RAC) के जवानों और उच्च अधिकारियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है, जबकि आसमान से ड्रोन कैमरों और सड़कों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।इसके साथ ही क्षेत्र में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इसके तहत पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के एक जगह एकत्रित होने, किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस या प्रदर्शन करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि भड़काऊ गतिविधि या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान के सेवानिवृत्त एएसपी ने की आत्महत्या, जोधपुर में पुलिस जांच शुरू

जोधपुर / सत्ता संदेश

Rajasthan के जोधपुर शहर के लालसागर इलाके में एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान दशरथ सिंह चरण के रूप में हुई है, जो करीब दो साल पहले पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में लालसागर क्षेत्र में एक नया मकान बनवाया था और लगभग एक सप्ताह पहले ही अपनी पत्नी के साथ वहां रहने आए थे।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पारिवारिक स्थिति, मानसिक तनाव या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण सहित सभी एंगल से जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशरथ सिंह चरण एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हाल ही में नए घर में शिफ्ट होने के बाद सामान्य जीवन जी रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मानसिक दबाव, सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समय पर सहायता बेहद जरूरी हो जाती है।

भिवाड़ी में अवैध पटाखा फैक्टरी में आग, सात मजदूरों की मौत, दो फंसे

जयपुर, 16 फरवरी (भाषा) राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी कस्बे में सोमवार को आतिशबाजी बनाने वाली एक अवैध फैक्टरी में आग लगने से सात लोगों की जलकर मौत हो गई और दो लोग अंदर फंसे रह गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सुमित्रा पारीक ने बताया, “इस घटना में सात लोगों की मौत हुई है। यह एक परिधान फैक्टरी थी, लेकिन अंदर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे।”
उन्होंने कहा कि फैक्टरी में दो लोग फंसे हुए हैं। यह हादसा भिवाड़ी के खुशखेड़ा-करोली औद्योगिक क्षेत्र में हुआ।
पारीक ने कहा, “परिसर को परिधान फैक्टरी के नाम पर किराए पर लिया गया था, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार अंदर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे।”
उन्होंने बताया कि पुलिस को घटना की जानकारी नियमित गश्त के दौरान मिली, इसके बाद तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया।
जिला कलेक्टर आर्टिका शुक्ला और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुक्ला ने मामले की जांच के आदेश दिए।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार फैक्टरी में 20 से अधिक लोग मौजूद थे। आग लगते ही कई मजदूर बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि नौ लोग अंदर फंस गए। इनमें से सात लोग जलकर मर गए। डेढ़ घंटे से अधिक समय बाद आग पर काबू पाया गया। कुछ अस्थियां भी बरामद हुईं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिला प्रशासन को तुरंत राहत और बचाव कार्य करने के निर्देश दिए और वन मंत्री संजय शर्मा को अलवर भेजा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर मोदी के हवाले से कहा कि राजस्थान के भिवाड़ी में आग लगने की घटना, दुखद और बेहद अफसोसजनक है।
मोदी ने कहा, “जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और जांच की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मजदूरों की मौत पर शोक व्यक्त किया।

तू किया चोर बनेगा रे बाबा ! जब एग्जॉस्ट फैन के छेद में फंसा मिला चोर, हैरान करेगा मामला

नेशनल डेस्क: राजस्थान के कोटा शहर से एक बहुत ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक चोर चोरी करने की कोशिश में खुद ही मुसीबत में फंस गया। यह घटना बोरखेड़ा थाना इलाके के प्रताप नगर की है, जहां एक चोर घर के एग्जॉस्ट फैन के छेद से अंदर घुसने की कोशिश में बीच में ही फंस गया।

ऐसे खुला राज: मकान मालिक सुभाष रावत 3 जनवरी को अपनी पत्नी के साथ खाटूश्याम जी गए थे। जब वे अगले दिन सुबह करीब 12:50 बजे लौटे तो स्कूटी को घर के अंदर ले जाते समय उनकी लाइट किचन की दीवार पर पड़ी। उन्होंने देखा कि जिस जगह एग्जॉस्ट फैन लगा था, वह खुला हुआ था और वहां एक युवक आधा अंदर और आधा बाहर लटका हुआ था।

पुलिस की कार्रवाई और फरार साथी: परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। चोर ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। पुलिस मौके पर पहुंची और उसे बाहर निकालकर हिरासत में ले लिया। सुभाष रावत के मुताबिक, चोर का एक और साथी भी था जो उनके आने पर छत के रास्ते भाग गया।

संदिग्ध कार और जांच: पकड़े गए चोर की तलाशी के दौरान उसकी जेब से कार की चाबी मिली। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना से पहले गली में एक संदिग्ध कार घूमती हुई देखी गई थी, जिस पर पुलिस का निशान था। पुलिस अब CCTV फुटेज के ज़रिए दूसरे आरोपियों की पहचान कर रही है और उन्हें पकड़ने के लिए स्पेशल टीमें बनाई गई हैं।

अरावली बचाओ आंदोलन: राजस्थान में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, जानें क्या है मामला

नेशनल डेस्क: अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए राजस्थान और दिल्ली-NCR में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोमवार को राजस्थान के कई जिलों में लोग सड़कों पर उतरे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई।पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियांउदयपुर में कांग्रेस और कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया। जोधपुर में NSUI कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। सीकर में पर्यावरणविदों ने 945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हर्ष पर्वत पर चढ़कर अरावली को बचाने की अपील की।

विवाद का मुख्य कारण—सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर, 2025 के फैसले को लेकर है, जिसमें अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी गई है। इस नई परिभाषा के अनुसार, सिर्फ़ उसी लैंडफ़ॉर्म को अरावली पहाड़ियाँ माना जाएगा जो अपने लोकल लेवल से कम से कम 100 मीटर ऊपर हो। एक्सपर्ट्स और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस क्राइटेरिया के कारण 90 परसेंट से ज़्यादा अरावली पहाड़ियाँ प्रोटेक्शन के दायरे से बाहर हो जाएँगी, जिससे वहाँ माइनिंग और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज़ को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्थान के ‘फेफड़े’ खतरे में –राजस्थान असेंबली में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने अरावली को राजस्थान का ‘फेफड़ा’ और ‘लाइफलाइन’ बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पहाड़ियों को बचाने का फ़ैसला वापस नहीं लिया गया, तो कांग्रेस ज़ोरदार आंदोलन करेगी। एनवायरनमेंटलिस्ट्स के अनुसार, अरावली दिल्ली-NCR का ‘फेफड़ा’ और ‘लाइफलाइन’ है। अरावली के लिए एक नेचुरल सुरक्षा कवच है जो रेगिस्तान को फैलने से रोकता है और ग्राउंड वॉटर लेवल को बनाए रखने में मदद करता है।

गुरुग्राम में भी विरोध प्रदर्शन —हरियाणा के गुरुग्राम में कैबिनेट मिनिस्टर राव नरबीर सिंह के घर के बाहर भी बड़ी संख्या में लोगों ने शांति से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ” के नारे लगाए और मांग की कि सरकार अरावली को पूरी तरह से सुरक्षित क्षेत्र घोषित करे। Aravalli Hills Protest, Rajasthan News, Supreme Court Order, Save Aravalli,

30 करोड़ रुपये का फ्रॉड केस: विक्रम भट्ट और पत्नी की बेल एप्लीकेशन खारिज, 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा

एंटरटेनमेंट डेस्क: मशहूर फिल्ममेकर-डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबर भट्ट को 30 करोड़ रुपये के फ्रॉड केस में कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों की फाइनल बेल एप्लीकेशन खारिज कर दी और उन्हें 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। अब दोनों उदयपुर जेल में रहेंगे।

जानकारी के मुताबिक, विक्रम भट्ट पर आरोप है कि उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन में बड़े मुनाफे का वादा करके उदयपुर के डॉक्टर अजय से अलग-अलग किश्तों में करीब 30 करोड़ रुपये लिए थे। पीड़ित डॉक्टर का आरोप है कि रकम लेने के बाद उन्हें न तो फिल्म की कमाई में हिस्सा दिया गया और न ही उनकी रकम वापस की गई। इसके बाद डॉक्टर ने उदयपुर पुलिस में फ्रॉड का केस दर्ज कराया था।केस दर्ज होने के बाद उदयपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को मुंबई से ट्रांजिट रिमांड पर उदयपुर ले आई।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने सेहत का हवाला देते हुए फाइनल बेल मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने फैक्ट्स और केस डायरी के आधार पर बेल देने से मना कर दिया।मीडिया से बात करते हुए विक्रम भट्ट ने पहले अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था और कहा था कि यह मामला आपसी गलतफहमी का नतीजा है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। हालांकि, पुलिस जांच में गंभीर फैक्ट्स सामने आने के बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस हाई-प्रोफाइल केस ने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में भी हलचल मचा दी है।