ब्रेकिंग न्यूज़
असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा- भारत विकास और आत्मविश्वास के नए दौर में

छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश आत्मविश्वास, सुरक्षा, सुशासन और विकास के नए युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को राष्ट्रसेवा और गरीब कल्याण को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और भारत की वैश्विक पहचान पहले से अधिक मजबूत हुई है।

साय ने अपने संदेश में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है। गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे कई अभियानों ने देश के विकास मॉडल को नई दिशा दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में दोबारा केंद्र की सत्ता संभाली और लगातार तीसरे कार्यकाल में भी उनकी सरकार विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

महानदी जल विवाद को लेकर भाजपा सरकार पिछली बीजद सरकार की गलती को सुधार रही है: ओडिशा के महाधिवक्ता

भुवनेश्वर, दो मार्च (भाषा) ओडिशा के महाधिवक्ता (एजी) पीतांबर आचार्य ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार पिछली बीजद सरकार द्वारा की गई उस ‘‘ऐतिहासिक गलती’’ को सुधारने के लिए कदम उठा रही है, जिससे पड़ोसी छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद उत्पन्न हुआ था।

आचार्य ने पुरी में रविवार को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) के सदस्यों के राज्य दौरे से इतर पत्रकारों को यह बयान दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ में बांधों के निर्माण का विरोध न करके एक ऐतिहासिक गलती की थी। हम ओडिशा के लोगों के हित में स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठा रहे हैं।’’

न्यायाधिकरण के सदस्यों ने हीराकुड जलाशय और सतकोसिया घाटी का दौरा किया तथा सोमवार को वे चिल्का झील जाएंगे।

आचार्य ने कहा, ‘‘इन स्थानों को रामसर स्थल घोषित किया गया है और ये क्षेत्र महानदी के प्राकृतिक जल प्रवाह से सीधे जुड़े हुए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘न्यायाधिकरण के सदस्य जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए ओडिशा का दौरा कर रहे हैं। वे सात से 11 मार्च तक छत्तीसगढ़ का भी दौरा करेंगे।’’

ओडिशा ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी इलाकों में बांध के निर्माण से इसके प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे निचले इलाकों के किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

ओडिशा के इन आरोप के बाद 2018 में इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।