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तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से शांतनु सेन ने दिया इस्तीफा

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Shantanu Sen ने All India Trinamool Congress के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांतनु सेन ने व्यक्तिगत कारणों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कदम को पार्टी के भीतर चल रहे हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन तृणमूल कांग्रेस के उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों और रुख को मीडिया में प्रस्तुत करते थे। वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम पार्टी के भीतर किसी असंतोष या पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करती रही है, और ऐसे में प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस रिक्त पद को कैसे भरता है और क्या शांतनु सेन भविष्य में किसी अन्य भूमिका में पार्टी में सक्रिय रहते हैं।

पं. बंगाल में ED का एक्शन ! कोलकाता और मुर्शिदाबाद में सोना पप्पू और शांतनु सिन्हा के ठिकानों पर छापेमारी

कोलकाता / सत्ता संदेश

ED Raid in West Bengal: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद प्रवर्तन निदेशालय का बड़ा एक्शन सामने आया है। ईडी ने कोलकाता और मुर्शिदाबाद में छापेमारी शुरू की है। ईडी द्वारा सोना पप्पू और शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े लोगों की कुछ बिल्डिंगों में छापेमारी के बाद तलाशी ली जा रही है।

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय का बड़ा एक्शन सामने आया है। ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के गोल्डन ब्वॉय कहे जाने वाले सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े 9 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है। ईडी ने यह कार्रवाई कोलकाता और मुर्शिदाबाद में शुरू की है। जिन जगहों पर तलाशी ली जा रही है, उनमें मो. अली उर्फ मैक्स राजू, सौरव अधिकारी (शांतनु सिन्हा बिस्वास का भतीजा) और शांतनु सिन्हा बिस्वास के मुर्शिदाबाद स्थित ठिकाने शामिल हैं। यह तलाशी आरोपियों और अन्य लोगों से हिरासत में पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की जा रही है।

शांतनु सिन्हा बिस्वास पर कसा शिकंजा

जांच में सामने आया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास और उनके परिवार के नाम पर दर्ज कंपनियों के बैंक खातों में भारी मात्रा में संदिग्ध धन मिला है। इसके अलावा करोड़ों रुपये की संपत्तियों को कागजों पर बहुत कम कीमतों में खरीदने का भी पता चला है, जिसे अपराध की कमाई माना जा रहा है। जांच के दौरान उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। ईडी ने पहले पांच बार समन जारी किया था, लेकिन वे बार-बार पेश होने से बच रहे थे। उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था। बंगाल में सत्ता परिवर्तन होते हुए उन्हें अरेस्ट किया गया था। सरकार ने उनकी पुलिस सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। शांतनु सिन्हा बिस्वास को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी अधिकारियों में गिना जाता था। वे पहले कालीघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं।

सिन्हा का सोना पप्पू से लिंक

कोलकाता पुलिस के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास को ED ने जबरन वसूली, जमीन हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। सिन्हा की गिरफ्तारी की मुख्य वजह ‘सोना पप्पू’ सिंडिकेट से संबंध है। जांच के मुताबिक, शांतनु सिन्हा के तार कुख्यात अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ के आपराधिक गिरोह से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया और जमीन हड़पने व रंगदारी जैसे अवैध कामों में मदद की। इस सिंडिकेट के माध्यम से शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) और गलत वित्तीय लेनदेन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस अकेले लड़ेगी चुनाव, खरगे के आवास पर हुई बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कांग्रेस बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। इस फैसले की पुष्टि कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने की है।

ममता बनर्जी ने भी किया था अकेले लड़ने का ऐलान: कांग्रेस के इस फैसले से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी यह साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा था कि बंगाल में सभी पार्टियां TMC के खिलाफ लड़ती हैं और वे इसके लिए तैयार हैं।

लेफ्ट के साथ गठबंधन पर संशय: गौरतलब है कि साल 2016 और 2021 के चुनावों में कांग्रेस का वामदलों (Left Front) के साथ सीट-शेयरिंग समझौता था। हालांकि, इस बार कांग्रेस ने अब तक लेफ्ट के साथ गठबंधन में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी बिना किसी बैसाखी के चुनावी मैदान में उतरना चाहती है।

क्या है कांग्रेस की रणनीति? बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ लड़ने की बात करती हैं, लेकिन राज्य में वे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और माकपा (CPI-M) को ही पहुँचाती हैं। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी नहीं चाहतीं कि राज्य का अल्पसंख्यक वोट बैंक विभाजित हो, जबकि कांग्रेस इस वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।