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प्रवासन, ऋण-निवेश और कृषि परिवारों की स्थिति आकलन सर्वेक्षणों पर क्षेत्रीय प्रशिक्षण शिविर एवं कार्यशाला आयोजित

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), क्षेत्र संचालन प्रभाग (FOD), स्वास्थ्य एवं शिक्षा, घरेलू उपभोक्ता व्यय, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS), शहरी ढांचा सर्वेक्षण, मूल्य सांख्यिकी तथा औद्योगिक सांख्यिकी जैसे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक विषयों पर व्यापक नमूना सर्वेक्षण आयोजित करता है। ये सर्वेक्षण राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर नीति निर्माण तथा विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराते हैं।

इन सर्वेक्षणों (एनएसएस 81वां दौर), में प्रवासन संबंधी विवरण सर्वेक्षण अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (AIDIS) तथा स्थिति आकलन सर्वेक्षण (SAS) प्रमुख सर्वेक्षण हैं। प्रवासन संबंधी विवरण सर्वेक्षण का उद्देश्य देश में प्रवासन के स्वरूप, प्रवासन के कारणों, प्रवास की अवधि, रोजगार एवं शिक्षा से संबंधित प्रवासन तथा प्रवासन से जुड़े विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी एकत्र करना है।

अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (AIDIS) का उद्देश्य भारतीय परिवारों की परिसंपत्तियों, पूंजी निर्माण तथा ऋणग्रस्तता से संबंधित व्यापक मात्रात्मक जानकारी एकत्र करना है। इसके अंतर्गत परिसंपत्तियों की बिक्री एवं हानि, उधार लेने एवं चुकौती तथा संस्थागत एजेंसियों में परिवारों द्वारा रखी गई जमा राशियों से संबंधित जानकारी भी एकत्र की जाती है।

स्थिति आकलन सर्वेक्षण (SAS) का उद्देश्य कृषि परिवारों की कृषि एवं गैर-कृषि गतिविधियों से प्राप्त आय तथा व्यय संबंधी विस्तृत जानकारी एकत्र करना है, ताकि कृषि परिवारों की औसत मासिक आय का आकलन किया जा सके।

प्रवासन संबंधी विवरण सर्वेक्षण, AIDIS तथा SAS का संचालन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (FOD) द्वारा जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के दौरान किया जाना निर्धारित है।

इन सर्वेक्षणों के अंतर्गत आंकड़ों के संकलन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा हरियाणा राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। प्रशिक्षण सत्र क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा संचालित किए गए तथा शिविर की अध्यक्षता श्री दीपक मेहरा, उप महानिदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने की।

प्रवासन संबंधी विवरण सर्वेक्षण (एनएसएस 81वां दौर), AIDIS तथा SAS पर एक संयुक्त कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 9 से 12 जून, 2026 तक सीएसआईओ (सीएसआईआर), सेक्टर-30, चंडीगढ़ में किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के 80 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में श्री दीपक मेहरा, उप महानिदेशक, एनएसओ (एफओडी), ने विश्वसनीय एवं सटीक आंकड़ों के संकलन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा एकत्रित गुणवत्तापूर्ण आंकड़े देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, प्रवासन की प्रवृत्तियों, परिवारों की ऋणग्रस्तता, कृषि आय तथा परिसंपत्ति स्वामित्व के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण एवं विकास योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

NISCPR-RIS के बीच विज्ञान एवं नवाचार नीति को मजबूत करने के लिए MoU पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, नीति और कूटनीति के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए, राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान ने 6 मई को विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह सहयोग संयुक्त अनुसंधान, नीति विश्लेषण, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से किया जाएगा। यह साझेदारी विज्ञान नीति, संचार, कूटनीति और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में कार्य को बढ़ावा देगी, साथ ही समावेशी एवं सतत विकास के लिए संयुक्त परियोजनाओं, प्रकाशनों, नीतिगत संवादों, कार्यशालाओं और जनसंपर्क गतिविधियों का संचालन करेगी।

RIS के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी असमानताओं जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए विज्ञान कूटनीति को एक महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने आईटीईसी पाठ्यक्रम, आईजीओटी कर्मयोगी प्रशिक्षण, भारतीय विज्ञान कूटनीति मंच के प्रकाशन और दक्षिण एवं आईबीएसए फैलोशिप के माध्यम से वैश्विक साझेदारी सहित आरआईएस की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

CSIR-NISCPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने इस साझेदारी को विकासशील देशों के लिए एक सहयोगात्मक और पारस्परिक लाभप्रद प्रयास बताया, जो कार्य समूहों और संयुक्त प्रकाशनों पर केंद्रित है। उन्होंने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में NISCPR की भूमिका के साथ-साथ CSIR के अनुसंधान एवं विकास तंत्र, एचआईवी दवा नवाचारों, 15 ओपन-एक्सेस पत्रिकाओं पर प्रकाश डाला।

डॉ. राजन सुधेश रत्ना ने विकासशील देशों में विकास के एक प्रेरक के रूप में विज्ञान कूटनीति और सहयोग को मजबूत करने में दक्षिण के माध्यम से आरआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। CSIR-NISCPR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. योगेश सुमन ने ग्रामीण आजीविका और सतत विकास के लिए CSIR प्रौद्योगिकियों के प्रसार में NISCPR की भूमिका पर बल दिया।

RIS की सलाहकार डॉ. स्नेहा सिन्हा ने कहा कि विज्ञान कूटनीति पर कार्यशालाओं और शोध सहित पूर्व के सहयोगों ने भविष्य के जुड़ाव के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। उन्होंने भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन से पहले भारत-अफ्रीका सहयोग पर केंद्रित विकासशील देशों में विज्ञान कूटनीति पर गोलमेज सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रौद्योगिकी साझाकरण तथा विज्ञान कूटनीति के दृष्टिकोण को एक संयुक्त रिपोर्ट में एकीकृत करने पर जोर दिया।