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यूआईडीएआई ने हरियाणा में आधार सेवाओं का विस्तार किया, गुरुग्राम में नया आधार सेवा केंद्र शुरू

हरियाणा / सत्ता संदेश

यूआईडीएआई ने हरियाणा में आधार सेवाओं का विस्तार किया, गुरुग्राम में नया आधार सेवा केंद्र शुरूचंडीगढ़, 20 मई 2026: यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई), क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने हरियाणा में अपनी सेवा वितरण व्यवस्था को और सुदृढ़ करते हुए गुरुग्राम में एक नए आधार सेवा केंद्र (एएसके) का शुभारंभ किया है। यह केंद्र प्लॉट नंबर 804, प्रथम तल, सरस्वती विहार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, चक्करपुर मेन मार्केट रोड, चक्करपुर विलेज, सेक्टर-12, गुरुग्राम – 122002, हरियाणा में स्थित है। केंद्र का उद्घाटन आज निदेशक कर्नल हरमीत सिंह कपूर द्वारा किया गया।

नव स्थापित आधार सेवा केंद्र का उद्देश्य नागरिकों को आधार संबंधी सेवाएं अधिक सुगमता, दक्षता और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराना है। यहां निवासी आधार नामांकन, नाम, पता एवं जन्म तिथि जैसे जनसांख्यिकीय विवरणों में संशोधन के साथ-साथ बायोमेट्रिक अपडेट की सेवाएं भी प्राप्त कर सकेंगे।

इस नए केंद्र के शुरू होने से विशेष रूप से आसपास के कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को बड़ी सुविधा मिलेगी, क्योंकि उन्हें अब आधार सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। केंद्र में आधुनिक अवसंरचना, प्रशिक्षित कर्मियों एवं सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं की व्यवस्था की गई है, ताकि नागरिकों को न्यूनतम प्रतीक्षा समय में बेहतर सेवा अनुभव प्राप्त हो सके।

यूआईडीएआई के अनुसार, इस आधार सेवा केंद्र की स्थापना से मौजूदा केंद्रों पर भीड़ कम होगी, अनुरोधों का त्वरित निपटान सुनिश्चित होगा तथा आधार सेवाओं की समग्र गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इसके साथ ही सेवाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए आधार सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर पहुंच से अधिक निवासी अपने आधार विवरण समय-समय पर अद्यतन रख सकेंगे, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी एवं वित्तीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी।

यूआईडीएआई ने हरियाणा के निवासियों से अपील की है कि वे नामांकन एवं अपडेट संबंधी आवश्यकताओं के लिए इस आधार सेवा केंद्र का उपयोग करें। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे आवश्यक वैध दस्तावेज साथ लेकर आएं अथवा सुविधा हेतु ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें।

अधिक जानकारी के लिए निवासी यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट अथवा अपने निकटतम आधार सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

श्री सौरभ विजय ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

नई दिल्ली, 18 मई 2026: श्री सौरभ विजय ने सोमवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला। वे महाराष्ट्र कैडर के 1998 बैच के IAS अधिकारी हैं।

IIT-दिल्ली से सिविल इंजीनियर होने के नाते, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार में कई पदों पर कार्य किया है।

UIDAI में शामिल होने से पहले वे महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग में प्रधान सचिव (व्यय) थे। कैडर में उनके पूर्व असाइनमेंट में महाराष्ट्र के प्रधान सचिव योजना और विकास आयुक्त, प्रधान सचिव पर्यटन, सचिव चिकित्सा शिक्षा, सचिव उच्च व तकनीकी शिक्षा, इत्यादि शामिल हैं।

उन्होंने केंद्रीय डेप्युटेशन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्वपूर्ण भूमिकाओं में सेवा दी है, जिनमें नई दिल्ली में राष्ट्रपति सचिवालय में निदेशक तथा वाशिंगटन डी.सी. में विश्व बैंक में बांग्लादेश, भूटान, भारत व श्रीलंका के लिए कार्यकारी निदेशक के सलाहकार के रूप में कार्य शामिल है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)  ने निगमन दिवस 2026 मनाया; भारत में डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अपना सहयोग जारी रखा

दिल्ली /सत्ता संदेश

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) अपना निगमन दिवस 2026 मना रहा है। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक खरीद के सहयोग में इसकी निरंतर भूमिका को दर्शाता है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी संस्था, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस स्पेशल पर्पस व्हीकल (जेम एसपीवी) को जेम प्लेटफॉर्म के विकास, प्रबंधन और रखरखाव के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 17 मई 2017 को स्थापित किया गया था। वर्षों से, जेम एक प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में उभरा है, जो देश भर के विक्रेताओं के लिए व्यापार में सुगमता और व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देता है।

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना के अनुरूप स्थानीय क्षमताओं को सरकारी खरीद के अवसरों से जोड़कर घरेलू उद्यमों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन, निर्माण उपकरण, फर्नीचर, वस्त्र और चिकित्सा वस्‍तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रथम श्रेणी के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी देखी गई है।  

आज, इस प्लेटफॉर्म पर 1.36 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और लगभग 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 72% सक्रिय विक्रेता सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, जेम पर मौजूद 11 लाख से अधिक एमएसई को 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए। महिला नेतृत्व वाले एमएसई को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के खरीद ऑर्डर मिले, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्टार्टअप्स को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर मिले, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और सरकारी खरीद तक ​​पहुंच बढ़ाने में जेम की भूमिका को दर्शाता है।

जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा, “जेम की स्थापना सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल खरीद मंच बनाने की परिकल्पना के  साथ की गई थी। आज, जेम घरेलू उद्यमों को खरीद के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।”

जेम निगमन दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हितधारकों के साथ जुड़ाव और ज्ञान साझा करने संबंधी कई पहल आयोजित कर रहा है। समारोह का शुभारंभ 15 मई 2026 को जेम विक्रेता मूल्यांकन कार्यशाला के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य संभावित ओईएम के लिए विक्रेता मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता बढ़ाना था।

इसके अलावा, जेम 21 मई 2026 को “जेम को समृद्ध बनाना” विषय के तहत “जेम मंथन” का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य जेम तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है। जेम 22 मई 2026 को रक्षा सेवाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श सत्र का भी आयोजन करेगा जिसमें रक्षा खरीद और परिचालन आवश्यकताओं के साथ तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रक्रिया सुधार और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 समावेशी शासन के लिए डेटा-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करता है

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

5,000 से अधिक टीमों की तरफ ससमाधान प्रस्तुत करने के साथ, यह डीपीआई इकोसिस्टम में सबसे बड़े डेटा नवाचार चुनौतियों में से एक बन गया

नई दिल्ली, 8 मई 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम में डिजिटल पहचान के क्षेत्र में छात्रों द्वारा किए गए उन बेहतरीन नवाचारों का उत्सव मनाया गया, जिनका उद्देश्य शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाना है।

डिजिटल पहचान डेटा के नवीन और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इस हैकाथॉन ने छात्रों और युवा पेशेवरों को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहां वे ऐसे बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और डेटा-आधारित समाधान विकसित कर सकें, जिनका लक्ष्य समावेशिता, कार्यकुशलता और शासन के परिणामों को बेहतर बनाना है।

लगभग 15,000 टीमों के पंजीकरण और 5,000 से ज़्यादा टीमों की तरफ से समाधान जमा करने के साथ, इस पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस तरह, यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) इकोसिस्टम में डेटा नवाचार के सबसे बड़े चैलेंज में से एक बन गया।

एक सख्त, कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद-जिसमें 5,000 से ज़्यादा प्रविष्टियों की जांच, 30 परियोजनाओं की शॉर्टलिस्टिंग और 15 फाइनलिस्ट टीमों का विस्तृत मूल्यांकन शामिल था-टॉप पांच टीमों को अंतिम समारोह में अपने समाधान पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, कोलकाता और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता की विजेता टीम ने यूआईडीएआई द्वारा साझा किए गए, इकट्ठा किए गए आधार नामांकन और अपडेट डेटासेट का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।

उनके काम से अलग-अलग क्षेत्रों, राज्यों और जनसांख्यिकीय समूहों में नामांकन के रुझानों और बायोमेट्रिक अपडेट के तरीकों के बारे में अहम जानकारी मिली, साथ ही सेवा देने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मिले।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्लेषण की बारीकियों को जनहित के मजबूत नजरिए के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नए प्रयोगों में नीतियों और कामकाज में सुधार को सीधे तौर पर मदद करने की क्षमता है; साथ ही उन्होंने शासन में सबको शामिल करने और कुशलता लाने के लिए डेटा के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के महत्व पर भी जोर दिया।

यूआईडीएआई के सीईओ ने इस पहल के लिए यूआईडीएआई के भविष्य के विजन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन को एक सालाना प्लेटफॉर्म के तौर पर संस्थागत रूप दिया जा सकता है, ताकि डिजिटल पहचान और सार्वजनिक डेटा के इस्तेमाल में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

हैकाथॉन के आने वाले संस्करणों में भी उम्मीद है कि इसमें सिर्फ छात्रों तक ही भागीदारी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शिक्षा जगत, शोधकर्ता, स्टार्ट-अप और अन्य गैर-शैक्षणिक योगदानकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे एक ज्यादा विविध और अलग-अलग विषयों वाला नवाचार इकोसिस्टम तैयार होगा।

यूआईडीएआई डेटा हैकाथॉन 2026, यूआईडीएआई का मुक्त नवाचार, युवाओं को जोड़ने और प्रमाणों पर आधारित नीति-निर्माण के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है। प्रतिभागियों को असल दुनिया के डेटासेट पर काम करने का मौका देकर, इस पहल ने न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया, बल्कि ऐसे समाधानों को भी प्रोत्साहित किया जिनका सीधा असर जनता पर पड़े।

यूआईडीएआई ने हैकाथॉन की सफलता में योगदान देने के लिए सभी प्रतिभागियों, जूरी सदस्यों और साझेदारों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की।

यूआईडीएआई ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक सदृढ़ता को बढ़ाने के लिए एनएफएसयू के साथ हाथ मिलाया

यह सहयोग साइबर सुरक्षा ऑडिट, फोरेंसिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण सहित छह प्रमुख क्षेत्रों में केन्द्रित है

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) ने डिजिटल फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है और भारत के डिजिटल पहचान इकोसिस्टम को आधार प्रदान करने वाले यूआईडीएआई के डिजिटल इकोसिस्टम में साइबर सदृढ़ता को और मजबूत करने के लिए दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाया है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच इस समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस समारोह में यूआईडीएआई के उप महानिदेशक श्री अभिषेक कुमार सिंह और दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा: शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास, सूचना सुरक्षा और प्रणाली अखंडता, फोरेंसिक अवसंरचना और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान शामिल है) तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच, जिसमें एनएफएसयू के छात्रों के लिए प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने कहा कि यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का समर्थन करने वाली सुरक्षा, सदृढ़ता और फोरेंसिक क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत की डिजिटल पहचान प्रणालियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रभबीर सिंह बरार की अपील: जनगणना-2027 में पंजाबी को मातृभाषा दर्ज करें, डिजिटल प्रक्रिया अपनाएं

अमृतसर / सत्ता संदेश

संवाददाता- विक्रमजीत सिंह कैमरामैन- तरजिंदर सिंह

पनसप के चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़ ने आम जनता से जनगणना-2027 में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय जनगणना के सटीक आंकड़ों पर निर्भर करते हैं।

बराड़ ने कहा कि राज्य के विकास से संबंधित कई अहम फैसले जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे बड़ी संख्या में आगे आएं और पंजाबी को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराएं, ताकि उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 का पहला चरण “मकानों की सूचीकरण एवं आवास गणना” है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना प्रक्रिया सरल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित है, जो लोगों को डिजिटल जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करती है।

चेयरमैन बराड़ ने लोगों से इस तकनीक-आधारित प्रक्रिया को अपनाने और सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल से 14 मई तक उपलब्ध स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और एक व्यापक एवं विश्वसनीय राष्ट्रीय डाटाबेस के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि प्रभावी योजना निर्माण और नीति निर्धारण के लिए मजबूत डाटाबेस अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि जनगणना के प्रमाणिक आंकड़े सुशासन की रीढ़ होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कल्याणकारी योजनाएं, बुनियादी ढांचे का विकास और संसाधनों का समान वितरण समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत 15 मई से 13 जून, 2026 तक घर-घर सर्वेक्षण भी किया जाएगा। इस दौरान आवासीय स्थिति, सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित 33 प्रश्न पूछे जाएंगे तथा प्रत्येक घर की गणना की जाएगी, ताकि कोई भी परिवार इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान से वंचित न रह जाए।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की स्व-गणना, नागरिकों से जनगणना 2027 में भागीदारी की अपील

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

हरियाणा में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां तेज़ हो गई हैं और इसके प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं आवास गणना” के तहत स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्वयं स्व-गणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर एक प्रेरणादायक पहल की है।

मुख्य सचिव द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देता है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। जनगणना किसी भी देश के विकास की आधारशिला होती है, जिससे सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों का सही वितरण करने में मदद मिलती है।

इस अवसर पर जनगणना निदेशालय हरियाणा के निदेशक डॉ. ललित जैन और विशेष सचिव राजस्व हरियाणा हेमा शर्मा भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि स्व-गणना प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर स्व-गणना पोर्टल पर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज करें। इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

सरकार का उद्देश्य है कि जनगणना 2027 को तकनीकी रूप से सशक्त और अधिक सहभागिता वाला बनाया जाए, ताकि हर नागरिक की सही और पूरी जानकारी दर्ज हो सके। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान सफल होगा और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

सी-डॉट ने “साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म के सहयोगात्मक विकास” के लिए जंप्स ऑटोमेशन के साथ साझेदारी की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य साइबर जागरूकता पैदा करना और संगठनों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना है

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने सी-डॉट कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम (सीसीआरपी) के तहत जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और उद्यमों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवोन्‍मेषी गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म विकसित करना है।

एक समारोह के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदक, बोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना और पारंपरिक प्रशिक्षण को एक आकर्षक, संवादमूलक और प्रभावी शिक्षण अनुभव में बदलना है। इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर से बचाव और समय सीमा के भीतर संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित वास्तविक सिमुलेशन परिदृश्य शामिल होंगे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगठन साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

इस सॉल्‍यूशन में एक सशक्त पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग प्रणाली के साथ-साथ एक एआई-संचालित व्यवहार विश्लेषण इंजन शामिल होगा जो उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करेगा, चुनौती की जटिलता को गतिशील रूप से समायोजित करेगा और उभरते साइबर खतरों के साथ सामग्री को अपडेट रखेगा। इसे जंप्स ऑटोमेशन की एआई और स्वचालन विशेषज्ञता एवं सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार तथा सुरक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं के संयोजन से बनाया जाएगा।

यह भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सामाजिक प्रभाव डालने और साइबर सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित सी-डॉट सुविधाओं में संपूर्ण सत्यापन के साथ एक संरचित विकास, परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करेगी। इस प्लेटफॉर्म को भविष्य में उद्यमों के साथ एकीकृत करने के प्रावधानों के साथ एक वाणिज्यिक-स्तरीय एसएएएस सॉल्‍यूशन के रूप में तैनात किए जाने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने एक प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता मंच विकसित करने में इस सहयोग के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मनिर्भर भारत के विजन के प्रति सी-डॉट की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने, घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सक्षम बनाना है, जिससे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता और लचीलेपन की संस्कृति को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर श्री रोहन चंदक ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को संवादमूलक और प्रभावशाली बनाने में प्लेटफॉर्म की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक परिवर्तन लाना और मानव-संबंधित साइबर जोखिमों को कम करना है।

सी-डॉट के बारे में:

टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और तैनाती से जुड़ा है। सी-डॉट ने उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी के माध्यम से दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सी-डॉट सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम (सीसीआरपी) आरंभ किया है। इस सहयोगी अनुसंधान एवं विकास नीति ढांचे के तहत, सी-डॉट अपने नेतृत्व वाली परियोजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप, संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आमंत्रित करता है। फंडों के अतिरिक्‍त, सी-डॉट स्वदेशी अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सूत्रधार, एकीकरणकर्ता और संसाधन प्रदाता के रूप में कार्य करता है।

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के बारे में:

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी एक प्रौद्योगिकी सॉल्‍यूशन कंपनी है जिसकी एआई, स्वचालन और अनुकूलित उद्यम एआई सॉफ्टवेयर विकास में विशेषज्ञता है। कंपनी जटिल व्यावसायिक और सामाजिक चुनौतियों को हल करने के लिए नवोनमेषी, डेटा-संचालित समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

भारत मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभरा है : नैसकॉम अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं खंडित आपूर्ति शृंखलाओं के कारण वैश्विक कंपनियां अब केवल लागत दक्षता के बजाय भरोसे तथा मजबूती को प्राथमिकता दे रही हैं जिससे भारत एक मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभर रहा है।

‘नैसकॉम ग्लोबल कॉन्फ्लुएंस 2026’ में नांबियार ने कहा कि निर्यात पर काफी हद तक निर्भर प्रौद्योगिकी उद्योग असाधारण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के पुनर्गठन ने देशों एवं कंपनियों के प्रौद्योगिकी साझेदारी के तरीके को मूल रूप से बदल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ पहले सभी केवल लागत एवं दक्षता को ही प्राथमिकता देते थे… अब वह दौर खत्म हो चुका है। दक्षता महत्वपूर्ण है लेकिन यह निर्णायक कारक नहीं है। मजबूती अब कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन सभी प्राथमिकताओं के बीच भारत एक उपयुक्त स्थिति में है जो इसे कारोबार के लिए एक बेहद सक्षम देश बनाता है।’’

नांबियार ने कहा कि दुनिया भर के देश और कंपनियां अब यह मूल प्रश्न पूछ रही हैं कि उनका भरोसेमंद साझेदार कौन होगा और किस देश के साथ वे दीर्घकालिक साझेदारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक ‘‘विश्वसनीय लोकतंत्र’’ होने के साथ-साथ अपने विशाल आकार और विविध जनसंख्या के कारण नवाचार के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला भी है।

भारत की ताकत का एक प्रमुख आधार उसका डिजिटल प्रतिभा भंडार है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 60 लाख पेशेवर और व्यापक उद्योग में अतिरिक्त 30-40 लाख लोग शामिल हैं। यह परिवेश अब कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, उत्पाद अभियांत्रिकी एवं साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहा है।

नांबियार ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की वैश्विक संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उन्होंने आधार एवं यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) जैसे मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके मूल सिद्धांत जैसे उपयोगकर्ता की सहमति, गोपनीयता, विस्तार क्षमता एवं परस्पर संचालन..दुनिया के लिए उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई के साथ मिलकर डीपीआई एक बड़ी शक्ति बन सकता है।’’

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में भारत के देर से शुरुआत करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नांबियार ने कहा, ‘‘ अंततः भारत के पसंदीदा साझेदार बनने की कहानी केवल प्रौद्योगिकी की नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों एवं साझा आकांक्षाओं की भी है। प्रौद्योगिकी के इस नए दौर में कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता।’’