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हेगसेथ ने भारत-पाक संघर्षविराम पर ट्रंप के दावे का किया समर्थन, भारत को बताया हिंद-प्रशांत रणनीति का प्रमुख साझेदार

सिंगापुर / सत्ता संदेश

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने शनिवार को राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने तथा संघर्षविराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया।

सिंगापुर में आयोजित Shangri-La Dialogue के दौरान अपने संबोधन और बातचीत में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से किया जाना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। नई दिल्ली कई अवसरों पर इस नीति को स्पष्ट रूप से दोहरा चुकी है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर

हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को और करीब लाती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत के योगदान की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, खुफिया साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक नजर

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दक्षिण एशिया, चीन, ताइवान, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने क्षेत्रीय स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ का बयान एक ओर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

हालांकि भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी भूमिका को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना रखते हैं, विशेषकर रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में।

भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, पीएम मोदी से करेंगे अहम मुलाकात

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनकी यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव को कम करने और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दिल्ली पहुंचने के बाद रूबियो कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। वह भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग, व्यापार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों समेत कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे।

इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।

रूबियो नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लेंगे। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूबियो का यह दौरा भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा भरने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

चीन से दोस्ती के 75 साल पूरे होने पर पाकिस्तान जारी करेगा विशेष स्मारक सिक्का

इस्लामाबादा / सत्ता संदेश

Pakistan ने China के साथ राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 75 पाकिस्तानी रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा की है।

पाकिस्तान सरकार के अनुसार यह स्मारक सिक्का दोनों देशों के लंबे और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक होगा। चीन और पाकिस्तान ने वर्ष 1951 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, जो पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के दो साल से भी कम समय बाद शुरू हुए थे।

पाकिस्तान, चीन के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला मुस्लिम देश माना जाता है। पिछले सात दशकों में दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक, व्यापारिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्मारक सिक्का दोनों देशों की “ऑल वेदर फ्रेंडशिप” को दर्शाने के साथ-साथ द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती देने का प्रतीकात्मक कदम भी है।

‘होर्मुज में सिर्फ हमारे नाविक मारे गए’: 60 देशों की बैठक में भारत ने दुनिया को चेताया

इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन की पहल पर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए आयोजित 60 से अधिक देशों की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक में भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है।

इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि होर्मुज संकट में अब तक 3 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं, जो विभिन्न विदेशी जहाजों पर कार्यरत थे। भारत ने जोर देकर कहा कि वह एकमात्र ऐसा देश है जिसने खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के दौरान अपने नागरिकों की जान गंवाई है।

ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा: विदेश सचिव ने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी (LNG) गुजरता है, और इसके बंद होने से वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है।

कूटनीति की अपील: भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के जरिए रास्ता निकालने की अपील की है। भारत का मानना है कि इस पूरे संकट का समाधान केवल बातचीत और शांतिपूर्ण कूटनीति से ही संभव है।

सप्लाई पर असर: ईरान की सेना (IRGC) द्वारा स्ट्रेट को अवरुद्ध किए जाने से भारत के साथ-साथ चीन, जापान, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की पेट्रोल-डीजल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।यह बैठक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की सरकार द्वारा वैश्विक व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए बुलाई गई थी।

ईरान का इजरायल पर ताबड़तोड़ हमला: मिडिल-ईस्ट में छठे दिन भी भीषण जंग जारी

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार सुबह ईरान ने इजरायल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं, जिससे मध्य पूर्व (मिडल-ईस्ट) में जारी युद्ध अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इस हमले के जवाब में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों और उसके परमाणु कार्यक्रमों पर जबरदस्त प्रहार किए हैं।युद्ध की विभीषिका केवल जमीन तक सीमित नहीं है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया, जिसमें 87 शव बरामद किए गए हैं। इजरायली सेना ने लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों और बेरूत के दक्षिणी इलाकों को भी निशाना बनाया है।इस भीषण जंग का मानवीय और वैश्विक प्रभाव भी दिखने लगा है।

अब तक ईरान में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान और इजरायल में भी दर्जनों लोग मारे गए हैं। युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है और लाखों यात्री विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना की कार्रवाई की सराहना की है, जबकि इजरायल ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य ईरान के नेतृत्व को खत्म करना है।

जापान में मुस्लिम कब्रिस्तानों पर लगा बैन; मृतकों की अस्थियां मूल देश भेजने का आदेश जारी

टोक्यो: जापान सरकार ने देश में मुस्लिम कब्रिस्तानों (Muslim Cemeteries) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। सरकार के इस नए आदेश के अनुसार, अब जापान में शवों को दफनाने की अनुमति नहीं होगी और मृतकों की अस्थियों को उनके मूल देश (Country of Origin) वापस भेजना होगा।

शवदाह संस्कृति का हवाला : जापानी अधिकारियों का कहना है कि जापान में शवदाह (Cremation) संस्कृति प्रचलित है, इसलिए विदेशी समुदायों को भी स्थानीय नियमों का पालन करना होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्थियों को उनके देश वापस भेजने की व्यवस्था में वह सहायता प्रदान करेगी।

ओसाका का एकमात्र कब्रिस्तान भी होगा बंद: बता दें कि जापान के ओसाका शहर में वर्तमान में केवल एक मुस्लिम कब्रिस्तान है, जिसे नए आदेश के तहत अब बंद कर दिया जाएगा।

जापान में पहले से ही सड़कों पर नमाज पढ़ने, लाउडस्पीकर पर अज़ान देने और नई मस्जिदों के निर्माण पर प्रतिबंध लागू है।2 लाख मुस्लिमों पर पड़ेगा असर जापान में लगभग 2 लाख मुस्लिम रहते हैं, जिनमें से अधिकांश इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आए प्रवासी मजदूर हैं।

वर्ष 2025 के इस नए कानून के लागू होने पर मुस्लिम समुदाय ने विरोध जताया है, लेकिन जापानी कानून के तहत विदेशी धार्मिक प्रथाओं को स्थानीय नियमों के अधीन रखा गया है।

स्पेन में भयानक ट्रेन हादसा: दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर में 20 लोगों की मौत, 70 से ज़्यादा घायल

इंटरनेशनल डेस्क: स्पेन के कॉर्डोबा प्रांत में एक बहुत ही दर्दनाक ट्रेन हादसा हुआ है, जहाँ दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर हो गई। इस हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 70 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 25 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कैसे हुआ हादसा? हादसा कॉर्डोबा के एडमुज इलाके में हुआ। जानकारी के मुताबिक, मलागा से मैड्रिड जा रही एक हाई-स्पीड ट्रेन अचानक पटरी से उतरकर दूसरे ट्रैक पर पहुँच गई, जहाँ सामने से आ रही मैड्रिड-ह्यूएलवा ट्रेन से उसकी ज़ोरदार टक्कर हो गई। हादसे के समय दोनों ट्रेनों में करीब 500 यात्री सवार थे।

घटना का मंज़र: टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि ट्रेन के चार डिब्बों के एक्सल उड़ गए और एक डिब्बा ढलान से नीचे गिर गया। कॉर्डोबा फायर चीफ फ्रांसिस्को कार्मोना ने बताया कि एक ट्रेन पूरी तरह से तबाह हो गई। हादसे की वजह से मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच ट्रेन सर्विस रोक दी गई हैं।

बचाव काम में मुश्किलें: हादसा बहुत दूर और पहाड़ी इलाके में हुआ, जिसकी वजह से राहत और बचाव टीमों को पीड़ितों तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है। स्थानीय लोग खुद से पानी, खाना और कंबल लेकर मदद कर रहे हैं। पुलिस, फायर ब्रिगेड और रेड क्रॉस की टीमें लगातार बचाव काम में लगी हुई हैं। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हादसे पर गहरा दुख जताया है।