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KYC के 2025-26 अंतिम आंकड़े जारी, ‘वोकल फॉर लोकल’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने पिछले 12 सालो में विकास और परिवर्तन की असाधारण यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई जो अब तक सर्वाधिक है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी अब केवल पारंपरिक उत्पाद नहीं रह गई है बल्कि यह ‘नए भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन गई है। खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन में नए मानदंड स्थापित करते हुए देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया और उसे दिशा दी है।

केवीआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनंतिम आंकड़े जारी किए

नई दिल्ली में राजघाट के गांधी दर्शन पर स्थित केवीआईसी के कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए इसके अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में विगत 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने विगत वर्षों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2024-25 में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी प्रकार, वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2023-24 में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है

अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह उल्लेखनीय प्रदर्शन न केवल ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान कर रहा है बल्कि भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रभावशाली मार्गदर्शन, महात्मा गांधी से मिली प्रेरणा और देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत लाखों कारीगरों की कड़ी मेहनत को इस उपलब्धि का श्रेय दिया। केवीआईसी के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि जहां वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्राम उद्योग उत्पादों का उत्पादन 26,109 करोड़ रुपये का था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें लगभग पांच गुना वृद्धि हुई जो 380 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,25,296 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31,154 करोड़ रुपये थी वहीं इसमें लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई जो 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में 1,87,105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह अब तक बिक्री का उच्चतम आंकड़ा है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी के वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। इनका उत्पादन वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का था जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,974 करोड़ रुपये हो गया। यह लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, खादी वस्त्रों की बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये हो गई है जो इसमें लगभग 628 प्रतिशत की वृद्धि है। खादी के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर प्रोत्साहन और इसके प्रचार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार के विस्तार में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री के नए कीर्तिमान

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2013-14 में ग्रामोद्योग सामग्रियों का उत्पादन जहां 25,298 करोड़ रुपये था वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है जो इसमें लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, उनकी बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,79,236 करोड़ रुपये हो गई जो लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। ग्रामोद्योग क्षेत्र ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोग कार्यरत थे वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.99 करोड़ हो गया जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से प्रेरित होकर ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी गई है। परिणामस्वरूप, यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार को मजबूत करने और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है।

रोजगार सृजन में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

केवीआईसी ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित गतिविधियों में वर्ष 2013-14 में क्रमिक रूप से वृद्धि के साथ रोजगार 1.30 करोड़ था जो इस क्षेत्र में 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया। इससे ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर होती है।

पीएमईजीपी ने स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति प्रदान की है

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयां स्थापित की गईं और इन इकाइयों के लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के बदले सरकारी खर्च पर 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए। योजना की शुरूआत से अब तक कुल 10,84,679 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के बदले 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई है। इस पहल के माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत टूल-किट के वितरण के माध्यम से कारीगरों का सशक्तीकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अब तक 51,230 इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील, 2,46,099 मधुमक्खी पालन के लिए बक्से और मधुमक्खियों के छत्ते, 2,674 स्वचालित और पैडल से चलने वाली अगरबत्ती बनाने की मशीनें, 7,669 जूते बनाने और मरम्मत करने के टूल-किट, 836 पेपर प्लेट और दोना बनाने की मशीनें, एसी मरम्मत, मोबाइल मरम्मत, सिलाई, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर के लिए 7,571 टूल-किट, काष्ठ शिल्प, बेकार लकड़ी से बने सामान और लकड़ी के खिलौने बनाने के लिए 5,138 मशीनें और ताड़ के गुड़, तेल घानी निकालने और इमली प्रसंस्करण के लिए 1,789 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। इस योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 37,769 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। विगत चार वर्षों की समीक्षा से संकेत मिलता है कि 2022-23 में 21,874, 2023-24 में 29,540, 2024-25 में 38,904 और 2025-26 में 37,769 मशीनें और उपकरण वितरित किए गए। इस प्रकार, ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अब तक कुल 3,23,006 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए हैं और इस प्रकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा

केवीआईसी ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इनमें से 47,382 प्रशिक्षु महिलाएं थीं जो कुल संख्या का लगभग 59 प्रतिशत हैं। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत 2025-26 के दौरान 28,180 महिला उद्यमियों ने व्यावसायिक इकाइयां स्थापित कीं जिससे 3,09,980 महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। यह आंकड़ा महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5,00,000 कारीगरों में से 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के साथ यह क्षेत्र महिला नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% तक की वृद्धि

कारीगरों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 4 रुपये प्रति गट्ठर से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति गट्ठर हो गया है। यह पारिश्रमिक में लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

सरकारी खरीद, प्रदर्शनी में बिक्री और राष्ट्रीय ध्वजों की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही, खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी खरीद बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये हो गई है जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग में वृद्धि को दर्शाती है। इसी प्रकार, खादी उत्पादों की प्रदर्शनियों और विपणन की पहलों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री हुई जिससे बाजार विस्तार और उपभोक्ताओं की सहभागिता को मजबूती मिली है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये थी वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.35 करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन अभियानों के प्रभाव और खादी के उपयोग के प्रति जनता में बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है।

भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शी-मार्ट्स के माध्यम से पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक रूपरेखा तैयार की


दिल्ली /सत्ता संदेश

डीएवाई-एनआरएलएम ने पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए शी-मार्ट्स पर राष्ट्रीय परामर्श का नेतृत्व किया

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से 14-15 मई , 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा के मेफेयर कन्वेंशन हॉल में शी-मार्ट्स (स्वयं सहायता उद्यमी-ग्रामीण परिवर्तन के लिए विपणन के अवसर) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श ने बजट घोषणा – 2026 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया। इस परामर्श की मेजबानी ओडिशा आजीविका मिशन (ओएलएम), मिशन शक्ति विभाग, ओडिशा सरकार ने की और राष्ट्रीय सहायता संगठन (एनएसओ) के रूप में पीआरएडीएएन ने इसे सुगम बनाया।

राज्य मिशन निदेशकों, सीईओ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड के प्रतिनिधियों, क्षेत्र विशेषज्ञों, विकास कार्यकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों ने एक साथ मिलकर महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों और बाजार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया।

इस परामर्श का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जमीनी प्रतिक्रिया, सुझावों और प्रासंगिक जानकारियों के माध्यम से शी-मार्ट्स पहल के परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देना था। प्रमुख विषयों में संस्थागत संरचना, वित्तपोषण मॉडल, अभिसरण मार्ग, निगरानी प्रणाली, व्यावसायिक प्रक्रियाएं, शासन संरचनाएं, प्रौद्योगिकी एकीकरण और कार्यान्वयन रणनीतियां शामिल थीं।

उद्घाटन सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार ने किया, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से मुख्य उद्घाटन भाषण दिया। अपने मुख्य भाषण में, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डीएवाई-एनआरएलएम का भविष्य उद्यम विकास और बाज़ार एकीकरण में निहित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी-आधारित संस्थागत मॉडलों के बजाय, महिलाओं के समूहों द्वारा संचालित, समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा और एकत्रीकरण प्रणालियों के रूप में उभरना चाहिए।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री स्वाति शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस राष्ट्रीय परामर्श का उद्देश्य एक ऐसे कार्यकारी मंच के रूप में काम करना है, जहाँ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मसौदा रूपरेखा की गहन समीक्षा कर सकें, कार्यान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान कर सकें और बड़े पैमाने पर इसे लागू करने के लिए व्यावहारिक विकल्प सुझा सकें।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी वीबी-जीराम-जी की प्रमुख विशेषताओं को उजागर करने के लिए इस परामर्श में शामिल हुईं।

ओडिशा आजीविका मिशन की राज्य मिशन निदेशक डॉ. मोनिका प्रियदर्शनी ने मिशन शक्ति और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से विकेंद्रीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में ओडिशा के अनुभव पर प्रकाश डाला।

डीएवाई-एनआरएलएम की ग्रामीण आजीविका विभाग की निदेशक, डॉ. मोलिश्री ने शी-मार्ट्स पहल के विकास और रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया और आजीविका संवर्धन से उद्यम-आधारित ग्रामीण बाजार प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत सरकार के वीबी-जीराम-जी की सहायक आयुक्त सुश्री दीक्षा सुप्याल बिष्ट ने वीबी-जीराम-जी और शी-मार्ट्स के बीच संभावित अभिसरण के अवसरों पर चर्चा की, विशेष रूप से महिला-केंद्रित बुनियादी ढांचे, मांग सृजन और बाजार समर्थन प्रणालियों के संबंध में।

पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण “ग्रामीण विपणन के लिए एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में ‘शी-मार्ट्स’ पर आयोजित राष्ट्रीय पैनल चर्चा थी। इस पैनल ने शी-मार्ट्स के लिए स्केलेबल डिज़ाइन सिद्धांतों पर विचार-विमर्श करने हेतु सरकार, वित्त, प्रौद्योगिकी और सामाजिक उद्यम क्षेत्रों के विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाया। इस परामर्श में व्यापक उप-समूह विचार-विमर्श भी शामिल था, जिसमें पाँच विषयगत समूहों ने शी-मार्ट्स के मसौदा परिचालन ढाँचे की गहन समीक्षा की; इस समीक्षा में और अधिक विस्तार, जोड़, हटाव और किन पहलुओं से बचना है—इन सभी बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।

परामर्श के दूसरे दिन मानव संसाधन संरचना एवं महिला नेतृत्व, तकनीकी डिजाइन एवं कार्यान्वयन रणनीति तथा क्षमता निर्माण संरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने महिला नेतृत्व वाली शासन प्रणाली और सामुदायिक स्वामित्व को बनाए रखते हुए पेशेवर खुदरा प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

दो-दिवसीय परामर्श के दौरान, इस बात पर एक मज़बूत आम सहमति बनी कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी पर निर्भर खुदरा दुकानों के बजाय, विकेंद्रीकृत, महिलाओं के नेतृत्व वाले, पेशेवर रूप से प्रबंधित और समुदाय के स्वामित्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

परामर्श प्रक्रिया राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, डीएवाई-एनआरएलएम और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों की ओर से शी-मार्ट्स के लिए अंतिम परिचालन दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करने और देश भर में चरणबद्ध कार्यान्वयन का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2029 तक 3 करोड़ अतिरिक्त ‘लखपति दीदी’ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, मंत्रालय ने एसआरएलएम को ‘शी-मार्ट्स’ स्थापित करने में सहायता देने का भी संकल्प लिया है। ये शी-मार्ट्स ऐसे टिकाऊ ग्रामीण विपणन मंच होंगे जो पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले उत्पादक समूहों के लिए आय के अवसर, उद्यम विकास, ब्रांडिंग और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का किसान हित में निर्णायक कदम, 4,886 करोड़ रु. से अधिक की MSP सुरक्षा

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक में 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी खरीदी को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी

महाराष्ट्र के चना उत्पादकों के लिए बड़ा फैसला, श्री  शिवराज सिंह चौहान ने खरीद सीमा बढ़ाकर 8.19 लाख मीट्रिक टन की

लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार प्रतिबद्ध, किसानों को औने-पौने दाम से मिलेगी राहत- श्री शिवराज सिंह

किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और बाजार में मजबूरी में बिक्री की स्थिति से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में रबी 2026 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन कर दी गई है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपए से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।

किसान हित में केंद्र सरकार का एक और बड़ा निर्णय

कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 69.66 करोड़ रु. से अधिक होगा। इस निर्णय से कर्नाटक के सूरजमुखी उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।

केंद्र सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहतकारी साबित होगा, जिन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका के कारण मजबूरी में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

महाराष्ट्र के चना किसानों को बड़ी राहत

इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के दौरान राज्य में पीएसएस के तहत चने की अधिकतम खरीद मात्रा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन करने को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 4,816.80 करोड़ रु. से अधिक होगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चना खरीद की समय-सीमा में 30 दिनों का विस्तार करते हुए इसे 29 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निर्धारित अवधि में अपनी उपज की बिक्री पूरी नहीं कर पाए थे। अब अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सकेगा और उन्हें बाजार के दबाव में कम कीमत पर बिक्री नहीं करनी पड़ेगी।

किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और कृषि उपज की खरीद प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसानोन्मुख बने। कर्नाटक में सूरजमुखी और महाराष्ट्र में चने की खरीद संबंधी ये निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील और सक्रिय है। इन फैसलों से न केवल संबंधित राज्यों के किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण भी मजबूत होगा। लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।