ब्रेकिंग न्यूज़
PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…21-05-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ में आज का दिन घटनाओं से भरा रहा। अमृतसर में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया, तो वहीं पंजाब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। इसके साथ ही भीषण गर्मी का प्रकोप और अपराध से जुड़ी कई अन्य प्रमुख खबरों ने दिनभर सुर्खियां बटोरीं।

पंजाब-चंडीगढ़ की 10 बड़ी खबरें विस्तार से:

1. AAP नेता की अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, एक महिला की मौत : अमृतसर में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अशोक कुमार के तीन मंजिला घर में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। इस ब्लास्ट के बाद घर में आग लग गई, जिसमें सुमन नाम की महिला की झुलसकर मौत हो गई और गुरप्रीत नामक महिला गंभीर रूप से घायल है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के घरों की दीवारें तक हिल गईं।

2. हाईकोर्ट का आदेश: पंजाब सरकार को 30 जून तक देना होगा DA : पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य के 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को 30 जून तक IAS और IPS अधिकारियों के समान महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए। वर्तमान में IAS अफसरों को 58% जबकि अन्य कर्मचारियों को केवल 42% DA मिल रहा था।

3. जालंधर में क्रूरता: पति ने तवे से वार कर पत्नी को मार डाला : जालंधर में एक व्यक्ति ने घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी के सिर पर रसोई के तवे से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। आरोपी पति, जिस पर पहले भी नेपाल में हत्या का केस दर्ज है, वारदात के बाद खुद थाने पहुँच गया, हालांकि पुलिस के अनुसार वह अभी फरार है।

4. पठानकोट: किराना स्टोर में आग बुझाने के दौरान पिता-पुत्र की मौत : पठानकोट में एक किराना स्टोर की पहली मंजिल पर लगी आग को बुझाते समय धुएं के कारण दम घुटने से पिता और उनके इकलौते बेटे की मौत हो गई। दोनों आग बुझाने ऊपर गए थे लेकिन बेहोश होकर वहीं झुलस गए। बेटे की शादी महज 3 साल पहले ही हुई थी।

5. लुधियाना में हादसा: डिवाइडर से टकराई थार, स्टूडेंट की जान गई : लुधियाना में जिम से लौट रहे पांच दोस्तों की तेज रफ्तार थार गाड़ी बेकाबू होकर डिवाइडर से जा टकराई। इस हादसे में गाड़ी चला रहे छात्र आर्यन वीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके 4 अन्य दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए।6. मोगा: नशामुक्ति केंद्र से गार्डों को पीटकर 30 मरीज फरार: मोगा के एक सरकारी नशामुक्ति केंद्र में मरीजों और स्टाफ के बीच विवाद के बाद हंगामा हो गया। मरीजों ने गार्डों के साथ धक्का-मुक्की की और केंद्र का ताला तोड़कर 30 मरीज वहां से भाग निकले। यह पूरी घटना सीसीटीवी (CCTV) में कैद हो गई है।

7. चंडीगढ़ के नामी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी : चंडीगढ़ के डीपीएस (DPS) और चितकारा इंटरनेशनल जैसे बड़े स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। ईमेल में ‘खालिस्तान’ का जिक्र किया गया और रेल ट्रैक पर धमाकों की चेतावनी दी गई। हालांकि, जांच के दौरान स्कूलों में कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

8. भीषण गर्मी का कहर: बठिंडा में पारा 46.6 डिग्री पहुँचा : पंजाब और चंडीगढ़ में ‘सीवियर हीटवेव’ का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बठिंडा में तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुँचा है। प्रशासन ने अस्पतालों में विशेष हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट्स स्थापित की हैं और 26 मई तक भीषण गर्मी की चेतावनी दी है।

9. कनाडा स्पाउस वीजा के नियम सख्त, अब IELTS होगा जरूरी: कनाडा जाने के इच्छुक पंजाबियों के लिए बुरी खबर है। अब स्पाउस वीजा (Spouse Visa) के लिए जीवनसाथी को भाषा परीक्षा (IELTS) पास करना अनिवार्य होगा। नए नियमों के तहत अब केवल उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों के जीवनसाथी को ही ओपन वर्क परमिट मिल सकेगा।

10. बच्ची के किडनैपिंग मामले पर सांसद हरभजन सिंह हुए ट्रोल : मोहाली में साढ़े 4 साल की बच्ची के दिनदहाड़े हुए अपहरण के मामले में ट्वीट करने पर सांसद हरभजन सिंह सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए। यूजर्स ने उनके राजनीति में आने और पार्टी बदलने पर सवाल उठाए, जिस पर भज्जी ने भी तीखे जवाब दिए।

लुधियाना में कांग्रेसी यूथ नेता के शोरूम पर हमला: पार्किंग विवाद के बाद 5 नकाबपोशों ने मचाया उत्पाद, कर्मचारी घायल

पंजाब डेस्क: पंजाब के लुधियाना स्थित जवाहर कैंप इलाके में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ शाम करीब 4 बजे कांग्रेसी यूथ नेता अरुण की कपड़े की दुकान ‘द डेनिम क्लब’ पर नकाबपोश बदमाशों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने न केवल दुकान में तोड़फोड़ की, बल्कि वहां मौजूद एक कर्मचारी को बेरहमी से पीटकर घायल भी कर दिया।

वारदात का विवरण:

हमलावर और हथियार: सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के अनुसार, 5 नकाबपोश बदमाश हथियारों के साथ दुकान में दाखिल हुए। उन्होंने दुकान के शीशे तोड़ दिए और वहां रखे टेबल-कुर्सियों से हमला शुरू कर दिया।

कर्मचारी पर जानलेवा हमला: बदमाशों ने दुकान में काम करने वाले लव सोंधी को निशाना बनाया, जो पंजाब पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा है। फुटेज में बदमाश उसे बुरी तरह पीटते हुए नजर आ रहे हैं। घटना के वक्त दुकान के मालिक अरुण वहां मौजूद नहीं थे।

हमले की वजह (पार्किंग विवाद): इस हमले की मुख्य वजह सुबह के समय हुआ एक मामूली पार्किंग विवाद बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, दुकान के बाहर एक एक्टिवा खड़ी करने को लेकर अरुण की एक युवक से बहस हुई थी, जिसके साथ एक लड़की भी थी। वह युवक जाते समय धमकी देकर गया था और आशंका है कि उसी ने शाम को अपने साथियों के साथ इस वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस की कार्रवाई: घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने घायल कर्मचारी के बयान दर्ज कर लिए हैं और फुटेज के आधार पर बदमाशों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने सुलझाया मुद्दा

लुधियाना: पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की है कि राज्य की विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में पिछले कई दिनों से चल रही सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों की हड़ताल आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई है।

समाधान और मुख्य समझौते:यह निर्णय सफाई कर्मचारियों की एक 35 सदस्यीय समिति (जिसमें 5 सदस्यीय कोर कमेटी शामिल थी) और कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया।कर्मचारियों की मुख्य मांगें आउटसोर्स किए गए कामगारों को पक्का करने और स्थानीय निकायों की अन्य समस्याओं से जुड़ी थीं।

मंत्री चीमा ने बताया कि कई मांगों पर तुरंत सहमति बन गई है, जबकि चुनाव आचार संहिता के कारण बाकी बचे मुद्दों के समाधान के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है। सरकार ने इन सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक महीने की समय-सीमा तय की है।

राजनीतिक पलटवार: हड़ताल के समाधान के साथ-साथ हरपाल चीमा ने बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बिट्टू द्वारा मुख्यमंत्री को ‘आईएसआई एजेंट’ कहे जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे 3 करोड़ पंजाबियों का अपमान बताया। चीमा ने बीजेपी को “पंजाब विरोधी” करार दिया और बिट्टू व सुनील जाखड़ की पुरानी चुप्पी पर सवाल उठाए।

उपराष्ट्रपति ने सरकारी स्कूलों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने का आह्वान कियाउपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा- ‘ईमानदारी से कड़ी मेहनत करो, सफलता में विनम्र रहो’

आंध्र प्रदेश/ सत्ता संदेश

आंध्र प्रदेश में गुंटूर जिले के स्कूली छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी राधाकृष्णन से मुलाकात की।

सरकारी स्कूलों के 27 लड़कियों सहित 41 मेधावी छात्रों के इस समूह ने कक्षा 10 की परीक्षाओं में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया था और वर्तमान में वे दिल्ली के शैक्षिक दौरे पर हैं।

सरकारी स्कूल के गरीब और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को शैक्षिक दौरे पर दिल्ली लाने की पहल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे दौरे छात्रों को कक्षा से बाहर सीखने और उनके ज्ञान का विस्तार करने में मदद करते हैं। उन्होंने छात्रों से बातचीत करके खुशी व्यक्त की।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सभी सफल लोगों को जीवन में संघर्ष, असफलता और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां किसी व्यक्ति को अधिक मजबूत, अधिक आत्मविश्वासी और सफलता के प्रति अधिक दृढ़ संकल्पित बनाती हैं। छात्रों को अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति से निराश न होने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाएगी।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को याद दिलाया कि देश के कई महान वैज्ञानिक, प्रशासक, शिक्षक, नवप्रवर्तक, उद्यमी और राजनीतिज्ञ सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों से ही निकले हैं।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने बताया कि उन्होंने भी एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम में पढ़ाई की थी और इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा जीवन को बदलने, परिवारों को ऊपर उठाने, समुदायों को मजबूत करने और राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने का सबसे शक्तिशाली साधन है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी स्कूलों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने सांसदों और विधायकों से सरकारी स्कूलों के सुधार और सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का भी आग्रह किया।

पिछले एक दशक में देश की उल्लेखनीय आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक विकसित भारत के सपने की ओर आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में छात्रों के सपने और आकांक्षाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि 41 मेधावी छात्रों में से 27 लड़कियां थीं। उन्होंने कहा कि यह देश में नारी सशक्तिकरण को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को मादक पदार्थों और हानिकारक व्यसनों से दूर रहने की सलाह दी, जिनमें सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी शामिल है। उन्होंने छात्रों से खेलकूद, पठन-पाठन और रचनात्मकता को प्राथमिकता देने तथा अपनी पढ़ाई, लक्ष्यों और परिवार एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के समापन में, उपराष्ट्रपति ने छात्रों को तीन सिद्धांतों को हमेशा याद रखने की सलाह दी: ईमानदारी से कड़ी मेहनत करना, सफलता में विनम्र रहना और ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना। उन्होंने सभी छात्रों को उज्ज्वल, सार्थक और सफल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री पेम्मासानी चंद्र शेखर और पश्चिम गुंटूर विधानसभा की सांसद श्रीमती गल्ला माधवी उपस्थित थीं।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर लंबे


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की गुणवत्ता और रखरखाव की समीक्षा की

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आज नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टमटा और श्री हर्ष मल्होत्रा ​​के साथ-साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी और परियोजना के संवेदक उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान, श्री गडकरी ने टिकाऊ और कुशल राजमार्ग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यान्वयन, गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मजबूत सड़क नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

श्री गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोकथाम के उपायों को लागू करते हुए पूरे नेटवर्क में सड़क सुरक्षा और स्थायित्व बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रत्‍युत्तर प्रणाली स्थापित करके मानसून की व्यापक तैयारियों को सुनिश्चित करें।

रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

किसी भी संदिग्ध गतिविधि या उसमें लिप्त व्यक्ति की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें ताकि रेलवे को निशाना बनाने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके

 रेलवे को निशाना बनाने वाली हाल की घटनाओं के मद्देनजर रेल मंत्री ने नई दिल्ली में फील्ड अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की

आधुनिक तकनीक का उपयोग करके फील्ड से खुफिया जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है: अश्विनी वैष्णव

रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, सीसीटीवी जैसे नवीनतम तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। रेलगाड़ियों, यात्रियों, स्टेशन परिसर और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आज नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में देश भर के फील्ड अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। रेल भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी इस बैठक में उपस्थित थे।

हाल ही में हुई आगजनी की कुछ घटनाओं सहित कई मामलों की प्रारंभिक जांच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। भारतीय रेलवे ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इनकी सक्रिय रूप से जांच कर रहा है। कई मामलों में, रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई से बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिली है। खुफिया प्रणालियों को मजबूत करने और सूचनाओं को तेजी से संसाधित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा, रेलवे मंत्रालय यात्रियों को यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में प्रतीक्षा करते समय असामाजिक गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संदिग्ध व्यक्ति को देखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना देने को कहा गया है।

सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में, बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से जमीनी स्तर से खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया। प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने, रेलवे नेटवर्क में सीसीटीवी कवरेज का विस्तार करने और रेलवे बोर्ड मुख्यालय तथा फील्ड जोन के बीच परिचालन सुरक्षा तालमेल को सुधारने पर भी बल दिया गया। बैठक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, कैमरों की विशिष्टताओं को उन्नत करने और एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों को तैनात करने पर भी विचार किया गया। बैठक में रेलवे नेटवर्क में अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन के लिए आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के बीच सूचना साझाकरण तंत्र को बेहतर बनाकर आपसी तालमेल को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूएमएमआईडी (उम्‍मीद) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया; कहा- जीनोमिक और सटीक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य तय करेगी


दिल्ली / सत्ता संदेश

यूएमएमआईडी: दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से पीड़ित परिवारों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप और किफायती स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय पहल

चिकित्सा का पूरा भविष्य जीन और जीनोम आधारित व्यक्तिगत उपचार की ओर अग्रसर है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- उम्‍मीद यह दर्शाता है कि विज्ञान और सार्वजनिक नीति किस प्रकार जीवन को बदल सकते हैं

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज दुर्लभ आनुवंशिक विकारों/रोगों के लिए यूएमएमआईडी (वंशानुगत विकारों के इलाज की अनूठी विधियां) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत धीरे-धीरे एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है जहां स्वास्थ्य सेवा, निदान और उपचार तेजी से जीनोम-आधारित, सटीक और प्रत्येक रोगी की आनुवंशिक प्रोफ़ाइल के अनुसार व्यक्तिगत होते जाएंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार दशकों तक उपेक्षित रहे क्योंकि निदान ही कठिन था, उपचार दुर्गम था और दवाएं या तो अनुपलब्ध थीं या अत्यधिक महंगी थीं, इसलिए सभी परिवारों के लिए निदान और इलाज को व्यवहार्य, वहनीय और सुलभ बनाने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय तंत्र का निर्माण करना आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने यूएमएमआईडी (उम्मीद) को भारत में सटीक चिकित्सा के भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह पहल देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को जीन और जीनोम-आधारित चिकित्सा देखभाल की अगली पीढ़ी के लिए भी तैयार करेगी।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली के पृथ्वी भवन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्र को यूएमएमआईडी नेटवर्क समर्पित करने के लिए आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने यूएमएमआईडी संकलन का विमोचन किया और आनुवंशिक विकारों के निदान, परामर्श, जागरूकता अभियान और कार्यक्रम निगरानी तक राष्ट्रव्यापी पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से यूएमएमआईडी डैशबोर्ड का शुभारम्भ किया।

इस कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले; डीबीटी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुचिता नीनावे; वरिष्ठ वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, यूएमएमआईडी कार्यान्वयन संस्थानों के प्रतिनिधि और देश भर के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संगठनों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने लगातार किफायती, सुलभ, निवारक और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया है, स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मजबूत किया है और सस्ती दवाओं तक पहुंच को व्यापक बनाया है, साथ ही साथ शीघ्र निदान और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रणालियां भी विकसित की हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार एक मूक लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें परिवार अक्सर निदान और उपचार की तलाश में वर्षों तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत कम आबादी को प्रभावित करने के बावजूद, ये विकार प्रभावित परिवारों पर भारी भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक बोझ डालते हैं और इसलिए अन्य किसी भी गंभीर बीमारी की तरह ही इस पर भी राष्ट्रीय ध्यान देने और स्वास्थ्य देखभाल को लेकर संवेदनशील होने की जरूरत है।

चिकित्सा जगत से जुड़े अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुर्लभ आनुवंशिक विकारों को ऐतिहासिक रूप से मुख्यधारा की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सीमित महत्व दिया गया है, क्योंकि ये कम प्रचलित हैं और इनकी निदान प्रक्रिया जटिल है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अक्सर निदान में देरी, जागरूकता की कमी और रोगियों के लिए अपर्याप्त उपचार की सुविधा उपलब्ध होती है। उन्होंने यह भी कि भारत की व्यापक आनुवंशिक विविधता इस चुनौती को और भी जटिल बनाती है और इसके लिए प्रारंभिक जांच, आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व परामर्श, चिकित्सकों के प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता के एक मजबूत तंत्र की जरूरत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इस कठिन लेकिन सामाजिक परिवर्तनकारी मिशन को हाथ में लेने की सराहना करते हुए कहा कि यूएमएमआईडी यह दर्शाता है कि कैसे विज्ञान, करुणा और जन नीति समय पर हस्तक्षेप और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से पीड़ा को कम करने के लिए एक साथ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व और नवजात शिशु स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श, चिकित्सकों की क्षमता निर्माण और सामुदायिक आउटरीच को एकीकृत जन स्वास्थ्य मॉडल के तहत एकीकृत करते हुए एक राष्ट्रीय ढांचा सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि स्क्रीनिंग और निदान सेवाओं के माध्यम से इस कार्यक्रम से पहले ही लगभग तीन लाख लोगों को लाभ मिल चुका है और आकांक्षी जिलों तथा वंचित क्षेत्रों में इसका विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से उन्नत निदान और परामर्श के लिए लगभग 30 निदान केंद्र स्थापित करने में भी मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि उन्नत जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा महानगरों से बाहर भी आम नागरिकों तक पहुंचे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यूएमएमआईडी के माध्यम से प्राप्त अनुभव सटीक चिकित्सा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा, जहां मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार प्रोटोकॉल रोगियों की व्यक्तिगत आनुवंशिक प्रोफाइल पर आधारित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आनुवंशिक चिकित्सा और परमाणु चिकित्सा दो प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं जो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा को नया रूप दे सकते हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यूएमएमआईडी पहल ने वैज्ञानिक हस्तक्षेप, सहयोगात्मक जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और शीघ्र निदान के माध्यम से हजारों परिवारों को आशा की किरण दिखाई है। उन्होंने कहा कि भारत की आनुवंशिक विविधता वैज्ञानिक नवाचार और व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक हैं।

इससे पहले, उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए डॉ. सुचिता नीनावे ने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, परामर्श और क्षमता निर्माण तक पहुंच में सुधार करके वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल ने समन्वित संस्थागत साझेदारी के माध्यम से दुर्लभ और वंशानुगत रोगों के इलाज के लिए एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाने में मदद की है।

इस कार्यक्रम में यूएमएमआईडी पहल का एक संक्षिप्त विवरण, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों पर प्रस्तुतियां और इस पहल की यात्रा, प्रभाव और भविष्य की रूपरेखा को उजागर करने वाली एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी शामिल था।

“टीडीबी-डीएसटी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी आधारित एसटीईएम गतिविधि किट के व्यावसायीकरण के लिए भोपाल स्थित अनसोज़ क्रिएशन्स को सहयोग प्रदान किया है”

भोपाल / सत्ता संदेश

भारत के स्वदेशी शैक्षिक प्रौद्योगिकी और अनुभवात्मक शिक्षण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी आधारित एसटीईएम गतिविधि किट का व्यावसायीकरण” नामक परियोजना के लिए भोपाल स्थित मेसर्स अनसोज़ क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और युवाओं के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) पर आधारित शैक्षिक किटों की एक व्यापक श्रृंखला के उत्पादन के लिए एक उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के व्यापक ढांचे के अंतर्गत नवाचार-आधारित शिक्षा, स्वदेशी शैक्षिक प्रौद्योगिकियों और भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास को बढ़ावा देने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

प्रस्तावित उत्पाद पोर्टफोलियो में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम, सेंसर और रीयल-टाइम फीडबैक तंत्र को एकीकृत किया गया है ताकि गहन और अंतःक्रियात्मक शिक्षण अनुभव तैयार किए जा सकें। एसटीईएम किट छात्रों में व्यावहारिक प्रयोग, समस्या-समाधान, विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो पारंपरिक निष्क्रिय शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़ते हैं।

ये उत्पाद यांत्रिक डिजाइन, शिक्षण विधियों और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कि संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) को मिलाकर एक एकीकृत शिक्षण इकोसिस्टम बनाते हैं जो भौतिक शैक्षिक उपकरणों को डिजिटल बुद्धिमत्ता के साथ जोड़ता है। इन समाधानों का उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय के पाठ्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों की वैचारिक समझ और व्यावहारिक अनुप्रयोग को मजबूत करना है।

यह परियोजना एसटीईएम किट, शैक्षिक खिलौने और इलेक्ट्रॉनिक लर्निंग मॉड्यूल की बढ़ती घरेलू मांग को भी पूरा करती है, जो वर्तमान में आयातित उत्पादों का वर्चस्व वाला क्षेत्र है। कंपनी का स्वदेशी डिजाइन, स्थानीय विनिर्माण और पर्यावरण के प्रति जागरूक उत्पादन प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करना देश में आत्मनिर्भर शैक्षिक प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देने की उम्मीद है। वैश्विक स्थिरता मानकों के अनुरूप, किटों में उत्पाद की सतहों, आवरणों और पैकेजिंग घटकों में पर्यावरण के अनुकूल और जैव-अपघटनीय सामग्री का उपयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत की भविष्य की नवाचार क्षमता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि हम युवा शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को कितनी प्रभावी ढंग से पोषित करते हैं। स्वदेशी एसटीईएम शिक्षण प्रौद्योगिकियों के लिए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का समर्थन अनुभवात्मक शिक्षा, गहन तकनीक आधारित शिक्षण इकोसिस्टम और अगली पीढ़ी के लिए नवाचार-आधारित कौशल विकास को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेसर्स अनसोज़ क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इस सहायता से कंपनी की उन्नत एसटीईएम गतिविधि किटों के उत्पादन को बढ़ाने की क्षमता में उल्लेखनीय मजबूती आएगी। इन किटों का उद्देश्य विभिन्न आयु समूहों के लिए अनुकूलित, अनुभवात्मक और व्यक्तिगत संज्ञानात्मक शिक्षण को सक्षम बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भारत में भविष्य के लिए तैयार शिक्षण इकोसिस्टम के निर्माण और नवाचार-प्रेरित प्रतिभाओं के पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम के लिए MDI, गुड़गांव के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया

गुड़गांव / सत्ता संदेश

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के मैनेजमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MTI) और मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI), गुड़गांव ने 20 मई, 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी के नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में हुआ यह समझौता, SAIL में भविष्य की कमान संभालने वाले लीडर्स को तैयार करने के उद्देश्य से एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम्स पर मिलकर काम करने के लिए किया गया है।

यह साझेदारी अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ जोड़ेगी। इसके तहत कस्टमाइज्ड लीडरशिप प्रोग्राम्स, रणनीति और इनोवेशन पर आधारित लर्निंग इंटरवेंशन, मापने योग्य व्यावसायिक प्रभाव के लिए ‘एक्शन लर्निंग’, ओवरसीज लर्निंग प्रोग्राम, संयुक्त रिसर्च व कंसल्टिंग और कंपनी के अधिकारियों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए केस स्टडीज शामिल होंगे। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज के साथ तालमेल बिठाते हुए संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करना है।

इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर SAIL के एमटीआई (MTI) के कार्यपालक निदेशक (HR-L&D) श्री संजय धर और एमडीआई (MDI), गुड़गांव की प्रोफेसर सुमिता राय (Dean–Industry Connect) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर SAIL के निदेशक (कार्मिक) श्री के. के. सिंह और सेल तथा एमडीआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।