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दोस्ती में दगाबाजी: गाजियाबाद में गोल्ड मेडलिस्ट पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या, साथी खिलाड़ी ने लिया ‘शिकायत’ का बदला

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले 24 वर्षीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस हत्या को किसी और ने नहीं, बल्कि चिराग के ही पुराने दोस्त और साथी पैरा खिलाड़ी यश खटीक ने अंजाम दिया है।

हत्या की वजह: खेल से बाहर होने का बदला पुलिस पूछताछ में आरोपी यश खटीक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। यश ने बताया कि वह और चिराग स्कूल के दिनों से ‘ब्लाइंड कैटेगरी’ में एक साथ प्रैक्टिस करते थे। कुछ समय पहले, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान चिराग ने यश के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके कारण यश का क्वालिफिकेशन रद्द हो गया और वह खेल से बाहर हो गया। इसी बात की रंजिश में यश ने पिस्तौल का इंतजाम किया और मौका पाकर चिराग की हत्या कर दी।

दो दिन पहले ही जीता था गोल्ड मेडल ; चिराग त्यागी की मौत ने खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है। महज दो दिन पहले ही उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता था। इस जीत के बाद उनका चयन अक्टूबर 2026 में जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स के लिए हुआ था। चिराग बुधवार सुबह घर से हॉस्टल जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन दोपहर बाद उनका शव साईं कुंज इलाके में मिला।

पुलिस की कार्रवाई: गाजियाबाद के पुलिस उपायुक्त (DCP) धवल जायसवाल के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर आरोपी यश खटीक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल बरामद करने के लिए छापेमारी कर रही है और यह भी जांच रही है कि क्या इस वारदात में कोई और भी शामिल था।

जालंधर: नशा तस्करों की सूचना देने वाले सरपंच की इलाज के दौरान मौत; 3 गिरफ्तार, शहीद के दर्जे की मांग

पंजाब डेस्क: जालंधर के गांव बूटा छन्ना के सरपंच और जमहूरी किसान सभा के नेता महिंदर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई है। उन पर 28 फरवरी को उस समय हमला किया गया था जब वे अपनी पत्नी के साथ सुबह साढ़े 6 बजे खेत जा रहे थे। 2 बाइकों पर सवार होकर आए 5 हमलावरों ने उन पर घात लगाकर हमला किया था।

नशा तस्करों के खिलाफ मुहिम का बने शिकार: ग्रामीणों और किसान संगठनों का आरोप है कि सरपंच महिंदर सिंह पंजाब सरकार की ‘नशे के विरुद्ध युद्ध’ मुहिम के तहत पुलिस को चिट्टा (नशा) बेचने वालों की जानकारी दे रहे थे। लोगों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि पुलिस ने तस्करों पर कार्रवाई करने के बजाय सरपंच की मुखबिरी की सूचना ही तस्करों को दे दी, जिसके बाद यह हमला हुआ।

पुलिस कार्रवाई और मांगें सरपंच का इलाज: अरमान अस्पताल में चल रहा था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से 3 को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि 2 अब भी फरार हैं। सरपंच की मौत के बाद अब परिवार और प्रदर्शनकारी उन्हें ‘शहीद’ का दर्जा देने और गांव के स्कूल का नाम उनके नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं।