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17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान, बैंकों की ओर से जनभागीदारी पर जोर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत देशभर के बैंकों द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना के अनुसार, अभियान के दौरान पंजाब में नागरिकों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक स्थलों, अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों और क्लीननेस टारगेट यूनिट्स (CTUs) में विशेष स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करना और स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही ‘कबाड़ से जुगाड़- वेस्ट टू वेल्थ’ और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को बैंक कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता की शपथ के साथ की गई। अभियान के दौरान समावेशिता और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित विभिन्न स्वच्छता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

वहीं, 1 अक्टूबर को सुबह 8 बजे “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” के आह्वान के साथ श्रमदान गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाएगा।

अभियान के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन शिविरों में स्वास्थ्य जांच, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का वितरण और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

अभियान के सफल संचालन के लिए आम नागरिकों से भी स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। लोगों से सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया है।

सहभागिता की शक्ति: भारत टीबी के खिलाफ जंग में कैसे निर्णायक मोड़ ला रहा है
श्री जगत प्रकाश नड्डा
आज, जब भारत एक और टीबी-मुक्त भारत अभियान - एक 100 दिवसीय अभियान - की शुरुआत कर रहा है, तो मैं टीबी को समाप्त करने की हमारी यात्रा को अत्यंत गर्व और नई आशा के साथ याद करता हूँ। हाल के वर्षों में, भारत की टीबी के खिलाफ प्रतिक्रिया असाधारण रही है, जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदृष्टि से प्रेरित जनभागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना पर आधारित है। समाज आधारित इस समग्र दृष्टिकोण ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शक्ति साबित की है, जैसे कि मिशन इंद्रधनुष जैसी प्रमुख पहलों की सफलता को आगे बढ़ाना और सामुदायिक स्तर पर 'स्वस्थ महिलाएं, मजबूत परिवार' के संदेश को सुदृढ़ करना। दिसंबर 2024 में शुरू किए गए 100 दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान के अनुभव ने जनशक्ति में हमारे विश्वास को और मजबूत किया है।
एक चिकित्सा अभियान के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब एक जन आंदोलन बन चुका है। इसके परिणाम स्वयं ही सब कुछ बयां करते हैं: भारत में 2015 से टीबी के मामलों में 21% की गिरावट आई है—जो वैश्विक दर से लगभग दोगुनी है—साथ ही टीबी से होने वाली मृत्यु दर में भी 25% की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि जब विज्ञान, व्यवस्था और समाज मिलकर काम करते हैं तो क्या हासिल किया जा सकता है।
आज, भारत में टीबी के खिलाफ लड़ाई सामूहिक भागीदारी की शक्ति को दर्शाती है। केंद्रीय मंत्रालयों से लेकर ग्राम पंचायतों तक, डॉक्टरों से लेकर जन प्रतिनिधियों तक, हर कोई इसमें शामिल है। यहां तक ​​कि जिन मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है, वे भी टीबी से जीत हासिल करने वाले अन्य लोगों का समर्थन कर रहे हैं। जिन मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है, वे भी टीबी से ठीक हो चुके अन्य लोगों की मदद कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 25 अन्य मंत्रालयों, सभी पंचायती राज संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के साथ मिलकर उनकी विशेषज्ञता, नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को साझा करने के लिए हाथ मिलाया है।
टीबी रोगियों को मानसिक और सामाजिक सहायता प्रदान करने, उपचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुधारने और उनकी गरिमा को बहाल करने के लिए 2 लाख से अधिक मेरा भारत स्वयंसेवकों ने पंजीकरण कराया है।
विज्ञान और नवाचार का प्रभाव
हमारी रणनीति नए साक्ष्यों और उभरती चुनौतियों के जवाब में लगातार विकसित होती रही है। भारत के राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षणों से पता चला है कि आधे मरीज़ों में विशिष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। इसके चलते लक्षणहीन संवेदनशील आबादी में सक्रिय परीक्षण की ओर बदलाव आया है। लक्षणहीन मामले संक्रमण फैलाते हैं – एक ऐसा रोगी जिसका परीक्षण नहीं हुआ है, अनजाने में दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं, इसलिए शुरुआती जांच न केवल एक आवश्यकता है बल्कि एक नागरिक जिम्मेदारी भी है।
एआई-सक्षम छोटी एक्स-रे मशीनों और उन्नत आणविक परीक्षण तकनीक से लैस, निकश्या वाहन सबसे अधिक जोखिम वाले समुदायों के लिए आसान परीक्षण की सुविधा प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 20 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप 32.65 लाख टीबी के मामले सामने आए हैं, जिनमें 10.9 लाख लक्षणहीन मामले भी शामिल हैं, जिनका अन्यथा इलाज संभव नहीं है। इस गति को बनाए रखते हुए, टीबी मुक्त भारत अभियान के अगले 100 दिनों में 3,000 से अधिक एआई-संचालित छोटे एक्स-रे उपकरण और अगली पीढ़ी की निदान मशीनें तैनात की जाएंगी।
डेटा-आधारित उपकरण उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों की पहचान करने में मदद करेंगे जहां लक्षित परीक्षण का सबसे बड़ा प्रभाव हो सकता है।

भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। घनी आबादी और संवेदनशील समुदायों को देखते हुए, यदि परीक्षण और देखभाल को मजबूत नहीं किया गया तो यह बीमारी अनजाने में फैल सकती है। इसीलिए हम औपचारिक बस्तियों, प्रवासी श्रमिक समूहों और अन्य कमजोर आबादी जैसे उच्च जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
आगे का रास्ता
जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, हमारा कार्य स्पष्ट होता जाता है; प्राप्त गति को बनाए रखना और इसे और भी तेज करना। भारत एक राष्ट्र है,जब हम साथ मिलकर काम करते हैं, तो सफलता हमेशा मिलती है। हमने पोलियो उन्मूलन के लिए साथ मिलकर काम किया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, हमने रिकॉर्ड समय में एक अरब से अधिक लोगों को कोविड-19 का टीका लगाया।'मेड इन इंडिया' विकास रणनीति के साथ, हम अपेक्षा से कहीं अधिक निश्चितता की ओर बढ़ रहे हैं। हम इस साझा मिशन में प्रत्येक नागरिक, संगठन और युवा मंच को शामिल करके शीघ्र निदान को बढ़ावा देना, निदान तक पहुंच का विस्तार करना और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ाना जारी रखेंगे। भारत का टीबी विरोधी अभियान केवल एक जन स्वास्थ्य प्रयास नहीं है। यह एक जन भागीदारी का प्रयास है - जो किसी उद्देश्य के लिए एकजुट होने की हमारे देश की क्षमता का प्रमाण है।
यदि हम एकजुट होकर खड़े हों, तो हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आने वाली पीढ़ी टीबी को इतिहास का एक अध्याय मात्र समझे, न कि उनके जीवन की एक वास्तविकता। यही वो भारत है जिसके लिए हम काम कर रहे हैं। यही वो भारत है जिसका निर्माण हम सब मिलकर करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे संयुक्त प्रयासों से हम अपने आदरणीय प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित संकल्प को प्राप्त कर लेंगे, 'हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं'।
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(लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं।)