ब्रेकिंग न्यूज़
CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित, 7-8 अक्टूबर को जाना था दंतेवाड़ा और कबीरधाम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का 7-8 अक्टूबर का छत्तीसगढ़ दौरा अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया है।

रायपुर / सत्ता संदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित कर दिया गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित था। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से जारी पत्र में दौरा स्थगित किए जाने की वजह ‘अपरिहार्य कारण’ बताई गई है। दौरे की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के पत्र के मुताबिक, दौरे के दौरान ज्ञानेश कुमार को राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया था। उनके दौरे को लेकर जरूरी प्रोटोकॉल और अन्य व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।

दंतेवाड़ा, कबीरधाम और चित्रकूट जाने का था कार्यक्रम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रस्तावित कार्यक्रम में दंतेवाड़ा की देवी दंतेश्वरी मंदिर, कबीरधाम स्थित प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर और बस्तर जिले के चित्रकूट वाटरफॉल का दौरा शामिल था।

हालांकि, अब आयोग ने इस दो दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि आयोग से संशोधित तारीख मिलने के बाद इसकी जानकारी अलग से दी जाएगी।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा ऐसे समय में स्थगित हुआ है, जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष ने की CEC के इस्तीफे की मांग

चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष का विरोध भी लगातार जारी है। हाल ही में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। आयोग के कार्यालय की ओर मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी भवन परिसर में कई घंटे तक धरना दिया।

विपक्षी नेताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों के साथ-साथ मतदाता सूची के SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।

इससे पहले सितंबर में ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी दौरा भी स्थगित किया गया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित करने के लिए चुनाव आयोग ने फिलहाल केवल ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला दिया है।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, जंतर-मंतर मामले में 3 FIR दर्ज

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को दिल्ली समेत कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े मामले में तीन FIR दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक, ये मामले प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर लागू निषेधाज्ञा और पुलिस द्वारा जारी आदेशों के उल्लंघन को लेकर दर्ज किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने तीनों FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की हैं। इनमें दो FIR संसद मार्ग थाना और एक FIR कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं। धारा 223 लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है।

प्रदर्शन से पहले नहीं मिली थी अनुमति

2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों से जुड़े प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कार्रवाई की।

कई विपक्षी नेता भी हिरासत में लिए गए

प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं सौरभ भारद्वाज, आतिशी और संजीव झा समेत कई विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

प्रदर्शन में AAP के अलावा कांग्रेस से जुड़े संगठनों, वामपंथी दलों, AISA, SFI और अन्य छात्र एवं युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

FIR में किसी व्यक्ति या संगठन को नहीं बनाया गया नामजद आरोपी

पुलिस के अनुसार, फिलहाल तीनों FIR में किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। हालांकि, FIR की सामग्री में प्रदर्शन के आयोजन और उसमें शामिल संगठनों तथा आयोजकों का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।

FIR में BNS की धारा 223 के साथ अन्य धाराओं का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान लागू आदेशों का उल्लंघन किया गया और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने तथा गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने से संबंधित प्रावधान भी लागू होते हैं।

दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को दिल्ली के अलावा मुंबई में भी बड़ा प्रदर्शन हुआ। मुंबई के शिवाजी पार्क में हजारों लोगों के जुटने की खबर सामने आई। इन प्रदर्शनों का प्रमुख मुद्दा SIR के तहत मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष तथा अन्य संगठनों की आपत्तियां थीं।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता गिरफ्तारी का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस और विपक्षी दलों के हैं।

दिल्ली पुलिस अब दर्ज की गई तीनों FIR के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के बड़े फैसले, नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO; दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान जानकारी उपलब्ध न होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए अनिवार्य रूप से ERO/AERO कार्यालय नहीं बुलाया जाएगा।

आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) संबंधित मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा, ताकि ERO द्वारा मामले में निर्णय लिया जा सके। केवल असाधारण परिस्थितियों में ERO के निर्णय के अनुसार ऑनलाइन सुनवाई की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है।

गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष हेल्प डेस्क

आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, श्रमिकों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क बनाए जाएं और विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि उन्हें SIR प्रक्रिया में आवश्यक सहायता मिल सके।

आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। हालांकि गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार संबंधित निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

ECINet की होगी समीक्षा

बैठक में ECINet प्रणाली की समीक्षा का भी फैसला लिया गया है। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति यह जांच करेगी कि ECINet प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।

आयोग ने बताया कि राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) से पिछले कुछ महीनों में मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड पहले ही किए जा चुके हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों को किसी अतिरिक्त सुविधा की आवश्यकता होने पर उसे भी लागू किया जाएगा। भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टलों से जुड़ी नई पहलों पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति (COO) में चर्चा की जाएगी।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी SIR की समयसीमा

दिल्ली के CEO के अनुरोध पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा अब 30 नवंबर 2026 तक होगी।

वहीं महाराष्ट्र के CEO के अनुरोध पर वहां नोटिस और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

आयोग की बैठकों के एजेंडे और मिनट्स जारी होंगे

निर्वाचन आयोग ने तय किया है कि आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही जारी किया जाएगा और बैठक का विवरण यानी मिनट्स भी जारी किया जाएगा। अधिकारियों की APAR (Annual Performance Appraisal Report) हर साल तय समयसीमा के भीतर यानी 31 दिसंबर तक पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। आयुक्तों द्वारा दिए गए निर्देशों का आयोग के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।

20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा

आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है। आयोग के मुताबिक जिन लोगों का नाम SIR के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में छूट गया है, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं।

CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

गोवा में 81 मतदाताओं ने Form-6 भरा

आयोग ने बताया कि गोवा के CEO ने संबंधित BLO को उन मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया है, जिनके नाम छूट गए हैं। आयोग के अनुसार, 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल करवाने के लिए Form-6 पहले ही भर दिया है।

आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग या IT प्रभाग की किसी नीतिगत बात से संबंधित नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी SIR आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने आदेश में इसे सही ठहराया है। आयोग के मुताबिक SIR के तीसरे चरण में शामिल शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की संख्या के अंतिम आंकड़े स्पष्ट होंगे।

यह प्रेस विज्ञप्ति 26 सितंबर 2026 को हुई निर्वाचन आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर जारी की गई है और इसे पूरे आयोग की मंजूरी प्राप्त है।

चुनाव आयोग की अहम बैठक में बड़े फैसले, दिल्ली-महाराष्ट्र में SIR की समयसीमा बढ़ी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में अहम बैठक की। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से मिली मांग के आधार पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। वहीं, नोटिस जारी करने और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।

महाराष्ट्र के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।

BLO घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज

आयोग के आधिकारिक बयान के मुताबिक, SIR के तहत जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके दस्तावेज जुटाने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाएंगे। आयोग ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत नहीं होगी।

इसके अलावा, जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को जरूरत के अनुसार नाइट शेल्टर, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

फॉर्म-6 और घोषणा पत्र पर आयोग की सफाई

बैठक में फॉर्म-6 से जुड़े विवाद पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र जमा करने की व्यवस्था जारी रहेगी। आयोग के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट भी फॉर्म-6 में दिए जाने वाले घोषणा पत्र की वैधता को सही ठहरा चुका है।

ECINET की होगी समीक्षा

आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। इसमें एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) के साथ IIT और IIM के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे।

आयोग ने यह भी तय किया कि उसकी सभी बैठकों का एजेंडा पहले से जारी किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी।

अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी

बैठक में अधिकारियों की विदेश यात्राओं को लेकर भी फैसला लिया गया। अब अधिकारियों को विदेश यात्रा से पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेना जरूरी होगा। चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आयोग ने अधिकारियों की APAR यानी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट को हर साल 31 दिसंबर तक पूरा करने की समयसीमा पर भी जोर दिया।

कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई

कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि इसका आयोग या उसके IT विभाग की किसी नीतिगत व्यवस्था से संबंध नहीं था। आयोग के अनुसार, पत्र ECI में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण संबंधी आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। साथ ही IT विभाग की निगरानी में उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की भूमिका कभी वापस नहीं ली गई।

20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा

आयोग के मुताबिक, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। SIR के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को ऐसे मतदाताओं के नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने कहा कि देशभर में SIR से जुड़े फैसलों समेत हाल के महीनों में कई निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया आगे बढ़ी।

चुनाव आयोग में 14 बार उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विवाद गहराया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों से बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपने संज्ञान में लिए बिना किए जाने पर सवाल उठाए और कुछ कदमों को “अनधिकृत” तथा “अवैध” बताया। एक प्रमुख विवाद नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जोड़े जाने को लेकर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे हटाने की मांग की थी।

विवाद केवल फॉर्म-6 तक सीमित नहीं रहा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस और ECINet से जुड़े कामकाज को दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने तथा जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस मामले में कैबिनेट सचिव तक अपनी चिंताएं पहुंचाईं। ( सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। हालांकि, नामों का ड्राफ्ट सूची से हटना अपने आप में अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है, क्योंकि संबंधित प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज करने तथा पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की व्यवस्था मौजूद है।

पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में SIR को लेकर बड़ी संख्या में दावे और अपीलें भी सामने आई हैं। इसी बीच, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं। हालिया एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कथित एकतरफा फैसलों की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई है। इसमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के केंद्रीकरण और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर आरोप लगाए गए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया भी इस विवाद के केंद्र में है। 2023 के कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। इससे पहले 2023 में Anoop Baranwal v. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग चयन व्यवस्था का सुझाव दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की बात कही गई थी। बाद में संसद द्वारा कानून बनाकर नियुक्ति की नई व्यवस्था लागू की गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया, बहु-सदस्यीय आयोग में आपसी सहमति और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर गंभीर सार्वजनिक बहस खड़ी कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं, जबकि आयोग की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया गया था।

अब इस विवाद का केंद्र यह है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में संस्थागत पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया का कितना पालन हुआ और आयोग के भीतर दर्ज असहमतियों का किस तरह समाधान किया गया। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं और चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले जवाबों से इन सवालों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।