दिल्ली SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि एक भी नोटिस गलत जारी नहीं हुआ है। आयोग ने 1200 ERO और 14 हजार BLO की तैनाती की जानकारी दी।
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में कहा कि एक भी नोटिस गलत तरीके से जारी नहीं किया गया है और हर मामले की जांच की जा रही है। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं कटने दिया जाएगा। दिल्ली में SIR से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए करीब 1,200 इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO), जो SDM स्तर के अधिकारी हैं, और 14 हजार BLO तैनात किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिलहाल प्रक्रिया की समयसीमा 31 अक्टूबर तक है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। आयोग का कहना है कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के मामलों को सुनकर उनका सत्यापन किया जा रहा है।
33 लाख लोगों को नोटिस पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई लोगों को अंग्रेजी में नोटिस भेजे गए हैं, जबकि वे अंग्रेजी पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। उनके मुताबिक पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और सेवानिवृत्त अधिकारियों तक को नोटिस मिले हैं।
भूषण ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के पारिवारिक रिकॉर्ड में उम्र का अंतर या अन्य दस्तावेजी विसंगतियां हैं, वे पुराने दस्तावेज कहां से लाएंगे। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि 12 दस्तावेजों तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं है और अन्य स्वीकार्य दस्तावेज भी मान्य हो सकते हैं।
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, करीब 19 लाख लोगों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। उनका तर्क था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए दस्तावेज जुटाना और प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी यह मुद्दा सामने आया कि आम मतदाताओं के लिए सत्यापन की प्रक्रिया आसान बनाई जानी चाहिए।
हर वार्ड में BLO बैठाने का सुझाव
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने चुनाव आयोग से कहा कि हर वार्ड में BLO की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने में परेशानी न हो। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी आया कि यदि नोटिस बड़ी संख्या में कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया से जारी हुए हैं तो उनमें संभावित त्रुटियों को ठीक करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटने के बाद विवाद
दिल्ली SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47 लाख नाम शामिल नहीं किए गए। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में नोटिस पाने वाले 33 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। याचिका में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘नो मैपिंग’ जैसी श्रेणियों के आधार और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
नोटिस मिलने के बाद क्या करना होगा?
SIR प्रक्रिया में यदि मतदाता के रिकॉर्ड को लेकर कोई विसंगति सामने आती है तो संबंधित Electoral Registration Officer की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है। मतदाता को अपने नाम और पात्रता के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों का सत्यापन करता है।
यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत वह संबंधित प्राधिकरण/ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है और आगे की वैधानिक अपील का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का मुख्य मुद्दा यही है कि SIR के तहत मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी, सुलभ और उचित तरीके से लागू हो, ताकि पात्र मतदाताओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त अवसर मिल सके। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 सितंबर 2026 की कार्यवाही से संबंधित सूची भी उपलब्ध है।