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राज्यसभा चुनाव 2026: यूपी की 10, उत्तराखंड की 1 सीट पर 16 अक्टूबर को वोटिंग

राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीखों का ऐलान हो गया है। यूपी की 10, उत्तराखंड की 1 और पश्चिम बंगाल की 1 सीट पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा। जानें पूरा चुनाव कार्यक्रम।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव भी इसी दिन कराया जाएगा। राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके करीब एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं।

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को मतदान होगा और इसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इन सीटों पर होने वाला चुनाव राज्य की मौजूदा विधानसभा संख्या और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कुल 31 राज्यसभा सीटें हैं, जबकि राज्य विधानसभा में 403 सदस्य हैं।

इन 10 सीटों में वर्तमान में भाजपा के पास 8, समाजवादी पार्टी के पास 1 और बहुजन समाज पार्टी के पास 1 सीट बताई जा रही है। इन सीटों से जुड़े प्रमुख चेहरों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, गीता शाक्य उर्फ चंद्रप्रभा, सीमा द्विवेदी, बी.एल. वर्मा, दिनेश शर्मा, सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक बताए जा रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के पास 100 से अधिक विधायक हैं। इसी संख्या बल के आधार पर विभिन्न दलों की ओर से राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट भी इस चुनाव में शामिल है। राज्य में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं और राज्य की राज्यसभा में तीन सीटें हैं।

पश्चिम बंगाल में एक सीट पर उपचुनाव

पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर भी 16 अक्टूबर को उपचुनाव कराया जाएगा। यह सीट रिक्त होने के बाद चुनाव के लिए निर्धारित की गई है। पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं।

राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना के बाद इन सीटों पर नई तस्वीर सामने आएगी।

दिल्ली SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, चुनाव आयोग बोला- ‘एक भी नोटिस गलत नहीं, किसी का नाम नहीं कटने देंगे’

दिल्ली SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि एक भी नोटिस गलत जारी नहीं हुआ है। आयोग ने 1200 ERO और 14 हजार BLO की तैनाती की जानकारी दी।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में कहा कि एक भी नोटिस गलत तरीके से जारी नहीं किया गया है और हर मामले की जांच की जा रही है। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं कटने दिया जाएगा। दिल्ली में SIR से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए करीब 1,200 इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO), जो SDM स्तर के अधिकारी हैं, और 14 हजार BLO तैनात किए गए हैं।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिलहाल प्रक्रिया की समयसीमा 31 अक्टूबर तक है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। आयोग का कहना है कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के मामलों को सुनकर उनका सत्यापन किया जा रहा है।

33 लाख लोगों को नोटिस पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई लोगों को अंग्रेजी में नोटिस भेजे गए हैं, जबकि वे अंग्रेजी पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। उनके मुताबिक पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और सेवानिवृत्त अधिकारियों तक को नोटिस मिले हैं।

भूषण ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के पारिवारिक रिकॉर्ड में उम्र का अंतर या अन्य दस्तावेजी विसंगतियां हैं, वे पुराने दस्तावेज कहां से लाएंगे। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि 12 दस्तावेजों तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं है और अन्य स्वीकार्य दस्तावेज भी मान्य हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, करीब 19 लाख लोगों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। उनका तर्क था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए दस्तावेज जुटाना और प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी यह मुद्दा सामने आया कि आम मतदाताओं के लिए सत्यापन की प्रक्रिया आसान बनाई जानी चाहिए।

हर वार्ड में BLO बैठाने का सुझाव

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने चुनाव आयोग से कहा कि हर वार्ड में BLO की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने में परेशानी न हो। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी आया कि यदि नोटिस बड़ी संख्या में कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया से जारी हुए हैं तो उनमें संभावित त्रुटियों को ठीक करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटने के बाद विवाद

दिल्ली SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47 लाख नाम शामिल नहीं किए गए। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में नोटिस पाने वाले 33 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। याचिका में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘नो मैपिंग’ जैसी श्रेणियों के आधार और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

नोटिस मिलने के बाद क्या करना होगा?

SIR प्रक्रिया में यदि मतदाता के रिकॉर्ड को लेकर कोई विसंगति सामने आती है तो संबंधित Electoral Registration Officer की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है। मतदाता को अपने नाम और पात्रता के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों का सत्यापन करता है।

यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत वह संबंधित प्राधिकरण/ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है और आगे की वैधानिक अपील का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का मुख्य मुद्दा यही है कि SIR के तहत मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी, सुलभ और उचित तरीके से लागू हो, ताकि पात्र मतदाताओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त अवसर मिल सके। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 सितंबर 2026 की कार्यवाही से संबंधित सूची भी उपलब्ध है।

माछीवाड़ा : शेलर मालिकों का बड़ा ऐलान, पुराने चावल की निकासी तक नया धान उठाने से इनकार

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब में नए धान की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले शेलर मालिकों ने अपनी समस्याओं को लेकर बड़ा ऐलान किया है। माछीवाड़ा शेलर एसोसिएशन की बैठक प्रधान अशोक सूद और चेयरमैन हुसन लाल मड़कल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पिछले साल के चावल की निकासी, गोदामों में जगह की कमी और आगामी धान की मिलिंग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के बाद एसोसिएशन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक शेलरों में पड़ा पिछले साल का चावल गोदामों में रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक वे मंडियों से नया धान उठाने से इनकार करेंगे।

प्रधान अशोक सूद और चेयरमैन हुसन लाल मड़कल ने बताया कि पिछले साल का करीब 13 प्रतिशत चावल अभी भी शेलरों में पड़ा हुआ है। गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण चावल की निकासी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर धान की मिलिंग मार्च या अधिकतम मई तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार 30 सितंबर तक भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते शेलर मालिकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ रहा है।

एसोसिएशन ने हाइब्रिड धान की मिलिंग में टूटे चावल (टोटा) की अधिक मात्रा निकलने का मुद्दा भी उठाया। पदाधिकारियों के अनुसार माछीवाड़ा क्षेत्र में हाइब्रिड धान की बड़े स्तर पर बुवाई हुई है और इसकी मिलिंग के बाद टोटे की मात्रा अधिक निकलती है। ऐसे में सरकार से मौजूदा 10 प्रतिशत टोटे के मानक में छूट देने की मांग की गई है।

शेलर मालिकों ने कहा कि भले ही 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है, लेकिन यदि पिछले साल के चावल को गोदामों में लगाने की व्यवस्था नहीं की गई तो वे नया धान उठाने में असमर्थ रहेंगे।

वहीं, माछीवाड़ा सच्चा सौदा आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मोहित कुंदरा ने शेलर मालिकों की मांगों को जायज बताते हुए केंद्र सरकार से जल्द समाधान की अपील की। उन्होंने कहा कि मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है और इस बार फसल का उत्पादन भी अच्छा रहने की उम्मीद है। ऐसे में शेलरों की समस्याओं का समय रहते समाधान जरूरी है, ताकि मंडियों में धान की खरीद और उठान व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब में होंगे धार्मिक समागम, चार शोभायात्राओं का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित विभिन्न धार्मिक समागमों का आयोजन किया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब भर में गुरु रविदास जी की वाणी और शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व फरवरी में मनाया जाना है। इसी को समर्पित धार्मिक समागमों और कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं।

मंत्री के अनुसार प्रकाश पर्व को लेकर चार शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें एक शोभायात्रा 30 नवंबर से 3 दिसंबर तक वाराणसी से शुरू होगी। इसके अलावा फरीदकोट से 2 दिसंबर से 3 दिसंबर तक तथा बठिंडा से 1 दिसंबर से 3 दिसंबर तक शोभायात्रा निकाली जाएगी।

उन्होंने बताया कि चौथी शोभायात्रा भी 30 नवंबर से 3 दिसंबर तक आयोजित की जाएगी और सभी धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्री गुरु रविदास जी की वाणी एवं संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

जालंधर : बच्चे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के लगाए आरोप

जालंधर / सत्ता संदेश

कपूरथला चौक स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने, बच्चे की गंभीर हालत की जानकारी नहीं देने और लगातार पैसे जमा करवाने के गंभीर आरोप लगाए। हंगामे की सूचना मिलने पर थाना डिवीजन नंबर-2 की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को संभाला।

बच्चे के पिता शमशेर ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। सोमवार को उनका बेटा छत से गिर गया था, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। हालत बिगड़ने पर उसे कपूरथला चौक स्थित सत्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद अलग-अलग दवाइयों और जांच के नाम पर उनसे लगातार पैसे जमा करवाए जाते रहे, लेकिन बच्चे की वास्तविक स्थिति के बारे में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार के मुताबिक, उन्हें बच्चे से मिलने की अनुमति भी नहीं दी गई।

परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने बच्चे को देखने की बात कही तो उन्हें पहले शाम 5 बजे, फिर 6 बजे और बाद में 7-8 बजे का समय दिया गया। इससे परिवार को संदेह हुआ। आरोप है कि जब उन्होंने अंदर जाकर बच्चे की स्थिति जानने का प्रयास किया तो अस्पताल के बाउंसरों और सुरक्षा कर्मचारियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।

परिवार के अनुसार काफी प्रयास के बाद बच्चे के चाचा किसी तरह अंदर पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि बच्चे की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मृत्यु के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई और उनसे पैसे जमा करवाए जाते रहे। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय रहते बच्चे की गंभीर स्थिति या मौत की जानकारी दी जाती तो वे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने अथवा अन्य चिकित्सकीय विकल्प तलाशने का प्रयास कर सकते थे।

मामले की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम में दी गई। 112 नंबर पर सूचना मिलने के बाद थाना डिवीजन नंबर-2 की पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। पुलिस ने मौके का जायजा लेने के साथ परिजनों और अस्पताल पक्ष से बातचीत की।

पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या पक्ष सामने आया है, इसकी जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

कोहाड़ा रोड पर दर्दनाक हादसा, ट्रक की चपेट में मजदूर की मौत; स्कॉर्पियो से भी टकराया ट्रक

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब के कोहाड़ा रोड स्थित हाड़ियां चौक के पास मंगलवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 28 वर्षीय मजदूर अरावण, निवासी बलीबेग बस्ती, की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक की चपेट में आने से मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार अरावण रोजाना की तरह काम के लिए घर से निकला था और राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करता था। हाड़ियां चौक के पास वह एक ट्रक की चपेट में आ गया। हादसे के बाद ट्रक चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और सामने से आ रही स्कॉर्पियो से जा टकराया। टक्कर में स्कॉर्पियो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि उसमें सवार लोगों को मामूली चोटें आईं।

बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो नजदीकी गांव भमा की है और करीब एक सप्ताह पहले ही शोरूम से निकाली गई थी।

हादसे की सूचना मिलते ही कूमकलां पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि हादसे में शामिल ट्रक को भी कब्जे में ले लिया गया है। मृतक शादीशुदा था और उसके दो बच्चे हैं।

वहीं, ट्रक चालक गुरजंट सिंह ने पुलिस के सामने दावा किया कि वह ट्रक लेकर कोहाड़ा की ओर जा रहा था। इसी दौरान एक व्यक्ति अचानक उसके वाहन के सामने आ गया। चालक के मुताबिक अचानक सामने आए व्यक्ति को बचाने का मौका नहीं मिला और वह ट्रक की चपेट में आ गया। इसके बाद ट्रक का संतुलन बिगड़ने से वह स्कॉर्पियो से जा टकराया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है। पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए घटनाक्रम की जांच कर रही है।

नशा मुक्त भारत के 6 साल हुए पूरे… नशीले पद्दार्थों को कहें ना…जिंदगी हो कहे हां…

सुधांश पंत, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव

यह एक दृश्य अक्सर दोहराया जाता है – लगभग हर कॉलेज के छात्रावासों में, हर कार्यालय की पार्टियों में और साथ जवान हो रहे दोस्तों के हर समूह में। कुछ नशीले पदार्थ एक-दूसरे तक पहुंचाए जाते हैं। इस क्रम में एक बात काफी सहजता के साथ, लेकिन जोर देकर कही जाती है कि बाकी सब भी तो ऐसा ही कर रहे हैं। ऐसे में, मना करना कुछ ऐसा लगता है मानो आप समूह के बाकी साथियों से अलग-थलग हो रहे हों। इसके बाद एक पल की चुप्पी छाती है। और फिर एक युवा अपने साथियों के समूह को ‘ना’ कहने से पैदा होने वाली शर्मिंदगी और अलग-थलग पड़ जाने की बेचैनी के बीच जल्दी से फैसला ले लेता है। यही एक निर्णायक पल होता है, क्योंकि लत हमेशा सोच-समझकर लिए गए फैसले से नहीं लगती। अक्सर इसकी शुरुआत पीछे छूट जाने के डर से होती है।

नशीले पदार्थों को ना, जिंदगी को हां

यही वह मौन लेकिन अहम पल है, जिसको ध्यान में रखकर ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का व्यापक उद्देश्य नशीले पदार्थों की लत के बारे में जागरूकता फैलाना रहा है। लेकिन इसकी असली चुनौती सामाजिक रही है: नशे से मुक्त रहने का फैसला लेने को आसान बनाना, उस फैसले की अभिव्यक्ति को सहज  बनाना और कुल मिलाकर, इस पूरी कवायद को एक सामान्य बात के तौर पर देखना आसान बनाना। 

दृढ़ संकल्प

जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एनएमबीए की शुरुआत  की, तो इस अभियान ने एक कहीं अधिक कठिन चुनौती से जूझना तय किया। यह कठिन चुनौती थी – किसी कमजोर पल में, एक अकेले व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के समूह के सामने ‘नहीं’कहने की हिम्मत लाने की। इस दृष्टि से, इस अभियान का सबसे असरदार शब्द शायद सबसे आसान शब्द है, ‘ना!’ यह कोई नाटकीय ‘ना!’ नहीं है। यह कोई नैतिक उपदेश नहीं है। बस जब आपके आस-पास के सभी लोग जब ‘हां’ कह रहे हों, तब बिना विचलित हुए मना करने का आत्मविश्वास है।

माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है, “विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत ‘नशा मुक्त युवा’ नाम ही इस संकल्प को पूरी तरह स्पष्ट करता है। अब जबकि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तो यह जरूरी है कि हमारे युवा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों, आत्मविश्वास से भरे हों और हमेशा नशे की जानलेवा लत से मुक्त रहें। यही इस अभियान का उद्देश्य है। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे युवा नशे की लत के खतरों को समझें, जागरूक रहें और इससे दूर रहें। इस संकल्प को साकार करने में ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा अभियान’ अब एक अहम भूमिका निभा रहा है।”

एनएमबीए: साझा जिम्मेदारी का एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन

छह वर्ष बाद, वह एक पहल अब एक बहुत बड़े अभियान का हिस्सा बन गई है। यह अभियान संकल्प लेने और लोगों को जोड़ने की गतिविधियों के जरिए 13.71 करोड़ से अधिक युवाओं तक पहुंचा है। साथ ही विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में 31 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शैक्षिक परिसरों में विद्यार्थियों का स्वैच्छिक रूप से संकल्प लेना अब एक आम बात हो गई है और ग्राम सभाएं भी अब इस मुद्दे पर नियमित रूप से चर्चा करती हैं। जहां पहले लोग अपने परिवार के किसी सदस्य की लत को निजी शर्म की बात मानकर छिपाते थे, वहीं अब 10.65 करोड़ से अधिक महिलाओं, स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) और सामुदायिक नेटवर्कों के जरिए, इस बारे में खुलकर और अपनी भाषा में अपने पड़ोसियों से बात करने लगी हैं।

19 सितंबर, 2026 तक, 1.70 लाख से अधिक ‘नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम)’ सामुदायिक स्तर पर चैंपियन बनकर उभरे हैं और 34.57 करोड़ से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंचाने  में मदद कर रहे हैं। और, यह रुझान सकारात्मक दिशा में तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा है।

यहीं से सामाजिक व्यवहार को बदलने हेतु एक जन-अभियान की शुरुआत हुई है। एनएमबीए ने एकतरफा जागरूकता से आगे बढ़कर लगातार कई ऐसे रास्ते बनाए हैं, जिनसे लोग इस मुहिम से जुड़ सकें, जानकारी हासिल कर सकें और इसके संदेश को आगे बढ़ा सकें।

एनएमबीए पोर्टल जानकारियों, शैक्षिक संसाधनों, सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों और नागरिकों के लिए इस अभियान से जुड़ने के अवसरों को एक साथ लाता है।

नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत

हाल ही में, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में इस बड़े मिशन को आगे बढ़ाते हुए ‘नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य को फिर से दोहराया। उनकी यह अपील इसलिए भी खास थी क्योंकि इसमें केवल संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि युवा संगीतकारों, विद्यार्थियों और थिएटर समूहों को भी शामिल किया गया। ऐसा यह मानते हुए किया गया कि संदेश सबसे अधिक असरदार तब होते हैं, जब वे उन लोगों की आवाज के जरिए पहुंचते हैं जिन पर युवाओं का भरोसा पहले से ही जमा होता है। 

असल में, एनएमबीए ने पिछले छह वर्षों के दौरान चुपचाप नशाबंदी की दीवार ही नहीं, बल्कि अपनापन महसूस कराने वाला एक वैकल्पिक दायरा भी बनाया है। यह दायरा अब बड़ा होकर हर राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायती राज संस्थाओं, आशा एवं आंगनवाड़ी नेटवर्कों तथा हजारों सामुदायिक संगठनों तक जा पहुंचा है और हर जगह लोग अपने-अपने शब्दों में यही संकल्प ले रहे हैं।

जागरूकता से संकल्प तक

इतने बड़े पैमाने का आंदोलन बहुत देर तक सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। यह घरों, कक्षाओं और समुदायों में बातचीत का हिस्सा बनने लगता है, जिससे नशीले पदार्थों के सेवन का मुद्दा खुलकर सामने आता है और इसकी रोकथाम महज संकट के समय की चर्चा न रहकर एक सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।

लेकिन ऐसी जागरूकता तो बस एक शुरुआत है। जो लोग अपने या अपने किसी करीबी के लिए मदद चाहते हैं, उनके मन में अगला सवाल यह आता है कि वे आखिर जाएं कहां? एनएमबीए ने इस कदम को भी आसान बनाने का प्रयास किया है।

राष्ट्रीय नशा-मुक्ति हेल्पलाइन, 14446, जानकारी, मार्गदर्शन और उपयुक्त नशा-मुक्ति संबंधी सेवाओं के लिए संपर्क का जरिया प्रदान करती है। यह चिंता के पल को स्वस्थ होने की दिशा में उठाए जा सकने वाले पहले कदम में बदलने में मदद करती है।

एक दोस्त के जोर देने और अपनी सही समझ के बीच फैसला करते समय कभी हिचकिचाहट भरे पल का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति के लिए एनएमबीए की यात्रा यह भरोसा दिलाती  है कि वे अकेले नहीं हैं।

भारत की उम्मीद की किरण – युवाओं – की सुरक्षा में एकजुट 

अब नागरिकों के पास ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर इस मिशन को आगे बढ़ाने का अवसर  है। वे इस बातचीत को मात्र एक अभियान तक सीमित न रखकर उन जगहों तक ले जा सकते हैं, जहां रोजमर्रा के फैसले लिए जाते हैं।

क्योंकि कोई भी स्थायी बदलाव शायद ही कभी किसी एक अभियान, एक संस्था या एक पल के जरिए आता है। यह बदलाव तभी कायम रहता है, जब जागरूकता रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है, बातचीत एक सामूहिक संकल्प में बदलती है और वह संकल्प रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

यही ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की क्षमता और उसका नतीजा है। यह नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ एक ऐसा अभियान है, जिसके साथ पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है।

आइए, भारत की उम्मीद की किरण-युवाओं-की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।

लुधियाना : मेयर हाउस का घेराव, डोर स्टेप कचरा कलेक्शन के विरोध में उतरे सफाई कर्मचारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में कचरा डोर स्टेप कैंपेन के विरोध में सफाई कर्मचारी संगठनों और मौजूदा पार्षदों ने मेयर हाउस का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल गरम हो गया और प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हल्की नोकझोंक भी हुई।

प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि घरों से कचरा इकट्ठा करने का काम एक निजी कंपनी को ठेके पर दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे लंबे समय से यह काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

कर्मचारी संगठनों ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि उनका काम और रोजगार छीना जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने मौजूदा पार्षदों के साथ मिलकर मेयर हाउस का घेराव किया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कचरा संग्रहण व्यवस्था में काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखा जाए और ऐसा कोई फैसला न लिया जाए जिससे उनके रोजगार पर असर पड़े।

घेराव के दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। फिलहाल प्रदर्शन के चलते मेयर हाउस के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा।

अमृतसर : KMSC का प्रदर्शन, खाद की कमी और पराली जलाने की नीति पर सरकार को घेरा

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में खाद की कथित कमी, कालाबाजारी, बीजों के मनमाने दाम और पराली जलाने को लेकर सरकार की नीतियों के विरोध में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (KMSC) ने अमृतसर स्थित एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कमेटी के प्रमुख नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाते हुए केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि किसानों को यूरिया और DAP खाद हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने बीज विक्रेताओं पर भी मनमाने दाम वसूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को कई स्थानों पर बिना पक्के बिल के ऊंची कीमतों पर बीज दिए जा रहे हैं।

पराली जलाने को लेकर सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए पंढेर ने कहा कि किसानों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने और राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज करने जैसी कार्रवाई से उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालिया केंद्रीय ड्राफ्ट नियमों में दो एकड़ से कम जमीन पर ₹5,000, दो से पांच एकड़ पर ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर ₹30,000 प्रति घटना पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान रखा गया है।

पंढेर ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली के स्थानीय स्रोतों और औद्योगिक प्रदूषण समेत सभी कारकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से पराली प्रबंधन को लेकर निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई जा रही है। पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के मामलों की निगरानी शुरू हो चुकी है और शुरुआती मामले भी दर्ज किए गए हैं।

किसान नेता ने केंद्र सरकार पर किसानों की आय दोगुनी करने और फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी से जुड़े वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल कार्रवाई का सामना कराने के बजाय खेती से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों पर लागू की जा रही नीतियों की समीक्षा करने की मांग उठाई।

PRTC पनबस यूनियन की ट्रांसपोर्ट से मीटिंग खत्म, समझौते के बाद बस स्टॉप स्ट्राइक टली

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

PRTC पनबस कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन और सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट के बीच हुई बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है। बैठक में हुए एग्रीमेंट के बाद यूनियन ने प्रस्तावित बस स्टॉप स्ट्राइक को फिलहाल पोस्टपोन कर दिया है।

यूनियन के मुताबिक, बैठक के दौरान कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद हड़ताल को टालने का फैसला लिया गया।

यूनियन ने बताया कि 24 सितंबर को ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ एक और बैठक होगी, जिसमें कर्मचारियों की मांगों और अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

यूनियन के अनुसार, सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि इस महीने के अंत तक नई सरकारी बसें सड़कों पर आ जाएंगी। इसके अलावा आउटसोर्सिंग और कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया करीब तीन सप्ताह में पूरी करने का आश्वासन भी दिया गया है।

यूनियन का कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन और बैठक में हुए समझौते के बाद फिलहाल बस स्टॉप स्ट्राइक को स्थगित किया गया है। अब 24 सितंबर को होने वाली ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ बैठक पर कर्मचारियों की नजर रहेगी।