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चंडीगढ़ : पावरग्रिड अंतर-क्षेत्रीय ब्रिज टूर्नामेंट-2026 का शुभारंभ

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ में तीन दिवसीय पावरग्रिड अंतर-क्षेत्रीय ब्रिज टूर्नामेंट-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। टूर्नामेंट में पावरग्रिड के विभिन्न क्षेत्रों की कुल 12 टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगिता में टीम और पेयर चैंपियनशिप के मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं।

टूर्नामेंट में दक्षिण क्षेत्र-I (SR-I), दक्षिण क्षेत्र-II (SR-II), पूर्व क्षेत्र-I (ER-I), पूर्व क्षेत्र-II (ER-II), पश्चिम क्षेत्र-I (WR-I), पश्चिम क्षेत्र-II (WR-II), उत्तर-पूर्व क्षेत्र (NER), उत्तर क्षेत्र-I (NR-I), उत्तर क्षेत्र-III (NR-III), उत्तर-पश्चिम क्षेत्र (NWR), कॉर्पोरेट सेंटर (CC) और मेजबान क्षेत्र उत्तर क्षेत्र-II (NR-II) की टीमें भाग ले रही हैं।

प्रतियोगिता के मुकाबले लीग-कम-नॉकआउट प्रारूप में खेले जा रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में विभिन्न क्षेत्रों से आई टीमें टीम और पेयर चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।

टूर्नामेंट का उद्घाटन तरुण बजाज, कार्यपालक निदेशक (उत्तरी क्षेत्र-II) ने किया। इस अवसर पर आशुतोष के. शर्मा, महाप्रबंधक (एचआर) सहित पावरग्रिड और पंजाब ब्रिज एसोसिएशन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

टूर्नामेंट का आयोजन पंजाब ब्रिज एसोसिएशन की देखरेख में किया जा रहा है। प्रतियोगिता का समापन 26 सितंबर 2026 को होगा।

फाइबर से भविष्य तक: भारत की टेक्सटाइल ग्रोथ सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करती है – गिरिराज सिंह

भारत ने 2030 तक $350 बिलियन की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री का टारगेट रखा है। सस्टेनेबिलिटी धीरे-धीरे इसकी कॉम्पिटिटिव स्ट्रेटेजी के सेंटर में आ रही है। फाइबर, यार्न, फैब्रिक, प्रोसेसिंग, अपैरल, टेक्निकल टेक्सटाइल और फिनिश्ड गुड्स वाले सेक्टर के लिए, सस्टेनेबिलिटी तेज़ी से कॉम्पिटिटिवनेस, मार्केट एक्सेस और ज़िम्मेदार ग्रोथ का सवाल बनता जा रहा है।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया एनवायरनमेंट और एम्पावरमेंट के लिए एक फैशन विज़न अपना रही है और भारत इस मामले में दुनिया को लीड कर सकता है, तो उन्होंने भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में लगातार हो रहे बदलाव की ओर इशारा किया।
टेक्सटाइल सेक्टर एक बड़ा एम्प्लॉयमेंट इंजन है, जो सीधे 49 मिलियन से ज़्यादा लोगों को रोजी-रोटी देता है। इसका घरेलू मार्केट लगभग $196 बिलियन का है और 2030 तक इसके $250 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत ने 2030 तक टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में $100 बिलियन का टारगेट रखा है। टेक्सटाइल मंत्रालय का सस्टेनेबिलिटी एजेंडा इसी दोहरी सच्चाई को दिखाता है। इसे एक आसान आइडिया के आस-पास डिज़ाइन किया गया है कि भारत को ग्रोथ और सस्टेनेबिलिटी के बीच चुनना नहीं चाहिए। इसके बजाय, क्लीनर प्रोडक्शन, रिसोर्स का कुशल इस्तेमाल, सर्कुलरिटी और ज़िम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग टेक्सटाइल सेक्टर के अगले ग्रोथ चैप्टर की नींव रखने के लिए तैयार हैं।

सस्टेनेबिलिटी एक कॉम्पिटिटिव मुद्दा क्यों बन गया है

ग्लोबल ब्रांड अपनी सप्लाई चेन के लिए तेज़ी से ज़्यादा बड़े सस्टेनेबिलिटी टारगेट तय कर रहे हैं। कंज्यूमर रीयूज़्ड, रिपेयर्ड और रीसायकल किए गए प्रोडक्ट में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जबकि मुख्य एक्सपोर्ट मार्केट में पॉलिसी-मेकर एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस, रीसायकल कंटेंट, ट्रेसेबिलिटी, केमिकल, पानी और एनर्जी के इस्तेमाल जैसी ज़रूरतों को लागू कर रहे हैं। भारत के क्लाइमेट कमिटमेंट्स टेक्सटाइल सेक्टर को भी लो-कार्बन ग्रोथ की राह पर ले जा रहे हैं, जिसमें 500 GW नॉन-फॉसिल एनर्जी कैपेसिटी, रिन्यूएबल एनर्जी ज़रूरतों का 50 परसेंट रिन्यूएबल एनर्जी से और 2070 तक नेट-ज़ीरो एमिशन शामिल हैं। इसलिए, सस्टेनेबिलिटी भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक सेकेंडरी कंप्लायंस इश्यू से आगे बढ़कर इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस का एक ज़रूरी हिस्सा बन रही है। भारत की स्थिति एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस, अलग-अलग तरह के रॉ मटीरियल, टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटी, एक स्थापित रीसाइक्लिंग और रीयूज़ इकोसिस्टम, एक बढ़ते स्टार्ट-अप सेक्टर और क्लस्टर्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट्स और इंडस्ट्रियल एसोसिएशन्स के एक बड़े नेटवर्क से मज़बूत हुई है। सर्कुलराइज़ेशन भारत के लिए पूरी तरह से नया नहीं है। रफूगरी, कांथा, गोधरी, चिंदी दरिया और खेस बुनाई जैसी परंपराओं ने पीढ़ियों से समुदायों में रिपेयर और रीयूज़ को शामिल किया है। वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 की भारत की मेज़बानी इस बड़े बदलाव को और दिखाती है, जो सरकारों, इंडस्ट्री, इनोवेटर्स और एक्सपर्ट्स को एक साथ लाकर आइडियाज़ को ऐसे सॉल्यूशन में बदल रही है जिन्हें बड़े पैमाने पर और पार्टनरशिप में लागू किया जा सके।

टेक्सटाइल वेस्ट को सर्कुलर मौके में बदलना

सर्कुलरिटी लागू करने के सबसे साफ़ एरिया में से एक टेक्सटाइल वेस्ट है। मिनिस्ट्री ने 2026 में एक स्टडी की जिसमें 15 राज्यों और 250 से ज़्यादा स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की गई। इसमें सालाना 70.73 लाख टन टेक्सटाइल वेस्ट बनने का अनुमान लगाया गया। इसमें से 70 परसेंट से ज़्यादा पहले ही रिकवर किया जा रहा है और 95 परसेंट से ज़्यादा प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइक्लिंग, डाउनसाइक्लिंग या अपसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है। एक बड़ा गैप पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट में है, जहाँ कलेक्शन, सेपरेशन और इकोनॉमिकली वायबल रिकवरी के सिस्टम कम डेवलप्ड हैं। स्टडी का अनुमान है कि भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग मार्केट 2030 तक लगभग $3.5 बिलियन तक पहुँच सकता है। इसमें कलेक्शन, सॉर्टिंग, फाइबर रिकवरी, रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग, रिपेयर और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग के मौके शामिल हैं, जिससे लगभग एक लाख ग्रीन जॉब्स बनने की संभावना है।

मिनिस्ट्री प्रॉब्लम को क्वांटिफाई करने से आगे बढ़कर इस साइकिल को पूरा करने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केट सिस्टम बनाने की ओर बढ़ रही है। कई शहरों में टेक्सटाइल रिकवरी सुविधाओं के पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं, जबकि मिक्स और दोबारा इस्तेमाल न होने वाले मटीरियल के लिए पॉलिसी सॉल्यूशन की पहचान की जा रही है, साथ ही टेक्सटाइल वेस्ट की मैपिंग के ज़रिए मज़बूत कलेक्शन और सॉर्टिंग सिस्टम की ज़रूरत पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नवी मुंबई में टेक्सटाइल कमेटी द्वारा नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, साहस फाउंडेशन और महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के साथ पार्टनरशिप में लागू किए गए एक टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट पायलट ने हर महीने 3,323 kg से ज़्यादा टेक्सटाइल वेस्ट को डंपिंग और जलाने से हटाकर दूसरे इस्तेमाल में लाया है। यह 12,000 से ज़्यादा घरों तक पहुँचा और 80 से ज़्यादा कलेक्शन बिन लगाए। इसने 1,000 से ज़्यादा सैंपल और रीसायकल किए गए प्रोडक्ट भी बनाए। टेक्सटाइल कमेटी, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) और स्कोप के बीच पार्टनरशिप के ज़रिए सर्टिफाइड अपसाइकल्ड टेक्सटाइल प्रोडक्ट को पब्लिक प्रोक्योरमेंट में लाया जा रहा है। GeM पर 27 कैटेगरी और 40 प्रोडक्ट के साथ 31 अपसाइकलर को अपसाइकल्ड टेक्सटाइल मार्क के तहत सर्टिफाइड किया गया है। इससे सर्कुलर प्रोडक्ट के लिए एक पक्का मार्केट बनाने में मदद मिलती है।

क्लीन प्रोडक्शन: पानी, एनर्जी और केमिकल

साइकिल सस्टेनेबिलिटी की कहानी का सिर्फ़ एक हिस्सा है। टेक्सटाइल का एनवायरनमेंट पर बड़ा असर मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग के दौरान होता है, जिससे पानी, एनर्जी और केमिकल्स भी उतने ही ज़रूरी हो जाते हैं। खतरनाक केमिकल्स को खत्म करने का एजेंडा UNIDO, ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) और दूसरे पार्टनर्स के साथ एक बड़े प्रोग्राम के ज़रिए आगे बढ़ाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद एनर्जी, पानी और ग्रीनहाउस गैस परफॉर्मेंस को बेहतर बनाते हुए खतरनाक केमिकल्स को कम करना है। इसके टारगेट में 10,530 टन की सीधी कमी और 21,000 टन ज़हरीले केमिकल्स की इनडायरेक्ट कमी शामिल है; इसका टारगेट 147,000 टन की सीधी कमी और 294,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के बराबर एमिशन की इनडायरेक्ट कमी भी है। इसे सीधे 40,000 लोगों तक पहुंचने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें से इस ग्रुप में 60 परसेंट महिलाएं होने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर लेवल पर सस्टेनेबिलिटी को इस इलाके की भविष्य की इंडस्ट्रियल ज्योग्राफी में शामिल किया जा रहा है। लगभग $10 बिलियन के अनुमानित इन्वेस्टमेंट के साथ सात ‘PM मित्र’ पार्क बनाए जा रहे हैं, जिनमें पानी, गंदे पानी के डिस्पोजल और कॉमन प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इंटीग्रेटेड प्रोविजन होगा।

पायलट से स्केल तक: पॉलिसी, टेक्नोलॉजी और MSMEs

सस्टेनेबिलिटी को मेनस्ट्रीम करने के लिए, पायलट प्रोग्राम को फैक्ट्रियों और क्लस्टर तक बढ़ाया जाना चाहिए। यह खास तौर पर ज़रूरी है क्योंकि MSMEs टेक्सटाइल इकोसिस्टम का एक बड़ा हिस्सा हैं और उन्हें टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, डेटा और टेक्निकल एक्सपर्टीज़ तक पहुंचने में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई 2023 में, मिनिस्ट्री ने एक ESG टास्क फोर्स बनाई, जिसमें सरकारी बॉडीज़, इंडस्ट्री एसोसिएशन, चैंबर्स, मल्टीलेटरल एजेंसियां, इनोवेटर्स, ब्रांड्स और एकेडेमिया को एक साथ लाया गया। इसके काम में यूनिफॉर्म सर्टिफिकेशन, क्लस्टर्स के लिए शुरुआती सपोर्ट, अवेयरनेस और कैपेसिटी बिल्डिंग, सस्टेनेबल फैशन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन शामिल हैं, जो लंबे समय में फायदेमंद साबित होंगे।

नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन वेस्ट-टू-फाइबर टेक्नोलॉजी पर रिसर्च और टेक्सटाइल वेस्ट और बायो-रेसिड्यूज़ को एडवांस्ड ‘ग्रीन’ मटीरियल में बदलने में मदद करता है। IIT दिल्ली के पानीपत कैंपस में, अटल सेंटर फॉर टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में इस्तेमाल के लिए वेस्ट हीट-रेसिस्टेंट अरामिड फाइबर की रीसाइक्लिंग सहित रिसर्च और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर रहा है। भारत टेक्स 2026 में, सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करने वाली रिसर्च ने इस सेक्टर में कई तरह के नए इनोवेशन पर रोशनी डाली, जिसमें जंगल के लिए अच्छे भांग के फाइबर, सर्कुलर बिजनेस मॉडल और इंसानों के बनाए सेल्युलोसिक फाइबर के विकल्प के तौर पर गेहूं की भूसी का इस्तेमाल शामिल है।

टेक्स-इको: तरक्की के फ्रेमवर्क में सस्टेनेबिलिटी

यूनियन बजट 2026-27 ने एक मजबूत पॉलिसी सिग्नल दिया। माननीय फाइनेंस मिनिस्टर श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लेबर-इंटेंसिव टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम की घोषणा की। यह पहल—‘टेक्स-इको’ सेक्टर के डेवलपमेंट फ्रेमवर्क में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करेगी, न कि इसे एक अलग एनवायरनमेंटल प्रोग्राम के तौर पर देखेगी; इसमें फाइबर सिक्योरिटी, मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, पारंपरिक क्लस्टर, हैंडीक्राफ्ट, हैंडीक्राफ्ट और स्किल डेवलपमेंट जैसे एरिया शामिल होंगे।

प्रस्तावित ‘टेक्स-इको’ पहल चार स्ट्रेटेजिक पिलर को जोड़ती है: रिसोर्स रिकवरी और रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर; वॉटर मैनेजमेंट और कार्बन में कमी; सस्टेनेबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को इंस्टीट्यूशनल बनाना; और इनोवेशन, डिजिटल कैपेबिलिटी और नॉलेज सिस्टम। टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग मेगा-हब और टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी टेक्सटाइल वेस्ट को इकट्ठा करने, छांटने, ग्रेडिंग करने और फॉरवर्ड करने के प्रोसेस को आसान बनाएंगी। पानी और कार्बन न्यूट्रैलिटी के उपाय ‘ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ रिन्यूएबल एनर्जी, कम एमिशन वाले बॉयलर और रिसोर्स-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करेंगे। मार्केट में भरोसा, कम्प्लायंस, कैपेसिटी बिल्डिंग और डिमांड जेनरेशन के साथ-साथ क्रेडिबिलिटी को मजबूत करने के लिए एक ‘इंडिया सस्टेनेबिलिटी मार्क’ का प्रस्ताव दिया गया है।

एक ESG इकोसिस्टम बनाना

इन उपायों के पीछे एक बड़ा इंस्टीट्यूशनल बदलाव है। टेक्सटाइल मंत्रालय के अंदर एक डेडिकेटेड सस्टेनेबिलिटी डिवीजन सस्टेनेबल और सर्कुलर प्रैक्टिस, रिसोर्स एफिशिएंसी, एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट रिडक्शन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और रिस्पॉन्सिबल प्रोडक्शन के लिए एक फोकल पॉइंट के तौर पर काम करता है। सरकार न केवल एक रेगुलेटर के तौर पर बल्कि एक फैसिलिटेटर, एक लीड एंटिटी और एक इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर के तौर पर भी काम करती है। ESG एजेंडा एनवायर्नमेंटल डाइमेंशन से कहीं आगे जाता है। वर्कर वेल-बीइंग, फॉर्मलाइजेशन, ग्रीन एम्प्लॉयमेंट और एक जस्ट ट्रांज़िशन जैसे पहलू डीकार्बोनाइजेशन, वॉटर मैनेजमेंट, केमिकल सेफ्टी और सर्कुलरिटी के साथ अलाइन होते हैं, जबकि गवर्नेंस प्रायोरिटी में स्टैंडर्ड, ट्रेसेबिलिटी, डिस्क्लोजर, सर्टिफिकेशन और भरोसा शामिल हैं।

आगे का रास्ता

भारत की सस्टेनेबल टेक्सटाइल यात्रा एक अहम दौर में जा रही है, जो मज़बूत पोस्ट-कंज्यूमर कलेक्शन, रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसोर्स-एफिशिएंट मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन टेक्नोलॉजी के कमर्शियलाइज़ेशन, भरोसेमंद मेज़रमेंट और ट्रेसेबिलिटी, और रीसायकल प्रोडक्ट्स के लिए मज़बूत मार्केट पर फोकस कर रही है। एक प्रस्तावित सस्टेनेबिलिटी कोएलिशन इन प्रायोरिटीज़ के आसपास सरकार, UN एजेंसियों, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स, इंडस्ट्री, MSMEs और एकेडेमिया को एक साथ लाएगा। दिशा तेज़ी से साफ़ होती जा रही है: सस्टेनेबिलिटी को फैक्ट्री मालिक के लिए उतना ही काम करना चाहिए जितना यह पर्यावरण के लिए करती है, एक्सपोर्टर के लिए उतना ही काम करना चाहिए जितना यह कंज्यूमर के लिए करती है, और एक बड़े इंटीग्रेटेड पार्क के लिए उतना ही काम करना चाहिए जितना यह एक छोटे एंटरप्राइज के लिए करती है। यह रिसोर्स प्रोडक्टिविटी में सुधार कर सकता है, डिमांडिंग ग्लोबल मार्केट तक पहुंच को आसान बना सकता है, रीसाइक्लिंग और पर्यावरण के अनुकूल टेक्नोलॉजी पर फोकस करने वाले नए बिज़नेस को बढ़ावा दे सकता है, और नौकरियां पैदा कर सकता है।

एक ऐसे देश के लिए जो 2030 तक अपने टेक्सटाइल और अपैरल मार्केट को लगभग दोगुना करने की राह पर है, सस्टेनेबिलिटी का मुद्दा प्रोग्रेस को धीमा करने के बारे में नहीं है। यह ग्रोथ की अगली लहर को पावर देने के बारे में है – जो ज़्यादा साफ, ज़्यादा सर्कुलर, ज़्यादा डायनामिक और आखिरकार, ज़्यादा कॉम्पिटिटिव होगी।

(लेखक केंद्रीय कपड़ा मंत्री हैं; व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)

संशोधित ईपीएफ सीमा और सामाजिक सुरक्षा तंत्र का निर्माण, कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए

लेखक : वी. अनंत नागेश्‍वरन् और श्रुति सिंह

विश्वकर्मा जयंती पर, कामग़ारों और शिल्पकारों का सम्मान करने वाले इस पर्व के अवसर पर सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के बहुत समय से लंबित निर्णय की घोषणा की। कोई पूछ सकता है कि सीमा में 10,000 रुपये की वृद्धि से आखिर क्या बदलाव आएगा? इस संशोधन की आवश्यकता क्यों है और इसका कर्मचारी या नियोक्ता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? तो आइए, मूल बातों से शुरुआत करते हैं।

25,000 रुपये की यह वैधानिक वेतन सीमा अनिवार्य ईपीएफ, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा (ईडीएलआई) कवरेज के लिए सीमा का काम करती है। ये तीनों योजनाएं भारत में वेतनभोगी कामग़ारों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र के मूल आधार हैं: सेवानिवृत्ति/आपातकालीन निधि; नियोक्ता के अंशदान से वित्तपोषित पेंशन निधि, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद भुगतान किया जाता है; और जीवन बीमा, जिसे नियोक्ता के अंशदान से ही वित्तपोषित किया जाता है, जिससे कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को सहायता मिल सके। पूर्णतः उचित यही है कि सामाजिक सुरक्षा को साल 2014 से स्थिर किसी संख्या पर आधारित न रखा जाए, जबकि इस अवधि में वेतन, न्यूनतम मजदूरी और जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ती रही है।

पिछली वेतन सीमा के तहत, 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला कोई भी नया कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर हो जाता था, ईपीएस के लिए पात्र नहीं होता था और ईडीएलआई के संरक्षण से भी वंचित रहता था। किसी मौजूदा कर्मचारी का वेतन समय के साथ इस सीमा से अधिक हो जाने पर कवरेज समाप्त नहीं होती थी, लेकिन ईपीएस के तहत पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये पर ही सीमित रहता था। कोई यह तर्क दे सकता है कि अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी इसके बजाय स्वैच्छिक कवरेज का विकल्प चुन सकते हैं। इस तर्क में समस्या यह है कि सीमा से अधिक वेतन पर स्वैच्छिक नामांकन के लिए संयुक्त विकल्प के तहत नियोक्ता की सहमति आवश्यक होती है, जिससे यह विकल्प सुनिश्चित अधिकार के बजाय सौदेबाज़ी का विषय बन जाता है। बढ़ी हुई वेतन सीमा के साथ, यह कवरेज सौदेबाज़ी का विषय न रहकर अधिकार बन जाएगी।

बढ़ी हुई वेतन सीमा कामगारों से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान तो नहीं करती, लेकिन यह औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र को थोड़ा अधिक न्यायसंगत और थोड़ा व्यापक जरूर बनाती है। 10,000 रुपये की वृद्धि भले ही मामूली लगती हो, लेकिन अब सामाजिक सुरक्षा तंत्र के दायरे में आने वाले अतिरिक्त 51 लाख कामगारों की संख्या मामूली नहीं है। और अधिकांश अधिकारों के विपरीत, इस अधिकार का लाभ लेने के लिए कामगार को अपनी ओर से कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है।

मनुष्य अपने भविष्य की कल्पना करने और उसके लिए तैयारी करने में खास अच्छे नहीं होते। 65 वर्ष की उम्र के अपने भावी स्वरूप के लिए कोई बजट नहीं बनाता। हम अक्सर उस छोटे लाभ को चुनते हैं जो जल्दी मिल जाए, बजाय उस बड़े लाभ के जो देर से मिले। व्यवहार अर्थशास्त्र में इसे ‘हाइपरबोलिक डिस्काउंटिंग’ कहा जाता है। परिणामस्वरूप, सीमित आय में तत्काल उपभोग की जरूरतों को पूरा करने की तुलना में भविष्य में अपने लिए या किसी भावी परिस्थिति के लिए बचत करना और योजना बनाना अक्सर अधिक कठिन होता है। यही कारण है कि ईपीएफओ द्वारा संचालित अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा अंशदान जैसी व्यवस्थाओं की रूपरेखा महत्वपूर्ण है। यह बचत के लिए कामगार की इच्छा या इच्छाशक्ति पर निर्भर किए बिना काम करती है। आय के कामगार के खाते में पहुंचने से पहले ही पेंशन के लिए अंशदान अलग रख दिया जाता है—जो पैसा कभी दिखाई ही नहीं देता, उसे खर्च करना संभव नहीं होता। और धीरे-धीरे, हर महीने वेतन का एक छोटा हिस्सा अलग रखा जाता है, जिससे सेवानिवृत्ति निधि तैयार होती है, जिसका उपयोग आपातकाल में भी किया जा सकता है, साथ ही जीवन बीमा का कवरेज भी मिलता है—वह भी आपके अपनी ओर से बिना कोई अतिरिक्त प्रयास किए।

हालांकि, इस संशोधन के साथ नियोक्ताओं के लिए एक लागत भी जुड़ी हुई है। अनिवार्य वेतन सीमा अब बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने के साथ, नियोक्ताओं को काफी अधिक संख्या में कर्मचारियों को वैधानिक ईपीएफ कवरेज प्रदान करनी होगी और उनके मासिक अंशदान संबंधी दायित्व भी बढ़ जाएंगे। उदाहरण के लिए, 22,000 रुपये प्रति माह कमाने वाला ऐसा कर्मचारी, जो पहले अनिवार्य कवरेज से बाहर था, अब वैधानिक रूप से ईपीएफ कवरेज के दायरे में आएगा और नियोक्ता के लिए इस कर्मचारी को ईपीएफ कवरेज प्रदान करना अनिवार्य होगा। अब नियोक्ता को वेतन का 12 प्रतिशत अंशदान करना होगा, जो ईपीएस पेंशन योजना और कर्मचारी के अपने ईपीएफ खाते के बीच विभाजित होगा। यह राशि प्रति कर्मचारी प्रति माह 2,640 रुपये या वार्षिक 31,680 रुपये होगी। ऐसे 20 कर्मचारियों के मामले में, यह अतिरिक्त पेरोल लागत के रूप में प्रति वर्ष 6,33,600 रुपये होगी। इसके अलावा, ईडीएलआई बीमा अंशदान भी होगा, जो राशि में भले ही छोटा है, लेकिन अब इसकी गणना भी अधिक वेतन आधार पर की जाएगी। नियुक्ति संबंधी निर्णय लेते समय यह नियोक्ताओं के लिए एक वास्तविक लागत है।

अधिक लागत कंपनी के लिए एक स्पष्ट निष्कर्ष प्रतीत होती है, लेकिन यह केवल प्रारंभिक प्रभाव है और रोजगार बाजार इससे कहीं अधिक जटिल है। अधिक ईपीएफ कवरेज भर्ती के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में काम करता है, जिससे अधिक कुशल और अधिक कार्य-क्षमता वाले कामगार आकर्षित होते हैं, क्योंकि नए कर्मचारी किसी नौकरी का मूल्यांकन करते समय केवल मासिक वेतन को ही ध्यान में नहीं रखते। यह कवरेज कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में भी सहायक हो सकती है। पेंशन और बीमा लाभ वाला कामगार संभवतः अधिक समय तक काम पर बना रहेगा और नौकरी की शुरुआत थोड़ी अधिक सुरक्षा के साथ करेगा। दूरदर्शी नियोक्ता पहले से ही इसे समझते हैं और अच्‍छी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए स्वैच्छिक कवरेज प्रदान करते हैं।

सामाजिक सुरक्षा की अवधारणा यह है कि यह ट्रैम्पोलीन की तरह न केवल आपको संभालती है, बल्कि फिर से उछलकर आगे बढ़ने में भी सक्षम बनाती है। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य कामगारों को ऐसा कोष उपलब्ध कराना है, जिससे वे आपातकाल के समय या सेवानिवृत्ति के बाद आवश्यकता पड़ने पर धन प्राप्त कर सकें, जिससे कोई अस्थायी संकट जीवनभर की कठिनाई का रूप न ले और उन्हें ऋण-जाल में न फंसाए।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी पहलें, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाया है, इस सुरक्षा तंत्र को और मज़बूत बनाती हैं। बदलते रोज़ग़ार स्‍वरूप हेतु तैयारी करने के लिए मजबूत उद्योग संपर्कों के साथ, कौशल उन्नयन, पुनःकौशल विकास और नव कौशल विकास के लिए कौशल विकास पारितंत्र का निर्माण किया जा रहा है। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) अंशदायी पेंशन कवरेज को उन लोगों के लिए कम आय वर्ग तक और आगे बढ़ाती है, जो निवेश जोखिम उठाने और आर्थिक तथा बाजार वृद्धि के लाभों में भागीदारी के इच्छुक हैं। यह ट्रैम्पोलीन भी कदम दर कदम मज़बूत होता जा रहा है।

(वी. अनंत नागेश्वरन् भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं और श्रुति भारतीय आर्थिक सेवा की एक अधिकारी हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)

कुमारी शैलजा को जन्मदिन पर डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने दी शुभकामनाएं

कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा के जन्मदिन पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचकर शुभकामनाएं दीं।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव एवं लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा के जन्मदिन के अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और समाजसेवी डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कुमारी शैलजा को पुष्पगुच्छ भेंट किया और केक काटकर उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने कहा कि कुमारी शैलजा का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, सामाजिक सरोकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ संवाद और जनहित से जुड़े मुद्दों पर कुमारी शैलजा की सक्रियता ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि कुमारी शैलजा का राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति उनकी सक्रिय भूमिका कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. पंवार ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

जन्मदिन के मौके पर हुई इस मुलाकात के दौरान डॉ. पंवार ने कुमारी शैलजा के सुखमय और स्वस्थ जीवन की कामना की तथा कहा कि वह इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ जनसेवा एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में योगदान देती रहें।

बहरीन की महिला मामले में अकाली दल पुनर सुरजीत ने CM मान से की मुलाकात, SIT जांच की मांग

बहरीन की महिला से जुड़े मामले को लेकर अकाली दल पुनर सुरजीत के प्रतिनिधिमंडल ने CM भगवंत मान से मुलाकात कर SIT जांच की मांग की। अमरजीत सिंह चावला पर दर्ज FIR की जांच की मांग।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

बहरीन में रहने वाली महिला से जुड़े मामले को लेकर शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र भी सौंपा।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज FIR और श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्टी ने मांग की कि वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में SIT गठित कर जांच को तय समय में पूरा किया जाए।

बहरीन से महिला के पंजाब आने से लेकर पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि महिला और उसकी बहू को बहरीन से भारत लाने के लिए हवाई टिकटों की व्यवस्था किसने की थी और श्री आनंदपुर साहिब में उनके ठहरने का इंतजाम किसके द्वारा किया गया था। इसके अलावा महिला की गिरफ्तारी, जेल में रहने और बाद में श्री आनंदपुर साहिब पहुंचने से जुड़े घटनाक्रम की भी जांच की मांग की गई है।

अमरजीत सिंह चावला पर FIR

इस मामले में अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ श्री आनंदपुर साहिब पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चावला ने आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस जांच जारी है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभी तक इस मामले में गिरफ्तारी नहीं हुई है।

अकाली दल (पुनर सुरजीत) के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मामले में हस्तक्षेप करते हुए SIT गठित करने की मांग की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने जांच को 15 दिनों के भीतर पूरा करने की मांग भी रखी है।

मामले में पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी।

अकाली दल का AAP सरकार पर हमला, सुखबीर बादल बोले- सत्ता में आए तो ड्रग तस्करों की संपत्ति होगी जब्त

सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार पर कानून-व्यवस्था, नशे, अवैध माइनिंग, भ्रष्टाचार और OPS को लेकर निशाना साधा। सुखबीर ने ड्रग तस्करों पर सख्त कानून का ऐलान किया।

अमृतसर / सत्ता संदेश

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था, नशे, अवैध माइनिंग, भ्रष्टाचार और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर निशाना साधा है। SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और आगामी समय में पार्टी की सरकार बनने पर नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानून लाने की बात कही।

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या गंभीर है और उनके अनुसार मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ड्रग्स की पहुंच बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अगर शिरोमणि अकाली दल की सरकार बनती है तो ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाएगा।

ड्रग तस्करों की संपत्ति जब्त करने का ऐलान

सुखबीर बादल ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ड्रग तस्करों को कम से कम 10 साल तक जमानत नहीं मिल सकेगी और उन्हें उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के कारोबार से जुड़ी उनकी संपत्तियों को सरकार जब्त करेगी। उनके इस बयान की हालिया रिपोर्टों में भी पुष्टि हुई है।

उन्होंने नशे के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं और परिवारों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि समाज को मिलकर इस समस्या के खिलाफ आवाज उठानी होगी।

मजीठिया ने अवैध माइनिंग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए

बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब में कानून-व्यवस्था और प्रशासन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध माइनिंग का नेटवर्क सक्रिय है और स्थानीय स्तर पर पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

मजीठिया ने GMADA और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े मामलों को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अगर प्रवर्तन निदेशालय (ED) कथित वित्तीय लेन-देन की मनी ट्रेल की जांच करे तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ये आरोप मजीठिया की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

किसानों की फसल खरीद का मुद्दा भी उठाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अकाली नेताओं ने मंडियों में किसानों की फसल खरीद से जुड़े मुद्दे भी उठाए। मजीठिया ने आरोप लगाया कि खरीद में देरी के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कुछ किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

OPS और कर्मचारियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

सुखबीर बादल ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग दोहराई। अकाली नेताओं ने कर्मचारियों के DA और अन्य लंबित मांगों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

सुखबीर बादल ने कहा कि OPS कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग है और इसे बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर कर्मचारियों से किए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया।

कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार AAP सरकार को घेर रहा है। हाल में पुलिस की कथित सुरक्षा एडवाइजरी को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए थे, हालांकि पंजाब पुलिस ने उस वायरल दस्तावेज को फर्जी बताया था।

अकाली दल की ओर से लगाए गए आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया इस मामले में अलग से सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फरीदकोट हेरोइन केस में बड़ा खुलासा: बरामदगी बढ़कर 54 किलो, BSF की मदद से 6.7 किलो और हेरोइन बरामद

फरीदकोट में 47.3 किलो हेरोइन और तीन विदेशी पिस्तौल के साथ गिरफ्तार चार आरोपियों के मामले में BSF की मदद से 6.7 किलो अतिरिक्त हेरोइन बरामद हुई। कुल बरामदगी 54 किलो हुई।

फरीदकोट / सत्ता संदेश

फरीदकोट पुलिस द्वारा 47 किलो 300 ग्राम हेरोइन और तीन विदेशी पिस्तौल के साथ चार आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में अब एक और बड़ी बरामदगी हुई है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों में से एक की निशानदेही पर BSF की मदद से 6 किलो 700 ग्राम अतिरिक्त हेरोइन बरामद की है। इसके साथ ही इस मामले में बरामद कुल हेरोइन की मात्रा बढ़कर 54 किलो हो गई है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में से मंगल सिंह पुलिस रिमांड पर है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि बॉर्डर पार से ड्रग्स की खेप उठाते समय उसका कुछ हिस्सा कंटीली तार की बाड़ के पास छूट गया था। आरोपी ने पुलिस को उस जगह की जानकारी दी, जिसके बाद फरीदकोट पुलिस ने BSF के सहयोग से बताए गए स्थान पर तलाशी अभियान चलाया।

तलाशी के दौरान पुलिस को कंटीली तार के पास से 6 किलो 700 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इससे पहले पुलिस ने चार आरोपियों को 47 किलो 300 ग्राम हेरोइन और तीन विदेशी पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया था।

बॉर्डर पार बैठे तस्करों से कनेक्शन की जांच

SP नरिंदर सिंह ने बताया कि आरोपियों से लगातार गहन पूछताछ की जा रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि आरोपियों के बॉर्डर पार बैठे ड्रग तस्करों से संपर्क कैसे बने और ड्रग्स की खेप मंगवाने के लिए पैसों का लेन-देन किस तरह किया गया।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में हेरोइन की खेप कहां पहुंचाई जानी थी और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ और जांच के दौरान ड्रग तस्करी के नेटवर्क से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।

रोपड़-श्री चमकौर साहिब रोड जाम, किसानों का प्रदर्शन; सड़कों पर पशु चराने के खिलाफ मांग

रोपड़-श्री चमकौर साहिब रोड पर किसानों ने प्रदर्शन कर जाम लगाया। किसानों ने सड़कों, पंचायत और वन विभाग की जमीनों पर पशु चराने तथा कथित अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

रोपड़ / सत्ता संदेश

सड़कों और सरकारी जमीनों पर पशु चराने के मुद्दे को लेकर किसानों ने रोपड़-श्री चमकौर साहिब रोड जाम कर प्रदर्शन किया। किसान संगठनों ने प्रशासन से सड़कों, पंचायत की जमीनों और वन विभाग की जमीनों पर पशु चराने पर रोक लगाने की मांग की।

किसान नेताओं के अनुसार, करीब 10 दिन पहले गांव बंदे महल कलां में एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट की घटना हुई थी। आरोप है कि सड़क पर पशु चरा रहे हीर गुज्जर ने उक्त व्यक्ति के साथ मारपीट की। इसके बाद किसान संगठनों ने एकजुट होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की मांग की।

किसान संगठनों का कहना है कि उनका विरोध किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सड़कों और सरकारी जमीनों पर कथित तौर पर पशु चराने और कब्जे की समस्या को लेकर है।

प्रशासन से कई बार की थी कार्रवाई की मांग

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत करवाया था। उनका कहना है कि सड़कों तथा पंचायत और वन विभाग की जमीनों पर पशु चराने से आम लोगों और किसानों को परेशानी होती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

इसी के विरोध में किसानों ने रोपड़-श्री चमकौर साहिब रोड पर धरना लगाकर यातायात रोक दिया।

कैंप खाली करवाने की मांग

प्रदर्शनकारी किसानों ने मांग की कि सड़कों पर पशु चराने की गतिविधि पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जे के कारण लगाए गए कैंपों को भी खाली करवाने की मांग की।

किसान नेताओं ने प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, उनका विरोध जारी रह सकता है।

लुधियाना : निहंगों ने 3 युवकों को पकड़ा, पुलिस यूनिफॉर्म पहनने का भी आरोप

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना के डेहलों इलाके में तीन युवकों को कथित तौर पर नशीले पदार्थ के साथ पकड़े जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इनमें से दो युवकों ने पुलिस जैसी टी-शर्ट पहन रखी थी। निहंग सिंहों ने तीनों युवकों को पकड़कर एक खंभे से बांधा और उनके साथ मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, निहंग सिंहों ने तीनों युवकों को पकड़ने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस के अनुसार, युवकों के पास से करीब 10 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। मामले में NDPS एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

निहंगों ने डेहलों चौक पर लगाया जाम

बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट निहंग सिंह संगठनों ने डेहलों चौक पर जाम भी लगाया। उनका आरोप था कि पकड़े गए युवकों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

पुलिस ने कहा- आरोपी पुलिसकर्मी नहीं

डेहलों थाने के SHO विजय कुमार ने बताया कि निहंग सिंहों ने तीनों युवकों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान अजय शर्मा, आकाश और गुरकीरत के रूप में हुई है और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

SHO ने बताया कि मामले में NDPS एक्ट समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस यूनिफॉर्म को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस टी-शर्ट को पुलिस यूनिफॉर्म बताया जा रहा है, वह बाजार से खरीदी गई थी और युवक के पुलिसकर्मी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लुधियाना के डेहलों में तीन युवकों को निहंग सिंहों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया। दो युवकों के पुलिस यूनिफॉर्म जैसी टी-शर्ट पहनने की बात सामने आई। NDPS समेत कई धाराओं में FIR दर्ज।

₹500 का नोट असली है या नकली? RBI ने बताए पहचानने के आसान तरीके, ऐसे करें पहचान

नई दिल्ली। बाजार में नकली नोटों की पहचान को लेकर लोगों के बीच अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है। खासकर ₹500 के नोट को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि यह आम लेन-देन में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख मुद्रा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ₹500 के नोट में कई सुरक्षा फीचर्स दिए हैं, जिनकी मदद से आम व्यक्ति असली और नकली नोट में अंतर कर सकता है।

RBI ने मई 2023 में ₹2000 के बैंक नोट को सर्कुलेशन से वापस लेने की घोषणा की थी। हालांकि, ₹2000 के नोट का कानूनी मुद्रा का दर्जा खत्म नहीं किया गया था। RBI के अनुसार ये नोट अभी भी लीगल टेंडर हैं।

इसी बीच ₹500 के नकली नोटों का मुद्दा भी सामने आता रहा है। RBI की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग सिस्टम में ₹500 के 91,110 नकली नोट पकड़े गए थे, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 79,669 नोटों की तुलना में 14.4 प्रतिशत अधिक थे। बाद में सरकार द्वारा संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 2023-24 में ₹500 के 85,711 नकली नोट पकड़े गए।

₹500 के असली नोट की ऐसे करें पहचान

महात्मा गांधी की तस्वीर:
नोट के सामने वाले हिस्से के बीच में महात्मा गांधी का चित्र होता है।

देवनागरी में ₹500:
नोट पर मूल्यवर्ग 500 देवनागरी लिपि में भी अंकित होता है।

पारदर्शी रजिस्टर:
नोट को रोशनी के सामने रखने पर मूल्यवर्ग से जुड़ा पारदर्शी रजिस्टर दिखाई देता है।

सुरक्षा धागा:
₹500 के नोट में विंडोड कलर-शिफ्टिंग सिक्योरिटी थ्रेड होता है। नोट को झुकाने पर इसका रंग हरे से नीला दिखाई देता है। इस धागे पर ‘भारत’ और ‘RBI’ अंकित होते हैं।

वॉटरमार्क:
नोट को रोशनी के सामने रखने पर महात्मा गांधी का वॉटरमार्क और मूल्यवर्ग का इलेक्ट्रोटाइप वॉटरमार्क देखा जा सकता है।

रंग बदलने वाली स्याही:
नोट पर मूल्यवर्ग का अंक ऐसी स्याही से छपा होता है जिसका रंग नोट को झुकाने पर हरे से नीला दिखाई देता है।

अशोक स्तंभ:
नोट के दाईं ओर अशोक स्तंभ का प्रतीक मौजूद होता है।

उभरी हुई छपाई:
दृष्टिबाधित लोगों की सुविधा के लिए नोट पर कुछ चिन्ह और अंक उभरी हुई यानी इंटैग्लियो प्रिंटिंग में दिए गए हैं। ₹500 के नोट पर पहचान चिह्न के रूप में उभरा हुआ वृत्त (circle) दिया गया है। इसके अलावा पहचान के लिए एंगुलर ब्लीड लाइनों की व्यवस्था भी है।

नोट लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर किसी ₹500 के नोट की प्रिंटिंग संदिग्ध लगे, सुरक्षा धागा सामान्य दिखाई दे या वॉटरमार्क और उभरी हुई छपाई जैसे फीचर्स नजर न आएं, तो उसे सामान्य नोट मानकर आगे चलाने के बजाय बैंक में इसकी जांच करवाना बेहतर है। RBI ने बैंकों को नकली नोटों की पहचान और उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत संभालने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं।

ध्यान रखें: केवल नोट का रंग, आकार या कागज छूकर असली-नकली का फैसला न करें। RBI द्वारा बताए गए कई सुरक्षा फीचर्स को एक साथ जांचना ज्यादा विश्वसनीय तरीका है।