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Russia-Ukraine War : नाटो की बैठक से पहले रूस का यूक्रेन पर मिसाइल ड्रोन अटैक, 7 लोगों की मौत

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

नाटो शिखर बैठक से ठीक पहले रूस ने युक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस हमले में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा है और मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव अभियान जारी है।

यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने एक साथ कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया। कीव के मेयर विताली क्लिचको ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मलबा गिरने से आग लग गई और नुकसान हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी। हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी नए बड़े जनहानि के आंकड़े जारी नहीं किए गए। इससे पहले भी पिछले सप्ताह रूस ने कीव पर बड़ा हमला किया था, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी।

जेलेंस्की ने पहले ही बड़े हमले की चेतावनी क्यों दी थी?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को कहा था कि खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि रूस एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस और नाटो शिखर सम्मेलन से पहले दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना और लोगों की जान लेना है। उनके इस बयान के कुछ घंटे बाद ही कीव पर बड़ा हमला हो गया।

नाटो शिखर सम्मेलन से पहले यह हमला कितना अहम?

यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब मंगलवार से तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन शुरू होना है। सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में यूक्रेन युद्ध, यूरोप की सुरक्षा और रूस के खिलाफ आगे की रणनीति प्रमुख मुद्दे होंगे। ऐसे समय में कीव पर हमला रूस की ओर से एक रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

रूस और यूक्रेन के बीच जंग किस दिशा में बढ़ रही?

रूस पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में अधिक से अधिक इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरी, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर चुका है। इससे दोनों देशों के बीच संघर्ष और अधिक व्यापक होता जा रहा है। पिछले कुछ सप्ताह में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों को लगातार निशाना बनाया है।

क्या ट्रंप और पुतिन की बातचीत का असर दिखेगा?

चार जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने में मदद की पेशकश की थी। हालांकि बातचीत के कुछ ही दिनों बाद कीव पर हुए ताजा हमले ने संकेत दिया है कि फिलहाल युद्ध थमता नहीं दिख रहा है। अब सभी की नजर नाटो शिखर सम्मेलन पर रहेगी, जहां यूक्रेन संकट को लेकर आगे की रणनीति और सहयोग पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज, भारत से मदद की गुहार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत का नाम खुलकर सामने आने लगा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) खोलने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद इलाके में राशन और दवाइयों की कमी हो गई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

पीओजेके के नेता ने भारत से क्या अपील की?

सरदार अमन खान ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पीओजेके के लोगों को भारत की मदद की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आम लोगों को खाने-पीने का सामान और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पूंछ और डोडा सेक्टर की ओर रास्ता खोलने की भी मांग की। हालांकि, उनके इस कथित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीओजेके में विरोध प्रदर्शन क्यों तेज हुए हैं?

पिछले महीने से पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और विरोध की आवाज उठाने वालों पर सख्ती की जा रही है। ईदगाह मैदान में हुई एक बड़ी रैली में प्रदर्शनकारियों ने ‘पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है’ और ‘हमें आजादी चाहिए’ जैसे नारे लगाए। इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन अब केवल स्थानीय मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।विज्ञापन

जेएएसी पर कार्रवाई को लेकर क्या दावा?

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने पांच जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पीओजेके में असंतोष और बढ़ गया। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव रहा है, जबकि स्थानीय संगठनों की भूमिका लगातार सीमित होती गई है।

पाकिस्तान प्रशासन पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?

  • प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कार्रवाई में कई लोगों की जान जा चुकी है।
  • जेएएसी का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सख्ती की जा रही है।
  • संगठन ने कहा कि यदि मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
  • कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
  • क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
  • पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

ये प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए चुनौती क्यों?

पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शन अब पाकिस्तान के लिए एक राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनते जा रहे हैं। भारत से मदद मांगने और एलओसी खोलने की अपील ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, इन मांगों पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान प्रशासन आंदोलन को बातचीत से शांत करने की कोशिश करता है या सख्ती का रास्ता जारी रखता है। फिलहाल पीओजेके के हालात पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

‘ब्रिक्स वैश्विक इकोनॉमी का नया पावरहाउस, हाई-टेक निर्यात में एक-तिहाई हिस्सेदारी’, पुतिन

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

दुनिया में आर्थिक मोर्चे पर एक नया बदलाव दिख रहा है और ब्रिक्स देश इसके विकास का मुख्य इंजन बन चुके हैं। 29वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा (49 प्रतिशत) ब्रिक्स देशों से आया है। यह आंकड़े बताते हैं कि उभरते बाजार अब वैश्विक पटल पर एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहे हैं। 

व्यापार और अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स का दबदबा

वर्तमान में, क्रय शक्ति समता के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स का योगदान लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, व्यापारिक मोर्चे पर भी इन देशों ने तेजी से प्रगति की है। पुतिन ने कहा है कि ब्रिक्स के अस्तित्व में आने के बाद से वैश्विक माल व्यापार में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।

प्रमुख आंकड़े और क्षेत्रीय प्रभाव

  • जीडीपी में योगदान: वैश्विक जीडीपी वृद्धि (पिछले 5 वर्षों में) का 49 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स से आया।
  • क्रय शक्ति: पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स के पास।
  • आपसी व्यापार: ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार एक ट्रिलियन डॉलर के पार।
  • तकनीकी निर्यात: वैश्विक हाई-टेक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक। 

तकनीक और इनोवेशन में भारत-चीन का नेतृत्व

ब्रिक्स देश अब केवल पारंपरिक व्यापार या कमोडिटी निर्यात तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक हाई-टेक निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक हो गई है। राष्ट्रपति पुतिन ने तकनीकी क्षेत्र में विशिष्ट देशों की ताकत का उल्लेख करते हुए बताया कि वैश्विक सॉफ्टवेयर उद्योग में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। वहीं, चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पेटेंट के मामले में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। रूस भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय तकनीक और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। 

बहुध्रुवीय विश्व और समान विकास की वकालत

आर्थिक विकास के साथ-साथ इस मंच पर वैश्विक समानता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पुतिन ने कहा, “दुनिया तब अधिक न्यायसंगत बनती है जब आर्थिक विकास उन अरबों लोगों तक पहुंचता है जो पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था के हाशिये पर थे”। इसी कड़ी में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने वैश्विक प्रशासन की एक निष्पक्ष प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन और रूस संप्रभु समानता, अंतर्राष्ट्रीय कानून और वास्तविक बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उभरते बाजारों का भविष्य: अफ्रीका और मध्य एशिया

इस आर्थिक महाकुंभ में अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों की विकास क्षमता को भी रेखांकित किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने बताया कि रूस और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग अब केवल व्यापारिक नहीं रहा, बल्कि यह तकनीकी गठबंधन और संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं में बदल गया है, जिसका कुल पोर्टफोलियो 50 अरब डॉलर से अधिक है। 

तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन ने भविष्य के अफ्रीका का खाका खींचते हुए कहा कि 2050 तक दुनिया का हर चौथा व्यक्ति अफ्रीकी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में दुनिया की 20 सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से नौ अफ्रीका में होंगी।

यह आर्थिक सत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पश्चिमी देशों के एकाधिकार से परे, ब्रिक्स देश और उभरते बाजार अब केवल वैश्विक विकास के भागीदार नहीं, बल्कि उसके मुख्य संचालक बन गए हैं। तकनीक, आपसी व्यापार और नई रणनीतिक साझेदारियों के बलबूते यह समूह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हेगसेथ ने भारत-पाक संघर्षविराम पर ट्रंप के दावे का किया समर्थन, भारत को बताया हिंद-प्रशांत रणनीति का प्रमुख साझेदार

सिंगापुर / सत्ता संदेश

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने शनिवार को राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने तथा संघर्षविराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया।

सिंगापुर में आयोजित Shangri-La Dialogue के दौरान अपने संबोधन और बातचीत में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से किया जाना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। नई दिल्ली कई अवसरों पर इस नीति को स्पष्ट रूप से दोहरा चुकी है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर

हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को और करीब लाती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत के योगदान की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, खुफिया साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक नजर

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दक्षिण एशिया, चीन, ताइवान, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने क्षेत्रीय स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ का बयान एक ओर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

हालांकि भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी भूमिका को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना रखते हैं, विशेषकर रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में।

अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

इजराइल ने ईरान में फैक्टरी पर हमला किया, हथियार कार्यक्रम के लिए फेंटानिल आपूर्ति का लगाया आरोप

दुबई, एक अप्रैल (एपी) इजराइल ने कथित रूप से रासायनिक हथियार कार्यक्रम में इस्तेमाल के लिए ‘‘ईरान सरकार को फेंटालिन की आपूर्ति करने वाले वाली’’ एक फैक्टरी पर हमला किया है। इजराइल ने बुधवार तड़के यह जानकारी दी।

ईरान ने तोफीघ डारू फैक्टरी पर हमले की पुष्टि की लेकिन उसने साथ ही कहा कि यह फैक्टरी केवल ‘‘अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी दवाओं’’ की आपूर्ति करती थी जिनका उपयोग चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में होता है।

इजराइल और ईरान ने बताया कि यह हमला मंगलवार को किया गया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान स्थित फैक्टरी की एक तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इजराइल के युद्ध अपराधी दवा कंपनियों पर अब खुलेआम और बेशर्मी से बमबारी कर रहे हैं।’’

भीषण दर्द के इलाज के लिए अस्पतालों में फेंटानिल का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल जानलेवा भी हो सकता है।

इजराइल और अमेरिका ने हाल के वर्षों में दावा किया है कि ईरान हथियारों में फेंटानिल के इस्तेमाल के लिए परीक्षण कर रहा है। अमेरिका ने यह दावा करते हुए ईरान के उस शैक्षणिक शोध का भी हवाला दिया था जिसमें यह अध्ययन किया गया कि 2002 में चेचेन चरमपंथियों द्वारा मॉस्को के थिएटर में लोगों को बंधक बनाए जाने की घटना के दौरान रूस ने संभवतः फेंटानिल का कैसे इस्तेमाल किया।

इजराइल ने आरोप लगाया कि ‘तोफीघ डारू’ तेहरान के एक उन्नत अनुसंधान संस्थान एसपीएनडी को फेंटानिल की आपूर्ति करता था। अमेरिका का आरोप है कि एसपीएनडी ने ऐसे शोध और परीक्षण किए हैं जिनका इस्तेमाल परमाणु विस्फोटक उपकरणों और अन्य हथियारों के विकास में किया जा सकता है।

इस बीच, प्राधिकारियों ने बताया कि बुधवार तड़के कतर के तट के पास एक टैंकर पोत पर हमला हुआ।

ब्रिटेन की सेना के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस’ केंद्र ने हमले की घोषणा करते हुए कहा कि प्रक्षेपास्त्र पोत के किनारे से टकराया।

उसने कहा कि इस दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ और चालक दल सुरक्षित है।

मंगलवार को दुबई के तट के पास तेल से भरे एक कुवैती टैंकर पर हमला हुआ था। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान फारस की खाड़ी में 20 से अधिक पोत पर हमले कर चुका है।

क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई आश्वासन दिया है: केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया

 नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को सवाल किया कि क्या ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि भारतीय पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बृहस्पतिवार रात फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की ‘‘गंभीर स्थिति’’ पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है कि वह हमारे पोतों को होर्मुज से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?’’

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है।

भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने तीन दिन पहले उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।