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भारत–ब्रिटेन FTA को बढ़ावा, हरियाणा से ब्रिटेन के लिए फास्टनर्स की पहली शिपमेंट रवाना

हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को मिली नई उड़ान, यूपीएस ने हरियाणा से फास्टनर्स की पहली शिपमेंट ब्रिटेन के लिए रवाना

भारत–ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हरियाणा से फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट आज यूपीएस से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अधिकारियों एवं यूपीएस के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डीजीएफटी की सहायक निदेशक हेमलता हेड़ाऊ, सहायक निदेशक हीरा लाला, अनुभाग प्रमुख योगेंद्र मीणा तथा यूपीएस के निदेशक अमित जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विशेष रूप से एमएसएमई एवं विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक बाजारों में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी तथा भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से हरियाणा सहित पूरे देश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। फास्टनर उद्योग के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जो ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर यूपीएस के निदेशक अमित जैन ने कहा कि कंपनी के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हरियाणा से पहली फास्टनर्स निर्यात शिपमेंट उनके संसथान से ब्रिटेन के लिए रवाना की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा देश के निर्यात को नई गति प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट को ब्रिटेन के लिए रवाना किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस उपलब्धि को भारतीय उद्योग, निर्यात क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर राजीव जैन, सन्नी निझावन , बलजीत सिंह, रविंदर , शिमला रानी आदि मौजूद रहे |

India-UK CETA: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात पर होगा शून्य शुल्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है। इसे पिछले कुछ सालों में भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप तथा युवा पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

भारत को ये होंगे लाभ
इस करार से भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा। इससे कीमतों में कमी आएगी। पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

क्या है सीईटीए?
सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे। इसके अलावा डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिससे इसे भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।

स्कॉच व्हिस्की के दाम घटेंगे
स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर भी आयात शुल्क में कटौती होगी। स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 फीसदी शुल्क पहले चरण में 75 फीसदी और दस वर्षों में घटकर 40 फीसदी रह जाएगा।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी व कुछ मांस उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।

आईटी कंपनियों के लिए बड़ी राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा।

सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में
यह पहला मौका है, जब भारत ने किसी एफटीए में ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, ताकि भारतीय ईवी उद्योग को शुरुआती पांच वर्षों तक सुरक्षा मिल सके। पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रकों पर शुल्क 44 फीसदी से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 फीसदी हो जाएगा।

किन उद्योगों को फायदा?
रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस एवं प्रोसेस्ड फूड, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट एवं स्टोन उत्पाद

क्या हो सकता है सस्ता?
सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम, नेल पॉलिश