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माय भारत स्वयंसेवकों ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ PM मोदी के वर्चुअल संवाद में लिया भाग

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समावेशी भारत के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस वर्चुअल संवाद में देश के 245 जिलों से 5,000 से अधिक माय भारत स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चंडीगढ़ में लगभग 30 प्रतिभागियों, जिनमें माय भारत स्वयंसेवक भी शामिल थे, ने उपायुक्त कार्यालय, चंडीगढ़ के समिति कक्ष से इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा।

कार्यक्रम में अमनदीप सिंह भट्टी, पीसीएस, अतिरिक्त उपायुक्त, चंडीगढ़; शिवधन शर्मा, यूटी निदेशक, माय भारत; विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत, चंडीगढ़; तथा मनदीप, जिला सूचना अधिकारी, चंडीगढ़ उपस्थित रहे। सभी गणमान्य अतिथियों ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण एवं सामुदायिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास के लिए संचालित विभिन्न परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए उन्हें विकास, नवाचार तथा जनसेवा से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

यह संवाद प्रतिभागी स्वयंसेवकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा तथा इससे माय भारत की युवा नेतृत्व, नागरिक सहभागिता एवं राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई।

माननीय प्रधानमंत्री के “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” के आह्वान के तहत माय भारत पोर्टल पर एक वर्चुअल शपथ (Virtual Pledge) भी प्रारंभ की गई है, जिसका उद्देश्य युवाओं एवं नागरिकों को नशा मुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान से जोड़ना है। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस शपथ को लेकर नशा मुक्त भारत के जन आंदोलन का हिस्सा बनें तथा समाज में जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें। शपथ लेने के उपरांत प्रतिभागी ई-प्रमाण पत्र (e-Certificate) भी डाउनलोड कर सकते हैं।

शपथ लेने के लिए माय भारत पोर्टल पर जाएँ: https://mybharat.gov.in/events/nasha_mukt_yuva

MYB-DAC ने चंडीगढ़ में युवा सहभागिता को सशक्त बनाने की समीक्षा की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

माय भारत चंडीगढ़ की जिला सलाहकार समिति (MYB-DAC) की बैठक गुरुवार को उपमंडल मजिस्ट्रेट (दक्षिण), चंडीगढ़ की अध्यक्षता में आयोजित की गई। उन्होंने उपायुक्त, चंडीगढ़ के नामित प्रतिनिधि के रूप में बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में चंडीगढ़ में माय भारत की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं की सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी शैक्षणिक संस्थानों को अपने विद्यार्थियों का पंजीकरण माय भारत पोर्टल पर सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक संस्थान से एक नोडल अधिकारी तथा कैंपस एम्बेसडर नियुक्त करने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके, स्वयंसेवा (वॉलंटियरिज्म) को बढ़ावा मिले तथा संस्थागत स्तर पर माय भारत की गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।

समिति ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्र निर्माण से संबंधित पहलों तथा माय भारत मंच के माध्यम से उपलब्ध अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) के अवसरों में युवाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी संबंधित विभाग एवं संस्थान मिलकर चंडीगढ़ में माय भारत के सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के निर्माण की दिशा में कार्य करेंगे तथा युवाओं को सामुदायिक विकास एवं स्वयंसेवी गतिविधियों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की चिरस्थाई विरासतः संस्थाएं, विचार और राष्ट्र निर्माण

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

इतिहास अक्सर महान नेताओं को उनके राजनीतिक संघर्षों के जरिए याद करता है। लेकिन राजनेताओं के चिरस्मरणीय योगदान राजनीति के दायरे तक ही सीमित नहीं होते। उनकी वास्तविक विरासत उनके द्वारा सृजित संस्थाओं, परिपोषित विचारों और आने वाली पीढि़यों के लिए छोड़े गए आदर्शों में होती है। राष्ट्र भारत केसरी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 125वां जन्म दिवस मना रहा है। इस अवसर पर उनके सार्वजनिक जीवन के एक ऐसे पहलू को स्मरण करना प्रासंगिक होगा जिसकी ओर व्यापक रूप से गौर करने की जरूरत है। यह पहलू है, राष्ट्र निर्माण की बुनियाद के रूप में संस्थाओं का सृजन करने की उनकी आजीवन प्रतिबद्धता। 

स्वतंत्र भारत का उदय सिर्फ एक राजनीतिक संघर्ष से नहीं हुआ। उसे विश्वविद्यालय बनाने थे जो नागरिकों को शिक्षित करने में सक्षम हों। ऐसी अनुसंधान संस्थाएं खड़ी करनी थीं जो वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार कर सकें। उसे ऐसे उद्योग तैयार करने थे जो आर्थिक आत्मनिर्भरता पैदा कर सकें। सभ्यता की विरासत की रक्षा करने वाले सांस्कृतिक संगठनों और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने वाली लोक संस्थाओं को तैयार करना था। डॉ मुखर्जी ने जल्दी ही समझ लिया था कि राष्ट्र का भविष्य सिर्फ दूरद्रष्टा नेतृत्व पर ही निर्भर नहीं करता। यह उन मजबूत संस्थाओं पर भी निर्भर करता है जो नेताओं और सरकारों से ज्यादा टिकाऊ होंगी। 

उनका असाधारण शैक्षिक कॅरियर उनके विश्वास को प्रतिबिंबित करता है। वह कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने। उन्होंने वैसे समय में यह कार्यभार संभाला जब उच्चतर शिक्षा भारत के बौद्धिक जागरण का केंद्र बन रही थी। उनके लिए विश्वविद्यालय सिर्फ स्नातक तैयार करने के स्थल नहीं थे। वे वैसे सुविज्ञ नागरिकों को गढ़ने वाले संस्थान थे जो सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ योगदान करने में सक्षम हों। उनकी राय थी कि शिक्षा को राष्ट्र निर्माण के वृहत्तर कार्य से अलग नहीं किया जा सकता।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रगति के प्रति उनका समर्पण विश्वविद्यालयों के परिसर से कहीं आगे बढ़कर था। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु की कोर्ट और काउंसिल के सदस्य के तौर पर, उन्होंने भारत के प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में से एक को मज़बूत बनाने में योगदान दिया। 1947 में, उन्होंने ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ पावर इंजीनियरिंग’ की आधारशिला रखी क्योंकि वे भली-भांति समझते थे कि स्वतंत्र भारत की आर्थिक प्रगति के लिए इंजीनियरिंग की शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षमता बहुत ज़रूरी होगी। नवाचार को मुख्य नीतिगत लक्ष्य बनाए जाने से बहुत पहले ही, उन्होंने यह समझ लिया था कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और औद्योगिक विकास ही देश की दीर्घकालिक मज़बूती तय करेंगे।

स्वतंत्रता के बाद, जब डॉ. मुखर्जी भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने, तब इस दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप दिया गया। उन शुरुआती सालों में, नए नए आज़ाद देश के सामने एक औद्योगिक आधार तैयार करने की बड़ी चुनौती थी। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स और सिंदरी फर्टिलाइज़र फैक्ट्री जैसे संस्थान सिर्फ़ मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के तौर पर नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के संकल्प के प्रतीक के तौर पर स्थापित किए गए थे। डॉ. मुखर्जी के लिए, औद्योगीकरण कभी भी अपने आप में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं था; यह राष्ट्रीय क्षमता और सामूहिक आत्मविश्वास में किया गया एक निवेश था।

हालाँकि, किसी भी संस्थान के निर्माण के लिए केवल भौतिक अवसंरचना या प्रशासनिक कुशलता की ही ज़रूरत नहीं होती। इसके लिए सहानुभूति, जन-सेवा और नैतिक ज़िम्मेदारी की भावना की भी आवश्यकता होती है। डॉ. मुखर्जी में इन गुणों की झलक 1943 के बंगाल अकाल के दौरान ही साफ़ तौर पर दिखाई दी थी, जब उन्होंने  बीसवीं सदी की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए बड़े पैमाने पर राहत कार्य करने में खुद को समर्पित कर दिया था। विभाजन के बाद, उन्होंने विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए बड़े पैमाने पर काम किया। वे समझते थे कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण में संस्थानों को फिर से खड़ा करने के साथ-साथ लोगों के दुख दर्द को कम करना और उस पर मरहम लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उनका सार्वजनिक जीवन, भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी समझ और सम्मान को भी दर्शाता था। ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ़ इंडिया’ के अध्यक्ष के तौर पर, उन्होंने बौद्ध देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई। सभ्यतागत कूटनीति के स्थायी महत्व को समझते हुए, बुद्ध के मुख्य शिष्यों—अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्यायन—के पवित्र अवशेषों का भारत में स्वागत करने में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। आज भी, मंगोलिया जैसे देशों के साथ इन पवित्र अवशेषों को साझा करने की भारत की कोशिशें यह दिखाती हैं कि किस तरह सांस्कृतिक विरासत अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को मज़बूत करती है और ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा बनाती है।

साहित्य और विद्वता के प्रति भी उनकी चिंता उतनी ही स्पष्ट थी। उनके पत्रों से पता चलता है कि उन्होंने प्रसिद्ध कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की उनके व्यक्तिगत संकट के समय किस तरह मदद की थी। ऐसी घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि सार्वजनिक नेतृत्व को  केवल बड़े नीतिगत फैसलों से ही नहीं, बल्कि उदारता के उन शांत और मौन कार्यों से भी आंका जाता है, जिन पर शायद ही कभी लोगों का ध्यान जाता है।

डॉ. मुखर्जी ने संस्थागत निर्माण के इसी दृष्टिकोण को संविधान सभा में भी आगे बढ़ाया। संविधान के निर्माण को “एक बड़ी जिम्मेदारी” और “एक गंभीर और पवित्र विश्वास” के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने संवैधानिक शासन के साथ जुड़ी नैतिक ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर दिया। उनके वे शब्द आज भी बेहद प्रासंगिक हैं। संविधान की ताकत अंततः न केवल उसके लिखित प्रावधानों पर, बल्कि संसद की शुचिता, सार्वजनिक संस्थानों की स्वतंत्रता, कानून के शासन और नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी निर्भर करती है। संवैधानिक लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब संस्थाओं पर जनता का भरोसा हो और वे ईमानदारी से काम करें।

जैसे-जैसे भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो रहा है, डॉ. मुखर्जी की सोच हमें एक ज़रूरी बात याद दिलाती है। सिर्फ़ आर्थिक विकास से ही देश की तरक्की तय नहीं होती। संवहनीय विकास के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, सांस्कृतिक संरक्षण और लोगों का भरोसा जगाने वाले संस्थानों में लगातार निवेश की ज़रूरत होती है।

सड़कें, हवाई अड्डे और कारखाने बेहद जरूरी हैं, लेकिन उतने ही जरूरी वे विश्वविद्यालय भी हैं जो जिज्ञासा को प्रोत्साहित करते हैं, वे प्रयोगशालाएँ जो ज्ञान का विस्तार करती हैं, वे संग्रहालय जो विरासत को संजोते हैं और वे सार्वजनिक संस्थान जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हैं, वे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

संस्थाओं में एक अद्भुत गुण होता है: वे सरकारों, राजनीतिक आंदोलनों और यहाँ तक कि कई पीढ़ियों से भी ज़्यादा समय तक बनी रहती हैं। वे संचित ज्ञान को संजोकर रखती हैं, बदलाव के बीच निरंतरता बनाए रखती हैं और समाज को दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं। नेता इतिहास को आकार दे सकते हैं, लेकिन संस्थाएं सभ्यता को जीवित रखती हैं।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन का सबसे अहम सबक यही है। उनकी विरासत केवल उन पदों तक सीमित नहीं है जो उन्होंने संभाले या उन बहसों में भी नहीं है जिनमें उन्होंने हिस्सा लिया, बल्कि यह उनके उस अटूट विश्वास में निहित है कि मजबूत संस्थान ही किसी राष्ट्र की आकांक्षाओं के सच्चे संरक्षक होते हैं।

जैसे-जैसे भारत अपनी विकास यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, ज्ञान, वैज्ञानिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को मजबूत करना ही उनके प्रति सबसे सार्थक श्रद्धांजलि होगी।

(लेखक केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं।)

माय भारत चंडीगढ़ द्वारा युवा क्लब विकास अभियान 2026 का शुभारंभ

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में माय भारत चंडीगढ़ द्वारा पूरे चंडीगढ़ में युवा क्लब विकास अभियान 2026 का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं की सहभागिता को सशक्त बनाना तथा संगठित युवा समूहों के माध्यम से सामुदायिक विकास को बढ़ावा देना है।

इस अभियान के अंतर्गत चंडीगढ़ में कार्यरत सभी युवा क्लबों, महिला मंडलों एवं युवा संगठनों को माय भारत से संबद्ध होने तथा राष्ट्र निर्माण की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह अभियान उन युवाओं को भी प्रोत्साहित करता है जो नए युवा क्लब का गठन कर उसे माय भारत से संबद्ध करना चाहते हैं।

जन-जागरूकता एवं संपर्क अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने हेतु छह स्वयंसेवकों—मोहिनी, कस्तूरी, कार्तिक, पंकज, तनीष एवं वैभव—को चंडीगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया है। ये स्वयंसेवक जागरूकता गतिविधियों का संचालन करेंगे तथा युवा समूहों को संबद्धता प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करेंगे।

अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत चंडीगढ़ ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत युवा संगठनों को सशक्त बनाना तथा चंडीगढ़ में युवा क्लबों का एक सशक्त एवं सक्रिय नेटवर्क विकसित करना है। उन्होंने सभी पात्र युवा क्लबों, महिला मंडलों एवं युवा संगठनों से माय भारत से संबद्ध होने तथा विभिन्न युवा विकास एवं राष्ट्र निर्माण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

जो संगठन अपने वर्तमान क्लब को माय भारत से संबद्ध करना चाहते हैं अथवा नए युवा क्लब का गठन करना चाहते हैं, वे श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत चंडीगढ़, को मोबाइल नंबर 9805832503 पर संपर्क कर सकते हैं.

इच्छुक व्यक्ति अधिक जानकारी एवं सहायता हेतु माय भारत कार्यालय, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर, सेक्टर-12, चंडीगढ़ में भी संपर्क कर सकते हैं।

नई दिल्ली में 15 से 17 जून तक विकसित भारत युवा संसद का होगा आयोजन
  • विकसित भारत युवा संसद 2026: नई दिल्ली में 15 से 17 जून, 2026 तक आयोजन
  • युवाओं के नेतृत्व में राष्ट्र-निर्माण और शासन की दिशा में एक अहम पड़ाव
  • बहस से समाधान तक: युवा ‘नारी शक्ति वंदन’ (समावेशिता को बढ़ावा) और ‘विकसित भारत 2047’ पर चर्चा करेंगे
  • युवा संसदीय कार्यवाही को करीब से देखेंगे: शासन-व्यवस्था की गहरी समझ

युवा मामले और खेल मंत्रालय, केंद्रीय युवा मामले और खेल तथा श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के नेतृत्व में, ‘MY Bharat’ (एक स्वायत्त संस्था) के माध्यम से नई दिल्ली में 15 से 17 जून, 2026 तक ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिछले आयोजनों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रमुख पहल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को नए नज़रिए से देखती है। यह युवा नागरिकों को शासन, नीतिगत चर्चा और संसदीय कामकाज की व्यावहारिक समझ प्रदान करती है। यह कार्यक्रम तीन चरणों में आगे बढ़ेगा, जिनमें से प्रत्येक को युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:

ज़िला नोडल राउंड:

• देश के हर कोने तक बातचीत पहुँचाने के लिए 757 नोडल विश्वविद्यालयों/संस्थानों में ‘आपातकाल के 50 साल: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक’ विषय पर व्यापक चर्चाएँ आयोजित की गईं।
• हर ज़िले से शीर्ष 5 प्रतिभागियों को राज्य स्तर के राउंड में भाग लेने का मौका मिला।

राज्य स्तरीय राउंड:

• सभी राज्यों की विधानसभाओं और प्रमुख सरकारी स्थानों पर आयोजित इन राउंड्स ने युवाओं को ‘केंद्रीय बजट 2026: युवा शक्ति-संचालित बजट’ विषय पर क्षेत्रीय शासन-व्यवस्था की सार्थक झलक दिखाई।
• राज्य विधानसभा अध्यक्षों और राज्यपालों की अध्यक्षता में हुए इन सत्रों ने सार्वजनिक चर्चा में युवाओं की आवाज़ को और मज़बूत किया।

राष्ट्रीय राउंड (15-17 जून, 2026):

• सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिनिधि ग्रैंड फिनाले के लिए नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे। • नेशनल राउंड में कई तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं:
• शुरुआती भाषण: हर टीम का एक प्रतिनिधि ‘नारी शक्ति वंदन: समावेशिता को बढ़ावा और विकसित भारत 2047’ विषय पर सभा को संबोधित करेगा; हर प्रतिनिधि 3 मिनट तक बोलेगा।
• प्रश्नकाल: संसदीय भावना के अनुरूप, टीमें सवाल पूछेंगी और जवाब देंगी — सवाल के लिए 3 मिनट और जवाब के लिए 3 मिनट — ताकि एक सामूहिक प्रस्ताव तैयार किया जा सके।
• मास्टरक्लास: एक जानी-मानी हस्ती भाषण कला और पब्लिक स्पीकिंग पर मास्टरक्लास लेंगी, जिससे भाग लेने वाले युवाओं में नेतृत्व क्षमता और निखरेगी।
• पीएम संग्रहालय का दौरा: प्रतिनिधि पीएम संग्रहालय के खास दौरे के ज़रिए भारत की समृद्ध राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की परंपरा को जानेंगे।
• नई संसद का दौरा: भारत की नई संसद इमारत का एक प्रेरणादायक दौरा, जो प्रतिभागियों को देश के लोकतंत्र के केंद्र से सीधे जोड़ेगा।
• पुरस्कार समारोह: 17 जून को ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें युवा प्रतिभागियों के बेहतरीन योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

‘विकसित भारत युवा संसद’ सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है — यह एक ऐसा आंदोलन है जो भारत के युवाओं की ऊर्जा, विचारों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनाता है। सेंट्रल हॉल में तैयार किए गए प्रस्ताव इन तीन दिनों के बाद भी गूंजते रहेंगे और युवा नेताओं की एक ऐसी पीढ़ी को प्रेरित करेंगे जो ‘विकसित भारत 2047’ की ओर भारत की यात्रा की ज़िम्मेदारी उठाएगी।

उद्घाटन समारोह

‘विकसित भारत युवा संसद’ का उद्घाटन 16 जून, 2026 को नई दिल्ली में संसद के सेंट्रल हॉल में लोकसभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे। भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

‘युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका’: मनसुख मांडविया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ राष्ट्रीय राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए युवा: माय भारत युवा सम्मेलन’ को संबोधित किया।
इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, नवाचारों, उभरते दिग्गजों और उपलब्धि हासिल करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि वाले युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसमें राष्ट्र निर्माण में युवाओं की परिवर्तनकारी भूमिका और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा, “युवा हमारी शक्ति, हमारा गौरव, हमारा संकल्प और हमारा भविष्य हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, युवा भारतीयों को नवाचार करने, उत्कृष्टता हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। चाहे स्टार्टअप हो, खेल हो, सार्वजनिक सेवा हो, उद्यमिता हो या रचनात्मक क्षेत्र, युवा भारतीय अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ा रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने माय भारत की हालिया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धि की भी सराहना की और युवाओं से इस मंच के कार्यक्रमों, स्वयंसेवी अवसरों और राष्ट्र निर्माण की पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
डॉ. मांडविया ने युवाओं से अपनी क्षमता को पहचानने और उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा “यह समय युवाओं का है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक विकसित भारत की परिकल्पना की है जो युवा भारतीयों के विचारों, नवाचार और आकांक्षाओं से आकार लेता है। हमें मिलकर एक प्रतिस्पर्धी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा जो 140 करोड़ नागरिकों के सपनों को साकार करे।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, कहा कि भारत के युवा मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी हैं, और एक युवा भारतीय द्वारा हासिल की गई हर उपलब्धि देश को विकसित भारत की ओर बढ़ने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता किसी भी क्षेत्र में दृढ़ता, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होती है, और उन्होंने खेल, उद्यमिता, कंटेंट क्रिएशन, कला और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में युवा भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना की।
युवा सम्मेलन के दौरान, अभिनेता विक्रांत मैसी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया और डिजिटल सशक्तिकरण तथा नवाचार के माध्यम से सृजित अवसरों पर जोर दिया।

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हर काम देश के नाम’

सैनिकों के स्वास्थ्य और परिवार की भलाई को मजबूत करने के लिए  सप्त शक्ति कमान 11 एवं 12 मई 2026 को दो दिवसीय लैंडमार्क वेलनेस सेमिनार “ ऑगमेंटेड  वैलनेस : फिट  फॉर  ड्यूटी , फिट  फॉर  लाइफ   ” का आयोजन करने जा रही है।

चंडीगढ़: /सत्ता संदेश

भारतीय सेना गर्व के साथ संवर्धित वेलनेस नामक उच्च प्रभाव वाला दो दिवसीय वेलनेस सेमिनार आयोजित करने जा रही है। यह सेमिनार सैनिकों, अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसका शीर्षक “वेलनेस सेमिनार” है। यह सेमिनार आज के कठिन परिचालन वातावरण में सेवा कर रहे सैन्य कर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, वित्तीय और आध्यात्मिक चुनौतियों का समाधान करेगा।

वेलनेस सेमिनार बठिंडा मिलिट्री स्टेशन के सागत सिंह ऑडिटोरियम में 11 एवं 12 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को तीन शक्तिशाली सत्रों के साथ तैयार किया गया है, जो अत्याधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान को युद्धकालीन सैन्य अनुभव के साथ जोड़कर व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रणनीतियाँ प्रदान करता है, जिससे  सेना की परिचालन तैयारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों में सीधी वृद्धि होगी।

आधुनिक सैन्य जीवन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, वित्तीय समझदारी और आध्यात्मिक शक्ति की मांग करता है। यह सेमिनार प्रतिभागियों को प्रमाण-आधारित उपकरण और सेवा/सेवानिवृत्त सैन्य नेताओं तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों के समय-परीक्षित ज्ञान से सुसज्जित करेगा ताकि “संतुलित योद्धा” का निर्माण किया जा सके, जो मिशन के लिए सदैव तैयार रहे तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कल्याण भी बनाए रखे। यह सेमिनार जीवनशैली संबंधी रोगों में कमी, बेहतर तनाव प्रबंधन, मजबूत परिवार समर्थन प्रणालियों तथा संगठनात्मक लचक में सीधा योगदान देगा।