ब्रेकिंग न्यूज़
चंपत राय और अनिल मिश्रा की छुट्टी, राम मंदिर चंदा चोरी पर ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफा मंजूर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी खबर सामने आई है। सोमवार को हुई राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। ट्रस्ट की अहम बैठक में इन दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे पर फैसला लिया गया है। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे थे। एसआईटी जांच शुरू होने के बाद दोनों ने इस्तीफा दे दिया था जिसे आज स्वीकार कर लिया गया।

आज हुई ट्रस्ट की बैठक में चर्चा हुई है कि चढ़ावा चोरी की वजह से देशभर में बदनामी हो रही है। बैठक में दीनेन्द्र दास से कहा गया गया कि पहले चर्चा महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर हो बाद में आप अपना विषय रखें, उस पर भी चर्चा होगी। इस मीटिंग में गोपाल राव भी शामिल होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सदस्यों ने उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया।

नियुक्तियों में चंपत राय की अहम भूमिका

ट्रस्ट की मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा हुई कि फिलहाल चंपत राय और अनिल मिश्रा को जिम्मेदारी लेनी होगी। चंपत राय की भूमिका ट्रस्ट में महासचिव की थी। ट्रस्ट में यह बात भी रखी गई कि ट्रस्ट में जितनी भी नई नियुक्तियां हुईं वो चंपत राय और अनिल मिश्रा के द्वारा ही की गई थी।

ट्रस्ट की बैठक में शामिल स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि धर्म की रक्षा करना हमारा पहला कर्तव्य है। जब लोग आस्था से जुड़ते है तो छोटी छोटी बातों का खयाल रखना चाहिए। चढ़ावा चोरी के जो आरोप लगे हैं उससे पूरा देश आहत है और इससे बदनामी भी हो रही है।

इस्तीफे पर सर्वसम्मित से फैसला

राम मंदिर ट्रस्ट की हुई बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सर्वसम्मित से फैसला लिया गया। ये दोनों इन बैठक में शामिल नहीं हुए थे. दोनों को बाहर ही रोक दिया गया था। अब देखना है कि इन दोनों के इस्तीफे के बाद इन पर क्या एक्शन होता है? एसआईटी अभी भी मामले की जांच कर रही है, दोनों से पूछताछ भी कर चुकी है. ऐसे में सबकी निगाहें अगले कदम पर टिकी हैं।

ट्रस्ट की बैठक में कौन-कौन?

बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष हंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि और ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल शामिल रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (पदेन सदस्य) संजय प्रसाद और अयोध्या के जिलाधिकारी मौजूद रहे।

नितिन गडकरी ने NHLML परियोजनाओं की समीक्षा की, मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से पूरा करने के निर्देश

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड-एनएचएलएमएल की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और देश भर में विकसित किए जा रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, रोपवे, इंटरमॉडल स्टेशन और सड़क मार्ग किनारे विकसित की जा रही सुविधाओं में प्रगति का आकलन किया।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर यात्रा सुगम बनाने और सुविधाएं बढ़ाने के काम में लगी है।

बैठक में गडकरी ने भविष्य अनुरूप एकीकृत परिवहन प्रणाली निर्मित करने की इन परिवर्तनकारी पहल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं बहुआयामी संपर्क मजबूत बनाएंगी, नए आर्थिक अवसर खोलेंगी, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देंगी और भारत की समग्र प्रचालन प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएंगी।

गडकरी ने परियोजना कार्यान्वयन में बाधक प्रमुख चुनौतियों का मूल्यांकन किया और सभी पक्षधारकों को प्राथमिकता के आधार पर इन्‍हें दूर करने और परियोजना निष्पादन में तेजी लाने के निर्देश दिये। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से प्रचालन दक्षता में सुधार होगा, परिवहन लागत कम होगी और यात्रियों को विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और सुविधाएं मिलेंगी। इससे विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दृष्टि योजना आगे बढ़ाई जा सकेगी।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की चिरस्थाई विरासतः संस्थाएं, विचार और राष्ट्र निर्माण

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

इतिहास अक्सर महान नेताओं को उनके राजनीतिक संघर्षों के जरिए याद करता है। लेकिन राजनेताओं के चिरस्मरणीय योगदान राजनीति के दायरे तक ही सीमित नहीं होते। उनकी वास्तविक विरासत उनके द्वारा सृजित संस्थाओं, परिपोषित विचारों और आने वाली पीढि़यों के लिए छोड़े गए आदर्शों में होती है। राष्ट्र भारत केसरी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 125वां जन्म दिवस मना रहा है। इस अवसर पर उनके सार्वजनिक जीवन के एक ऐसे पहलू को स्मरण करना प्रासंगिक होगा जिसकी ओर व्यापक रूप से गौर करने की जरूरत है। यह पहलू है, राष्ट्र निर्माण की बुनियाद के रूप में संस्थाओं का सृजन करने की उनकी आजीवन प्रतिबद्धता। 

स्वतंत्र भारत का उदय सिर्फ एक राजनीतिक संघर्ष से नहीं हुआ। उसे विश्वविद्यालय बनाने थे जो नागरिकों को शिक्षित करने में सक्षम हों। ऐसी अनुसंधान संस्थाएं खड़ी करनी थीं जो वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार कर सकें। उसे ऐसे उद्योग तैयार करने थे जो आर्थिक आत्मनिर्भरता पैदा कर सकें। सभ्यता की विरासत की रक्षा करने वाले सांस्कृतिक संगठनों और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने वाली लोक संस्थाओं को तैयार करना था। डॉ मुखर्जी ने जल्दी ही समझ लिया था कि राष्ट्र का भविष्य सिर्फ दूरद्रष्टा नेतृत्व पर ही निर्भर नहीं करता। यह उन मजबूत संस्थाओं पर भी निर्भर करता है जो नेताओं और सरकारों से ज्यादा टिकाऊ होंगी। 

उनका असाधारण शैक्षिक कॅरियर उनके विश्वास को प्रतिबिंबित करता है। वह कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने। उन्होंने वैसे समय में यह कार्यभार संभाला जब उच्चतर शिक्षा भारत के बौद्धिक जागरण का केंद्र बन रही थी। उनके लिए विश्वविद्यालय सिर्फ स्नातक तैयार करने के स्थल नहीं थे। वे वैसे सुविज्ञ नागरिकों को गढ़ने वाले संस्थान थे जो सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ योगदान करने में सक्षम हों। उनकी राय थी कि शिक्षा को राष्ट्र निर्माण के वृहत्तर कार्य से अलग नहीं किया जा सकता।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रगति के प्रति उनका समर्पण विश्वविद्यालयों के परिसर से कहीं आगे बढ़कर था। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु की कोर्ट और काउंसिल के सदस्य के तौर पर, उन्होंने भारत के प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में से एक को मज़बूत बनाने में योगदान दिया। 1947 में, उन्होंने ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ पावर इंजीनियरिंग’ की आधारशिला रखी क्योंकि वे भली-भांति समझते थे कि स्वतंत्र भारत की आर्थिक प्रगति के लिए इंजीनियरिंग की शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षमता बहुत ज़रूरी होगी। नवाचार को मुख्य नीतिगत लक्ष्य बनाए जाने से बहुत पहले ही, उन्होंने यह समझ लिया था कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और औद्योगिक विकास ही देश की दीर्घकालिक मज़बूती तय करेंगे।

स्वतंत्रता के बाद, जब डॉ. मुखर्जी भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने, तब इस दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप दिया गया। उन शुरुआती सालों में, नए नए आज़ाद देश के सामने एक औद्योगिक आधार तैयार करने की बड़ी चुनौती थी। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स और सिंदरी फर्टिलाइज़र फैक्ट्री जैसे संस्थान सिर्फ़ मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के तौर पर नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के संकल्प के प्रतीक के तौर पर स्थापित किए गए थे। डॉ. मुखर्जी के लिए, औद्योगीकरण कभी भी अपने आप में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं था; यह राष्ट्रीय क्षमता और सामूहिक आत्मविश्वास में किया गया एक निवेश था।

हालाँकि, किसी भी संस्थान के निर्माण के लिए केवल भौतिक अवसंरचना या प्रशासनिक कुशलता की ही ज़रूरत नहीं होती। इसके लिए सहानुभूति, जन-सेवा और नैतिक ज़िम्मेदारी की भावना की भी आवश्यकता होती है। डॉ. मुखर्जी में इन गुणों की झलक 1943 के बंगाल अकाल के दौरान ही साफ़ तौर पर दिखाई दी थी, जब उन्होंने  बीसवीं सदी की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए बड़े पैमाने पर राहत कार्य करने में खुद को समर्पित कर दिया था। विभाजन के बाद, उन्होंने विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए बड़े पैमाने पर काम किया। वे समझते थे कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण में संस्थानों को फिर से खड़ा करने के साथ-साथ लोगों के दुख दर्द को कम करना और उस पर मरहम लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उनका सार्वजनिक जीवन, भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी समझ और सम्मान को भी दर्शाता था। ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ़ इंडिया’ के अध्यक्ष के तौर पर, उन्होंने बौद्ध देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई। सभ्यतागत कूटनीति के स्थायी महत्व को समझते हुए, बुद्ध के मुख्य शिष्यों—अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्यायन—के पवित्र अवशेषों का भारत में स्वागत करने में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। आज भी, मंगोलिया जैसे देशों के साथ इन पवित्र अवशेषों को साझा करने की भारत की कोशिशें यह दिखाती हैं कि किस तरह सांस्कृतिक विरासत अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को मज़बूत करती है और ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा बनाती है।

साहित्य और विद्वता के प्रति भी उनकी चिंता उतनी ही स्पष्ट थी। उनके पत्रों से पता चलता है कि उन्होंने प्रसिद्ध कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की उनके व्यक्तिगत संकट के समय किस तरह मदद की थी। ऐसी घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि सार्वजनिक नेतृत्व को  केवल बड़े नीतिगत फैसलों से ही नहीं, बल्कि उदारता के उन शांत और मौन कार्यों से भी आंका जाता है, जिन पर शायद ही कभी लोगों का ध्यान जाता है।

डॉ. मुखर्जी ने संस्थागत निर्माण के इसी दृष्टिकोण को संविधान सभा में भी आगे बढ़ाया। संविधान के निर्माण को “एक बड़ी जिम्मेदारी” और “एक गंभीर और पवित्र विश्वास” के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने संवैधानिक शासन के साथ जुड़ी नैतिक ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर दिया। उनके वे शब्द आज भी बेहद प्रासंगिक हैं। संविधान की ताकत अंततः न केवल उसके लिखित प्रावधानों पर, बल्कि संसद की शुचिता, सार्वजनिक संस्थानों की स्वतंत्रता, कानून के शासन और नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी निर्भर करती है। संवैधानिक लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब संस्थाओं पर जनता का भरोसा हो और वे ईमानदारी से काम करें।

जैसे-जैसे भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो रहा है, डॉ. मुखर्जी की सोच हमें एक ज़रूरी बात याद दिलाती है। सिर्फ़ आर्थिक विकास से ही देश की तरक्की तय नहीं होती। संवहनीय विकास के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, सांस्कृतिक संरक्षण और लोगों का भरोसा जगाने वाले संस्थानों में लगातार निवेश की ज़रूरत होती है।

सड़कें, हवाई अड्डे और कारखाने बेहद जरूरी हैं, लेकिन उतने ही जरूरी वे विश्वविद्यालय भी हैं जो जिज्ञासा को प्रोत्साहित करते हैं, वे प्रयोगशालाएँ जो ज्ञान का विस्तार करती हैं, वे संग्रहालय जो विरासत को संजोते हैं और वे सार्वजनिक संस्थान जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हैं, वे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

संस्थाओं में एक अद्भुत गुण होता है: वे सरकारों, राजनीतिक आंदोलनों और यहाँ तक कि कई पीढ़ियों से भी ज़्यादा समय तक बनी रहती हैं। वे संचित ज्ञान को संजोकर रखती हैं, बदलाव के बीच निरंतरता बनाए रखती हैं और समाज को दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं। नेता इतिहास को आकार दे सकते हैं, लेकिन संस्थाएं सभ्यता को जीवित रखती हैं।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन का सबसे अहम सबक यही है। उनकी विरासत केवल उन पदों तक सीमित नहीं है जो उन्होंने संभाले या उन बहसों में भी नहीं है जिनमें उन्होंने हिस्सा लिया, बल्कि यह उनके उस अटूट विश्वास में निहित है कि मजबूत संस्थान ही किसी राष्ट्र की आकांक्षाओं के सच्चे संरक्षक होते हैं।

जैसे-जैसे भारत अपनी विकास यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, ज्ञान, वैज्ञानिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को मजबूत करना ही उनके प्रति सबसे सार्थक श्रद्धांजलि होगी।

(लेखक केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं।)

MY Bharat पंजाब ने गहन युवा पंजीकरण और जागरूकता अभियान की शुरुआत की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त निकाय, मेरा युवा भारत (MY Bharat) पंजाब ने 1 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजाब के सभी 23 जिलों में MY Bharat पोर्टल पर एक गहन पंजीकरण और जागरूकता अभियान शुरू किया है।
यह अभियान युवाओं को जोड़ने में तेजी लाने और मार्च 2027 तक MY Bharat पोर्टल पर 5 करोड़ युवा पंजीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देने के देशव्यापी प्रयास का हिस्सा है।

पंजाब ने पोर्टल पर पहले ही 5,62,959 युवा पंजीकरण दर्ज किए हैं, और वर्तमान अभियान का उद्देश्य प्रत्येक स्कूल, कॉलेज, ब्लॉक और गाँव से युवाओं को इस प्लेटफॉर्म पर लाकर इस आधार का महत्वपूर्ण रूप से विस्तार करना है।

MY Bharat एक परिवर्तनकारी “फिजीटल” (भौतिक + डिजिटल) प्लेटफॉर्म है जो देश के युवाओं को सशक्त बनाता है और उन्हें राष्ट्र निर्माण के अवसरों से जोड़ता है। पंजीकरण पूरी तरह से निःशुल्क है और www.mybharat.gov.in पर 15-29 आयु वर्ग के युवाओं के लिए खुला है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, पंजीकृत युवा अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों (ELPs) तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं जो कक्षा से परे व्यावहारिक अनुभव और कौशल-निर्माण के अवसर प्रदान करते हैं। स्वयंसेवक अवसर (VOs) जो युवाओं को स्थानीय स्तर पर सामुदायिक विकास और सरकारी पहलों में योगदान करने में सक्षम बनाते हैं। मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों, युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों, त्योहारों और आयोजनों के लिए एक एकल-खिड़की गेटवे। कौशल विकास, इंटर्नशिप और परामर्श के मार्ग जो रोजगार क्षमता और व्यक्तिगत विकास को बढ़ाते हैं। एक युवा स्वयंसेवक के रूप में एक सत्यापित डिजिटल पहचान, जो राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में भागीदारी के लिए मान्यता और प्रमाणन प्रदान करती है।

सामुदायिक और नागरिक जुड़ाव में एक आवाज, जो प्रेरित युवाओं को साथी चेंजमेकर्स से जोड़ती है और उन्हें जमीनी स्तर की पहलों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाती है।

“पंजाब के युवाओं ने लगातार राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी ऊर्जा और प्रतिबद्धता दिखाई है। यह अभियान हमारे जिलों के हर युवा को—चाहे वे स्कूलों, कॉलेजों या गाँवों में हों—MY Bharat आंदोलन में शामिल होने और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनने का एक आमंत्रण है। हमारा ध्यान समावेशी भागीदारी पर है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाएँ, ग्रामीण युवा, दिव्यांग युवा और हमारी युवा आबादी के हर वर्ग को इस प्लेटफॉर्म पर जगह मिले।”

MY Bharat पंजाब ने राज्य भर के सभी युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और हितधारकों से आगे आने और MY Bharat पोर्टल पर पंजीकरण करने, और भारत के सबसे बड़े युवा जुड़ाव मंच का हिस्सा बनने की अपील की है।

पंजीकरण और विवरण के लिए, देखें: www.mybharat.gov.in

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत माय भारत, चंडीगढ़ द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती के अवसर पर उनके जीवन, विचारों एवं राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत चंडीगढ़ के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 45 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राष्ट्रवाद, शिक्षा, राष्ट्रीय एकता तथा भारत के विकास संबंधी उनके विचारों पर अपने निबंध प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान संजीव राणा, संस्थापक, कर्तव्यनिष्ठ फाउंडेशन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके दर्शन एवं राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। उन्होंने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

माय भारत, चंडीगढ़ ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन में अपनाते हुए समाज एवं देश के विकास में सक्रिय योगदान दें।

भारतीय नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत अपनी रक्षा क्षमताओं में लगातार इजाफा कर रहा है। इस बीच भारतीय नौसेना 11 जुलाई को अपनी छठी प्रोजेक्ट-17A स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ (F38) को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल करेगी। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और देश की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का एक और बड़ा उदाहरण है। इसमें ज्यादातर स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

जानकारी के मुताबिक ‘महेंद्रगिरि’ का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह पहली बार है जब भारतीय नौसेना के किसी युद्धपोत को महेंद्रगिरि नाम दिया गया है।

‘महेंद्रगिरि’ की खासियत

इस फ्रिगेट का डिजाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई ने किया है। महेंद्रगिरि में आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, कम रडार सिग्नेचर, बेहतर सुरक्षा और अत्याधुनिक ऑटोमेशन सिस्टम दिए गए हैं। इसमें कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह लंबी दूरी तक तेज गति से समुद्री अभियान चला सकती है।

स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

खास बात ये है कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसका निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत किया गया है, जिसमें कई भारतीय कंपनियों ने योगदान दिया है.

त्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस

महेंद्रगिरि अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है. इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, पनडुब्बी रोधी हथियार और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है।

हवाई, समुद्री और पनडुब्बी खतरों से मुकाबला

यह फ्रिगेट दुश्मन के हवाई, समुद्री और पनडुब्बी खतरों से मुकाबला करने में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, खोज एवं बचाव और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार निगरानी जैसे अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगी।

भारतीय नौसेना के अनुसार, प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार हो रही फ्रिगेट्स के बेड़े में शामिल होने से नौसेना की युद्ध क्षमता और अधिक मजबूत होगी. साथ ही भारत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा। नौसेना का कहना है कि महेंद्रगिरि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत टैक्सी की तर्ज पर शुरु होगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी,अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश के सहकारिता आंदोलन को नया जीवन देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत पहल की है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह में घोषणा की कि देश में सहकारी समितियों के विकास को तेज करने के लिए जल्द ही एक नई सहकारी लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) कंपनी का गठन किया जाएगा। 

उन्होंने साफ किया कि सहकारिता आंदोलन, जो कांग्रेस शासन के दौरान एक उपेक्षित आंदोलन बन चुका था, उसे इस मंत्रालय के गठन से एक महत्वपूर्ण ‘लाइफलाइन’ मिली है। देश के लगभग 8.5 लाख सहकारिता संगठनों और 30 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए यह पहल एक दूरगामी गेम-चेंजर साबित होने वाली है।

बीमा और परिवहन क्षेत्र में सहकारी मॉडल के विस्तार को लेकर सरकार की क्या योजना है?
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बताया कि देश में सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी का कामकाज बेहद शानदार रहा है और आगामी दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों में करने की ठोस तैयारी है। इसी मॉडल की तर्ज पर, बीमा क्षेत्र में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित की जाएगी।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि उर्वरक क्षेत्र की दिग्गज सहकारी संस्था इफको (आईएफएफसीओ) पहले से ही एक जापानी फर्म के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) के जरिए बीमा व्यवसाय में सक्रिय है। यह नई कंपनी सीधे तौर पर सहकारिता क्षेत्र को वित्तीय सुरक्षा के दायरे में लाकर उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करेगी।

ग्रामीण स्तर पर पैक्स (पीएसीएस) के डिजिटलीकरण और क्षमता निर्माण के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं?

सहकारिता क्षेत्र को पेशेवर, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • 50,000 ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) का शुभारंभ: ग्रामीण स्तर की वित्तीय रीढ़ कही जाने वाली 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) को डिजिटल तकनीक से लैस कर ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) में परिवर्तित कर दिया गया है। यह जमीनी स्तर के संस्थानों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
  • त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना: सहकारिता क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए गुजरात के आणंद में ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जो पेशेवर प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा।

कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किन बड़ी परियोजनाओं का अनावरण किया गया है?

किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए भंडारण और बेहतर सुविधाओं के उद्देश्य से कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया:

  • अनाज भंडारण क्षमता का विस्तार: कार्यक्रम के दौरान 75,000 टन की कुल क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण किया गया, 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ, तथा 47 अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया गया।
  • सहकार वन और टिश्यू कल्चर लैब: अमूल और एनसीसीएफ द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन किया गया। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन हुआ। साथ ही, बीज प्रणालियों को मजबूत करने के लिए बीबीएसएसएल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।

सहकारिता नीति को लेकर राज्यों की चिंताओं और आगामी विकास का क्या दृष्टिकोण है?
सहकारिता मंत्रालय के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप की शुरुआती आशंकाओं को खारिज करते हुए अमित शाह ने साफ किया कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी कांग्रेस शासित राज्य ने केंद्रीय हस्तक्षेप की शिकायत नहीं की है, क्योंकि यह मंत्रालय राज्यों के मामलों में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए है। 

उन्होंने यह भी कहा कि देश की डेयरी सहकारी प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है क्योंकि वर्तमान में डेयरी क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा असंगठित है, जिसे अधिक संगठित बनाया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सहकारी क्षेत्र को एक मजबूत आधारशिला बनाना है।

बैंस ब्रदर्स साथियों सहित अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

लुधियाना / सत्ता संदेश

कार्यकारी अध्यक्ष बापू तरसेम सिंह खालसा, विधायक मनप्रीत सिंह इयाली समेत पूरी नेतृत्व टीम ने किया पार्टी में स्वागत

अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के काफिले में उस समय बड़ा विस्तार हुआ, जब आत्म नगर विधानसभा क्षेत्र के ढंड पैलेस, डाबा रोड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बैंस ब्रदर्स अपने समर्थकों सहित पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बापू तरसेम सिंह खालसा, वरिष्ठ नेता एवं विधायक मनप्रीत सिंह अयाली सहित पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने तरलोचन सिंह बैंस, सुखविंदर सिंह बैंस, मनदीप सिंह बैंस और उनके साथियों का गर्मजोशी से पार्टी में स्वागत किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए, सांसद भाई अमृतपाल सिंह खालसा के पिता एवं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बापू तरसेम सिंह खालसा ने कहा कि पार्टी का काफिला लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग रास्ते में उन्हें रोककर पार्टी की नीतियों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं और भाई अमृतपाल सिंह खालसा की वापसी के बारे में भी पूछते हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि हाल ही में लुधियाना महानगर के गिल विधानसभा क्षेत्र से स. दर्शन सिंह शिवालिक अपने साथियों सहित पार्टी में शामिल हुए थे और आज आत्म नगर विधानसभा क्षेत्र से भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पार्टी से जुड़ना इसका प्रमाण है।

विधायक एवं वरिष्ठ नेता स. मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ ही एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी है, जिस पर पंजाब के लोग भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग पार्टी का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंथ और पंजाब हितैषी सोच रखने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का भी पार्टी में स्वागत है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में और भी लोग पार्टी से जुड़ेंगे।

अमरजीत सिंह विंचड़ी पंच प्रधाननी ने कहा कि सभी लोगों को जात-पात और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ जुड़ना चाहिए।

भाई हरभजन सिंह तोड़ पंच प्रधाननी ने कहा कि युवाओं को अपना भविष्य और पंजाब को बचाने के लिए भाई अमृतपाल सिंह का साथ देना चाहिए।

इस दौरान पार्टी के मुख्य प्रवक्ता स. जसकरण सिंह काहन सिंह वाला ने लोगों को विरोधियों के कथित झूठे दावों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब को तरक्की और खुशहाली की आवश्यकता है, जो केवल अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ की पंथक सरकार ही दे सकती है।

पार्टी के समन्वयक परमजीत सिंह जौहल ने कहा कि पूरे पंजाब में लोग और युवा भाई अमृतपाल सिंह के साथ जुड़ रहे हैं।

पार्टी में शामिल होने वालों में तरलोचन सिंह बैंस, सुखविंदर सिंह बैंस, मनदीप सिंह बैंस के साथ जसविंदर सिंह (आत्म नगर), दलजीत सिंह (आत्म नगर), मनदीप सिंह, जगदीप सिंह, जसविंदर सिंह (रणजीत नगर), अजीत सिंह (रणजीत नगर), गुरजीत सिंह (कोट मंगल सिंह), कुलविंदर सिंह (कोट मंगल सिंह), सतवीर सिंह गिल, इंद्रजीत सिंह (करतार चौक), इकविंदर सिंह (फतेह सिंह नगर), सतनाम सिंह (गुरपाल नगर), परमिंदर सिंह (करतार चौक), इंद्रजीत सिंह (जनता नगर) सहित बड़ी संख्या में समर्थक शामिल रहे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगी, उसका वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करेंगे।

इस अवसर पर पृथीपाल सिंह बटाला, ऑब्जर्वर जिला लुधियाना ने सभी का धन्यवाद किया। मंच संचालन पार्टी के वरिष्ठ नेता स. रछपाल सिंह पमाल ने किया।

कार्यक्रम को वरिष्ठ नेता राजीव कुमार लवली (हल्का जगराओं), संदीप सिंह रुपालों (प्रवक्ता), हरपाल सिंह कोहली, हनी सिंगला, प्रभजोत सिंह राहो (जिला अध्यक्ष, नवांशहर), एडवोकेट इंद्रजीत सिंह, बाबा सुरिंदर सिंह मुल्लापुर सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।

समारोह में मलकीत सिंह बल्ल हम्बड़ा, हरभजन सिंह इयाली, बलराज सिंह धालीवाल, बाबा हरजीत सिंह रायकोट, हरजीत सिंह पखोवाल, सुखविंदर सिंह रामगढ़िया, दानिश कपूर, मनजोत सिंह जस्स, बीबी हरप्रीत कौर अकालगढ़ (संयुक्त सचिव, महिला विंग), इंद्रजीत सिंह लुहारा, नरेंद्र सिंह अकालगढ़, कुलदीप सिंह भिट्टेवड्ड, राजवीर सिंह पमाल, सुखविंदर सिंह पमाल, हरमीत सिंह लुधियाना, कुलदीप सिंह कोहली, मनजीत सिंह चावला, हरप्रीत सिंह दुगरी, गुरदेव सिंह जवद्दी, हरप्रीत सिंह धांदरा, सोनू चीमा, बाबा प्रगट सिंह (अरबां खरबां तरना दल, जिला जालंधर), विक्रमजीत सिंह, जगरूप सिंह, सतनाम सिंह, शमशेर सिंह, हरविंदर सिंह, जसविंदर सिंह, अजीत सिंह, कुलविंदर सिंह, सुरजीत सिंह, गुरइकबाल सिंह, गुरदीप सिंह, जगदीप सिंह, राजा जबाल, जसकरण सिंह बैंस, सतवीर सिंह, हरजोत सिंह, हरजस सिंह, अंशवीर सिंह, गुरविंदर सिंह, रणधीर सिंह, राजदीप सिंह, गुरप्रताप सिंह, अंकित शर्मा, गौरव, आदेश प्रताप सिंह, इंद्रजीत सिंह, इरविंदर सिंह और परमिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे।

पहलगाम हमले में NIA जारी की सप्लीमेंट्री, लश्कर प्रमुख हाफिज सईद को बताया मुख्य आरोपी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को अपनी पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट में आरोपी बनाया है।  एनआईए ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी ने हमले की साजिश और आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी अतिरिक्त साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं।

हाफिज सईद के खिलाफ क्या-क्या आरोप?
जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट में दायर अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में, आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने हाफिज सईद पर व्यक्तिगत तौर पर और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा व उसके सक्रिय प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के चीफ के तौर पर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। चार्जशीट में उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और पाकिस्तान से आतंकी साजिश चलाने का आरोप लगाया गया है।विज्ञापन

पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15 दिन बाद भारतीय सेना ने सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। जिसमें कई कुख्यात आतंकी भी मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात बिगड़े और दो दशक बाद हालात चरम पर पहुंच गए। वहीं पाकिस्तान की तरफ से भारत के शहरों को निशाना बनाए जाने के बाद, भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी को नाकाम करते हुए उसका माकूल जवाब दिया। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिए। इससे घबराए पाकिस्तान ने भारत के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे दोनों देशों ने आपसी चर्चा के बाद लागू किया गया।

पाकिस्तान की साजिश के सबूत होने का दावा
एनआईए ने कहा कि यह पूरक चार्जशीट पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट का विस्तार है। इसमें पाकिस्तान की साजिश, हाफिज सईद की भूमिका और जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक एवं अन्य सबूतों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 

पहले किन लोगों को बनाया गया था आरोपी
एनआईए ने 15 दिसंबर 2025 को दाखिल अपनी पहली चार्जशीट में पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट, जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीन आतंकियों और गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को नामजद किया था। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा/टीआरएफ को भी एक कानूनी इकाई के रूप में आरोपी बनाया था। एनआईए का आरोप है कि इन संगठनों ने पहलगाम हमले की योजना बनाई, उसे अंजाम देने में मदद की और पूरी साजिश को संचालित किया।

पहले स्थानीय पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर
हमले के बाद सबसे पहले पहलगाम थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शुरुआती जांच के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह मामला एनआईए को सौंप दिया था। एनआईए ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी पाकिस्तान की उस पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में जुटी है, जिसके तहत सीमा पार से भारत में आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, एनएच-37 पर 24 घंटे के बंद का ऐलान

मणिपुर/ सत्ता संदेश

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। कांगपोकपी जिले के थिंगखोंगजांग कुकी गांव पर हुए कथित सशस्त्र हमले में एक महिला और एक बच्चा घायल हो गए। घटना के बाद कुकी संगठनों ने सोमवार से राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर 24 घंटे के बंद का एलान कर दिया है। साथ ही स्वतंत्र न्यायिक जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

चर्च में प्रार्थना के दौरान हुआ गांव पर हमला
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार शाम गांव के लोग चर्च में प्रार्थना कर रहे थे, तभी हथियारबंद हमलावरों ने गांव पर गोलीबारी की और विस्फोटक फेंके। हमले के दौरान कई घरों में आग लगाए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि

इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना में घायल महिला के पैर में गोली लगने की बात कही जा रही है, जबकि एक बच्चा भी घायल हुआ। दोनों को पहले असम राइफल्स के न्यू कैथेलमणबी शिविर में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में इम्फाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) भेजा गया।विज्ञापन

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे एनएससीएन (आईएम) और जेडयूएफ-के के उग्रवादी शामिल थे, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन ‘कुकी इनपी मणिपुर’ (केआईएम) ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम नागरिकों पर सुनियोजित हमला बताया। संगठन का आरोप है कि भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने गांव में घुसकर गोलीबारी की, घरों में आग लगाई और महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाया, जबकि निकट ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का शिविर मौजूद था। संगठन ने सवाल उठाया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हमलावर कैसे गांव में प्रवेश कर हिंसा फैलाकर आसानी से निकल गए। 

केआईएम ने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र न्यायिक जांच, सुरक्षा चूक की जवाबदेही तय करने और समयबद्ध जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आसपास के कुकी-जो समुदाय के ग्रामीण जब पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचे तो उन्हें सीआरपीएफ कर्मियों ने गांव में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बन गई। इस संबंध में भी सुरक्षा बलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एनएच-37 पर 24 घंटे का बंद
घटना के विरोध में कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी (केसीडब्ल्यूसी), साउथ वेस्ट सदर हिल्स ने तत्काल प्रभाव से एनएच-37 पर 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की है। संगठन ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, प्रभावित परिवारों को राहत, घायलों का समुचित इलाज औरसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए।

संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था में कथित विफलता का आरोप लगाते हुए 86वीं बटालियन सीआरपीएफ के साथ असहयोग की भी घोषणा की है। हालांकि इन आरोपों पर सीआरपीएफ या राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।