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UIDAI और चंडीगढ़ प्रशासन ने दिलाई 42 वर्षीय विशेष आवश्यकता वाली महिला को पहचान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ की एक 42 वर्षीय महिला, जो बचपन से गम्भीर विकासात्मक विकलांगता से पीड़ित है, लंबे समय तक बिना आधार के रह गई थी। उसकी स्थिति के कारण वह स्वयं सरकारी कार्यालयों या Aadhaar Enrolment Centres नहीं जा सकी, जिससे परिवार के लिए उसकी पहचान पत्र बनवाना बेहद कठिन हो गया था।

समस्या इस बात से और जटिल हो गई कि उसके पास आधार पंजीकरण के लिए आवश्यक वैध सहायक दस्तावेज भी नहीं थे। उसकी वृद्ध मां ने वर्षों तक अपनी बेटी के लिए औपचारिक पहचान दिलाने का प्रयास किया ताकि वह विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठा सके।

अनुरोध मिलने पर UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने मामले को प्राथमिकता पर लिया। केस की बारीकी से जांच कर एक समाधान-उन्मुख रणनीति अपनाई गई। चूंकि आधार पंजीकरण के लिए वैध सहायक दस्तावेजों की आवश्यकता थी, इसलिए पहले निवासी के लिए वोटर पहचान पत्र जारी कराने के प्रयास किए गए। आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद, आधार सेवा केंद्र (ASK), सेक्टर 17, चंडीगढ़ से एक मोबाइल एन्क्रोलमेंट किट निवास स्थान पर भेजी गई। दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन के बाद पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

उसके बाद UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने समय पर प्रोसेसिंग और आधार जनरेशन सुनिश्चित करने के लिए मामले की निगरानी जारी रखी। इन प्रयासों का परिणाम स्वरूप आधार सफलतापूर्वक जनरेट हुआ, जिससे निवासी को अपनी पहचान स्थापित करने और विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं तथा सेवाओं का लाभ उठाने में सहायता मिली।

कृतज्ञता व्यक्त करते हुए निवासी की वृद्ध मां ने UIDAI और चंडीगढ़ प्रशासन का समर्थन और त्वरित हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने साझा किया कि वर्षों की जद्दोजहद और अनिश्चितता के बाद उनकी बेटी को आखिरकार मान्यता प्राप्त पहचान मिल गई, जिससे परिवार को अत्यधिक सहजता और खुशी मिली।

यह पहल सभी पात्र निवासियों, विशेषकर उन लोगों के लिए पहचान सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के महत्व को उजागर करती है, जिन्हें शारीरिक, विकासात्मक या गतिशीलता संबंधी चुनौतियों के कारण सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई होती है। यह क्षेत्रीय कार्यालय और फील्ड टीमों के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों के दरवाजे तक आधार सेवाएँ पहुँचाकर जीवन बदल सकते हैं।

श्री सौरभ विजय, सीईओ यूआईडीएआई, ने क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़, का दौरा किया और आधार सेवा वितरण तंत्र की समीक्षा की

चंडीगढ़, / सत्ता संदेश

श्री सौरभ विजय, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), ने आज यूआईडीएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ का दौरा किया ताकि क्षेत्र में क्षेत्रीय कार्यालय और आधार सेवा वितरण पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन की समीक्षा की जा सके।

इस दौरे के दौरान, श्री सौरभ विजय ने क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विस्तृत बातचीत की और क्षेत्र में चल रही विभिन्न आधार-संबंधी पहलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आधार सेवाओं के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की और पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।

सीईओ ने परिचालन कार्यप्रवाह की समीक्षा की और आधार नामांकन, अपडेटेशन, प्रमाणीकरण पारिस्थितिकी तंत्र, शिकायत निवारण तंत्र और जागरूकता पहलों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने निवासी अनुभव में सुधार करने और क्षेत्र में आधार सेवाओं की पहुंच और विश्वसनीयता को मजबूत करने पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

कर्मचारियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान, श्री सौरभ विजय ने अधिकारियों को निवासियों को निर्बाध और सुरक्षित पहचान सेवाएँ प्रदान करने के विज़न की ओर समर्पण के साथ काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

अपने दौरे के हिस्से के रूप में, श्री सौरभ विजय ने क्षेत्रीय कार्यालय आने वाले निवासियों से भी बातचीत की और आधार-संबंधी सेवाओं के साथ उनके अनुभव के बारे में पूछा। निवासियों ने नामांकन और अद्यतन प्रक्रियाओं के बारे में अपनी प्रतिक्रिया साझा की, और सीईओ ने हर निवासी के लिए सरल, सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त सेवा वितरण सुनिश्चित करने के प्रति यूआईडीएआई की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सीईओ ने आगे आधार सेवा केंद्र (एएसके), चंडीगढ़ का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने आधार नामांकन, जनसंख्या संबंधी अपडेट, बायोमेट्रिक अपडेट, और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रियाओं सहित एंड-टू-एंड निवासी सेवा प्रक्रियाओं की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र के कार्यकलापों का अवलोकन किया और सेवा वितरण प्रथाओं व परिचालन व्यवस्थाओं के संबंध में कर्मचारियों से बातचीत की।

आधार सेवा केंद्र के दौरे के दौरान, श्री सौरभ विजय ने आधार सेवाएँ प्राप्त कर रहे निवासियों से भी बातचीत की और केंद्र में प्रतीक्षा समय, सेवा पहुँच और समग्र अनुभव के बारे में प्रतिक्रिया ली। उन्होंने निवासी-अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और समयपरक तथा कुशल सेवा वितरण सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

उन्होंने यह ज़ोर दिया कि आधार निवासियों के लिए विभिन्न कल्याण योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच सुगम बनाकर अच्छे शासन और जीवन की सहजता को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहता है। उन्होंने सभी आधार-संबंधी गतिविधियों में डेटा सुरक्षा, सेवा अखंडता और परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने के महत्व पर और बल दिया।

यह दौरा आधार को सुदृढ़ करने के प्रति यूआईडीएआई की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है

श्री सौरभ विजय ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

नई दिल्ली, 18 मई 2026: श्री सौरभ विजय ने सोमवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में चार्ज संभाला। वे महाराष्ट्र कैडर के 1998 बैच के IAS अधिकारी हैं।

IIT-दिल्ली से सिविल इंजीनियर होने के नाते, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार में कई पदों पर कार्य किया है।

UIDAI में शामिल होने से पहले वे महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग में प्रधान सचिव (व्यय) थे। कैडर में उनके पूर्व असाइनमेंट में महाराष्ट्र के प्रधान सचिव योजना और विकास आयुक्त, प्रधान सचिव पर्यटन, सचिव चिकित्सा शिक्षा, सचिव उच्च व तकनीकी शिक्षा, इत्यादि शामिल हैं।

उन्होंने केंद्रीय डेप्युटेशन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्वपूर्ण भूमिकाओं में सेवा दी है, जिनमें नई दिल्ली में राष्ट्रपति सचिवालय में निदेशक तथा वाशिंगटन डी.सी. में विश्व बैंक में बांग्लादेश, भूटान, भारत व श्रीलंका के लिए कार्यकारी निदेशक के सलाहकार के रूप में कार्य शामिल है।

UIDAI ने पंजाब में बढ़ाई आधार सेवाएं, होशियारपुर, जालंधर व गुरदासपुर में नए आधार सेवा केंद्र स्थापित

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होशियारपुर, गुरदासपुर व जालंधर में नए आधार सेवा केंद्रों (एएसके) शुरू करके, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने पंजाब में सेवा वितरण नेटवर्क को मजबूत किया है।

ये नवीनतम आधार सेवा केंद्र नागरिक सुविधा बढ़ाने व आधार संबंधी सेवाओं के सहज वितरण सुनिश्चित करने हेतु हैं। निवासी आधार नामांकन, नाम, पता व जन्म तिथि जैसे जनसांख्यिकीय विवरणों के अपडेट के साथ-साथ बायोमेट्रिक अपडेट अधिक बेहतर व आसान तरीके से प्राप्त कर सकते हैं।

इन केंद्रों के जुड़ने से यूआईडीएआई निवासियों, विशेषकर नजदीकी कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए पहुंच सुधारने व यात्रा समय घटाने की प्रतिबद्धता जारी रखे हुए है। केंद्र आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ व सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं से सुसज्जित हैं ताकि न्यूनतम प्रतीक्षा समय व सुगम सेवा अनुभव सुनिश्चित हो।

 मानकीकृत व नागरिक हितैषी वातावरण बनाकर, मौजूदा केंद्रों पर भीड़ घटाकर व अनुरोधों के तेज प्रसंस्करण सुनिश्चित करके, इन एएसके की स्थापना सेवा वितरण की समग्र गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है। यह आधार सेवाओं में पारदर्शिता व विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।

इसके अलावा, ये केंद्र वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं व दिव्यांग व्यक्तियों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए आधार सेवाओं को आसानी से सुलभ बनाकर व्यापक समावेशन को बढ़ावा देंगे। बेहतर पहुंच सुगमता अधिक निवासियों को आधार विवरण अद्यतन रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे विभिन्न सरकारी व वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच संभव होगी।

यूआईडीएआई पंजाब के निवासियों को अपने नामांकन और अपडेट संबंधी ज़रूरतों के लिए इन आधार सेवा केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ वैध सहायक दस्तावेज़ रखें, और अतिरिक्त सुविधा के लिए वे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए, निवासी यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या अपने निकटतम आधार सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

यूआईडीएआई ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक सदृढ़ता को बढ़ाने के लिए एनएफएसयू के साथ हाथ मिलाया

यह सहयोग साइबर सुरक्षा ऑडिट, फोरेंसिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण सहित छह प्रमुख क्षेत्रों में केन्द्रित है

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) ने डिजिटल फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है और भारत के डिजिटल पहचान इकोसिस्टम को आधार प्रदान करने वाले यूआईडीएआई के डिजिटल इकोसिस्टम में साइबर सदृढ़ता को और मजबूत करने के लिए दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाया है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच इस समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस समारोह में यूआईडीएआई के उप महानिदेशक श्री अभिषेक कुमार सिंह और दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा: शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास, सूचना सुरक्षा और प्रणाली अखंडता, फोरेंसिक अवसंरचना और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान शामिल है) तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच, जिसमें एनएफएसयू के छात्रों के लिए प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने कहा कि यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का समर्थन करने वाली सुरक्षा, सदृढ़ता और फोरेंसिक क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत की डिजिटल पहचान प्रणालियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सौ  संगठन आधार के ऑफलाइन सत्यापन में शामिल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ये संगठन सरकारी विभागों, वित्तीय फिनटेक और आतिथ्य क्षेत्र से संबंधित

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में तीन महीनों के भीतर कम से कम सौ संगठन ओवीएसई के रूप में पंजीकृत हुए हैं। यह उपलब्धि आधार ऑफलाइन तंत्र के माध्यम से सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागज रहित सत्यापन को सक्षम बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है – जिसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं और आम जनता दोनों को समान रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

इन संगठनों में केंद्र और राज्य दोनों के सरकारी विभाग, फिनटेक कंपनियां, इवेंट मैनेजमेंट और आतिथ्य-सत्कार संगठन, शिक्षा तथा परीक्षा संबंधी संस्थाएं, पहचान सत्यापन, पृष्ठभूमि सत्यापन संगठन एवं कार्यबल सत्यापन कंपनियां शामिल है।

आधार के ऑफलाइन सत्यापन में इन संगठनों के शामिल होने से सेवा वितरण की समयबद्धता में सुधार होने, परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने और भौतिक दस्तावेज़ प्रबंधन और मैन्युअल सत्यापन प्रक्रियाओं से जुड़ी लागतों में कमी आने की उम्मीद है। इन ओवीएसई भागीदारों का जुड़ना आधार-आधारित, गोपनीयता-प्रथम डिजिटल सत्यापन ढांचों में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है जो उपयोगकर्ता नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए पहुंच में आसानी सुनिश्चित करते हैं।

ये संगठन आधार ऑफलाइन सत्यापन विधियों जैसे कि क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों का लाभ उठाकर, अब यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बिना पहचान संबंधी जानकारी “दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने” में सक्षम होंगे।

यह वितरित मॉडल लचीलापन, विस्तारशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण और लोगों को अपनी जानकारी पर नियंत्रण रखने और स्वेच्छा से अपनी इच्छा अनुसार जानकारी साझा करने की व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

यह पहल सेवा प्रदाताओं के साथ लोगों की बातचीत को सरल बनाकर “जीवन की सुगमता” को बढ़ाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के चल रहे प्रयासों की पूरक है, जिससे  आधार धारकों को शीघ्र पंजीकरण, कम कागजी कार्रवाई और अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण का लाभ मिलेगा।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने माता-पिता से बच्चों के लिए अनिवार्य आधार बायोमेट्रिक अपडेट पूरा करने का आग्रह किया

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

लुधियाना में माता-पिता और अभिभावकों से 5–7 वर्ष आयु वर्ग (MBU-1) और 15–17 वर्ष आयु वर्ग (MBU-2) के बच्चों के आधार के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) को समय पर पूरा करने का कड़ा आग्रह किया गया है। बच्चों के बढ़ने के साथ उनकी बायोमेट्रिक विशेषताएँ जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और चेहरे की तस्वीरें महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजरती हैं, जिससे निर्धारित चरणों पर इन विवरणों को अपडेट करना उनकी आधार रिकॉर्ड की सटीकता, विश्वसनीयता और प्रमाणीकरण क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक हो जाता है।

निर्धारित समयसीमाओं के भीतर MBU पूरा न करने से प्रमाणीकरण विफलताएँ हो सकती हैं, जो आवश्यक सेवाओं तक पहुँच को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अपडेटेड आधार बायोमेट्रिक्स का उपयोग NEET जैसी प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में, साथ ही स्कूल प्रवेश, छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में प्राथमिक पहचान सत्यापन मोड के रूप में तेजी से हो रहा है। इसके अतिरिक्त, आधार-आधारित प्रमाणीकरण बैंकिंग सेवाओं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के लिए व्यापक रूप से आवश्यक है, जिससे समय पर बायोमेट्रिक अपडेट इन सेवाओं तक निर्बाध पहुँच के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण वर्तमान में 30 सितंबर 2026 तक 17 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट मुफ्त सुविधा प्रदान कर रहा है, ताकि अधिकतम अनुपालन सुनिश्चित हो। माता-पिता और अभिभावकों को भविष्य में किसी असुविधा से बचने के लिए इस सुविधा का शीघ्र लाभ उठाने की सलाह दी जाती है।

लुधियाना जिले के UDISE आंकड़ों के अनुसार, कुल 9,15,410 छात्रों में से पर्याप्त संख्या के बच्चों को अभी भी बायोमेट्रिक अपडेट पूरे करने हैं। 5–7 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1,22,596 बच्चों के पास लंबित MBU-1 है, जबकि 15–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1,04,204 बच्चों के पास लंबित MBU-2 है, जो पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ध्यान और कार्रवाई की आवश्यकता दर्शाता है।

बायोमेट्रिक अपडेट सुविधाजनक रूप से आधार सेवा केंद्रों (ASKs), पंजाब भर के सेवा केंद्रों पर और स्कूलों में आयोजित विशेष आधार अपडेट कैंपों के माध्यम से पूरे किए जा सकते हैं। माता-पिता से प्रोत्साहित किया जाता है कि बच्चे का आधार नंबर और आवश्यकतानुसार प्रासंगिक सहायक दस्तावेज़ साथ लाएँ और निकटतम केंद्र पर जाएँ या स्कूल-आधारित अपडेट अभियानों का उपयोग करें।

अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का समय पर पूरा होना आधार-सक्षम सेवाओं तक सहज पहुँच, छात्रवृत्तियों और शैक्षिक लाभों के लिए निरंतर पात्रता, परीक्षाओं और प्रवेशों में सुगम भागीदारी, e-KYC के माध्यम से बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन में परेशानी-रहित अनुभव सुनिश्चित करता है, और भविष्य में प्रमाणीकरण विफलताओं का जोखिम कम करता है। यह बच्चों की सुरक्षित डिजिटल पहचान को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सेवा वितरण और पहचान सत्यापन के लिए आधार पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, निर्धारित आयु विंडो में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का पूरा होना आवश्यक है। इसलिए सभी पात्र परिवारों से इस अपडेट को प्राथमिकता देने और सीमित समय के लिए प्रदान की जा रही मुफ्त सेवा का पूर्ण लाभ उठाने का कड़ा आग्रह किया जाता है।

आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेट को अनिवार्य बनाने के लिए यूआईडीएआई के विशेष अभियान के अंतर्गत 100,000 से अधिक स्कूली बच्चों को प्रशिक्षित किया गया जिससे लाखों बच्चों को इससे लाभ मिला

यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय और राज्यों के शिक्षा विभाग स्कूलों के सहयोग से काम कर रहे हैं**अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) अभियान छह महीने तक मिशन मोड में देशभर में चल रहा है; 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधार में एमबीयू 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष के लिए निःशुल्क है*

एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने पूरे देश में 103,000 से अधिक स्कूलों को अपनी सेवाएं दी और लाखों स्कूली छात्रों को अपने स्कूल परिसरों में सरलता से और सुविधापूर्वक आधार में अपना अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पूरा करने में मदद की।

इस विशाल अभियान ने अब तक लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) स्कूली बच्चों को अपने स्कूलों में ही अपना एमबीयू पूरा करने में सहयोग दिया।

यूआईडीएआई ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लिकेशन के साथ सफल तकनीकी एकीकरण के बाद सितंबर 2025 में स्कूली बच्चों के लिए मिशन मोड एमबीयू अभियान की शुरुआत की।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के यूडीआईएसई+ के साथ एकीकरण से स्कूलों में बच्चों के एमबीयू की स्थिति की जानकारी मिली। इससे उन बच्चों की पहचान करने में मदद मिली जिनका एमबीयू होना बाकी था और स्कूलों में शिविर आयोजित करके एमबीयू पूरा करने में मदद मिली।

देश भर में यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय और राज्य कार्यालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों, जिला प्रशासन, स्कूलों और यूआईडीएआई के इकोसिस्टम भागीदारों सहित सभी हितधारकों के साथ बाल हितैषी गतिविधियों के समन्वय के लिए काम कर रहे हैं।

चल रहे अभ्यास को क्रियान्वित करने के लिए कम से कम 4000 मशीनें उपयोग में हैं, और यूआईडीएआई गति को तेज करने के लिए इस संख्या को और बढ़ाने की प्रक्रिया में है।

बच्चों के आधार कार्ड में बायोमेट्रिक जानकारी को अपडेट रखने से उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों आदि के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने और नीट, जेईई, सीयूईटी जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण के लिए प्रमाणीकरण में सहायता मिलती है। यूआईडीएआई माता-पिता और अभिभावकों को अपने बच्चों के आधार कार्ड में बायोमेट्रिक जानकारी को अपडेट करने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है।

मिशन मोड में एमबीयू अभियान छह महीने से चल रहा है और यूआईडीएआई ने 1 अक्टूबर, 2025 से शुरू होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधार में एमबीयू को निःशुल्क कर दिया है।

स्कूलों में आयोजित शिविरों के अलावा, बच्चे भारत भर में स्थित किसी भी आधार नामांकन केंद्र और आधार सेवा केंद्र पर जाकर भी अपना एमबीयू पूरा कर सकते हैं।