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सतलुज फिल्म पर रोक लगाना निंदनीय: परमिंदर सिंह

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध करते हुए सरकार से इसे तुरंत हटाने की मांग की है। पार्टी के जिला शहरी अध्यक्ष परमिंदर सिंह ने कहा कि फिल्म पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है और सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

लुधियाना में जारी एक बयान में शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के जिला शहरी अध्यक्ष परमिंदर सिंह ने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाए गए प्रतिबंध की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसी फिल्मों को प्रदर्शन की अनुमति मिल जाती है जो समाज को गलत दिशा में ले जाती हैं, लेकिन जब कोई फिल्म सामाजिक सच्चाई को सामने लाने का प्रयास करती है तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

परमिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि फिल्म पर रोक लगाकर सच्चाई को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर फिल्म को निष्पक्ष तरीके से देखने और जनता तक पहुंचाने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाया गया प्रतिबंध जल्द से जल्द हटाया जाए ताकि इसे दोबारा ओटीटी प्लेटफॉर्म और सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने कहा कि दर्शकों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किसी फिल्म को देखना चाहते हैं या नहीं।

कॉकरोच जनता पार्टी के ‘एक्स’ अकाउंट को ब्लॉक करने के खिलाफ याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Delhi High Court में एक अनोखे मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिसमें “कॉकरोच जनता पार्टी” के ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दायर की गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Purushaindra Kumar Kaurav की पीठ के समक्ष होनी है। याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी के आधिकारिक अकाउंट को बिना पर्याप्त कारण के ब्लॉक किया गया, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि ‘एक्स’ प्लेटफॉर्म द्वारा अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के फैसले की समीक्षा की जाए और इसे पुनः बहाल करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम है, और इसे बिना स्पष्ट कारण के बंद नहीं किया जा सकता।

हालांकि, मामले में ‘एक्स’ या संबंधित प्राधिकरण की ओर से ब्लॉकिंग के कारणों पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अदालत अब इस बात पर विचार करेगी कि क्या अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया नियमों और कानूनों के अनुरूप थी या नहीं।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह राजनीतिक दलों के डिजिटल अधिकारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कंटेंट पॉलिसी से जुड़े व्यापक सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अकाउंट ब्लॉकिंग और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर कई कानूनी विवाद सामने आए हैं।

फिलहाल सभी की नजर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और क्या अकाउंट की बहाली पर कोई अंतरिम राहत दी जा सकती है।