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देशव्यापी PM-VBRY उत्सव में शामिल होगा चंडीगढ़; पीएम करेंगे 2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि के वितरण का नेतृत्व

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के सफल कार्यान्वयन के उपलक्ष्य में,  श्रम और रोजगार मंत्रालय 19 जून, 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के माननीय प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में एक राष्ट्रीय PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान, भारत के माननीय प्रधानमंत्री प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे।

PM-VBRY के तहत प्रोत्साहन राशि के इस वितरण से 15 लाख से अधिक लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम में लगभग 1,200 आमंत्रित लोगों के शामिल होने की आशा है, जिनमें नियोक्ता और कर्मचारी, लाभार्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। माननीय प्रधानमंत्री देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले लाभार्थियों के साथ बातचीत भी करेंगे। इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे के साथ-साथ श्रम और रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

देशव्यापी पहुंच अभियान के हिस्से के रूप में, देश भर में 200 स्थानों पर एक साथ क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्षेत्रीय कार्यक्रमों में जन प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होगी, जिनमें 2 राज्यपाल, 5 मुख्यमंत्री, 12 केंद्रीय मंत्री, 1 उपमुख्यमंत्री, 13 राज्य श्रम मंत्री, 39 राज्य मंत्री, 59 सांसद, 56 विधायक और 2 महापौर शामिल हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के साथ उनकी भागीदारी PM-VBRY की देशव्यापी पहुंच को और मजबूत करेगी और रोजगार सृजन तथा कार्यबल के औपचारिककरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। देशव्यापी भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए विज्ञान भवन में मुख्य कार्यक्रम की कार्यवाही का प्रसारण सभी क्षेत्रीय स्थानों पर किया जाएगा।

देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में लगभग 65,000 से 70,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की आशा है, जिनमें लगभग 9,000 नियोक्ता प्रतिनिधि और लगभग 45,000 कर्मचारी शामिल हैं।

इसी क्रम में, क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ द्वारा दिनांक 19.06.2026 को जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज, सैक्टर 32-सी, चण्डीगढ़ – 160030 में PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें मुख्य अतिथि श्री सौरभ जोशी, मेयर, चण्डीगढ़ होंगे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में श्री राजीव कुमार गुप्ता, आई.ए.एस., श्रम आयुक्त, पंजाब सरकार, श्री हेमांग डिमजेल, उप मुख्य श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री आकाश मित्तल, सहायक श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री पंकज वोहरा, संयुक्त निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, श्री एस एस नेगी, डी.जी., श्रम ब्यूरो, श्री हुक्म सिंह, सदस्य, क्षेत्रीय समिति शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, विभिन्न स्थापनाओं के कर्मचारी, नियोक्ता, कर्मचारी एसोसिएशन तथा नियोक्ता एसोसिएशन के सदस्य भाग लेंगे।

PM-VBRY  के बारे में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ELI) योजना है। इसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, संगठित कार्यबल में पहली बार शामिल होने वालों की मदद करना और नियोक्ताओं को अतिरिक्त नौकरियां पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार नौकरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (अधिकतम ₹15,000 तक) मिलता है, जबकि नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए दो साल तक प्रोत्साहन दिया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अतिरिक्त दो साल के लिए बढ़ा हुआ सहयोग मिलता है, जिससे श्रम-प्रधान उद्योगों में लगातार नौकरियां पैदा करने को बढ़ावा मिलता है।

कुल ₹99,446 करोड़ के बजट के साथ, PM-VBRY का लक्ष्य दो साल की अवधि में देश भर में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थियों के औपचारिक कार्यबल में पहली बार शामिल होने की आशा है। इस योजना के तहत लाभ 1 अगस्त, 2025 और 31 जुलाई 2027 के बीच पैदा हुई नौकरियों पर लागू होते हैं। इस योजना का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना, गुणवत्तापूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना और समावेशी व टिकाऊ आर्थिक विकास के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देना है।

इस योजना के दो हिस्से हैं:

भाग A – पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन:

इस हिस्से के तहत, EPFO  में पंजीकृत और ₹ 1 लाख प्रति माह तक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी, एक महीने के वेतन के बराबर प्रोत्साहन (अधिकतम ₹15,000 तक) दो किस्तों में प्राप्त करने के पात्र हैं। पहली किस्त लगातार छह महीने की सेवा पूरी होने के बाद दी जाती है, जबकि दूसरी किस्त बारह महीने की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा होने के बाद दी जाती है। जो कर्मचारी छह महीने से अधिक समय तक लगातार नौकरी में रहते हैं, वे इस योजना के तहत लाभ पाने के पात्र हो जाते हैं, जिससे कार्यबल को बनाए रखने और लगातार औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है। प्रोत्साहन की दूसरी किस्त को एक निश्चित अवधि के लिए बचत साधन/जमा खाते में रखा जाएगा ताकि युवा श्रमिकों में लंबी अवधि की बचत की आदत को बढ़ावा दिया जा सके।

भाग B – नियोक्ताओं के लिए सहयोग:

यह हिस्सा सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है। नियोक्ताओं को हर अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो साल तक ₹3,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन मिलेगा, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह महीने तक लगातार नौकरी पर बना रहे। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, ये प्रोत्साहन दो और साल के लिए बढ़ा दिए गए हैं, जिसमें तीसरा और चौथा साल भी शामिल है। इस हेतु पात्र होने के लिए, EPFO के अंतर्गत रजिस्टर्ड स्थापनाओं को कम से कम दो अतिरिक्त कर्मचारी (50 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) या पांच अतिरिक्त कर्मचारी (50 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) भर्ती करने होंगे।

पार्ट A के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को सभी भुगतान “आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम” (ABPS) का प्रयोग करके प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के ज़रिए किए जाते हैं, जबकि पार्ट B के तहत नियोक्ताओं को प्रोत्साहन सीधे उनके PAN-लिंक्ड बैंक अकाउंट में क्रेडिट किए जाते हैं।

आशा है कि PMVBRY योजना से नौकरियां बढ़ेंगी, विशेषकर मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर में, और साथ ही औपचारिक कार्यबल में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना देश भर में लाखों कामगारों के बीच रोज़गार को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने में भी काफी मदद करेगी।

PMVBRY योजना ने औपचारिक रोज़गार को बढ़ावा देने और कामगारों और नियोक्ताओं, दोनों को मदद करने में पहले ही काफी शुरुआती सफलता प्रदर्शित की है। मार्च 2026 में, योजना के पार्ट A के तहत 4.41 लाख पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ₹ 247 करोड़ के फायदे दिए गए, जिससे औपचारिक कार्यबल में आने वाले युवा कामगारों को सीधी वित्तीय मदद मिली। पार्ट B के तहत, 17,551 स्थापनाओं को ₹ 214 करोड़ के प्रोत्साहन दिए गए, जिससे लगभग 6.46 लाख कामगारों को अतिरिक्त रोज़गार मिला।

क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ के हिस्से सहित पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल की समेकित कुल स्थिति का विवरण नीचे दिया गया है:

1.  दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-B लाभार्थी (नियोक्ता)

विवरण                                                      स्थापनाओं की संख्या            राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                          2,428                    56,85,77,793
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                                      794                    26,63,94,224

2. दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-A लाभार्थी (कर्मचारी)

विवरण                                          लाभार्थियों की संख्या       राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                15,287           8,38,03,235
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                           5,435           3,26,38,831

“नोट: पार्ट-A के पहले चरण के दौरान बांटी गई राशि से संबंधित विवरण अभी उपलब्ध नहीं हैं।”

आने वाले समय में मिलने वाला लाभ PM-VBRY को लागू करने की दिशा में एक और अहम पड़ाव है। यह देशव्यापी कार्यक्रम रोज़गार पैदा करने, कार्यबल को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ाने के प्रति सरकार की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों को लगातार मदद देकर PM-VBRY भारत की रोज़गार रणनीति के एक अहम स्तंभ और ‘विकसित भारत’ के विज़न में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के तौर पर उभर रहा है।

आकांक्षाओं का गणित: भारत में रोजगार का सवाल अब स्थिरता पर क्यों निर्भर है

जब 1954 में सर आर्थर लुईस ने गरीब अर्थव्यवस्थाओं के अमीर बनने की परिघटना को समझाने का काम शुरू किया, तो उन्होंने विकास की मुख्य प्रक्रिया को पूंजी के संचय के रूप में नहीं बल्कि कामगारों के जीवन-निर्वाह वाली खेती से हटकर अधिक कमाई वाले उद्योगों एवं
सेवा क्षेत्रों की ओर मुड़ने के तौर पर पहचाना। उनका यह अनुमान बिल्कुल ही सही था कि यही बदलाव देर से औद्योगीकरण करने वाले हर देश का भविष्य तय करेगा। आज भारत ठीक इसी मोड़ पर खड़ा है और नीति-निर्माताओं के सामने सवाल पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध कराने भर का नहीं है। बल्कि, उनके सामने इससे भी अधिक अहम सवाल यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसी नौकरियां पैदा करने की स्थिति में है या नहीं जो पर्याप्त तादाद में हों, औपचारिक हों और एक युवा कामगार को जीवन भर बढ़ती उत्पादकता एवं सुरक्षा दे सकने लायक टिकाऊ हों।

इस जिम्मेदारी के भार को काफी सटीकता से बताया जा सकता है। ‘आर्थिक समीक्षा 2023-24’ ने ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे)’ और आबादी से जुड़े अनुमानों के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि इस दशक की बाकी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग 78.5 लाख गैर-कृषि नौकरियां सृजित करनी होंगी। यह आंकड़ा दो बढ़ते दबावों का नतीजा है: पहला, कामकाज के क्षेत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ने के साथ श्रमशक्ति में हो रही लगातार बढ़ोतरी; और दूसरा, संरचनात्मक बदलाव के कारण खेती से बाहर आने वाले
कामगार। रोजगार में खेती की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 46 प्रतिशत है। वर्ष 2047 तक इस हिस्सेदारी के घटकर एक-चौथाई तक आ जाने की संभावना है।

जुलाई 2025 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई और उसके अगले महीने से शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ उस अंतर को पाटने की अब तक की सबसे सोची- समझी कोशिश है। इस योजना के तहत, जुलाई 2027 तक की दो वर्षों की अवधि में 3.5 करोड़ से अधिक औपचारिक नौकरियां सृजित करने हेतु ‘कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)’ के जरिए 99,446 करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं। ईपीएफओ में पंजीकृत किसी कंपनी में पहली बार शामिल होने वाला और महीने में एक लाख रुपये से कम कमाने वाला कामगार, दो किस्तों
में कुल 15,000 रुपये तक पाने का हकदार बन जाता है। दूसरी किस्त वित्तीय साक्षरता पाठ्यक्रम (फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स) करने पर और बचत (सेविंग्स) के तौर पर मिलती है। वहीं, निर्धारित आधार-रेखा (बेसलाइन) से अधिक लोगों को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं को हर नए कामगार के लिए महीने में 3,000 रुपये तक मिलते हैं। ये शर्तें कुछ इस तरह तय की गई हैं कि छोटी कंपनियां भी इसके दायरे से बाहर हो जाने के बजाय इसमें शामिल हो सकें।

यह योजना भर्ती संबंधी सब्सिडी वाले आम व निराशाजनक तरीकों से इसलिए अलग और बेहतर है क्योंकि इसमें पहला लाभ मिलने से पहले छह महीने तक लगातार नौकरी करना आवश्यक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहली बार काम करने वाले को नौकरी पर रखने का लाभ तभी मिलता है जब वह कर्मचारी काम में कुशल बन जाए और टिका रहे। यह शर्त शुरुआती भर्ती को एक पक्की प्रतिबद्धता में बदल देती है, जिससे नियोक्ता को प्रशिक्षण की लागत वसूलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और कर्मचारी को भी उतने महीने मिल जाते हैं जिनमें वह असली हुनर सीख सके ​​और भरोसेमंद रिकॉर्ड बना सके। इस तरह, यह योजना केवल नौकरी देने के लिए नहीं बल्कि कर्मचारी को बनाए रखने की अपेक्षाकृत अधिक कठिन प्रक्रिया के लिए पुरस्कृत करती है और इसके बाद कर्मचारी के पास रोजगार क्षमता एक ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड होता है जिसका वह कहीं भी सदुपयोग कर सकता है।

इस योजना का सबसे अधिक झुकाव मैन्यूफैक्चरिंग की ओर है, जहां नियोक्ता को मिलने वाला प्रोत्साहन दो वर्ष के बजाय चार वर्ष तक मिलता है। समय-सीमा को दोगुनी करने का यह निर्णय औद्योगिक क्षमता तैयार होने में लगने वाले अधिक समय को ध्यान में रखकर लिया गया है। साथ ही, इससे निर्माता (मैन्यूफैक्चरर) समय से पहले स्वचालित व्यवस्था (ऑटोमेशन) लाकर कामगारों को हटाने के बजाय श्रमशक्ति बढ़ाने की ओर प्रेरित होते हैं। अहम बात यह है कि सरकार ने इसे देश को वैश्विक मैन्यूफैक्चरिंग केन्द्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दृष्टि से जरूरी माना है। ईपीएफओ ​​के जरिए, हर नए कामगार को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर मिलता है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का पहली बार अहसास होता है। अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले बहुत कम कामगारों को यह सुरक्षा मिल पाती है। इस योजना के शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। इसके शुरू होने के बाद से लगभग 60 लाख नए कर्मचारी नामांकित हुए हैं। इनमें से अधिकतर 30 वर्ष से कम आयु के हैं और 18 लाख से अधिक महिलाएं हैं। वहीं, लगभग 1.77 लाख प्रतिष्ठानों ने 66 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए हैं। इन प्रतिष्ठानों में कई ऐसी छोटी कंपनियां शामिल हैं, जहां लंबे समय से अनौपचारिक काम का बोलबाला रहा है।

हालांकि, एक अच्छी शुरुआत को पूरी तरह से सफल बदलाव मान लेना नासमझी होगी। इस योजना में धोखाधड़ी में शामिल कंपनियों को बाहर रखने, हर छह महीने में इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न के जरिए यह सुनिश्चित करना कि नौकरी सिर्फ कागजों के बजाय असल में बनी हुई है और भुगतान की स्वचालित प्रणाली जैसी कई अच्छी बातें हैं। ये सभी खूबियां इस बात को दर्शाती हैं कि योजनाकारों को इस बात का अहसास है कि ऐसी योजना में उन भर्तियों को लाभ नहीं मिलना चाहिए जो अन्यथा भी हो जातीं। इसकी असली सफलता पहले वर्ष में नामांकित लोगों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से पता चलेगी कि वे नौकरियां उस प्रोत्साहन के समाप्त होने के बाद भी बनी रहती हैं या नहीं और इससे पैदा होने वाली मांग को पूरा करने के लिए काम के लायक युवा मौजूद हैं या नहीं। इसीलिए, इस योजना की सफलता कौशल को सिखाने में किए जा रहे निवेश से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि बेरोजगारी सिर्फ आमदनी से ही वंचित नहीं करती, बल्कि यह लोगों के हुनर, आत्म-सम्मान और समाज में उनकी हैसियत को भी कमजोर करती है। वोल्टेयर ने भी यही बात कही थी जब उन्होंने कैंडिड के जरिए यह निष्कर्ष दिया था कि काम करने से तीन बड़ी समस्याएं – बोरियत, बुराई और अभाव – दूर रहती हैं। इस तरह की योजना की अहमियत इसलिए है क्योंकि यह रोजगार के सही और संपूर्ण मतलब को समझती है। यह औपचारिक नौकरी को सिर्फ गिनती के आंकड़े के तौर पर नहीं, बल्कि कामकाजी जीवन की पहली सुरक्षित
सीढ़ी के तौर पर देखती है। अब जबकि भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है, तो चुनौती इस बात की है कि इस योजना में दिखाई गई धैर्य की भावना को बनाए रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि युवाओं को सार्थक रोजगार, जिसे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय परियोजना के केन्द्र में रखा है, कुछ समय के प्रोत्साहन तक सीमित रहने के बजाय एक पूरी पीढ़ी के लिए टिकाऊ, उत्पादक और सम्मानजनक काम के रूप में मिले।

(लेखक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं)

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी: फ्री में मिलेगा ₹7 लाख तक का बीमा; जानें क्या है EPFO की EDLI स्कीम

बिजनेस डेस्क: यदि आपकी सैलरी से पीएफ (PF) कटता है, तो आप बिना किसी अतिरिक्त खर्च के ₹7 लाख तक के मुफ्त जीवन बीमा के हकदार हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने सब्सक्राइबर्स को यह सुरक्षा कवच EDLI (Employees’ Deposit-Linked Insurance) स्कीम के तहत प्रदान करता है।

नियोक्ता भरता है पूरा प्रीमियम: इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कर्मचारी को इसके लिए अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं देना पड़ता। इस इंश्योरेंस का पूरा प्रीमियम आपकी कंपनी या नियोक्ता (Employer) द्वारा भरा जाता है। जैसे ही आपका पीएफ खाता खुलता है, आप खुद-ब-खुद इस योजना का हिस्सा बन जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी के साथ अनहोनी होने पर उसके परिवार को अचानक आए आर्थिक संकट से बचाना है।

कैसे तय होती है ₹7 लाख की राशि? बीमा की राशि कर्मचारी की पिछले 12 महीनों की औसत बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) पर निर्भर करती है।नियम के अनुसार, इंश्योरेंस कवर औसत सैलरी का 35 गुना होता है।इसमें ₹1.75 लाख का बोनस भी जोड़ा जाता है।गणना के लिए सैलरी की अधिकतम सीमा ₹15,000 तय की गई है, जिसके आधार पर अधिकतम लाभ ₹7 लाख तक पहुँचता है।

क्लेम करने का तरीका और नियम: नौकरी के दौरान मृत्यु होने पर नामांकित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी वारिस ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में फॉर्म 5 IF भरकर क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। विभाग का लक्ष्य रहता है कि दावा 30 दिनों के भीतर निपटा दिया जाए, अन्यथा देरी होने पर विभाग को दावेदार को 12% सालाना ब्याज देना पड़ता है।

ई-नॉमिनेशन है जरूरी: इस राशि पर पहला हक पीएफ खाते में दर्ज नॉमिनी का होता है। नॉमिनी न होने की स्थिति में जीवनसाथी या बच्चे भी इसके लिए दावा कर सकते हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि पीएफ खाते में ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी रहे ताकि परिवार को हक पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।