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अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस पर भारत ने दोहराई संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र / सत्ता संदेश

भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर United Nations शांति अभियानों के प्रति अपनी ‘‘अटूट प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उन वीर शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधियों ने उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नागरिक कर्मियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत सेवा देते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद शांतिरक्षकों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उसकी भूमिका केवल एक सहभागी देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में योगदान सात दशकों से अधिक पुराना है। इस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों और अधिकारियों ने अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न मिशनों में भाग लिया है। कई भारतीय शांतिरक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन संघर्ष प्रभावित देशों में युद्धविराम बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की पेशेवर सैन्य क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के कारण उसके शांतिरक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शांति अभियानों की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आतंकवाद, गृहयुद्ध, मानवीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में शांतिरक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस हर वर्ष उन लाखों पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों के तहत सेवा दी है। यह दिन उन शांतिरक्षकों की स्मृति को भी समर्पित है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

एक और उपलब्धि हासिल

PGIMER के 12 घंटे OT मॉडल से एक वर्ष में प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि

चंडीगढ़ स्थित PGIMER Chandigarh ने अपने नवाचारपूर्ण 12 घंटे इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर (OT) मॉडल के सफल क्रियान्वयन के एक वर्ष पूरे होने पर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान ने बताया कि इस मॉडल के लागू होने के बाद प्रमुख सर्जरी में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि देखी गई है, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

“सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय हमने संभावनाओं का विस्तार चुना” – प्रो. विवेक लाल

PGIMER के निदेशक Vivek Lal ने कहा कि यह पहल मरीजों की बढ़ती जरूरतों, सर्जरी की लंबी प्रतीक्षा सूची और अस्पताल की क्षमता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए शुरू की गई थी।

उन्होंने कहा,
“हमने सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय सर्जिकल देखभाल में संभावनाओं और पहुंच को बढ़ाने का निर्णय लिया।”

12 घंटे OT मॉडल से बड़ा बदलाव

1 मई 2025 से लागू इस मॉडल के तहत इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बजाय बढ़ाकर रात 8 बजे तक कर दिया गया।

इस बदलाव का उद्देश्य था—

  • लंबी सर्जरी वेटिंग लिस्ट को कम करना
  • बेड उपयोग को बेहतर बनाना
  • तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं में पहुंच बढ़ाना

इस पहल के बाद PGIMER देश का पहला संस्थान बन गया जिसने 12 घंटे का संरचित OT मॉडल लागू किया।

10.46% की वृद्धि, 3,695 अतिरिक्त सर्जरी

संस्थान के अनुसार, एक वर्ष में कुल प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 3,695 अतिरिक्त ऑपरेशन के बराबर है।

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि मरीजों को:

  • जल्दी ऑपरेशन की सुविधा मिली
  • अस्पताल में प्रतीक्षा समय कम हुआ
  • बेड उपयोग अधिक प्रभावी हुआ

जटिल सर्जरी में भी सुधार

रिपोर्ट में बताया गया कि यह वृद्धि मुख्य रूप से उच्च जटिलता वाली सर्जरी में देखी गई, जिनमें शामिल हैं:

  • ऑर्थोपेडिक्स
  • न्यूरोसर्जरी
  • सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
  • रोबोटिक सर्जरी
  • ट्रांसप्लांट सर्जरी
  • यूरोलॉजी

यह दर्शाता है कि संस्थान की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता और मजबूत हुई है।

ऑर्थोपेडिक्स में 80% तक वृद्धि

विशेष रूप से ऑर्थोपेडिक्स OT-22 में लगभग 80% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।

महीने-दर-महीने प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, 12 में से 9 महीनों में सर्जरी में वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे अधिक वृद्धि:

  • अगस्त: +54% (1,210 अतिरिक्त सर्जरी)
  • अक्टूबर: +31% (730 अतिरिक्त सर्जरी)

सिस्टम स्तर पर बड़ा सुधार

संस्थान ने कहा कि यह मॉडल केवल संख्या में वृद्धि नहीं है, बल्कि यह:

  • स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता
  • ऑपरेशन थिएटर उपयोग
  • और मरीजों की पहुंच में सुधार

का बड़ा उदाहरण है।

PGIMER के अनुसार, यह पहल देश में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सिस्टम-लेवल सुधार के रूप में देखी जा रही है।

 *‘हर काम देश के नाम’*

*लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार संभाला*

*चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम ने 26 मई 2026 को चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में मुख्यालय पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जिन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक रणनीतिक योजना (डायरेक्टर जनरल स्ट्रैटेजिक प्लानिंग) का पदभार संभालने हेतु कार्यभार ग्रहण किया है।

पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल साही को दिसंबर 1988 में राजपूत रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था और वर्तमान में वे राजपूत रेजिमेंट के कर्नल के प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं।

जनरल अधिकारी को उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों सहित सियाचिन ग्लेशियर में व्यापक परिचालन अनुभव प्राप्त है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) तथा काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) में अपनी बटालियन और एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। उन्हें भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर, 3 कोर, की कमान संभालने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है, जिसकी जिम्मेदारी पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा तथा उत्तर-पूर्व के छह राज्यों के आंतरिक क्षेत्रों तक फैली हुई है। मई 2023 में मणिपुर में हुए जातीय संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में आधारभूत संरचना के उन्नयन और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस नियुक्ति से पूर्व वे आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने पेशेवर सैन्य शिक्षा को उभरती परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति के अनुरूप बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके नेतृत्व में संस्थान को 15 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन” से सम्मानित किया गया।

जनरल अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों पर भी कार्य किया है, जिनमें एक ऑपरेशनल कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन तथा सेना मुख्यालय में महानिदेशक सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) शामिल हैं।

उन्होंने सभी महत्वपूर्ण पेशेवर पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जिनमें डीएसएससी वेलिंगटन का स्टाफ कोर्स, आर्मी वॉर कॉलेज महू का हायर कमांड कोर्स तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली का एनडीसी कोर्स शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल साही के पास दो एमफिल डिग्रियाँ तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर डिग्री है।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल तथा सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

पदभार ग्रहण करने के उपरांत लेफ्टिनेंट जनरल साही ने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिचालन तत्परता, क्षमता विकास तथा सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के लिए बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर एलएनजी टैंकर ‘मुबाराज’ पहुंचा भारतीय जलक्षेत्र के करीब

नेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर आई है। एलएनजी (LNG) से लदा एक विशाल टैंकर जहाज, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, अब कुछ ही दिनों में भारत पहुंचने वाला है।

युद्ध के बीच फंसा था जहाज : जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस जहाज का नाम ‘मुबाराज’ है। यह जहाज मार्च 2026 में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दास द्वीप संयंत्र से एलएनजी भरकर निकला था। मार्च में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से यह जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ था और 31 मार्च के आसपास इसने सिग्नल भेजना भी बंद कर दिया था।

तनाव कम होने का संकेत: युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब किसी एलएनजी टैंकर ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार किया है। सोमवार को यह जहाज भारतीय जलक्षेत्र के पास फिर से दिखाई दिया, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक में तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मुबाराज मई के पहले सप्ताह में भारत पहुंच सकता है।

एलएनजी का महत्व: एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है ताकि इसे लंबी दूरी तक आसानी से ले जाया जा सके। भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत नियामक सुधारों के कारण बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी दस्तावेजों की फाइलिंग में भारी वृद्धि

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण-एनबीए ने भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो जैव विविधता, अनुसंधान, नवोन्‍मेषण और औद्योगिक विकास के बढ़ते समन्वय को दर्शाती है। यह वृद्धि जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने जैविक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को सुदृढ़ और स्पष्ट किया है।

संशोधित प्रावधानों के तहत, अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत आने वाले आवेदकों को भारत में उत्पन्न जैविक संसाधनों पर आधारित बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट सहित) के लिए आवेदन करने से पहले एनबीए से पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) प्राप्त करना अनिवार्य है। इस अनिवार्यता से बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली में अनुपालन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है, साथ ही यह सुनिश्चित हुआ है कि जैविक संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय कानून और संरक्षण तथा निष्पक्ष एवं समान लाभ बंटवारे के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

संशोधित ढांचे ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है और स्पष्ट रूप से परिभाषित अनुमोदन प्रक्रियाओं को लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकरण-आधारित प्रणाली की ओर निर्णायक बदलाव आया है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि के दौरान, लगभग 857 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदन प्राप्त हुए और 792 आवेदनों के लिए सीओआर जारी किए गए जो सही पाए गए। इसके बाद की अवधि, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक, कार्यालय को 1,077 आईपीआर आवेदन प्राप्त हुए और 885 पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) जारी किए गए, जो आवेदनों में वृद्धि और आईपीआर से संबंधित एनबीए आवेदनों के समय पर निपटान की दिशा में निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

ये आवेदन जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, खाद्य विज्ञान, जैव रसायन, कृषि रसायन, पॉलिमर प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, वस्त्र और अन्य विज्ञान-आधारित उद्योगों सहित विभिन्न सेक्‍टरों से प्राप्त हुए। यह ज्ञान-आधारित सेक्‍टरों में सुव्यवस्थित नियामक तंत्र के व्यापक रूप से अपनाए जाने और बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

जैविक संसाधनों से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य करके और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 एक जिम्मेदार नवोन्‍मेषण इकोसिस्‍टम को बढ़ावा दे रहा है– एक ऐसा इकोसिस्‍टम जो वैज्ञानिक प्रगति और संरक्षण प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखता है और हितधारकों के साथ निष्पक्ष और समान लाभ साझाकरण सुनिश्चित करता है। इसने अनुसंधान और व्यापार करने में सुगमता प्रदान की है, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं एक मजबूत और पारदर्शी नियामक दायरे में आएं।

विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है: दक्षिण अफ्रीकी मंत्री

जोहानिसबर्ग, 10 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप मंत्री जुको गोडलिम्पी ने सोमवार को प्रिटोरिया में उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो अब पतन के कगार पर है।

गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और ‘सीआईआई-इंडिया बिजनेस फोरम’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का जन्म उस वैश्विक व्यापार प्रणाली के ढांचे के बीच हुआ, जिसे पश्चिमी देशों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा, “प्रमुख शक्तियों द्वारा आकार दी जा रही दुनिया में भारत उभरता हुआ लोकतंत्र है।”

भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की उसकी योजनाओं पर मंत्री ने कहा कि भारत अब एक अलग और खास स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाएगा, जहां वह सिर्फ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चलने के बजाय एक नयी वैश्विक व्यवस्था के सह-निर्माता की भूमिका निभाने का दायित्व भी संभालेगा।”

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की उस व्यवस्था में भारत एक सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब उसे इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक मुख्य भागीदार की भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था अब पतन के कगार पर है।”

गोडलिम्पी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं।

मंत्री ने कहा, “हम विकास, औद्योगीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार में रणनीतिक साझेदार हैं।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इन दोनों देशों को “टेरिबल ट्विन्स” (खतरनाक जोड़ी) कहा जाता है क्योंकि इनके प्रतिनिधि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों में बदलाव लाने के लिए हमेशा मुखर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “वैश्विक विकास से संबंधित सभी चर्चाओं में दक्षिण अफ्रीका और भारत निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित ग्लोबल साउथ के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और इस बात पर भी बल देते हैं विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना कि अधिक आर्थिक शक्ति वाले देशों के विचारों को।”

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।

यूट्यूब यूजर्स के लिए राहत: करीब एक घंटे तक डाउन रहने के बाद बहाल हुई सेवा, जानें क्या थी वजह

टेक डेस्क : दुनिया के सबसे लोकप्रिय वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) की सेवाएं करीब एक घंटे तक बाधित रहने के बाद अब सामान्य हो गई हैं। बुधवार, 18 फरवरी 2026 की सुबह यूट्यूब के अचानक डाउन होने से भारत सहित दुनिया भर के लाखों यूजर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रिकमंडेशन सिस्टम में आई तकनीकी खराबी: यूट्यूब की टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उनके ‘रिकमंडेशन सिस्टम’ (recommendation system) में आई एक समस्या के कारण यूट्यूब के सभी प्लेटफॉर्म्स, जिनमें होमपेज, यूट्यूब ऐप, यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब किड्स शामिल हैं, पर वीडियो दिखाई नहीं दे रहे थे। हालांकि अब होमपेज फिर से दिखने लगा है, लेकिन टीम अभी भी पूरी तरह से समस्या को ठीक करने पर काम कर रही है।

यूजर्स को मिलीं ये परेशानियां: आउटेज के दौरान यूजर्स को ऐप और वेबसाइट पर ‘something went wrong’ का एरर दिखाई दे रहा था। इसके अलावा, अमेरिका और भारत सहित कई देशों में यूजर्स के अकाउंट अपने आप लॉगआउट हो रहे थे। टीवी ऐप पर भी दोबारा लॉगिन मांगा जा रहा था।

भारत और अमेरिका में बड़े स्तर पर असर : डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 2,83,490 लोगों ने यूट्यूब एक्सेस न कर पाने की रिपोर्ट की। भारत में भी सुबह 6:42 बजे के करीब हजारों यूजर्स ने तकनीकी दिक्कत की शिकायत दर्ज कराई, जिनमें से 72% शिकायतें यूट्यूब ऐप को लेकर थीं। गूगल सपोर्ट और टीम यूट्यूब ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही इसे पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।

सहारनपुर में गोकशी के दो आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
सहारनपुर (उप्र), आठ फरवरी (भाषा) सहारनपुर जिले की कुतुबशेर थाना पुलिस ने गोकशी के एक मामले में वांछित दो आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस क्षेत्राधिकारी (प्रथम) अमित श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि  आरोपियों की पहचान ग्राम धलापड़ा निवासी नासिर और हमजा कॉलोनी निवासी शोबान  के रूप में हुई है।
मामले का विवरण देते हुए सीओ ने बताया कि शनिवार और रविवार की मध्य रात कुतुबशेर थाना पुलिस टीम बड़ी नहर पटरी से हबीबगढ़ जाने वाले कच्चे रास्ते पर जांच कर रही थी तभी एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन संदिग्ध आते दिखे। 
पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, जिस पर संदिग्धों ने बाइक मोड़कर भागने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने पीछा किया तो कुछ दूरी पर हड़बड़ाहट में उनकी मोटरसाइकिल गिर गई। पुलिस को पास आता देख आरोपियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। 
पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बताया कि पुलिस द्वारा की गई जवाबी गोलीबारी में दो आरोपियों के पैरों में गोली लगी, जिससे वे घायल हो गए जबकि तीसरा आरोपी फरार हो गया।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपी थाना कुतुबशेर में गोवध अधिनियम के तहत वांछित आरोपी हैं। उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है। दोनों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
उन्होंने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एक-एक तमंचा, दो खोखा, चार कारतूस, गोकशी के उपकरण तथा बिना नंबर की एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
आदित्यनाथ ने रविदास के विचार आत्मसात कर समरस, विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनने का किया आह्वान
लखनऊ, एक फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संत रविदास की जयंती पर उन्हें नमन किया और लोगों से उनके विचारों को आत्मसात कर समरस एवं विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘सद्गुरु रविदास जी महाराज की पावन जयंती पर कोटि-कोटि नमन।’’  
 उन्होंने कहा, ‘‘सद्गुरु रविदास जी ने कर्म से सेवा, समरसता और समानता का जो संदेश दिया, वह आज भी हमें प्रेरित करता है।’’  
 आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास' का जो संकल्प है, उसकी आत्मा गुरु रविदास जी की शिक्षाओं में है।’’  
 मुख्यमंत्री ने लोगों से रविदास के विचारों को आत्मसात कर समरस एवं विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनने की अपील की।
मध्यकालीन कवि एवं समाज सुधारक संत रविदास ने अपने दोहों और उपदेशों के माध्यम से जाति आधारित सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया। उनका जन्म वाराणसी के पास सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था।