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मनरेगा बना इतिहास, आज से VB-G-RAM-G कानून हुआ लागू

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में आज से ग्रामीण रोजगार योजना, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी जी राम जी कानून) लागू हो गया है। वहीं पुराना मनरेगा कानून इतिहास की बात हो गया है। वीबी जी राम जी कानून के जरिए केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव करना चाहती है। 

क्या है वीबी-जी राम जी कानून
इस कानून के तहत केंद्र सरकार साल 2047 तक एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहती है। इसमें ऐसे ग्रामीण परिवारों के सदस्य, जो अकुशल श्रम कर सकते हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जाएगा। इस कानून में सरकार ग्रामीणों को सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रखने की कोशिश कर रही है, बल्कि ऐसा मॉडल बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव के स्तर पर विकास कार्यों की दिशा तय हो। 

नए कानून में किन कामों पर होगा फोकस
वीबी जी राम जी कानून के तहत गांवों में विकास कार्यों के लिए चार प्राथमिकताएं तय की गई हैं।-

जल सुरक्षा– इसके तहत गांवों में अब जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों को पुनर्जीवित करने का काम और वनीकरण जैसे कामों को आगे बढ़ाया जाएगा।

ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास-वीबी जी राम जी कानून के तहत ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, स्कूलों के विकास, स्वच्छता प्रणालियों और सौलर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम और आवास योजनाओं पर जोर रहेगा।

आजीविका से जुड़े काम– सरकार ने वीबी जी राम जी कानून को कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास से भी जोड़ रही है। 

मौसमी घटनाओं से जुड़े काम– नए कानून में ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा के समय तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए कानून में आश्रय स्थल, तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाएं, पुनर्वास के काम और जंगलों की आग बुझाने जैसे काम भी शामिल किए गए हैं। 

मनरेगा से कितना अलग है वीबी-जी राम जी?
केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। इस कानून में ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी।

इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

दोनों कानूनों में मुख्य अंतर-

विशेषतामनरेगा (MGNREGA)VB-G RAM G
गारंटीकृत रोजगार दिनप्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी थी।
 
 रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
वित्तपोषण मांग-आधारित योजना; अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का 100% केंद्र सरकार वहन करती थी।
 
 केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 है। वहीं हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ये अनुपात 90:10 है। केंद्र शासित राज्यों में पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। अगर जरूरत पड़ती है तो अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी
 
कृषि विरामयोजना पूरे वर्ष संचालित रहती थी।
 
राज्य बुवाई एवं कटाई के मौसम में 60 दिनों तक काम पर अस्थायी रोक घोषित कर सकते हैं।
 
परिसंपत्ति निर्माणसामान्य ग्रामीण श्रम एवं बुनियादी विकास कार्यों पर केंद्रित था।
 
चार प्रमुख विकास क्षेत्रों—जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और संपर्क (कनेक्टिविटी)—पर आधारित है।
 
बजट व्यवस्थामांग के अनुसार अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी।
 
आपूर्ति-आधारित व्यवस्था है, जिसमें राज्यों के लिए निश्चित एवं सीमित बजट निर्धारित होता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास योजना से कैसे जुड़ेगी?

  • मनरेगा कानून के तहत ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होतीं थी और वही इससे जुड़ा हर फैसला लेती थीं। वीबी जी राम जी कानून में विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत काम होगा, जिसे ग्राम पंचायतें तैयार करेंगी। इसके बाद इन विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक जानकारी जुटाएगी, इसके बाद ही कार्यों का आवंटन होगा। 
  • खास बात यह है कि इन ग्राम पंचायत योजनाओं को जीपीएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा और पीएम गति-शक्ति के साथ इस योजना को जोड़ा जाएगा। इससे काम में पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।
  • वीबी जी राम जी कानून में गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत मजदूरों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग के साथ रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई-सक्षम विश्लेषण और सोशल ऑडिट तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा काम की साप्ताहिक जानकारी स्वचालित रूप से तैयार की जाएगी और भौतिक-डिजिटल दोनों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

राज्य निर्धारित करेंगे क्षेत्रीय विकास के लिए किसे-क्या मिलेगा
वीबी जी राम जी कानून के मुताबिक, वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को नॉर्मेटिव आवंटन (Normative Allocation) का प्रावधान किया गया है। सीधे शब्दों में समझें तो पहले मनरेगा के तहत केंद्र जो फंड्स देता था, उसकी मांग औसतन और संभावित खर्चों के आधार पर होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंप दी है। यानी अब राज्य ही वर्ग और स्थानीय विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी और आवश्यकतानुसार बंटवारा सुनिश्चित करेंगे। 

सरकार, मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी कानून क्यों लाई?
दरअसल देश के अधिकतर राज्यों में मनरेगा कानून के दुरुपयोग का पता चला। जिनमें कई जगहों पर काम सिर्फ कागजों पर हुए थे और नियमों का उल्लंघन कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। कई जगहों पर मजदूरों की बजाय मशीनों से काम कराए गए और पैसे की धांधली की गई। ऐसे में सरकार ने ग्रामीण रोजगार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी बेहतर निगरानी के लिए वीबी जी राम जी कानून लाने का फैसला किया। यही वजह है कि नए कानून में जीपीएस से निगरानी और रियल टाइम जानकारी और सोशल ऑडिट जैसे प्रावधान किए गए हैं।  



एफटीए विकसित भारत के लिए नई व्यापार संरचना का निर्माण कर रहे हैं

दिल्ली / सत्ता संदेश

‘विकसित भारत’ का विज़न हासिल करने के लिए अगले दो दशकों तक आर्थिक विकास की उच्च दर बनाए रखना ज़रूरी है। भारत का विशाल घरेलू बाजार इस विकास के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन है, लेकिन केवल इसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी पैमाने और वास्तविक तकनीकी परिवर्तन हासिल करने के लिए, भारत मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के नेटवर्क के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ मजबूती से एकीकृत हो रहा है। जहां डब्ल्यूटीओ समझौते नियम-आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए आधारशिला प्रदान करते हैं, वहीं एफटीए इच्छुक साझेदारों को डब्ल्यूटीओ आधारशिला पर आगे बढ़ाते हुए रुचि के अन्य क्षेत्रों में अधिक गहराई से एकीकरण करने में सक्षम बनाते हैं। आर्थिक एकीकरण और साझेदार देशों के अनुसार नियम बनाने के महत्वपूर्ण चालक के रूप में वर्तमान में लागू 384 अधिसूचित एफटीए अपनी उपयोगिता रेखांकित करते हैं। ये एफटीए महत्वपूर्ण बाजार तक पहुंच बनाने और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के अनिश्चित हालात से बचाने के लिए संस्थागत रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) हैं।

वैश्विक आर्थिक अवसरों तक पहुंच भी उन भारतीय व्यवसायों के लिए जरूरी है, जो बड़े पैमाने पर काम करके वैश्विक चैम्पियन के तौर पर उभरना चाहते हैं। लेकिन फायदा केवल बड़े व्यवसायों तक सीमित नहीं है; एफटीए स्टार्ट-अप, एमएसएमई, किसानों, मछुआरों और भारतीय प्रतिभा के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर के द्वार खोलते हैं, जो अपनी क्षमताओं का विश्व स्तर पर लाभ उठाना चाहते हैं। ये बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ टैरिफ, सेवा बाजार तक पहुंच और पारदर्शी व्यापार नियमों को शामिल करती हैं, जिससे भारतीय व्यवसायों को लंबी अवधि के निवेश के लिए भरोसेमंद वातावरण मिलता है।

भारत की व्यापार बातचीत की रणनीति काफी विकसित हो चुकी है, और इसका ध्यान उन पूरक अर्थव्यवस्थाओं पर है, जो वस्तु और सेवाओं के लिए मुख्य निर्यात बाजार के रूप में काम करती हैं। हाल के मुक्त व्यापार समझौतों का एक मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण बाजारों में समान अवसर प्राप्त हों। यह समानता विशेष रूप से वस्त्र, परिधान और जूते जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों के लिए जरूरी है, जहां ऐतिहासिक रूप से भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगता रहा है, जबकि प्रतिस्पर्धियों को शुल्क मुक्त पहुँच मिलती है। कनाडा, इज़राइल और ईएईयू और एमईआरसीओएसयूआर जैसे समूहों के साथ भी भारत व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।

सेवाएँ भारत की निर्यात रणनीति और इसके एफटीए वार्ताओं के केंद्र में हैं। सीमापार डिजिटल डिलीवरी पर पक्के वादे करके, हाल के एफटीए, तेजी से बढ़ते वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) इकोसिस्टम, तकनीकी स्टार्टअप्स और डिजिटल नवोन्मेषियों के बीच निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने में मदद करते हैं।

डिजिटल डिलीवरी सेवाओं के अलावा, एफटीए ने भारत को वार्ताओं में नए तरीके अपनाने का मौका दिया है, जिससे ऐसी बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ हासिल हुई हैं, जो भारतीय प्रतिभा, खासकर युवाओं के आवागमन को बढ़ाती हैं। मुख्य उपलब्धियों में शामिल हैं – छात्र और पेशेवरों के लिए आवागमन प्रावधान और साइड-लेटर, भारत-यूके दोहरा योगदान समझौता (डीसीसी) जैसे फ्रेमवर्क, जो अस्थायी कार्य के लिए दोहरी सामाजिक सुरक्षा कराधान को रोकते हैं, और योग जैसे खास क्षेत्रों में आवागमन अधिकार।

भारत के नई पीढ़ी के एफटीए की एक विशेषता व्यापार और निवेश के बीच गहरे संबंध को मान्यता देना है। प्रमुख वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करके और प्रमुख निर्माण सामग्री के आयात को आसान बनाकर, यह नेटवर्क बढ़ती मांग के साथ मिलकर भारत को निर्माण और निवेश के लिए बेहद आकर्षक गंतव्य बनाता है। 

हाल के समझौते और आगे बढ़ते हुए बाजार तक पहुंच को निवेश परिणामों से सीधे जोड़ते हैं। इसका प्रमुख उदाहरण है, भारत-ईएफटीए समझौता, जिसमें यह शर्त रखी गयी है कि ईएफटीए देशों को भारतीय बाजार तक पहुंच तभी मिलेगी, जब वे 100 बिलियन डॉलर के एफडीआई का वादा करेंगे और भारत में दस लाख नौकरियां पैदा करेंगे। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए में भी ऐसे ही प्रावधान हैं, जिनके तहत लंबे समय के निवेश के वादे के बदले भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक पहुंच की सुविधा दी गयी है।

आधुनिक व्यापार अब केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है; इसके लिए 21वीं सदी के आयामों को समझना और नियमों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे व्यापार में तकनीकी बाधाएं (टीबीटी), स्वच्छता और पादप-स्वच्छता से जुड़े उपाय (एसपीएस), और व्यापार सुगमता (टीएफ)। भारत के अगली पीढ़ी के एफटीए इन रूपरेखाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

अक्सर, टैरिफ़ की तुलना में उत्पाद मानक और अन्य नियामक आवश्यकताएँ बाजार तक पहुँचने में ज़्यादा बड़ी रुकावटें पैदा करती हैं। भारत के एफटीए में नियामक समन्वय और सहयोग के प्रावधान भारतीय निर्यातकों के संदर्भ में इन बाधाओं को कम करने के लिए व्यवस्थित व संस्थागत तरीके प्रदान करते हैं। 

पर्यावरण और श्रम मानक व्यापार में संभावित बाधाओं के रूप में उभर रहे हैं और इनके लिए उपाय न करना अब कोई विकल्प नहीं है। भारत के नए एफटीए इन चिंताओं को दूर करने के लिए ऐसी सहयोगात्मक व्यवस्था पेश करते हैं, जिससे भारतीय हितों को नुकसान न पहुंचे। ये वैश्विक साझेदारों को भरोसा दिलाते हैं कि भारत मानकों के मामले में “सबसे निचले स्तर पर पहुँचने की होड़” से बचते हुए, वास्तविक नवाचार और बड़े पैमाने पर काम करके प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल करना चाहता है।

भारत की एफटीए नीति टुकड़ों में नहीं है, या देश-दर-देश नहीं है। यह जानबूझकर ऐसी पूरक अर्थव्यवस्थाओं को लक्षित करती है, जिनकी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में दो-तिहाई और वैश्विक आयात मांग में 75%  की हिस्सेदारी है।

सबसे जरूरी बात यह है कि इन एफटीए पर बातचीत हितधारकों की निरंतर भागीदारी और संपूर्ण सरकार दृष्टि  पर निर्भर करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि व्यापार नीति भारत के औद्योगिक विकास, नवाचार और सामाजिक-आर्थिक प्रगति जैसी व्यापक प्राथमिकताओं के अनुरूप है और समझौते इस तरह से बनाए जाएँ कि संवेदनशील क्षेत्र और आबादी सुरक्षित रहें।

खास तौर पर, एफटीए में ऐसे मज़बूत प्रावधान शामिल किये जाते हैं, जिनसे यह सुनिश्चित होता है कि भारतीय बाजार को खोलने से घरेलू हितधारकों को नुकसान नहीं होगा। संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में उदारीकरण लंबे समय में धीरे-धीरे किया जाता है, ताकि स्थानीय उद्योगों को तालमेल बिठाने का समय मिल सके। कृषि जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों को एमएसएमई और किसानों की सुरक्षा के लिए बाहर रखा गया है, साथ ही अचानक आयात बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा उपाय भी मौजूद हैं।

अंतिम लक्ष्य एक सुदृढ़ और तालमेल व नियम-आधारित व्यापार इकोसिस्टम है, जिसमें भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा शामिल हो। जमीनी स्तर पर निवेश करने और मूल्य-श्रंखला लिंक बनाने के जरिए, रणनीतिक एफटीए भारतीय व्यवसायों को उस चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने की स्वतंत्रता देंगे, जो वास्तव में मायने रखती है: नीतिगत अनिश्चितता और नियामक बाधाओं की परेशानी से मुक्त होकर विस्तार करना, नवाचार करना और विपणन करना।

(लेखक वाणिज्य मंत्रालय के सचिव हैं।)    

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस पर भारत ने दोहराई संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र / सत्ता संदेश

भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर United Nations शांति अभियानों के प्रति अपनी ‘‘अटूट प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उन वीर शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधियों ने उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नागरिक कर्मियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत सेवा देते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद शांतिरक्षकों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उसकी भूमिका केवल एक सहभागी देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में योगदान सात दशकों से अधिक पुराना है। इस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों और अधिकारियों ने अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न मिशनों में भाग लिया है। कई भारतीय शांतिरक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन संघर्ष प्रभावित देशों में युद्धविराम बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की पेशेवर सैन्य क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के कारण उसके शांतिरक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शांति अभियानों की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आतंकवाद, गृहयुद्ध, मानवीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में शांतिरक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस हर वर्ष उन लाखों पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों के तहत सेवा दी है। यह दिन उन शांतिरक्षकों की स्मृति को भी समर्पित है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

एक और उपलब्धि हासिल

PGIMER के 12 घंटे OT मॉडल से एक वर्ष में प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि

चंडीगढ़ स्थित PGIMER Chandigarh ने अपने नवाचारपूर्ण 12 घंटे इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर (OT) मॉडल के सफल क्रियान्वयन के एक वर्ष पूरे होने पर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान ने बताया कि इस मॉडल के लागू होने के बाद प्रमुख सर्जरी में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि देखी गई है, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

“सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय हमने संभावनाओं का विस्तार चुना” – प्रो. विवेक लाल

PGIMER के निदेशक Vivek Lal ने कहा कि यह पहल मरीजों की बढ़ती जरूरतों, सर्जरी की लंबी प्रतीक्षा सूची और अस्पताल की क्षमता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए शुरू की गई थी।

उन्होंने कहा,
“हमने सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय सर्जिकल देखभाल में संभावनाओं और पहुंच को बढ़ाने का निर्णय लिया।”

12 घंटे OT मॉडल से बड़ा बदलाव

1 मई 2025 से लागू इस मॉडल के तहत इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बजाय बढ़ाकर रात 8 बजे तक कर दिया गया।

इस बदलाव का उद्देश्य था—

  • लंबी सर्जरी वेटिंग लिस्ट को कम करना
  • बेड उपयोग को बेहतर बनाना
  • तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं में पहुंच बढ़ाना

इस पहल के बाद PGIMER देश का पहला संस्थान बन गया जिसने 12 घंटे का संरचित OT मॉडल लागू किया।

10.46% की वृद्धि, 3,695 अतिरिक्त सर्जरी

संस्थान के अनुसार, एक वर्ष में कुल प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 3,695 अतिरिक्त ऑपरेशन के बराबर है।

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि मरीजों को:

  • जल्दी ऑपरेशन की सुविधा मिली
  • अस्पताल में प्रतीक्षा समय कम हुआ
  • बेड उपयोग अधिक प्रभावी हुआ

जटिल सर्जरी में भी सुधार

रिपोर्ट में बताया गया कि यह वृद्धि मुख्य रूप से उच्च जटिलता वाली सर्जरी में देखी गई, जिनमें शामिल हैं:

  • ऑर्थोपेडिक्स
  • न्यूरोसर्जरी
  • सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
  • रोबोटिक सर्जरी
  • ट्रांसप्लांट सर्जरी
  • यूरोलॉजी

यह दर्शाता है कि संस्थान की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता और मजबूत हुई है।

ऑर्थोपेडिक्स में 80% तक वृद्धि

विशेष रूप से ऑर्थोपेडिक्स OT-22 में लगभग 80% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।

महीने-दर-महीने प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, 12 में से 9 महीनों में सर्जरी में वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे अधिक वृद्धि:

  • अगस्त: +54% (1,210 अतिरिक्त सर्जरी)
  • अक्टूबर: +31% (730 अतिरिक्त सर्जरी)

सिस्टम स्तर पर बड़ा सुधार

संस्थान ने कहा कि यह मॉडल केवल संख्या में वृद्धि नहीं है, बल्कि यह:

  • स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता
  • ऑपरेशन थिएटर उपयोग
  • और मरीजों की पहुंच में सुधार

का बड़ा उदाहरण है।

PGIMER के अनुसार, यह पहल देश में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सिस्टम-लेवल सुधार के रूप में देखी जा रही है।

 *‘हर काम देश के नाम’*

*लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार संभाला*

*चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम ने 26 मई 2026 को चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में मुख्यालय पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जिन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक रणनीतिक योजना (डायरेक्टर जनरल स्ट्रैटेजिक प्लानिंग) का पदभार संभालने हेतु कार्यभार ग्रहण किया है।

पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल साही को दिसंबर 1988 में राजपूत रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था और वर्तमान में वे राजपूत रेजिमेंट के कर्नल के प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं।

जनरल अधिकारी को उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों सहित सियाचिन ग्लेशियर में व्यापक परिचालन अनुभव प्राप्त है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) तथा काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) में अपनी बटालियन और एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। उन्हें भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर, 3 कोर, की कमान संभालने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है, जिसकी जिम्मेदारी पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा तथा उत्तर-पूर्व के छह राज्यों के आंतरिक क्षेत्रों तक फैली हुई है। मई 2023 में मणिपुर में हुए जातीय संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में आधारभूत संरचना के उन्नयन और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस नियुक्ति से पूर्व वे आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने पेशेवर सैन्य शिक्षा को उभरती परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति के अनुरूप बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके नेतृत्व में संस्थान को 15 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन” से सम्मानित किया गया।

जनरल अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों पर भी कार्य किया है, जिनमें एक ऑपरेशनल कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन तथा सेना मुख्यालय में महानिदेशक सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) शामिल हैं।

उन्होंने सभी महत्वपूर्ण पेशेवर पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जिनमें डीएसएससी वेलिंगटन का स्टाफ कोर्स, आर्मी वॉर कॉलेज महू का हायर कमांड कोर्स तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली का एनडीसी कोर्स शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल साही के पास दो एमफिल डिग्रियाँ तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर डिग्री है।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल तथा सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

पदभार ग्रहण करने के उपरांत लेफ्टिनेंट जनरल साही ने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिचालन तत्परता, क्षमता विकास तथा सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के लिए बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर एलएनजी टैंकर ‘मुबाराज’ पहुंचा भारतीय जलक्षेत्र के करीब

नेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर आई है। एलएनजी (LNG) से लदा एक विशाल टैंकर जहाज, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, अब कुछ ही दिनों में भारत पहुंचने वाला है।

युद्ध के बीच फंसा था जहाज : जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस जहाज का नाम ‘मुबाराज’ है। यह जहाज मार्च 2026 में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दास द्वीप संयंत्र से एलएनजी भरकर निकला था। मार्च में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से यह जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ था और 31 मार्च के आसपास इसने सिग्नल भेजना भी बंद कर दिया था।

तनाव कम होने का संकेत: युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब किसी एलएनजी टैंकर ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार किया है। सोमवार को यह जहाज भारतीय जलक्षेत्र के पास फिर से दिखाई दिया, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक में तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मुबाराज मई के पहले सप्ताह में भारत पहुंच सकता है।

एलएनजी का महत्व: एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है ताकि इसे लंबी दूरी तक आसानी से ले जाया जा सके। भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत नियामक सुधारों के कारण बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी दस्तावेजों की फाइलिंग में भारी वृद्धि

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण-एनबीए ने भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो जैव विविधता, अनुसंधान, नवोन्‍मेषण और औद्योगिक विकास के बढ़ते समन्वय को दर्शाती है। यह वृद्धि जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने जैविक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को सुदृढ़ और स्पष्ट किया है।

संशोधित प्रावधानों के तहत, अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत आने वाले आवेदकों को भारत में उत्पन्न जैविक संसाधनों पर आधारित बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट सहित) के लिए आवेदन करने से पहले एनबीए से पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) प्राप्त करना अनिवार्य है। इस अनिवार्यता से बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली में अनुपालन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है, साथ ही यह सुनिश्चित हुआ है कि जैविक संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय कानून और संरक्षण तथा निष्पक्ष एवं समान लाभ बंटवारे के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

संशोधित ढांचे ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है और स्पष्ट रूप से परिभाषित अनुमोदन प्रक्रियाओं को लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकरण-आधारित प्रणाली की ओर निर्णायक बदलाव आया है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि के दौरान, लगभग 857 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) आवेदन प्राप्त हुए और 792 आवेदनों के लिए सीओआर जारी किए गए जो सही पाए गए। इसके बाद की अवधि, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक, कार्यालय को 1,077 आईपीआर आवेदन प्राप्त हुए और 885 पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) जारी किए गए, जो आवेदनों में वृद्धि और आईपीआर से संबंधित एनबीए आवेदनों के समय पर निपटान की दिशा में निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

ये आवेदन जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, खाद्य विज्ञान, जैव रसायन, कृषि रसायन, पॉलिमर प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, वस्त्र और अन्य विज्ञान-आधारित उद्योगों सहित विभिन्न सेक्‍टरों से प्राप्त हुए। यह ज्ञान-आधारित सेक्‍टरों में सुव्यवस्थित नियामक तंत्र के व्यापक रूप से अपनाए जाने और बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

जैविक संसाधनों से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य करके और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 एक जिम्मेदार नवोन्‍मेषण इकोसिस्‍टम को बढ़ावा दे रहा है– एक ऐसा इकोसिस्‍टम जो वैज्ञानिक प्रगति और संरक्षण प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखता है और हितधारकों के साथ निष्पक्ष और समान लाभ साझाकरण सुनिश्चित करता है। इसने अनुसंधान और व्यापार करने में सुगमता प्रदान की है, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं एक मजबूत और पारदर्शी नियामक दायरे में आएं।

विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है: दक्षिण अफ्रीकी मंत्री

जोहानिसबर्ग, 10 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप मंत्री जुको गोडलिम्पी ने सोमवार को प्रिटोरिया में उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो अब पतन के कगार पर है।

गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और ‘सीआईआई-इंडिया बिजनेस फोरम’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का जन्म उस वैश्विक व्यापार प्रणाली के ढांचे के बीच हुआ, जिसे पश्चिमी देशों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा, “प्रमुख शक्तियों द्वारा आकार दी जा रही दुनिया में भारत उभरता हुआ लोकतंत्र है।”

भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की उसकी योजनाओं पर मंत्री ने कहा कि भारत अब एक अलग और खास स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाएगा, जहां वह सिर्फ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चलने के बजाय एक नयी वैश्विक व्यवस्था के सह-निर्माता की भूमिका निभाने का दायित्व भी संभालेगा।”

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की उस व्यवस्था में भारत एक सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब उसे इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक मुख्य भागीदार की भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था अब पतन के कगार पर है।”

गोडलिम्पी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं।

मंत्री ने कहा, “हम विकास, औद्योगीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार में रणनीतिक साझेदार हैं।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इन दोनों देशों को “टेरिबल ट्विन्स” (खतरनाक जोड़ी) कहा जाता है क्योंकि इनके प्रतिनिधि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों में बदलाव लाने के लिए हमेशा मुखर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “वैश्विक विकास से संबंधित सभी चर्चाओं में दक्षिण अफ्रीका और भारत निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित ग्लोबल साउथ के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और इस बात पर भी बल देते हैं विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना कि अधिक आर्थिक शक्ति वाले देशों के विचारों को।”

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।

यूट्यूब यूजर्स के लिए राहत: करीब एक घंटे तक डाउन रहने के बाद बहाल हुई सेवा, जानें क्या थी वजह

टेक डेस्क : दुनिया के सबसे लोकप्रिय वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) की सेवाएं करीब एक घंटे तक बाधित रहने के बाद अब सामान्य हो गई हैं। बुधवार, 18 फरवरी 2026 की सुबह यूट्यूब के अचानक डाउन होने से भारत सहित दुनिया भर के लाखों यूजर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रिकमंडेशन सिस्टम में आई तकनीकी खराबी: यूट्यूब की टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उनके ‘रिकमंडेशन सिस्टम’ (recommendation system) में आई एक समस्या के कारण यूट्यूब के सभी प्लेटफॉर्म्स, जिनमें होमपेज, यूट्यूब ऐप, यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब किड्स शामिल हैं, पर वीडियो दिखाई नहीं दे रहे थे। हालांकि अब होमपेज फिर से दिखने लगा है, लेकिन टीम अभी भी पूरी तरह से समस्या को ठीक करने पर काम कर रही है।

यूजर्स को मिलीं ये परेशानियां: आउटेज के दौरान यूजर्स को ऐप और वेबसाइट पर ‘something went wrong’ का एरर दिखाई दे रहा था। इसके अलावा, अमेरिका और भारत सहित कई देशों में यूजर्स के अकाउंट अपने आप लॉगआउट हो रहे थे। टीवी ऐप पर भी दोबारा लॉगिन मांगा जा रहा था।

भारत और अमेरिका में बड़े स्तर पर असर : डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 2,83,490 लोगों ने यूट्यूब एक्सेस न कर पाने की रिपोर्ट की। भारत में भी सुबह 6:42 बजे के करीब हजारों यूजर्स ने तकनीकी दिक्कत की शिकायत दर्ज कराई, जिनमें से 72% शिकायतें यूट्यूब ऐप को लेकर थीं। गूगल सपोर्ट और टीम यूट्यूब ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही इसे पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।