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प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवेनिया के जनेज जान्शा को प्रधानमंत्री चुने जाने पर दी बधाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Slovenia की संसद द्वारा Janez Janša को प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें बृहस्पतिवार को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वह स्लोवेनिया के नए नेतृत्व के साथ मिलकर द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने की बात कही।

जानकारी के अनुसार, जनेज जान्शा को स्लोवेनिया की संसद में हुए मतदान के बाद देश का नया प्रधानमंत्री चुना गया है। वे स्लोवेनियाई राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक छवि एक अनुभवी और दक्षिणपंथी रुझान वाले नेता के रूप में देखी जाती है।

स्लोवेनिया यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है और यूरोपीय संघ का सदस्य भी है। भारत और स्लोवेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री स्तर पर इस तरह के बधाई संदेश दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भविष्य में व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

फिलहाल, भारत और स्लोवेनिया दोनों देशों की सरकारें आपसी सहयोग को बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को मिलेगी रफ्तार, एक जून से चार दिवसीय दौरे पर आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक जून से चार दिवसीय भारत दौरे पर आएगा। इस महत्वपूर्ण वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के अधिकारी व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बातचीत में अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के साथ-साथ बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़े हैं और अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित समझौते को द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल व्यापारिक अड़चनों को दूर करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना भी है। खासतौर पर डिजिटल व्यापार, विनिर्माण, कृषि उत्पादों की पहुंच, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को अधिक मजबूत और स्थिर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतरिम समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों में तत्काल राहत और सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके। इससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच और कुछ गैर-शुल्क प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। वहीं अमेरिका भी भारत में निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और सहूलियत चाहता है। ऐसे में आगामी वार्ता को दोनों देशों के व्यापारिक हितों के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, पीएम मोदी से करेंगे अहम मुलाकात

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनकी यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव को कम करने और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दिल्ली पहुंचने के बाद रूबियो कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। वह भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग, व्यापार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों समेत कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे।

इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।

रूबियो नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लेंगे। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूबियो का यह दौरा भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा भरने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया


दिल्ली / सत्ता संदेश

यह स्‍मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के शौर्य, बलिदान और मानवीय योगदान को श्रद्धांजलि है

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री श्री क्वोन ओह-यूल ने 21 मई, 2026 को सियोल के इमजिनगैक पार्क में संयुक्त रूप से भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में निर्मित यह स्मारक, युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्‍टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) के साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन बहादुर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिनकी सेवा को कोरिया गणराज्य के लोग आज भी गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत के अमिट योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करने से लोगों के बीच आपसी समझ मजबूत होती है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर नए सिरे से ध्यान जाता है। स्मारक की स्थापना में बहुमूल्य सहयोग के लिए उन्होंने कोरिया गणराज्य की सरकार, विशेष रूप से पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवा के माध्यम से निर्मित अटूट मित्रता के बंधन को स्वीकार किया।

कोरियाई युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों को सम्मानित करने और उनके बीच आदान-प्रदान को मजबूत करने के उद्देश्य से दोनों मंत्रियों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान की स्मृति में एक संस्मरण भी जारी किया गया।

कोरियाई युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज (महावीर चक्र विजेता) के नेतृत्व में 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने भीषण गोलीबारी के बीच हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और उपचार करके व्यापक प्रशंसा अर्जित की थी। उनके अद्वितीय साहस और मानवीय दृष्टिकोण के लिए उन्हें घायल सैनिकों और नागरिकों द्वारा ‘मरून एंजल्स’ की उपाधि से नवाजा गया।

युद्धविराम के बाद भी भारत ने सीएफआई के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग (एनएनआरसी) के तहत जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों के मानवीय प्रत्यावर्तन और हिरासत को सुविधाजनक बनाने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल के.एस. थिमैया के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में एनएनआरसी की स्थापना की गई थी।

सीएफआई ने इस संवेदनशील और जटिल जिम्मेदारी को पेशेवरता, निष्पक्षता और करुणा के साथ निभाया, जिसके लिए उसे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, सुलह और मानवीय सिद्धांतों में योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्‍वीकृति मिली। लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का विशिष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कुशलता कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांतिप्रिय भूमिका का एक स्थायी प्रतीक बनी हुई है।

भारतीय युद्ध स्मारक का निर्माण उसी क्षेत्र में किया गया है जहां सितंबर 1954 में सीएफआई ने ‘हिंद नगर’ की स्थापना की थी, जिसमें लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनके शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन तक रखा गया था। यह परियोजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से शुरू की गई है, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और अटूट मित्रता के प्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाती है।

इस समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज की भतीजी सुश्री कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद थीं। कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।

यह समारोह भारत-दक्षिण कोरिया के साझा इतिहास के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम ज्ञात अध्याय को पुनर्जीवित करने और सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था। कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का योगदान शांति, मानवीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है। भारतीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन के साथ, रक्षा मंत्री ने वियतनाम और दक्षिण कोरिया की अपनी चार दिवसीय यात्रा का समापन किया।