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विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक पूरी, मनोहर लाल ने की बैठक की अध्यक्षता

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में सम्‍पन्‍न हुई। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने ‘ग्रिड स्थिरता’ विषय पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक, सलाहकार समिति के सदस्य सांसद, विद्युत मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड और सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सहित प्रमुख विद्युत क्षेत्र संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समिति ने भारत में बिजली की बढ़ती मांग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने और इन्वर्टर-आधारित उत्पादन संसाधनों के साथ-सा‍थ भारी मांग की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए ग्रिड स्थिरता की उभरती आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में सुरक्षित नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, ट्रांसमिशन सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा भंडारण, मजबूत प्रतिक्रियाशील विद्युत सहायता, ग्रिड अनुकूलन, तकनीकी मानकों का अनुपालन, पूर्वानुमान, विद्युत गुणवत्ता और ग्रिड की मजबूती जैसे विषय शामिल थे।

यह बात सामने आई कि ग्रिड की स्थिरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को एक विश्वसनीय, अनुकूल और मजबूत विद्युत ग्रिड द्वारा समर्थित होना चाहिए।

सदस्यों ने पर्याप्त संसाधन की उपलब्‍धता, सहायक सेवाओं, ऊर्जा भंडारण प्रोत्साहन, एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर की तैनाती, पीएमयू-आधारित निगरानी, ​​ब्लैक-स्टार्ट मॉक ड्रिल और तकनीकी मानकों को सुदृढ़ करने सहित पहले से ही की जा रही पहलों की सराहना की। समिति ने एक वर्ष में 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के रिकॉर्ड एकीकरण की भी सराहना की।

इनवर्टर आधारित उत्पादन संसाधनों और भारी मात्रा में मांग की व्यापक पैठ वाले भारतीय ग्रिड में ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कार्यों की सराहना की गई:

1. बिजली कटौती से बचने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं के चालू होने के बीच बेमेल से बचना।
2. संसाधनों की पर्याप्तता सुनिश्चित करने और जड़त्वीय समर्थन प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक भंडारण हेतु पंप स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देना।
3. उपयुक्त थोक उपभोक्ताओं को बड़े नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परिसरों के करीब लाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि ट्रांसमिशन निवेश को अनुकूलित किया जा सके।
4. वोल्टेज स्थिरता और सिस्टम की मजबूती को बनाए रखने के लिए एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर जैसे उपकरणों की योजना बनाना और उन्हें काम में लगाना।
5. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और भंडारण प्रणालियों से लचीली सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उपयुक्त नियामक और वाणिज्यिक प्रणाली स्थापित करना।
6. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ग्रिड-फॉर्मिंग इनवर्टर, इलेक्ट्रोलाइजर और डेटा सेंटर लोड जैसी नई प्रौद्योगिकियों के लिए तकनीकी मानकों की आवधिक और समयबद्ध समीक्षा।
7. ⁠ग्रिड से जुड़े संस्थानों द्वारा आवधिक स्व-लेखापरीक्षा और अनुपालन रिपोर्टिंग के माध्यम से अनुपालन निगरानी को मजबूत करना।
8. बेहतर मौसम डेटा, मौसम स्टेशनों के अंशांकन और रखरखाव के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों में स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान में सुधार करना।
9. मौसम की मार झेलने वाले क्षेत्रों में पारेषण और वितरण अवसंरचना को मजबूत करके, आपातकालीन बहाली प्रणालियों को बनाए रखकर और तेजी से बहाली के लिए ब्लैक-स्टार्ट क्षमता को बढ़ाकर ग्रिड के अनुकूलन को बढ़ाना।
10. इन्वर्टर-आधारित संसाधनों की बढ़ती पैठ को देखते हुए विद्युत गुणवत्ता और हार्मोनिक्स आकलन के लिए एक उपयुक्त ढांचा विकसित करना।

बैठक का समापन स्वच्छ, विश्वसनीय, अनुकूल, सुरक्षित और सुदृढ़ भारतीय ग्रिड की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के संकल्प के साथ हुआ।

लुधियाना के एनएसटीआई में सौर ऊर्जा उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ

लुधियाना/सत्ता संदेश

राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान लुधियाना में 16 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक नौ दिवसीय सौर ऊर्जा उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।कार्यक्रम का आयोजन कर्नल अजय कोहली, कमांडिंग ऑफिसर, 3 पंजाब बटालियन एनसीसी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, प्रशासनिक अधिकारी कर्नल जेपी शर्मा और सूबेदार मेजर करनैल सिंह के सक्रिय सहयोग से किया गया।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कैडेटों और स्थानीय युवाओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों, स्थापना, रखरखाव और व्यावसायिक मॉडलों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उद्यमिता कौशल प्रदान करना था। इस पहल का लक्ष्य नवीकरणीय ऊर्जा के बारे में जागरूकता बढ़ाना और स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वरोजगार के अवसर पैदा करना था।

इस कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। व्यावहारिक सत्र, उद्योग से संबंधित संवाद और परियोजना आधारित शिक्षण प्रशिक्षण के मुख्य घटक थे।
कार्यक्रम के सफल समापन के अवसर पर कर्नल अजय कोहली ने कहा, “यह पहल हमारे युवाओं को हरित ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजनकर्ता बनने के लिए सशक्त बनाती है। एनसीसी कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्ध है।” प्रशिक्षण का समापन 24 अप्रैल 2026 को सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं तेजी से पूरी करें: आंध्र प्रदेश सरकार ने निवेशकों से कहा

अमरावती, 25 मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने निवेशकों से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और उन्हें तय समय पर चालू करने को कहा है।

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सचिवालय में ब्रुकफील्ड-एक्सिस के प्रतिनिधियों और न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ आंध्र प्रदेश लिमिटेड (एनआरईडीकैप) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में राज्य में निर्माणाधीन विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।

रवि कुमार ने कहा, ‘‘ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने की जरूरत है और निवेशकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिना किसी देरी के उन्हें समय पर पूरा कर चालू किया जाए।’’

उन्होंने हितधारकों से कहा कि जमीनी स्तर पर आने वाली किसी भी समस्या की जानकारी तुरंत सरकार को दें ताकि उसका जल्द समाधान किया जा सके। साथ ही उन्होंने निवेशकों को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।

मंत्री ने दोहराया कि परियोजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन के लिए भूमि उपलब्धता, आधारभूत ढांचा और आवश्यक मंजूरियां सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश में बाधा बनने वाली समस्याओं को सक्रिय रूप से दूर करें और राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए सहज माहौल तैयार करें।

रवि कुमार ने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के उद्देश्य से एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के राज्य को देश की ‘बैटरी स्टोरेज कैपिटल’ बनाने के दृष्टिकोण को भी दोहराया।

मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उत्पन्न होंगे।

विद्युत क्षेत्र में भारत के नेतृत्वकारी क्षमता की राह बुलंद करना: नई विकास गाथा को ऊर्जा प्रदान कर रहा है भारत
  • श्री मनोहर लाल

प्राचीन प्रार्थना “तमसो मा ज्योतिर्गमय” – अर्थात हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो – केवल आध्यात्मिक आकांक्षा भर नहीं, अपितु आधुनिक भारत की गाथा को भी दर्शाती है। बीते दशक में, कभी लगातार कमी से परिभाषित होने वाले विद्युत इकोसिस्‍टम को दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते, सबसे वैविध्‍यपूर्ण  और सुधार-प्रेरित विद्युत बाज़ारों में से एक में परिवर्तित कर हमने इस आदर्श भावना को वास्तविकता में बदल दिया है।

            जैसे-जैसे भारत स्वयं को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र, उभरती हुई डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर रहा है, वैसे-वैसे विद्युत क्षेत्र हमारी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता की आधारशिला बन गया है।             पिछले दशक में, हमने उत्पादन और पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा की कमी वित्त वर्ष 2013–14 में 4.2% से घटकर वित्त वर्ष 2025–26 तक मात्र 0.03% रह गई है। केवल वित्त वर्ष 2025–26 में ही (जनवरी 2026 तक), सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52.53 गीगावाट क्षमता जोड़ी गई है, जो एक ही वर्ष में जोड़ी गई अब तक की सर्वाधिक क्षमता है, जिसने  2024–25 में स्थापित 34.05 गीगावाट के पिछले सर्वोच्च स्तर को भी पार कर लिया है। कुल विद्युत उत्पादन वित्त वर्ष 2014 में 1,020.2

बीयू से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,830 बीयू हो गया है।  प्रति व्यक्ति खपत 2014 में 957 किलोवाट-घंटे से बढ़कर 2025 में 1,460 किलोवाट-घंटा हो गई है, जो आर्थिक विकास और बेहतर पहुँच को दर्शाती है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि हर घर, खेत और उद्योग के पास उसकी आवश्यकता के अनुसार विश्वसनीय विद्युत उपलब्‍ध हो  और भारत अब दुनिया में विद्युत का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बन गया है।

            यद्यपि हम 520 गीगावाट से अधिक विद्युत उत्‍पादित करने में सक्षम हैं, लेकिन किसी भी प्रणाली की असली परीक्षा अधिकतम मांग या पीक लोड को बिना किसी तरह के संचालनात्मक दबाव के संभाल सकने की उसकी क्षमता होती है। साल 2024 की गर्मियों में अधिकतम मांग रिकॉर्ड 250 गीगावाट तक पहुँच गई थी और वित्त वर्ष 2025–26 में यह 242.49 गीगावाट रही। इससे पहले मांग में इस तरह की वृद्धि से ग्रिड पर दबाव पड़ सकता था, लेकिन हमारे लोड डिस्पैच केंद्रों ने लगभग शून्य ऊर्जा हानि के साथ इसे सफलतापूर्वक प्रबंधित किया। यह मजबूती दुनिया के सबसे बड़े समकालिक ग्रिडों में से एक के कारण संभव हुई है, जिसमें 120 गीगावाट अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता है, जो देश को “एक राष्ट्र-एक ग्रिड-एक फ्रीक्वेंसी” में एकीकृत करती है।

            प्रेरणादायक बात केवल यह नहीं है कि हम कितनी विद्युत का उत्‍पादन करते हैं, बल्कि यह भी है कि हम उसे कैसे उत्‍पादित करते हैं। गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित क्षमता का अंश तेजी से बढ़ा है, जिसकी बदौलत भारत 50% संचयी गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित विद्युत क्षमता हासिल करने के अपने एनडीसी लक्ष्य को निर्धारित समय से लगभग पाँच वर्ष पहले ही हासिल करने में समर्थ हो सका है। यह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु के प्रति हमारी संकल्‍पबद्धता को दर्शाता है। 2014 से, मिशन मोड योजनाओं के माध्यम से विद्युत क्षेत्र को नए रूप में ढाला गया है, जिन्होंने पहुँच का विस्तार करते हुए सतत परिवर्तन को भी गति दी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना ने भारत के हर गांव तक बिजली पहुँचायी, इसके बाद सौभाग्य योजना आई, जिसने लाखों घरों को बिजली से रोशन किया और ऊर्जा तक पहुँच को सभी के लिए वास्तविकता बना दिया।

            एक अन्य परिवर्तनकारी सुधार सितंबर 2025 में समान आईएसटीएस सबस्टेशनों पर सौर और गैर-सौर घंटों के लिए अलग-अलग कनेक्टिविटी की शुरुआत है। सौर परियोजनाओं को सौर घंटों के दौरान पहुँच मिलती है, जबकि भंडारण और पवन परियोजनाओं को गैर-सौर घंटों में पहुँच मिलती है। इससे बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त पारेषण क्षमता का उपयोग संभव होता है, अतिरिक्त लाइनों की आवश्यकता के बिना नवीकरणीय और भंडारण परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी आती है, पारेषण लागत घटती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।

            डिजिटल सशक्तिकरण हमारे आधुनिकीकरण की गाथा का महत्वपूर्ण अंश है। संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत 3.03 लाख करोड़ रुपये के खर्च के साथ हम पूरे देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू कर रहे हैं, जिससे उपयोगिताओं और नागरिकों के बीच संबंधों में परिवर्तन आ रहा है। इस योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ चुके हैं: एटी एंड सी हानियां 2021 में 21.91% से घटकर 2025 में 15.04% हो गई हैं, और प्रति यूनिट आपूर्ति पर अंडर-रिकवरी 69 पैसे से घटकर 6 पैसे रह गई है।

            जैसे-जैसे हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि वर्तमान मांग का प्रबंधन करना। डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक 1.4 गीगावाट से बढ़कर 9 गीगावाट होने का अनुमान है, और केवल ये सुविधाएँ ही भारत की कुल विद्युत खपत के लगभग 3% का उपयोग कर सकती हैं।             हमारा अगला लक्ष्य एआई, अनुसंधान एवं विकास और अन्य प्रौद्योगिकी-संचालित इकोसिस्टम से उत्पन्न विद्युत की विशाल और लगातार बढ़ती मांग को निरंतर रूप से पूरा करना है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, ऊर्जा भंडारण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत तेजी से बढ़ती डिजिटल अवसंरचना को स्वच्छ ऊर्जा से संचालित करने के लिए पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का बड़े पैमाने पर विकास कर रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत को स्वच्छ ईंधनों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक पैठ को बढ़ावा दे रहा है।

            हम परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी निर्णायक कदम उठा रहे हैं, जो कम कार्बन और विश्वसनीय पावर मिक्‍स का एक आवश्यक हिस्सा है। 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का हमारा लक्ष्य और SHANTI अधिनियम, 2025, हमारी तकनीकी संप्रभुता को प्रमाणित करते हैं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए कानूनी व नीतिगत ढाँचा तैयार करते हैं। अब हमें जो चाहिए, और जिसे यह समिट उत्प्रेरित कर सकता है, वह है तकनीक, वित्त और आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक साझेदारियाँ। विकसित भारत को ऊर्जा प्रदान करने, ग्‍लोबल साउथ में विद्युतीकरण को तेज करने और मजबूत, भविष्य-सक्षम ऊर्जा तंत्र बनाने के लिए, हमें महत्वाकांक्षा तक सीमित न रह कर, समन्वित कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ना होगा। यही वह समय है जब सरकारें, उद्योग जगत के दिग्‍गज, नवप्रवर्तनकर्ता और वैश्विक साझेदार मिलकर एक ऐसी नई ऊर्जा संरचना का निर्माण करें—जो स्वच्छ, विश्वसनीय, डिजिटल रूप से एकीकृत और वैश्विक रूप से आपस में जुड़ी हुई हो। भारत को सीमा-पार विद्युत सहयोग का नेतृत्व करना चाहिए; अगली पीढ़ी के पारेषण, डिजिटल ग्रिड इंटेलिजेंस और ओएसओडब्ल्यूओजी -संरेखित बाजार तंत्र में साहसपूर्वक निवेश करना चाहिए; और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोपावर नवाचार, लचीले गैस संसाधनों और स्वच्छ ऊर्जा का त्वरित उपयोग करना चाहिए। इस गति को ट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर और डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर के बीच मजबूत समन्वय और 2047 तक के लिए एकीकृत पावर सेक्टर रोडमैप द्वारा और भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए, जो भारत को मजबूत, टिकाऊ और किफायती विद्युतीकरण का वैश्विक मॉडल बनाए।

            इस पृष्ठभूमि में, नई दिल्ली में आयोजित भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 विशेष महत्व रखता है। यह ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है जब राष्ट्र टिकाऊ, सुरक्षित और प्रौद्योगिकी-संचालित विद्युत तंत्र की दिशा में अपने संक्रमण को तेज कर रहा है।

            “विकास को विद्युतीकृत करना, टिकाऊ भविष्य को मजबूत बनाना और दुनिया से जुड़ना” (अर्थात इलेक्ट्रिफाइंग ग्रोथ, एम्पावरिंग सस्टेनेबिलिटी, कनेक्टिंग ग्लोबली) विषय के साथ, यह समिट विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाते हुए वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में भारत की नेतृत्वकारी  क्षमता को प्रदर्शित करेगा। यह बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण, नवीकरणीय क्षमता के विस्तार और ग्रिड विश्वसनीयता को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा। यह समिट सहयोग, नीतिगत संवाद और निवेश जुटाने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।

            हमारा अनुमान है कि 2032 तक विद्युत उत्पादन में 345 बिलियन डॉलर और पारेषण एवं वितरण में 68 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश संभावित है, जबकि केवल ऊर्जा भंडारण में ही 35 बिलियन डॉलर से अधिक का अवसर मौजूद है। यह वास्तविक मांग पर आधारित है, क्योंकि भारत की कुल उत्पादन क्षमता पहले ही 520 गीगावाट से अधिक है और तेजी से बढ़ रही है, साथ ही ग्रिड के उत्सर्जन तीव्रता घट रही है।

आइए, हम सभी एकजुट होकर विकसित भारत को ऊर्जा प्रदान करें और ग्‍लोबल साउथ की साझा समृद्धि के मार्ग को आलोकित करें।

(लेखक भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत मंत्री हैं)