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वार्ड-70 के बच्चों को मिला नया स्पोर्ट्स पार्क, MLA मदन लाल बग्गा ने किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 70 में कैलाश चौक, गांधी स्ट्रीट के पास नवनिर्मित स्पोर्ट्स पार्क का उद्घाटन विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा ने स्थानीय निवासियों की मौजूदगी में किया। करीब 14.70 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पार्क से इलाके के बच्चों और युवाओं को घर के पास ही खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

उद्घाटन के दौरान MLA मदन लाल बग्गा ने कहा कि लंबे समय से खेलों में रुचि रखने वाले स्थानीय बच्चों को प्रैक्टिस के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता था। इसके अलावा, निजी कोचिंग सेंटरों की फीस भी कई परिवारों के लिए चुनौती बनी हुई थी। अब नए स्पोर्ट्स पार्क के बनने से बच्चे अपने घर के नजदीक मुफ्त में अभ्यास कर सकेंगे और अपनी खेल प्रतिभा को निखार सकेंगे।

इस मौके पर विधायक बग्गा ने बच्चों को फुटबॉल, क्रिकेट किट, बैडमिंटन सेट और बास्केटबॉल सहित विभिन्न खेलों का सामान भी वितरित किया। खेल सामग्री मिलने पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।

MLA बग्गा ने कहा कि उनका उद्देश्य लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के हर वार्ड में बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में काउंसलर अमन बग्गा खुराना, ब्लॉक प्रेसिडेंट कामराज शर्मा, वार्ड सेक्रेटरी सनी वासन, पुनीत मनोचा, जीतू सेठी, बॉबी राय, कमल बातिश, ईशान शर्मा, अनिल शर्मा, यूथ विंग ब्लॉक कोऑर्डिनेटर राहुल रुद्र, यूथ विंग वार्ड प्रेसिडेंट गीतिक गुगलानी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।

गांव लिब्रा में मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप आयोजित, डेयरी किसानों को दी योजनाओं की जानकारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

डेयरी डेवलपमेंट विभाग की ओर से डिप्टी डायरेक्टर डेयरी डेवलपमेंट, जिला लुधियाना के नेतृत्व में ब्लॉक खन्ना के गांव लिब्रा में एक दिवसीय मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप आयोजित किया गया। कैंप में क्षेत्र के डेयरी किसानों ने हिस्सा लिया और विभाग की विभिन्न गतिविधियों एवं योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

कैंप के दौरान डेयरी किसानों को पशुओं को बीमारियों से बचाने, संतुलित आहार देने, पशुओं की उचित देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी उपायों के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी।

इस दौरान डेयरी किसानों को डेयरी लोन केस से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी गई। विभाग की ओर से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि डेयरी व्यवसाय को और अधिक लाभदायक बनाया जा सके।

अधिकारियों ने किसानों को बताया कि विभाग की योजनाओं और सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर डेयरी किसान अपने व्यवसाय को मजबूत कर सकते हैं और दूध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

जवाहर नवोदय विद्यालय में 9वीं और 11वीं कक्षा में एडमिशन प्रक्रिया जारी, 30 सितंबर तक करें आवेदन

लुधियाना / सत्ता संदेश

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं में खाली सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया जारी है। इन कक्षाओं में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रवेश परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को आयोजित की जाएगी।

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू की प्रिंसिपल निशि गोयल ने बताया कि कक्षा 9वीं और 11वीं में उपलब्ध रिक्त सीटों को भरने के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इच्छुक और योग्य विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 9वीं में एडमिशन के लिए विद्यार्थी का लुधियाना जिले का स्थायी निवासी होना जरूरी है और उसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 में किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 8वीं में अध्ययनरत होना चाहिए। कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए विद्यार्थी का जन्म 1 मई 2012 से 31 जुलाई 2014 के बीच होना चाहिए।

इसी तरह, कक्षा 11वीं में एडमिशन के लिए विद्यार्थी का लुधियाना जिले का स्थायी निवासी होना और शैक्षणिक सत्र 2026-27 में किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 10वीं में पढ़ना जरूरी है। कक्षा 11वीं में प्रवेश के लिए जन्म तिथि 1 जून 2010 से 31 जुलाई 2012 के बीच निर्धारित की गई है।

इच्छुक विद्यार्थी कक्षा 9वीं में एडमिशन के लिए https://cbseitms.nic.in/2026/nvsix_6 और कक्षा 11वीं के लिए https://cbseitms.nic.in/2026/nvsxi_11 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

प्रिंसिपल निशि गोयल ने सभी इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना ऑनलाइन आवेदन जमा करें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026: SSS स्कूल घुधनी की कबड्डी टीम रही अव्वल, विभिन्न मुकाबलों में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

लुधियाना / सत्ता संदेश

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत लुधियाना जिले के विभिन्न ब्लॉकों में चल रहे ब्लॉक स्तरीय खेल मुकाबलों के दूसरे चरण के तीसरे दिन खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। कुमकलां, डेहलों, जगराओं, दोराहा और समराला ब्लॉकों में आयोजित मुकाबलों में खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, वॉलीबॉल और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में हिस्सा लिया।

ब्लॉक दोराहा में संत ईशर सिंह स्टेडियम, गांव घलोटी में आयोजित कबड्डी सर्कल स्टाइल अंडर-17 लड़कों के मुकाबलों में SSS स्कूल घुधनी की टीम ने पहला स्थान हासिल किया। SSS स्कूल रौनी दूसरे और सरकारी हाई स्कूल जरगढ़ी की टीम तीसरे स्थान पर रही। वहीं अंडर-17 लड़कों के वॉलीबॉल शूटिंग मुकाबलों में कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल पायल ने पहला, ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल पायल ने दूसरा और सरकारी हाई स्कूल जरखड़ी ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान ब्लॉक दोराहा के SHO जसनप्रीत सिंह सरहान ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

ब्लॉक कुमकलां के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल साहनेवाल खुर्द में आयोजित मुकाबलों में वॉलीबॉल स्मैशिंग अंडर-14 लड़कों के वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर ने पहला स्थान हासिल किया। परफेक्ट पब्लिक स्कूल दूसरे और भैणी शालू की टीम तीसरे स्थान पर रही। अंडर-17 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर प्रथम, दयाल पब्लिक स्कूल द्वितीय और दर्शन एकेडमी स्कूल लुधियाना तृतीय रहा। अंडर-21 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर ने पहला, डिसेंट पब्लिक स्कूल ने दूसरा और मुंडियां कलां ने तीसरा स्थान हासिल किया।

वॉलीबॉल स्मैशिंग लड़कियों के अंडर-17 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर पहले, डिसेंट पब्लिक स्कूल दूसरे और मुंडियां कलां तीसरे स्थान पर रहा। अंडर-21 वर्ग में मुंडियां कलां की टीम ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि दर्शन एकेडमी स्कूल तीसरे स्थान पर रहा।

कुमकलां में एथलेटिक्स के अंडर-14 लड़कों के 60 मीटर मुकाबले में अंश राज ने पहला, नमन भाटिया ने दूसरा और चिराग ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में साहिल कुमार प्रथम, पवनदीप सिंह द्वितीय और सुखप्रीत सिंह तृतीय रहे। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में 60 मीटर में अंशिका राय प्रथम, अशरा द्वितीय और साक्षी तृतीय रहीं। 600 मीटर में साक्षी ने पहला, दिव्यांशी सिंह ने दूसरा और प्रीति कुमारी ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में रिया गुप्ता प्रथम, दीक्षा सरमा द्वितीय और रामदीप कौर तृतीय रहीं।

ब्लॉक डेहलों के संतोख सिंह मर्दिंग स्टेडियम, गांव दुलय में एथलेटिक्स मुकाबलों के दौरान लड़कों की 60 मीटर दौड़ में सुखमनप्रीत सिंह ने पहला, वंस ने दूसरा और करण सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में सुखमनप्रीत सिंह प्रथम, जसविंदर सिंह द्वितीय और जसकरन सिंह तृतीय रहे। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में 60 मीटर में प्रभजोत कौर प्रथम, जशनप्रीत कौर द्वितीय और फलक तृतीय रहीं। लंबी कूद में जसनूर कौर प्रथम, वंशिका द्वितीय और अवनीत कौर तृतीय रहीं, जबकि शॉट पुट में दिलमेहक कौर ने पहला स्थान हासिल किया।

ब्लॉक जगराओं के कलगीधर स्टेडियम, कमालपुरा में अंडर-14 लड़कों की 60 मीटर दौड़ में सुखमनजीत सिंह प्रथम, वरिंदर सिंह द्वितीय और दिलजान तृतीय रहे। 600 मीटर में दिलजान सिंह ने पहला, दिलजोत सिंह ने दूसरा और एकमजीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में इशान सिंह प्रथम, दिलराज सिंह द्वितीय और खुशप्रीत सिंह तृतीय रहे। अंडर-21 लड़कों की 800 मीटर दौड़ में विशाल ने पहला, महकप्रीत सिंह ने दूसरा और गौरज सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।

जगराओं में लड़कियों के अंडर-14 वर्ग की 60 मीटर दौड़ में जसलीन कौर प्रथम, गुरलीन कौर द्वितीय और हरमनदीप कौर तृतीय रहीं। 600 मीटर में जसलीन कौर ने पहला, गुरलीन कौर ने दूसरा और सुखप्रीत कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में गुरनूर कौर प्रथम, गुरलीन कौर द्वितीय और तनप्रीत कौर तृतीय रहीं। वॉलीबॉल स्मैशिंग अंडर-14 लड़कों में SSS स्कूल गिद्दड़विंडी ने पहला और गांव सोहियां ने दूसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में गुरु हरगोबिंद पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिधवान खुर्द प्रथम और SSS स्कूल गिद्दड़विंडी दूसरे स्थान पर रहा।

ब्लॉक समराला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गांव मानकी में भी एथलेटिक्स मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। अंडर-14 लड़कों की 60 मीटर दौड़ में एकमजोत सिंह ने पहला, मनवीर सिंह ने दूसरा और गुरप्रीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में एकमजोत सिंह प्रथम, दीपक कुमार द्वितीय और जगदीप सिंह तृतीय रहे। लंबी कूद में मनवीर सिंह प्रथम, जगदीप सिंह द्वितीय और गुरप्रीत सिंह तृतीय रहे, जबकि शॉट पुट में हसनप्रीत सिंह ने पहला स्थान हासिल किया।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि ब्लॉक स्तरीय खेलों के तीसरे चरण में 12 से 14 सितंबर तक 4 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, खन्ना, लुधियाना-2 और रायकोट में भी विभिन्न खेल मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को खेलों के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करना है।

PEC में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर नुक्कड़ नाटक, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का दिया संदेश

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्टूडेंट काउंसलिंग सेल (SCC), PEC की ओर से ड्रामेटिक्स क्लब और आर्ट एंड फोटोग्राफिक क्लब के सहयोग से किया गया।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और परिसर में आत्महत्या की रोकथाम, भावनात्मक स्वास्थ्य तथा समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता लेने के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना था।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने भावनात्मक तनाव और मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को पहचानने का संदेश दिया। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहे व्यक्ति की बात सहानुभूति के साथ सुनना, उसे भावनात्मक सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना कितना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक और झिझक को कम करने तथा लोगों को बिना संकोच पेशेवर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आत्महत्या की रोकथाम केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर मिलने वाली सहायता, सहानुभूतिपूर्ण संवाद और सार्थक बातचीत किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

यह पहल परिसर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, भावनात्मक मजबूती और विद्यार्थियों के समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राजेश भाटिया, निदेशक, प्रो. पुनीत चावला, डीन स्टूडेंट अफेयर्स (DSA) तथा प्रो. सुलता भंडारी, प्रभारी (P/I), स्टूडेंट काउंसलिंग सेल (SCC), पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के मार्गदर्शन में किया गया।

PEC में पेटेंट खोज और ड्राफ्टिंग पर व्याख्यान, विद्यार्थियों को IPR की दी महत्वपूर्ण जानकारी

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ में स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी विद्यार्थियों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर व्याख्यानों की श्रृंखला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन डीन, प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (SRIC) कार्यालय की ओर से सीनेट हॉल में किया गया।

कार्यक्रम में प्रो. उमेश शर्मा, डीन, SRIC तथा प्रो. संदीप कुमार, एसोसिएट डीन, SRIC (IPR) का सहयोग रहा। व्याख्यानों का संचालन सुश्री संगीता नागर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, M/s S.S. Rana & Co., नई दिल्ली तथा श्रीमती सोनू राठौर, मुख्य तकनीकी अधिकारी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पेटेंट खोज, पेटेंट योग्यता और नवीनता के आकलन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के लिए पेटेंट ड्राफ्टिंग की मूलभूत प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

व्याख्यानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अनुसंधान और नवाचारों को बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। विशेषज्ञों ने पेटेंट से संबंधित आवश्यक जानकारियां साझा करते हुए शोध कार्यों को प्रभावी ढंग से संरक्षित करने के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम से PG और पीएचडी विद्यार्थियों को अपने शोध एवं नवाचारों के संरक्षण, पेटेंट प्रक्रिया की समझ विकसित करने तथा अपने अनुसंधान को बौद्धिक संपदा में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

भारत की भूली-बिसरी लौकी-वर्गीय सब्जियों पर वैज्ञानिकों की जेनेटिक नजर, बेहतर पैदावार की उम्मीद

मोहाली / सत्ता संदेश

लौकी, तोरई, करेला, नेनुआ और चिचिंडा जैसी सब्जियां भले ही भारतीय रसोई में बेहद आम हों, लेकिन कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय तक इन फसलों को अपेक्षाकृत कम महत्व मिला। अब वैज्ञानिक इन ‘भूली-बिसरी’ या ‘अनाथ फसलों’ की पैदावार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इनके जेनेटिक रहस्यों को समझने में जुटे हैं।

लौकी-वर्गीय सब्जियां उत्तर भारत के गांवों में आम तौर पर घरों और खेतों में मचान पर उगती दिखाई देती हैं। ये सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली सब्जियां हैं, लेकिन पोषण की दृष्टि से इनका महत्व काफी अधिक है। ऐसे समय में जब भारतीय भोजन में चावल और गेहूं जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी अधिक है, ये सब्जियां शरीर को कई जरूरी विटामिन और खनिज उपलब्ध कराती हैं।

कृषि वैज्ञानिक ऐसी फसलों को ‘अनाथ फसलें’ कहते हैं। इनका महत्व स्थानीय स्तर पर बहुत अधिक होता है, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक ब्रीडिंग में इन्हें चावल, गेहूं, कपास और टमाटर जैसी प्रमुख फसलों की तुलना में लंबे समय तक कम प्राथमिकता मिली।

ज्यादा नर फूल, कम फल बनना बड़ी चुनौती

लौकी-वर्गीय फसलों की एक प्रमुख समस्या इनके फूलों की प्रकृति है। इन पौधों में नर फूलों की संख्या मादा फूलों के मुकाबले बहुत अधिक होती है। जबकि फल केवल मादा फूलों से बनता है। इसके अलावा मादा फूल परागण के लिए बहुत कम समय के लिए तैयार रहता है और इसके लिए मधुमक्खियों जैसे परागण करने वाले कीटों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। पौधा लंबे समय तक तेजी से बढ़ता है, लेकिन उसकी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा ऐसे नर फूलों के निर्माण में खर्च हो जाता है जो फल नहीं देते।

इसे आसान भाषा में समझें तो किसान के लिए यह ऐसी व्यवस्था है जिसमें संसाधन ज्यादा खर्च हो रहे हैं, लेकिन उसके मुकाबले फल कम मिल रहे हैं।

IISER मोहाली की टीम तलाश रही जेनेटिक समाधान

इसी समस्या का समाधान तलाशने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) मोहाली में डॉ. रवि देवानी की टीम, फ्रांस के पेरिस-सैक्ले स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट साइंसेज में डॉ. बेंदहमाने के रिसर्च ग्रुप के साथ मिलकर काम कर रही है।

वैज्ञानिकों का लक्ष्य अधिक खाद या कीटनाशक के इस्तेमाल के बजाय उन जेनेटिक निर्देशों को समझना है, जो पौधे में यह तय करते हैं कि फूल नर बनेगा या मादा।

इस शोध के लिए फिलहाल लौकी को शुरुआती मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है। लौकी का जीनोम मैप किया जा चुका है और इसमें नए जेनेटिक निर्देशों को शामिल करने की तकनीक भी उपलब्ध है। ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए यह दूसरी कम-अनुसंधान वाली लौकी-वर्गीय फसलों की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

हाइब्रिड बीज उत्पादन में भी हो सकता है फायदा

आज बेहतर हाइब्रिड बीज तैयार करने के लिए बीज कंपनियों को दो अलग-अलग पौधों के बीच नियंत्रित क्रॉस कराना पड़ता है। इसके लिए एक पौधे के नर फूल से पराग लेकर उसे दूसरे पौधे के मादा फूल तक पहुंचाना पड़ता है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और श्रमसाध्य होती है, जिसका असर बीज उत्पादन की लागत पर भी पड़ता है।

खरबूजे और खीरे जैसी कुछ फसलों में वैज्ञानिक ऐसी प्लांट लाइनों को विकसित करने में सफल रहे हैं जिनमें अधिकांश फूल मादा होते हैं। इससे पौधे की ऊर्जा फल उत्पादन की दिशा में अधिक इस्तेमाल हो सकती है और हाइब्रिड बीज उत्पादन की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।

भारतीय लौकी-वर्गीय सब्जियों में इस तरह की रणनीति पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

जलवायु परिवर्तन और मधुमक्खियों की घटती संख्या भी चुनौती

लौकी-वर्गीय फसलों के लिए केवल फूलों का लिंग ही चुनौती नहीं है। परागण के लिए कीटों पर निर्भरता भी भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।

बढ़ती गर्मी, हीट वेव और परागण करने वाले कीटों की घटती संख्या ऐसी फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। अगर मादा फूल के थोड़े समय के परागण योग्य रहने के दौरान पर्याप्त परागण नहीं हुआ, तो फल बनने की संभावना कम हो जाती है।

इसीलिए वैज्ञानिक ऐसे पौधों की संभावनाएं तलाश रहे हैं जिन्हें परागण की इस निर्भरता से कम प्रभावित किया जा सके।

हर्माफ्रोडाइट फूल और पार्थेनोकार्पी पर भी नजर

शोध की एक दिशा ऐसे फूलों की ओर है जिनमें नर और मादा दोनों प्रजनन अंग एक ही फूल में मौजूद हों। ऐसे हर्माफ्रोडाइट फूल कुछ परिस्थितियों में बाहरी परागण पर निर्भरता कम कर सकते हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण संभावना ‘पार्थेनोकार्पी’ है। इसका अर्थ है बिना निषेचन के फल का विकसित होना। अगर लौकी-वर्गीय फसलों में ऐसी क्षमता विकसित की जा सके, तो फल बनने के लिए समय पर मधुमक्खियों या अन्य परागण करने वाले कीटों की मौजूदगी पर निर्भरता कम हो सकती है।

इससे गर्मी की लहरों और कमजोर परागण वाले मौसम में भी उत्पादन को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

खीरे और खरबूजे से मिले जेनेटिक संकेत

डॉ. बेंदहमाने और डॉ. रवि देवानी की टीम ने खरबूजे और खीरे में फूलों के लिंग को नियंत्रित करने वाले जेनेटिक स्विच की पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण शोध किए हैं। इन शोधों को ‘साइंस’, ‘नेचर’ और ‘नेचर प्लांट्स’ जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल्स में प्रकाशित किया जा चुका है।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या लौकी और उससे जुड़ी दूसरी फसलों में भी फूलों के लिंग को नियंत्रित करने वाले वही जेनेटिक स्विच मौजूद हैं।

लौकी और खीरे के बीच विकासवादी दूरी काफी पुरानी है। दोनों का अंतिम साझा पूर्वज करोड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इतने लंबे समय में दोनों पौधों के जेनेटिक निर्देशों में काफी बदलाव हो चुके हैं। इसलिए यह जरूरी नहीं कि खीरे में काम करने वाला जेनेटिक स्विच लौकी में भी उसी तरह काम करे।

यही सवाल अब वैज्ञानिकों के लिए अगले चरण के शोध का केंद्र है। अगर इन फसलों में फूलों के लिंग, परागण और फल बनने की प्रक्रिया को जेनेटिक स्तर पर बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में सफलता मिलती है, तो भारत की पारंपरिक और लंबे समय से उपेक्षित लौकी-वर्गीय सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

IIT रोपड़ और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज में MoU, सेना अधिकारियों को मिलेगी डिफेंस टेक्नोलॉजी में MTech डिग्री

रोपड़ / सत्ता संदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (IIT Ropar) और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के बीच भारतीय सेना के अधिकारियों को डिफेंस टेक्नोलॉजी में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (MTech) की डिग्री प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते से लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे सेना अधिकारियों को उच्च तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान का अवसर मिलेगा।

समझौते पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अमित राव ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह महल, प्रबंध निदेशक, आईआईटी रोपड़ डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन और ब्रिगेडियर रोहित दास भी उपस्थित रहे।

इस समझौते का समन्वय आईआईटी रोपड़ के डीन (पीजी एंड रिसर्च) डॉ. सारंग गुमफेकर और डीआरआईएफ के निदेशक वीरभद्र सिंह रावत ने किया।

समझौते के तहत आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर में लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ के एमटेक कार्यक्रम के माध्यम से डिफेंस टेक्नोलॉजी में औपचारिक शैक्षणिक मान्यता प्रदान की जाएगी। आईआईटी रोपड़ के संकाय सदस्य अधिकारियों के शोध प्रबंध और अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मेंटर के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।

इसके अलावा, पूर्व अनुमति के अधीन सेना अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ की प्रयोगशालाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सेमिनार और व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

दोनों संस्थानों ने आपसी हित वाले क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान और अनुसंधान को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे भारतीय सेना और आईआईटी रोपड़ के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दिसंबर 2022 के समझौते पर आधारित है नई साझेदारी

यह नया समझौता दिसंबर 2022 में आर्मी ट्रेनिंग कमांड, इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर्स ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (आर्मी) और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के समझौता ज्ञापन की नींव पर आधारित है।

आईआईटी रोपड़ के अनुसार, दिसंबर 2022 में हुए समझौते के बाद से संस्थान भारतीय सेना के साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार सहयोग कर रहा है। आईआईटी रोपड़ का डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन (DRIF) इस साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि यह समझौता भारतीय सेना के साथ संस्थान के निरंतर जुड़ाव में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आईआईटी रोपड़ के संकाय और बुनियादी ढांचे अब सीधे उन अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा में योगदान दे रहे हैं जो देश की राष्ट्रीय रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने आने वाले वर्षों में इस सहयोग को और व्यापक तथा मजबूत बनाने की उम्मीद जताई।

इस पहल से सेना के अधिकारियों को रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही आईआईटी रोपड़ और भारतीय सेना के बीच तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद 2027: हरियाणा के युवाओं के लिए बड़ा मौका, 30 सितंबर तक करें आवेदन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

विकसित भारत के निर्माण में हरियाणा के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 को लेकर चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान ‘मेरा युवा भारत’, हरियाणा के संयुक्त निदेशक आकर्ष दीक्षित और सहायक निदेशक ईशा गुप्ता ने कार्यक्रम के उद्देश्य, पात्रता, चयन प्रक्रिया और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी दी।

संयुक्त निदेशक आकर्ष दीक्षित ने प्रदेश के युवाओं से mybharat.gov.in पर पंजीकरण कर विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रश्नोत्तरी इस चयन प्रक्रिया का पहला चरण है और इसमें 30 सितंबर 2026 तक भाग लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपने विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता प्रस्तुत करने का अवसर देने वाला मंच है। प्रश्नोत्तरी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को आगे निबंध, जिला स्तरीय प्रतियोगिता, राज्य स्तरीय संवाद और राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

जनवरी 2027 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय संवाद

विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 का राष्ट्रीय आयोजन 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में प्रस्तावित है। चयनित युवा इस राष्ट्रीय मंच पर विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार और युवा नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे लाना है।

पांच चरणों में होगा युवाओं का चयन

कार्यक्रम की चयन प्रक्रिया को पांच प्रमुख चरणों में बांटा गया है—

प्रश्नोत्तरी → निबंध → जिला चैंपियनशिप → राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद → राष्ट्रीय स्तर का संवाद

पहले चरण में डिजिटल विकसित भारत प्रश्नोत्तरी आयोजित की जा रही है। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 प्रतिशत प्रतिभागियों को अगले चरण के लिए चुना जाएगा। देशभर में अधिकतम 4 लाख युवा निबंध चरण के लिए पात्र होंगे।

इसके बाद चयनित प्रतिभागियों को 500 शब्दों का निबंध प्रस्तुत करना होगा। प्रत्येक जिले से शीर्ष 50 निबंधों का चयन किया जाएगा। जिला स्तर पर विचार प्रस्तुत करने के बाद प्रत्येक जिले से शीर्ष दो युवाओं को राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

चयन प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञों और स्वतंत्र निर्णायक मंडल की भूमिका होगी तथा प्रक्रिया को योग्यता और प्रतिभा आधारित रखा गया है।

हरियाणा के युवाओं के लिए सुशासन और शहरी विकास मुख्य विषय

हरियाणा को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र क्लस्टर में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र के लिए मुख्य विषय “भविष्य का सुशासन, शहरी परिवर्तन एवं नागरिक सेवाएं” निर्धारित किया गया है।

इस विषय के माध्यम से युवा वर्ष 2047 तक भारत में अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था विकसित करने को लेकर अपने विचार और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।

युवा इस विषय को हरियाणा की स्थानीय जरूरतों, शहरी विकास, नागरिक सुविधाओं, तकनीक, प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में देखते हुए अपने अभिनव सुझाव दे सकते हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियों से लेकर युवा उद्यमिता तक अवसर

सहायक निदेशक ईशा गुप्ता ने बताया कि यह अभियान केवल प्रश्नोत्तरी तक सीमित नहीं है। युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए भी मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित भारत चैलेंज, सांस्कृतिक गतिविधियां, भारत के लिए डिजाइन, सामाजिक सरोकारों के लिए नवाचार, युवा उद्यमिता चुनौती और युवा संसद जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

सांस्कृतिक क्षेत्र में लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, भाषण और कविता जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी युवा अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकेंगे।

15 से 29 वर्ष के युवा ले सकते हैं भाग

प्रेस वार्ता में बताया गया कि 15 से 29 वर्ष की आयु के युवा इस प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हैं। ‘मेरा युवा भारत’ पोर्टल पर पहले से पंजीकृत युवाओं को दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है। वे सीधे विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग ले सकते हैं।

आकर्ष दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2025 में राष्ट्रीय युवा महोत्सव को विकसित भारत@2047 के संकल्प के अनुरूप पुनर्गठित करते हुए विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद का स्वरूप दिया गया था। पिछले संस्करण में देशभर से 50 लाख से अधिक युवाओं ने प्रश्नोत्तरी में हिस्सा लिया था और करीब 3,000 युवाओं का राष्ट्रीय संवाद के लिए चयन किया गया था।

उन्होंने हरियाणा के युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों और अन्य संबंधित हितधारकों से अभियान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पात्र युवा 30 सितंबर 2026 तक mybharat.gov.in के माध्यम से विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर के युवा नेतृत्व मंच तक पहुंचने का अवसर हासिल कर सकते हैं।

प्रेस वार्ता के अंत में कहा गया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवा शक्ति की सामूहिक भागीदारी से पूरा होने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। हरियाणा के युवा अपनी प्रतिभा, विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से इस संकल्प को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री तक पहुंच का मौका, 30 सितंबर तक खुला ‘विकसित भारत क्विज़’

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रतिभा और विचार प्रस्तुत करने का अवसर सामने आया है। माय भारत पंजाब ने युवाओं से ‘विकसित भारत क्विज़’ में भाग लेने की अपील की है। यह क्विज़ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 का पहला चरण है और इसमें 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन भाग लिया जा सकता है।

प्रेस क्लब, चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए माय भारत पंजाब की राज्य निदेशक (प्रभारी) रश्मीत कौर ने बताया कि क्विज़ पांच चरणों वाली पूरी तरह योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का प्रवेश द्वार है। चयनित युवाओं को जनवरी 2027 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संवाद में केंद्रीय मंत्रियों, सचिवों और प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

VBYLD 2027 का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है, जबकि माय भारत इसकी कार्यकारी एजेंसी है। वर्ष 1995 से आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव को वर्ष 2025 में विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप पुनर्गठित कर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का रूप दिया गया था। पिछले संस्करण में देशभर से 50 लाख से अधिक युवाओं ने क्विज़ में हिस्सा लिया था और करीब 3,000 युवाओं का चयन राष्ट्रीय संवाद के लिए हुआ था।

कौन ले सकता है हिस्सा?

17 अगस्त 2026 को 15 से 29 वर्ष की आयु वाला कोई भी युवा इस अभियान में भाग ले सकता है। पंजीकरण और सभी डिजिटल चरण पूरी तरह निःशुल्क हैं तथा माय भारत पोर्टल पर कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। जो युवा पहले से माय भारत पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे क्विज़ में हिस्सा ले सकते हैं।

पंजाब के युवाओं के लिए क्या है थीम?

VBYLD 2027 में राष्ट्रीय विषयों के बजाय देश को 10 क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नीति नगर) समूह में रखा गया है।

इस समूह की थीम “भविष्य का सुशासन, शहरी रूपांतरण एवं नागरिक सेवाएं” है। प्रतिभागियों के सामने यह विचार रखने की चुनौती होगी कि भारत वर्ष 2047 तक दुनिया की सबसे कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था कैसे विकसित कर सकता है। जिला स्तर के विषयों में इसी थीम को पंजाब की स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा।

पांच चरणों में होगा चयन

  • विकसित भारत क्विज़: माय भारत पोर्टल पर 30 सितंबर 2026 तक
  • विकसित भारत निबंध: चयनित प्रतिभागियों द्वारा 500 शब्दों का निबंध
  • जिला चैंपियनशिप: नवंबर 2026 में; प्रत्येक जिले के शीर्ष 50 प्रतिभागी प्रस्तुति देंगे
  • राज्य VBYLD: नवंबर-दिसंबर 2026 में राज्य मुख्यालय पर
  • राष्ट्रीय संवाद: 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में

VBYLD 2027 में केवल विकसित भारत चैलेंज ट्रैक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, डिजाइन फॉर भारत, हैक फॉर सोशल कॉज़ और यूथ सहित अन्य ट्रैक भी शामिल किए गए हैं। सांस्कृतिक ट्रैक में लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, वक्तृत्व और कविता लेखन जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।

रश्मीत कौर ने युवाओं से समय सीमा से पहले इसमें भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि देश के भविष्य के नेतृत्व की खोज का अभियान है। उनके मुताबिक, 2047 में देश की संस्थाओं को नेतृत्व देने वाले युवा आज पंजाब के हर जिले में मौजूद हैं और जरूरत है कि कोई भी युवा इस अवसर से वंचित न रह जाए।

पंजीकरण: mybharat.gov.in