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केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए इसकी छह दशकों की विशिष्ट राष्ट्र सेवा को स्मरण किया


तिरुवनंतपुरम /सत्ता संदेश

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रही है

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने ऑपरेशन सिंदूर सहित संकट के समय अनुकरणीय सेवा दी है

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने तिरुवनंतपुरम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल पेरूकाडा फैक्ट्री में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। यह समारोह देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में संगठन के 60 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

वर्ष 1966 में स्थापित, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपने शुरुआती योगदान से लेकर स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों, निदान, अवसंरचना विकास और सामाजिक विपणन में अपनी विविध उपस्थिति तक, संगठन ने लगातार उत्कृष्टता, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जताए गए गहरे विश्वास पर जोर दिया और कहा कि संगठन ने प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से इस विश्वास को लगातार कायम रखा है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने एचएलएल के निरंतर विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की उभरती जरूरतों के प्रति उसकी तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक, प्रभावी उपायों के माध्यम से उन्हें दूर करने की अद्वितीय क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि ऐसे प्रयास हमेशा स्तर तक नहीं पहुंचते, लेकिन उनका संचयी प्रभाव, विशेष रूप से महिलाओं और रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में, राष्ट्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एचएलएल पर विश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के किफायती दवाइयां और विश्वसनीय उपचार प्रत्यारोपण (एएमआरआईटी) फार्मेसी नेटवर्क जैसी प्रमुख पहलों के प्रति मजबूत समर्थन और जुड़ाव में भी परिलक्षित होता है, जिसने हाल ही में अपनी सेवा के एक दशक पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ-साथ ऐसी पहलों ने देश भर में सस्ती दवाओं की उपलब्धता को काफी हद तक बढ़ाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि एएमआरआईटी फार्मेसियों ने मंत्रालय को कैंसर की दवाओं, ब्रांडेड दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिनकी कीमतें प्रचलित बाजार दरों से 50 प्रतिशत कम हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को ठोस वित्तीय राहत मिल रही है।

संकट के समय में एचएलएल की सराहनीय भूमिका को याद करते हुए, श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन की त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसके तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण, भीष्म क्यूब्स और दवाएं जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब राज्यों में तुरंत पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संकट के समय राष्ट्र की सेवा करने के लिए एचएलएल की परिचालन तत्परता, प्रतिबद्धता और क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संस्था की वास्तविक क्षमता महत्वपूर्ण क्षणों में चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता में निहित होती है और इस संबंध में एचएलएल ने सार्वजनिक सेवा वितरण में एक मिसाल कायम की है।

अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और समर्पण के उच्चतम मानकों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठन की सराहना की और देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भागीदार के रूप में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड में मंत्रालय के निरंतर विश्वास की पुष्टि की।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्मारक सिक्के का विमोचन था, जो भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में एचएलएल की विशिष्ट यात्रा के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है। यह इसकी स्थायी विरासत और राष्ट्रीय महत्व का भी प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास सहित प्रमुख संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को आगे बढ़ाना और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाना है।

किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों और सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, एचएलएल ने इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण उत्पाद और सेवा पहलों की घोषणा की। इनमें हाइड्रोसेफालस शंट का पुनः शुभारंभ, एचएलएल परिवर्तन वेलनेस क्लिनिक, एचएलएल वाटर का शुभारंभ और ‘हैप्पी डेज़’ कम्पोस्टेबल सैनिटरी नैपकिन का विमोचन शामिल हैं। ये सभी पहल संगठन के सुलभता, स्थिरता और नवाचार-संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तिरुवनंतपुरम स्थित एचएलएल के अक्कुलम इकाई में उन्नत मेंस्ट्रुअल कप निर्माण सुविधा का उद्घाटन भी शामिल था। यह उन्नत सुविधा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता समाधानों को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी विनिर्माण उत्कृष्टता को मजबूत करने के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की पीएफटी और एएफटी सुविधाओं का दौरा किया जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें प्रमुख कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने दोनों इकाइयों के कारखाना का दौरा किया, टीमों के साथ बातचीत की और विनिर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही उनके गुणवत्ता, दक्षता और स्वदेशी उत्पादन के प्रति एचएलएल की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी, साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित हितधारकों ने भाग लिया।

आयुष मंत्रालय ने लू और अत्यधिक गर्मी की स्थिति को देखते हुए जन स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी की


दिल्ली /सत्ता संदेश

इस परामर्श में गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए निवारक उपायों, पारंपरिक स्‍वास्‍थ्‍य पद्धतियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है

देश के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और लू की स्थिति को देखते हुए  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत आयुष वर्टिकल ने आयुष मंत्रालय के समन्वय से वर्तमान ग्रीष्म ऋतु के लिए अत्यधिक गर्मी/लू पर एक व्यापक जन स्वास्थ्य सलाह जारी की है।

इस परामर्श में आम जनता, संवेदनशील समूहों, नियोक्ताओं, श्रमिकों तथा बडे सर्वाजनकि और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले लोगों के लिए गर्मी से होने वाले तनाव और गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाव हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दोपहर के समय में सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से बचने,  हल्के सूती कपड़े पहनने तथा मौसमी फलों और इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर तरल पदार्थों के सेवन पर जोर दिया गया है।

परामर्श में यह भी बताया गया है कि शिशु, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्ति, खुले में काम करने वाले श्रमिक और हृदय रोग तथा उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति लू की स्थिति में विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं तथा उन्हें अतिरिक्‍त देखभाल एवं निगरानी की आवश्यकता होती है।

कार्यस्थलों, सार्वजनिक आयोजनों तथा बाहरी गतिविधियों के लिए विशेष सावधानियां सुलझाई गई हैं, जिनमें छायादार विश्राम स्‍थलों की व्‍यवस्‍था, नि‍यमति जलपान अवकाश, श्रमिकों के लिए अनुकूलन उपाय तथा गर्मी के तनाव के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढाना शामिल है।

इस सलाह में नागरिकों को गर्मी से संबंधित बीमारियों के खतरनाक संकेतों- जैसे चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, मानसिक स्थिति में बदलाव, शरीर का अत्‍यधिक तापमान, निर्जलीकरण, दौरे पडना-बेहोशी- के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। हीटस्ट्रोक को एक चिकित्सा आपातस्थिति बताया गया है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है। गंभीर मामलों में तुरंत 108/102 आपातकालीन हेल्पलाइन हेल्‍पलाइन पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

डीजीएचएस के आयुष वर्टिकल द्वारा जारी परिशिष्ट के अंतर्गत इस परामर्श में आयुर्वेद, सिद्ध, योग, यूनानी और होम्योपैथी सहित विभिन्न आयुष पद्धतियों के पारंपरिक स्वास्थ्य एवं निवारक उपायों को भी शामिल किया गया है, ताकि लू की स्थिति से मुकाबला किया जा सके।

आयुर्वेद विभाग ने शीतल आहार पद्धातियों, मठ्ठा, नारियल पानी और नींबू आधारित पेय जैसे शरीर को तरलता प्रदान करने वाले पेयों के सेवन तथा निम्बुकफला पनाका, आम्र प्रपनाका और चिंचा पनाका सहित पारंपरिक उपयोग की सलाह देता है, जिससे अत्‍यधिक गर्मी के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करने में सहायाता मिल सकेगी।

सिद्ध और योग अनुभागों में शीतलता प्रदान करने वाले पेयों तथा शीतली प्राणायाम और हल्‍के योग अभ्‍यासों को अपनाने की सलाह दी गई है,  ताकि शरीर में ताकि संतुलित बना रहे और गर्मी के तनाव को कम किया जा सके।

यूनानी पद्धति धूप से झुलसने और डीहाईड्रेशन को रोकने के लिए पारंपरिक ठंडे पेय और हर्बल लेप की सलाह देती है, जबकि होम्योपैथी अत्‍यधिक भीषण गर्मी के दौरान एहतियाती उपाय करने की सिफारिश करती है।

परामर्श में जनता को गर्मी के मौसम में अपने दैनिक आहार में खीरा, तरबूज, नींबू, खरबूजा, लौकी और टमाटर जैसी हाइड्रेटिंग और शीतलता देने वाले पारंपरिक खाद्य सामग्रि‍यों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

नागरिकों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम संबंधी अद्यतनों पर नियमित रूप से ध्‍यान देने और लू संबंधी चेतावनियों के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की भी सलाह दी गई है।

विस्तृत परामर्श संलग्न है।

चंडीगढ़ ने रक्त आधान सेवाओं पर राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) एवं महानिदेशक (NACO) ने की*

चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026: आज सुबह 11 बजे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रक्त चढ़ाने से जुड़ी सेवाओं की एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) और महानिदेशक, नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने की।

इस बैठक में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चंडीगढ़ से भी वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।

बैठक में रक्त सेवाओं के 5 मुख्य चरणों की समीक्षा की गई, जैसे—लाइसेंस देना और नवीनीकरण, रक्तदान करने वालों की जांच और रक्त संग्रह, संक्रमण (TTI) की जांच, रक्त का प्रोसेसिंग और स्टोरेज, तथा रिकॉर्ड रखना। इन सभी को 10 मुख्य मानकों (KPI) के आधार पर परखा गया। इसके लिए eRaktKosh, CDSCO, ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम (BBMS) और अन्य रिकॉर्ड्स के डेटा का उपयोग किया गया।

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि देश का लक्ष्य है कि हर जिले में सुरक्षित खून उपलब्ध हो और खून चढ़ाने से होने वाले संक्रमण (TTI) बिल्कुल खत्म हों। उन्होंने यह भी बताया कि दिसंबर 2026 तक हर जिले में कम से कम एक ब्लड बैंक होना चाहिए।

बैठक में बताया गया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर जिला स्तर पर ब्लड सेंटर बढ़ाने और सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर को eRaktKosh से जोड़ने का काम चल रहा है।

चंडीगढ़ के बारे में बताया गया कि यहां हर जिले में कम से कम एक ब्लड सेंटर उपलब्ध है। साथ ही, यहां अधिकतर रक्तदान स्वेच्छा से किया जाता है और जांच की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है।

आगे के लिए यह तय किया गया कि ब्लड सेंटरों में काम करने के नियमों (SOPs) को सही तरीके से लागू किया जाए, आधुनिक टेस्ट (जैसे ELISA/CLIA) अपनाए जाएं, ब्लड कंपोनेंट अलग करने की सुविधा बढ़ाई जाए और eRaktKosh व BBMS के जरिए डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए।

इसके अलावा, ब्लड डोनर्स की पहचान के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम और हर ब्लड सेंटर का डिजिटल रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। इस काम में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, रेड क्रॉस सोसायटी और अन्य संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।

बैठक के अंत में डॉ. गुप्ता ने निर्देश दिए कि सभी ब्लड सेंटरों के लाइसेंस की जांच की जाए, eRaktKosh और BBMS का 100% उपयोग सुनिश्चित किया जाए, नियमों का सख्ती से पालन हो, कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण दिया जाए और सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

चंडीगढ़ प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर हर नागरिक को समय पर और सुरक्षित रक्त  उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

एक्ट ह्यूमेन एनजीओ ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) पहल के तहत 100 टीबी मरीजों को गोद लिया

सामुदायिक स्वास्थ्य को मजबूत करने और टीबी मुक्त भारत के तहत सरकार की ‘निक्षय मित्र’ पहल का समर्थन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, एक्ट ह्यूमेन एनजीओ ने अपनी सीएसआर पहल के तहत जिले में 100 टीबी मरीजों को गोद लेने का निर्णय लिया है।इस पहल के तहत, संगठन छह महीने की अवधि के लिए हर महीने प्रोटीन युक्त आहार किट प्रदान करेगा, जिससे उपचार करा रहे मरीजों को पोषण संबंधी सहायता सुनिश्चित हो सकेगी। इस प्रयास का उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करना, टीबी से जुड़े कलंक को कम करना और टीबी मुक्त एवं स्वस्थ समुदाय के निर्माण के व्यापक लक्ष्य में योगदान देना है।यह पहल लुधियाना के उपायुक्त श्री हिमांशु जैन (आईएएस), सहायक आयुक्त (सामान्य) श्रीमती पायल गोयल और श्री अंबर बंदोपाध्याय के मार्गदर्शन में की गई। इस पहल का समन्वय और संचालन जिला परिवर्तन सहयोगी सिमरनजीत कौर (सीएसआर) और साहिल सिद्दीकी (स्वास्थ्य) द्वारा किया गया, जिन्होंने इस सहयोग को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

लुधियाना जिला प्रशासन ने संगठन के मानवीय योगदान की सराहना की है और अधिक संगठनों को अपने सीएसआर पहलों के तहत जन कल्याण और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में सहयोग करने के लिए आगे आने को प्रोत्साहित किया है।
प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के बीच इस प्रकार के सहयोगात्मक प्रयास टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लुधियाना में 15 लोगों को काटने वाला कुत्ता ‘रेबीज-इन्फेक्टेड’ निकला, सभी घायलों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जाएगी

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना शहर के मॉडलग्राम की गांधी कॉलोनी में रविवार को जिस कुत्ते ने 11 साल के बच्चे समेत कुल 15 लोगों को काटा था, वह रेबीज से पीड़ित था। गुरु अंगद देव वेटरनरी मेडिसिन एंड साइंस यूनिवर्सिटी (GADVASU) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बुधवार को इस बात की पुष्टि हुई।घटना वाले दिन, रविवार सुबह, बीमार कुत्ते ने पहले एक 11 साल के बच्चे को गंभीर रूप से घायल किया, जिसके बाद उसने एक के बाद एक 14 और लोगों को काटा। नगर निगम की टीम ने दोपहर में कुत्ते को पकड़कर ABC सेंटर ले गई, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।घायलों का इलाज ज़रूरी

नगर निगम और हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, रिपोर्ट आने के बाद सभी 15 पीड़ितों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना ज़रूरी होगा। इसके साथ ही, जो लोग गंभीर रूप से घायल हैं, उन्हें इम्यूनोग्लोबुलिन भी दिया जाएगा।वेटेरिनेरियन डॉ. राजीव के अनुसार, कुत्ते के काटे हुए हर व्यक्ति को टिटनेस का टीका लगवाना और साथ ही पांच वैक्सीनेशन (एंटी-रेबीज पोस्ट-बाइट वैक्सीनेशन) का पूरा कोर्स करवाना ज़रूरी है। अगर कुत्ते ने किसी को कंधे के ऊपर काटा है, तो एंटी-रेबीज वैक्सीन के साथ हाइपर सीरम इंजेक्शन लगवाना बहुत ज़रूरी है ताकि वायरस को उसी जगह पर खत्म किया जा सके।