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एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की बैठक के 68वें सत्र का नई दिल्ली में समापन


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय ने विजन 2030 की रूपरेखा और संस्थागत निष्पादन उपायों की समीक्षा की

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की बैठक का 68वां सत्र 20-22 मई 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित तीन दिनों के विचार-विमर्श, रणनीतिक चर्चाओं और उच्च स्तरीय बैठकों के बाद नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में इस बैठक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता संगठनों (एनपीओ) के प्रमुखों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति निर्माताओं, उत्पादकता विशेषज्ञों और एपीओ सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 20 मई 2026 को तैयारी और बंद कमरे में हुई बैठकों के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से नेटवर्किंग और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

21 और 22 मई 2026 को आयोजित पूर्ण सत्रों में एपीओ की भविष्य की दिशा, शासन और रणनीतिक प्राथमिकताओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण एजेंडा मदों पर विचार-विमर्श किया गया। इन सत्रों में महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट, वर्ष 2025 की वित्तीय रिपोर्ट, 2026 के लिए लेखा परीक्षकों की नियुक्ति, एपीओ विजन 2030 संचालन समिति की सिफारिशें, 2027-28 की द्विवर्षीय अवधि के लिए एपीओ का प्रारंभिक बजट और शासन सुधार, क्षेत्रीय उत्पादकता पहलों पर प्रगति रिपोर्ट को स्वीकार किया गया और संस्थागत निष्पादन और अनुपालन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 21 मई 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया और उद्घाटन भाषण दिया। श्री गोयल ने भारत की उत्पादकता-आधारित विकास, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, विनिर्माण और रसद सुधार, एमएसएमई के सशक्तिकरण, स्थिरता पहलों और क्षेत्रीय सहयोग के बारे में बताया।

शासी निकाय की बैठक में नेतृत्व में महत्वपूर्ण परिवर्तन भी हुए, जिसमें इंडोनेशिया के एपीओ निदेशक, प्रोफेसर अनवर सानुसी ने 2026-27 के लिए एपीओ अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने भारत के एपीओ निदेशक और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया का स्थान लिया। ईरान और जापान के कार्यवाहक एपीओ निदेशकों ने क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण उत्पादकता संवर्धन और संगठनात्मक उत्कृष्टता में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्पादकता समर्थकों, तकनीकी विशेषज्ञों और एनपीसी विशेष मान्यता पुरस्कारों के लिए एपीओ पुरस्कार थे।

एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) ने एपीओ सदस्य देशों में उत्पादकता विशेषज्ञों के प्रमाणन निकायों का मूल्यांकन करने और मान्यता प्रदान करने के लिए एपीओ प्रत्यायन निकाय (एपीओ-एबी) की स्थापना की। अब तक, भारत सहित 13 एपीओ सदस्य देशों को प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इस कार्यक्रम के दौरान, कंबोडिया के राष्ट्रीय उत्पादकता संगठन प्रमाणन निकाय को एपीओ-एबी प्रत्यायन प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

सदस्य अर्थव्यवस्थाओं ने शासी निकाय की बैठक के दौरान एपीओ विजन 2030 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास, नवाचार, क्षमता विकास और उत्पादकता-आधारित विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

22 मई 2026 को आयोजित समापन सत्र का शुभारंभ एपीओ अध्यक्ष के संबोधन से हुआ, जिसके बाद भारत की वैकल्पिक निदेशक श्रीमती नीरजा शेखर ने अपने विचार रखे। इसके बाद यह घोषणा की गई 2027 में कि 69वीं जीबीएम की मेजबानी लाओ पीडीआर करेगा और एपीओ अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुखों की 67वीं कार्यशाला शिखर बैठक (एसएम) 2027 में श्रीलंका में आयोजित की जाएगी।

एपीओ ने “अन्य व्यवसाय” के अंतर्गत, सदस्य देशों को विजन 2030 के तहत जीएआईए (जेनुइन एआई एक्शन) पहल के बारे में जानकारी दी जिसमें एआई-संचालित उत्पादकता विकास और प्रशिक्षण प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। इसके बाद, द्वितीय उपाध्यक्ष, जापान द्वारा प्रस्तुत कार्यवाही का सारांश (दिन 1 और 2) अपनाया गया और एपीओ अध्यक्ष के समापन भाषण के साथ सत्र समाप्त हुआ।

बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के प्रमुख धरोहर स्थलों- राष्ट्रीय संग्रहालय, हुमायूं का मकबरा, इंडिया गेट-सेंट्रल विस्टा सेरिमोनियल ऐवन्यू और ‘द लाइट एंड द लोटस्: रेलिक्स ऑफ अवेकन्ड वन का सांस्कृतिक भ्रमण किया। इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ-साथ मूर्तियां, पांडुलिपियां और कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जो भारत की बौद्ध विरासत को दर्शाती हैं। इस प्रदर्शनी में नई दिल्ली के राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत को दर्शाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के इस अवसर की सराहना की।

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की 68वीं बैठक की सफल मेजबानी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ाने, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को भारी परेशानी का सामना

अमृतसर / सत्ता संदेश

ऑनलाइन फार्मेसी और नई नीति के विरोध में केमिस्टों की हड़ताल

अमृतसर की दवा मंडी समेत पंजाबभर में मेडिकल दुकानों पर लगे ताले

केमिस्ट एसोसिएशन की चेतावनी — मांगें नहीं मानी गईं तो संघर्ष होगा तेज

देशभर में आज मेडिकल स्टोर और दवाइयों की दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा, लेकिन ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। कई जगहों पर लोग मेडिकल स्टोरों के बाहर खड़े नजर आए, लेकिन बंद होने के कारण उन्हें दवाइयां नहीं मिल सकीं।

पंजाब के अमृतसर में भी इस बंद का बड़ा असर देखने को मिला। अमृतसर के कटड़ा शेर सिंह इलाके, जिसे दवाइयों की सबसे बड़ी होलसेल मार्केट माना जाता है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा पहले ही बंद का ऐलान किया गया था, जिसके चलते शहर की लगभग सभी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह बंद रात 12 बजे तक जारी रहेगा।

मीडिया से बातचीत करते हुए अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी मनजीत सिंह ने बताया कि यह हड़ताल पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन और ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर की गई है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर दवाइयां बेच रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना उचित जांच के दवाइयां बेची जा रही हैं, जिससे नकली दवाइयों का खतरा भी बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार द्वारा लाई जा रही नई नीतियों के कारण आने वाले समय में केमिस्टों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। एसोसिएशन के मुताबिक ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंस पोर्टल में भी कई तकनीकी खामियां हैं, जिससे दुकानदार परेशान हैं।

वहीं अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रधान अमरदीप सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार कर ऑनलाइन दवाइयां बेची जा रही हैं, जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली दवाइयों की सप्लाई भी आसानी से हो रही है, इसलिए केमिस्ट इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। अगले महीने ऑल इंडिया स्तर पर बैठक की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और आम लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

बाइट — केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रधान अमरदीप सिंह

बाइट — अमृतसर केमिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी मनजीत सिंह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर संबोधित किया

उत्तर प्रदेश / सत्ता संदेश

मोदी सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है

पिछले 20 वर्षों में अपने साहस, समर्पण और परिश्रम से देश का विश्वास अर्जित कर ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ हासिल करने वाले NDRF के सभी जवानों को बधाई

CAPF के जवानों ने 7 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे

भारत आज आपदा प्रबंधन में ‘ग्लोबल लीडर’ और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ बनकर उभरा है तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को धरातल पर उतारा है

पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है

मोदी सरकार आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को ‘मिनिमम कैजुअल्टी’ से ‘ज़ीरो कैजुअल्टी’ तक पहुँचा रही है

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है

1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाने और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने वाले NDRF के जवानों को देखते ही मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव बढ़ जाता है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक और NDRF के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया जाना सिर्फ NDRF की सराहनीय सेवाओं को स्वीकार किया जाना ही नहीं, बल्कि यह SDRF, पंचायत से लेकर राज्य तक पूरी मशीनरी, NCC, NSS और हजारों की संख्या में सेवा में लगे आपदा मित्रों की सेवाओं का राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमोदन किया जाना है। उन्होंने कहा कि NDRF के जवान देश में कहीं भी ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के घोष के साथ जाते हैं। NDRF के जवान देश-दुनिया में जहाँ कहीं भी गए, वहाँ प्यार और भरोसा अर्जित किया है। देश में कहीं भी आपदा आई हो या आने वाली हो, जब NDRF के जवान वहाँ पहुँचते हैं, तो जनता राहत की साँस लेती है कि अब उनका बचाव हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NDRF ने अपनी स्थापना के 20 साल में देश में कहीं भी बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य प्रकार की आपदा आई हो, अपने सफल कार्यों के आधार पर पूरे देश की 140 करोड़ जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या कोई भीषण हादसा, NDRF की एक झलक ही देशवासियों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव भर देती है। इस बल ने अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NDRF को प्रेसिडेंट्स कलर मिलना, NDRF के समस्त बल के सेवा, साहस, शौर्य और समर्पण के संचित गुणों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और NDRF ने अपने कार्यकाल में आपदा बचाव के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नक्शे पर स्थापित करने का काम किया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है, लेकिन देश के गृह मंत्री के नाते मेरे लिए यह विशेष गौरव का विषय है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज 116 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली छह परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से NDRF देश की जनता को किसी भी प्रकार की आपदा से सुरक्षित रखने के लिए और भी मजबूती से काम कर पाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से अब तक हमने न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए काम किया है, बल्कि अब हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि अब हम जीरो कैजुअल्टी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जिस आपदा का पूर्वानुमान और मौसम विज्ञान विभाग से पूर्व जानकारी मिल जाती है, वहाँ जन, धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि NDMA ने आपदा प्रबंधन से जुड़े नीति विषयक मामलों में ढेर सारे निर्णय लिए, बहुत सारे दिशानिर्देश जारी किए, और जन जागरूकता पैदा करने की दिशा में सफल प्रयास किए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपदा बचाव देश का संस्कार बनता जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF ने न केवल नागरिकों, बल्कि उनके साथ रहने वाले मूक पशुओं को भी बचाकर उत्कृष्ट सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि आपदा में जनहानि शून्य हो और संपत्तियों का नुकसान न्यूनतम हो।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय हीट वेव जैसी गंभीर चुनौतियों का भी बहुत ही प्रभावी तरीके से सामना करने की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय और NDRF ने क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर बहुत बल दिया है। NDRF ने अपने 8,500 से अधिक जवानों, 10,000 से ज्यादा सिविल डिफेंस कर्मियों और 2 लाख 20 हजार से अधिक वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का भागीरथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में 10,500 से अधिक नाविकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि कम्युनिटी बेस्ड आपदा रिस्पॉन्स को मजबूत करने के लिए आपदा मित्रों की टोली हर खतरे का मुकाबला करने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है। आपदा के कहर से जानमाल का नुकसान न्यूनतम करने के विषय को प्रधानमंत्री मोदी जी ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में एक थ्योरी के रूप में स्थापित किया है। बीते 12 साल में आपदा से बचाव सिर्फ एक सिस्टम नहीं बल्कि इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर भारत सरकार तक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक हर जगह एक साथ एक उद्देश्य के लिए काम करने का एक नया तरीका भारत सरकार ने अपनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में कई भीषण प्राकृतिक आपदाएं आई। ओडिशा के सुपर साइक्लोन, गुजरात के भूकंप और हिंद महासागर की सुनामी ने देश के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं के कारण देश में एक मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया गया। आपदा प्रबंधन अधिनियम भी आया। NDMA और NDRF का भी गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब 16 बटालियनों के साथ NDRF एक सशक्त बल बन चुका है। NDRF ने अपनी कार्यपद्धति से SDRF की ट्रेनिंग और SDRF के साथ साझा अभियानों से अपनी शक्ति बढ़ाया है। प्रोएक्टिव डिप्लॉयमेंट और प्रीपोजिशनिंग जैसे उपाय हमें नुकसान से बचाने में कारगर साबित हो चुके हैं। श्री शाह ने कहा कि 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ NDRF के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी। बाद में ऐसी कई आपदाएं आई, जैसे – धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली के फ्लड्स, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह। वहीं, अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश, सबरीमाला यात्रा, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजनों में NDRF ने बहुत अच्छे तरीके से समाज के साथ मिलकर काम किया।

गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है। इसके माध्यम से रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन, और गाइडलाइंस के निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है। श्री शाह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत आज निर्विवाद रूप से एक ग्लोबल लीडर और फर्स्ट रिस्पॉंडर के रूप में उभरा है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारते हुए इसे धरातल पर लागू किया गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी की प्रेरणा से ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया है। CDRI के आज 48 देश सदस्य बन चुके हैं और भारत के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने देशभर के सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि 2021 से अब तक CAPFs के सभी जवानों ने देशभर में 7 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह समस्त CAPFs के मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।