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रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्री किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करें

दिल्ली /सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल, 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बैठक के दौरान, संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्र की रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-विरोधी उपायों और एससीओ सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति के कारण उत्पन्न भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस वर्ष की एससीओ बैठक हो रही है। यह संगठन, जो क्षेत्र के सबसे प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक मंचों में से एक है, मौजूदा संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए संभावित उपायों पर विमर्श कर सकता है।

इस बैठक में रक्षा मंत्री वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के वर्तमान परिदृश्य में भारत की वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा करेंगे। साथ ही, आतंकवाद और चरमपंथ के प्रति भारत के सख्त और शून्य सहिष्णुता वाले दृष्टिकोण को भी रेखांकित करेंगे। बैठक के दौरान, राजनाथ सिंह कुछ भागीदार देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी कर सकते हैं।

एससीओ एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को शंघाई में हुई थी। इसके सदस्यों में भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। भारत वर्ष 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना और वर्ष 2023 में इसकी अध्यक्षता संभाली।

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पीके/केसी/बीयू/एसएस

(रिलीज़ आईडी: 2255806) आगंतुक पटल : 117

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होर्मुज खुलवाए बिना युद्ध खत्म करने के इच्छुक हैं ट्रंप: वॉल स्ट्रीट जर्नल

वाशिंगटन, 31 मार्च (भाषा) अमेरिकी समाचार पत्र द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रशासनिक अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य मोटे तौर पर बंद रहने की सूरत में भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने के लिए तैयार हैं, जो बाद में किसी और समय फिर से शुरू किया जा सकता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के अनुसार हालिया दिनों में ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा यह अनुमान लगाया है कि जलडमरुमध्य को जबरन खुलवाने के लिए एक अभियान चलाने से संघर्ष ट्रंप की निर्धारित समयसीमा, यानी चार-छह सप्ताह से आगे बढ़ जाएगा।

खबर के अनुसार ट्रंप ने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नौसेना को कमजोर करने और उसके मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचाने जैसे अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने के बाद मौजूदा सैन्य संघर्ष को धीरे-धीरे समाप्त करना चाहिए, और साथ ही तेहरान पर कूटनीतिक दबाव डालकर व्यापार के मुक्त प्रवाह को फिर से शुरू करने के लिए मजबूर करना चाहिए।

खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अगर यह प्रयास विफल रहता है, तो अमेरिका यूरोप और खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगियों पर दबाव डालेगा कि वे जलडमरूमध्य को फिर खुलवाने के लिए आगे आएं।

सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति और पेंटागन प्रमुख ने हमेशा सैन्य अभियान के लिए चार से छह सप्ताह की अनुमानित समयसीमा बताई है।

उन्होंने कहा, “आज 30 दिन हो गए हैं।”

लेविट ने यह संकेत भी दिया कि अरब देशों से भी ईरान में जारी सैन्य अभियान का बोझ साझा करने के लिए कहा जा सकता है।

जब यह पूछा गया कि क्या कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को ईरान में जारी सैन्य अभियान का खर्च उठाना चाहिए तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह ऐसा मुद्दा है जिसमें राष्ट्रपति काफी रुचि ले सकते हैं। मैं इस पर उनसे पहले कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन निश्चित रूप से यह एक विचार है और मुझे लगता है कि वह इस बारे में आपको ज्यादा जानकारी दे पाएंगे।”

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था, जिसके बाद ईरान ने पलटवार किया और पूरे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष फैल गया। होर्मुज जलडमरुमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग है।

होर्मुज जलडमरुमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फिलहाल काफी हद तक बंद है। इसके कारण रोजाना गुजरने वाले सैकड़ों जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।