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2 किलो हेरोइन के साथ SHO गिरफ्तार, पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आई थी नशे की खेप

अमृतसर: पंजाब पुलिस ने अमृतसर के भिंडी सैदां थाने में तैनात SHO शशपाल सिंह को 2 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन की एक खेप आई थी, जिसे SHO ने बरामद तो किया लेकिन उसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के बजाय खुद के पास रख लिया।

पुलिस की कार्रवाई और रिमांड: जैसे ही पुलिस के उच्चाधिकारियों को इस बात की भनक लगी कि SHO ने हेरोइन को खुर्द-बुर्द कर दिया है, तुरंत जांच शुरू की गई। जांच में दोषी पाए जाने पर एसएसपी सोहेल मीर ने शशपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सोमवार को आरोपी को अजनाला कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

थाने का पिछला रिकॉर्ड: गौरतलब है कि यह वही भिंडी सैदां थाना है जहाँ 30 मार्च को ग्रेनेड अटैक हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी बाद में खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी (KLA) ने ली थी। पुलिस अब इस मामले में गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…27-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन राजनीतिक उठापटक और प्रशासनिक कार्रवाइयों के नाम रहा। जहाँ एक ओर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के मामले में घिरे सस्पेंड DIG के ठिकानों पर छापेमारी कर हड़कंप मचा दिया, वहीं दूसरी ओर ‘आम आदमी पार्टी’ के 7 सांसदों के आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है।

इसके अलावा, कनाडा में एक बुजुर्ग सिख के साथ हुई बदसलूकी और पंजाब में जल्द होने वाले नगर निगम चुनावों की सुगबुगाहट ने भी दिनभर सुर्खियां बटोरीं।आइए, विस्तार से जानते हैं पंजाब और चंडीगढ़ की आज की 10 बड़ी और चुनिंदा खबरें…

सस्पेंड DIG पर ED की बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद पंजाब पुलिस के सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर के 11 ठिकानों पर ED ने छापेमारी की है। जांच के दौरान एक गाड़ी से बैग और दस्तावेज बरामद किए गए हैं और उनकी बेनामी संपत्तियों की जांच की जा रही है।

राघव चड्ढा का AAP पर प्रहार: भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब चंद भ्रष्ट और ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ लोगों की पार्टी बन गई है। इसी बीच राज्यसभा ने AAP के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

कनाडा में बुजुर्ग सिख से बदसलूकी पर माफी: कनाडा में एक बुजुर्ग सिख को धक्का देने वाले युवक को भारतीय मूल के युवाओं ने ढूंढ निकाला और उससे घुटनों के बल बैठकर माफी मंगवाई।, आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उसे अपने व्यवहार पर दुख है।

चंडीगढ़ में फर्जी इंस्पेक्टर की तलाश: चंडीगढ़ पुलिस एक ऐसे फर्जी नगर निगम इंस्पेक्टर की तलाश कर रही है जो वेंडर लाइसेंस बनाने के नाम पर लोगों से 5-6 हजार रुपए वसूल रहा है। SSP ने इस मामले की जांच के लिए DSP को जिम्मेदारी सौंपी है।

9 नगर निगमों में चुनाव की तारीख: पंजाब के 9 नगर निगमों (जैसे मोहाली, बठिंडा, पठानकोट) में चुनाव 24 मई को होने की संभावना है। इस बार चुनावों में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।

पटियाला में पिता ने की बेटी की हत्या: राजपुरा में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को वापस बुलाने के लिए अपनी 12 साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी और चुपचाप उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

पंजाब में बिजली संकट: पंजाब के लोगों को अगले 3 दिनों तक बिजली कटौती झेलनी पड़ सकती है। बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि अचानक मांग बढ़ने से यह किल्लत हुई है, जो 1 मई से ठीक हो जाएगी।

मात्र 30 रुपए के लिए हत्या: कपूरथला के नडाला में 30 रुपए के मामूली विवाद के चलते एक 22 वर्षीय युवक सूरज कुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कनाडा में पंजाबी युवती की संदिग्ध मौत: पंजाब के अहमदगढ़ की 29 वर्षीय प्रतिभा की कनाडा के ब्रैम्पटन में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका शव घर की सीढ़ियों पर मिला और अब परिजन भारत सरकार से शव वापस लाने की मदद मांग रहे हैं।

शादी के मंडप से फरार हुआ दूल्हा: फाजिल्का के जलालाबाद में एक युवक अपनी दूसरी शादी कर रहा था, तभी उसकी पहली पत्नी वहां पहुंच गई। हंगामा बढ़ते देख दूल्हा दीवार फांदकर फरार हो गया।

भारत–न्यूजीलैंड ने नए आर्थिक संघ की शुरुआत की दोनों देशों के लोगों के लिए एक लाभकारी समझौता: राजेश अग्रवाल    

दिल्ली/सत्ता संदेश

आधुनिक आर्थिक इतिहास के अधिकाँश समय के लिए व्यापार का तर्क सरल था: तुलनात्मक लाभ। यह प्रणाली काम करती थी – जब तक कि यह समझौता नहीं हुआ था। हाल के वर्षों में, भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के साथ, व्यापार समझौतों की संरचना का फिर से निर्माण किया जा रहा है। समान विचारधारा वाले लोकतंत्रों के लिए, सवाल अब यह नहीं है कि एकीकृत होना चाहिए या नहीं, बल्कि यह कि कितना गहराई से और कितनी तेजी से एकीकृत होना चाहिए। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की अपनी महत्वाकांक्षा की ओर आगे बढ़ रहा है।  देश ने पूर्व —इस बार भारत-प्रशांत क्षेत्र — की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया है। भारत ऐसे साझेदारों की तलाश में है, जो आर्थिक एकीकरण और अपने नागरिकों की समृद्धि के लिए इसके दृष्टिकोण को साझा करते हैं। न्यूजीलैंड के रूप में, भारत को बिल्कुल ऐसा ही देश मिला।

यह रिश्ता लंबे समय से बन रहा था और पहली नज़र में इसका विस्तार व्यापार से आगे तक है। लगभग 3,00,000 भारतीय मूल के लोग न्यूज़ीलैंड में रहते हैं, जो इसकी आबादी का लगभग 5 प्रतिशत हैं— ये एक ऐसे सेतु का निर्माण करते हैं, जो उतना ही सांस्कृतिक है, जितना कि आर्थिक। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्त वर्ष 2024–25 में 1.3 बिलियन डॉलर पहुंच गया और पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी — यह आंकड़ा तेज वृद्धि का संकेत देता है। सेवा व्यापार भी 13 प्रतिशत बढ़ गया है। दो क्रिकेट राष्ट्रों का एक साथ आना, न केवल रोमांचक है, बल्कि पहले से चल रही साझेदारी को भी रेखांकित करता है।

प्रतिस्पर्धी निर्माण केंद्रों के बीच व्यापार समझौतों के विपरीत, इस साझेदारी की ताकत इसकी पूरक भूमिका में निहित है। भारत पैमाने की पेशकश करता है: 1.4 अरब लोग, एक उभरता हुआ मध्यम वर्ग और एक विश्वस्तरीय डिजिटल और सेवा अवसंरचना। न्यूजीलैंड विशेषज्ञता की पेशकश करता है: उच्च-तकनीक कृषि, सतत वानिकी और विशिष्ट निर्माण तकनीक। दोनों देशों की पूरक भूमिका ही इस साझेदारी की नींव है।

बेहतर बाजार पहुंच:

एफटीए स्पष्टता और आकर्षक विशेषताओं के साथ संतुलन स्थापित करता है। भारत ने संवेदनशील उत्पादों को बाहर रखा है, जैसे डेयरी, अधिकांश पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, कृत्रिम शहद, वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, तांबा और एल्युमिनियम के सामान। शत-प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शुल्क हटा दिए गये हैं, जिससे निरंतर मौजूद बाधा समाप्त हो गयी है: यह बाधा प्रमुख शुल्क लाइनों पर 10 प्रतिशत तक के शुल्क के रूप में मौजूद थी। यह प्रगति श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, सिरामिक और कालीन तथा उच्च-वृद्धि वाले वाहन और इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए तत्काल प्रतिस्पर्धा आधारित प्रोत्साहन प्रदान करती है। भारत का वस्त्र और परिधान निर्यात, जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है, अब न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश कर रहा है, जो लगभग 1.9 बिलियन डॉलर मूल्य के ऐसे सामानों का वार्षिक आयात करता है और शून्य-शुल्क पहुँच की सुविधा देता है। इंजीनियरिंग निर्यात, जो दुनिया भर में 110 बिलियन डॉलर से भी अधिक हो गया है, अब ऐसे बाज़ार में भी वैसी ही गति पकड़ रहा है, जो 11 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग उत्पाद आयात करता है। चमड़ा, दवाएँ, समुद्री उत्पाद और प्लास्टिक—ये सभी क्षेत्र जो पहले टैरिफ़ की वजह से बाधित थे—अब आगे बढ़ने और फलने-फूलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।   

भारत-प्रशांत क्षेत्र में विविधीकरण और विस्तार: 

यह समझौता दोनों देशों को उनके पारंपरिक बाजारों से हटकर अपने व्यापार में विविधता लाने में मदद करता है। एक ओर, यह भारत को न्यूजीलैंड—जो संसाधनों से समृद्ध एक विकसित अर्थव्यवस्था है—में शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्रदान करता है; वहीं दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए यह न केवल दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले भारतीय बाजार, जहाँ 1.46 अरब लोग रहते हैं, के द्वार खोलता है, बल्कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था तक भी पहुंच सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, यह न्यूजीलैंड को चीन पर अपनी निर्यात निर्भरता कम करने में मदद करता है—क्योंकि उसके कुल माल निर्यात का 28% से अधिक हिस्सा चीन जाता है—और साथ ही इसकी आयात आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुदृढ़ता लाने में भी सहायक सिद्ध होता है। अब भारत की पहुंच केवल किसी एक विकसित अर्थव्यवस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहुंच दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के एक व्यापक क्षेत्रीय इकोसिस्टम तक हो गई है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अधिक निश्चितता और बड़े पैमाने पर अपना परिचालन करना कहीं अधिक आसान हो गया है। यह बाज़ार तक पहुँच में बिखराव को कम करता है और उन व्यवसायों के लिए एक सुगम मार्ग तैयार करता है, जो प्रशांत क्षेत्र में अपना विस्तार करना चाहते हैं।  

भारत में व्यापार-आधारित विकास कई विकल्प देता है। देश के स्तर पर, भारत-न्यूज़ीलैंड एफटीए से व्यापक और संरचना निहित लाभ मिलने की उम्मीद है, जो भारत के निर्यात आधार के भौगोलिक रूप से व्यापक और क्षेत्रीय रूप से विशिष्ट स्वरूप को प्रतिबिंबित करता है। गुजरात के रसायन और रत्न, महाराष्ट्र की दवाएं और वाहन कल-पुर्ज़े, तमिलनाडु के वस्त्र, उत्तर प्रदेश के चमड़े और हस्तशिल्प, पंजाब के कृषि-आधारित उत्पाद, कर्नाटक की दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा पश्चिम बंगाल की चाय और इंजीनियरिंग सामान—ये सभी बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धा से लाभ प्राप्त करने की स्थिति में हैं। आंध्र प्रदेश और केरल जैसी तटीय अर्थव्यवस्थाओं को समुद्री निर्यात में बेहतर मूल्य प्राप्ति होगी, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र को चाय, मसाले, बांस और जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार पहुँच मिल सकती है। अब निर्यात में और विविधता लायी जा सकती है।

सौभाग्य से, व्यापार दोनों तरफ से होता है। भारत ने अपनी 70.03% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ में ढील दी है, जबकि 29.97% टैरिफ लाइनों को छूट से बाहर रखा है; इसमें न्यूज़ीलैंड के साथ मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार के 95% मूल्य को शामिल किया गया है। उद्योग के लिए हमारे मुख्य इनपुट पर तुरंत ड्यूटी खत्म कर दी गई है। लकड़ी और लकड़ी के गूदे जैसे आयात से कागज़, पैकेजिंग, फ़र्नीचर और निर्माण क्षेत्रों को मदद मिलेगी। यह समझौता ऊन, और लौह व अलौह पदार्थों के कचरे और स्क्रैप तक पहुँच को भी बेहतर बनाता है, जिससे घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी। ये विनिर्माण को बढ़ावा देने वाले कारक हैं। इनकी लागत कम करके, यह समझौता एक महत्वपूर्ण काम करता है: यह भारतीय विनिर्माण के प्रतिस्पर्धा आधार को बदल देता है।

न्यूज़ीलैंड के लिए, हिसाब-किताब अलग है। भारत का मतलब है बड़ा पैमाना—विविधीकरण की रणनीति में एक ज़रूरी कड़ी, जो इतने बड़े मौके देती है कि कुछ ही देश उसकी बराबरी कर सकते हैं। 422 अरब डॉलर से ज़्यादा के विदेशी निवेश के साथ, न्यूज़ीलैंड की वैश्विक मौजूदगी पहले से ही काफी बड़ी है। भारत सिर्फ़ एक बाज़ार ही नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीक और मानव संसाधन के क्षेत्र में भी साझेदारी का अवसर देता है। 20 अरब डॉलर के निवेश के वादे के साथ, इस रिश्ते का दीर्घावधि रणनीतिक स्वरूप है—एक ऐसा स्वरूप जो रोज़गार पैदा करने, क्षमताओं को मजबूत करने और लेन-देन वाले जुड़ाव से आगे बढ़कर एक ऐसी साझेदारी में विकसित होने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है जो स्थायी, अंतर्निहित और लंबे समय तक चलने वाली हो।

वस्तु व्यापार से आगे का एफटीए

शायद इस साझेदारी का सबसे अहम पहलू इसकी बुनियादी बातों पर वापसी है: कृषि। कृषि तकनीक एक मुख्य स्तंभ के तौर पर उभरती है। यह समझौता एक ‘कृषि उत्पादकता साझेदारी’ की रूपरेखा तैयार करता है, जो ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में आगे बढ़ती है। प्रशीतन-श्रृंखला लॉजिस्टिक्स, सटीक खेती और कटाई के बाद के प्रबंधन में न्यूज़ीलैंड की विशेषज्ञता, पैदावार बढ़ाने और बर्बादी कम करने की भारत की ज़रूरत के अनुरूप है। कीवी फल, सेब और शहद के लिए कार्य योजनाएँ तथा उत्पादकों के लिए ‘उत्कृष्टता केंद्र’ और तकनीकी सहायता, बाज़ार तक पहुँच के साथ के साथ जोड़ी गई हैं। सेब, कीवी फल और मानुका शहद जैसे उत्पादों का आयात टैरिफ़ दर कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी समय-सीमा के ज़रिए नियंत्रित किया गया है—ये ऐसे तंत्र हैं जिन्हें उपभोक्ता की पसंद और घरेलू सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी बनावट बहुत सोच-समझकर, लगभग सर्जिकल सटीकता के साथ तैयार की गई है।

सेवाओं के क्षेत्र में, यह समझौता एक नए क्षेत्र में कदम रखता है: प्रतिभा का संस्थागत रूप देना। आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों के कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 वीज़ा का एक समर्पित कोटा, अस्थायी आवाजाही के लिए एक व्यवस्थित मार्ग की सुविधा देता है। तीन साल तक वैध रहने वाले ये वीज़ा, न्यूज़ीलैंड में श्रम की अनुमानित कमी—जिसके 2045 तक 250,000 श्रमिकों तक पहुँचने का अनुमान है—को पूरा करने के साथ-साथ भारत के विशाल पेशेवर आधार का लाभ उठाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय रसोइयों और संगीत शिक्षकों को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है, जिससे कुशल पेशेवरों की आवाजाही की परिभाषा पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर और व्यापक हो गई है। 

छात्रों के आवागमन और पढ़ाई के बाद काम करने के वीज़ा से जुड़े प्रावधान, पढ़ाई के दौरान हर हफ़्ते 20 घंटे तक काम करने के अधिकार की गारंटी देते हैं और पढ़ाई के बाद वहाँ रहने की सुविधा देते  हैं – एसटीईएम स्नातकों के लिए तीन साल तक और डॉक्टर डिग्री के शोधार्थियों के लिए चार साल तक। इन प्रावधानों को एक संधि के दायरे में शामिल करके, उन्हें घरेलू नीति में होने वाले बदलावों की अस्थिरता से सुरक्षित रखा गया है।

पूर्वानुमान, सबसे पहले

यह समझौता एक ऐसी दुनिया में पूर्वानुमान को सुनिश्चित करने का एक प्रयास है, जहाँ ऐसा अवसर कम ही मिलता है।  

इस समझौते का दायरा इससे भी कहीं अधिक विस्तृत है: एमएसएमई में सहयोग; भौगोलिक संकेतकों के लिए यूरोपीय मानकों के अनुरूप बौद्धिक संपदा अधिकार; दवाओं की मंज़ूरी में तेज़ी लाना; और डिजिटल सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ—जिसमें खराब होने वाली वस्तुओं के लिए निकासी का समय घटकर मात्र 24 घंटे रह गया है। इन प्रावधानों को एक औपचारिक संधि में शामिल करके, यह एफटीए  व्यापक सहयोग और मानव पूंजी के विकास के लिए एक उत्प्रेरक का काम करता है। 27 अप्रैल 2026 को, दोनों देशों ने एक ऐसी साझेदारी को औपचारिक रूप दिया है, जो आने वाले दशकों तक उनके क्षेत्रीय जुड़ाव को आकार देगी।

व्यापार समझौतों की भाषा में, यह एक सफलता है। भू-राजनीति की भाषा में, यह एक ताल-मेल है।

(लेखक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव हैं) 

ट्राई ने देश में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के प्रसार के लिए परामर्श पत्र जारी किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज “देश में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के प्रसार” के लिए परामर्श पत्र जारी किया है।

इस परामर्श पत्र में मौजूदा नियामक ढांचे की समीक्षा की गई है, सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के प्रसार को प्रभावित करने वाली चुनौतियों की पहचान की गई है, और देश भर में सार्वजनिक वाई-फाई के बुनियादी ढांचे के प्रसार में तेजी लाने के उपायों पर हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं। परामर्श पत्र में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

  • अन्य देशों में सार्वजनिक वाई-फाई इकोसिस्टम का अवलोकन और अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से प्राप्त प्रमुख निष्कर्ष।
  • देश में सार्वजनिक वाई-फाई की वर्तमान स्थिति का आकलन, जिसमें नेटवर्क से जुड़े रुझान और मांग के पैटर्न शामिल हैं।
  • देश में सार्वजनिक वाई-फाई के प्रसार को प्रभावित करने वाली प्रमुख समस्याओं और चुनौतियों की पहचान।
  • ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी केंद्रों और अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर व्यवहार्य सार्वजनिक वाई-फाई मॉडल विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, टीएसपी/आईएसपी और निजी संस्थाओं जैसे प्रमुख हितधारकों की भूमिका का परीक्षण।
  • भारतीय सार्वजनिक वाई-फाई प्रणाली के अंतर्गत प्राधिकरण, प्रमाणीकरण, रोमिंग और बिलिंग प्रणालियों से संबंधित समस्याओं की जांच।
  • सार्वजनिक वाई-फाई की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त संभावित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजस्व मॉडलों का विश्लेषण।

परामर्श पत्र ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। हितधारकों से परामर्श पत्र पर लिखित टिप्पणियां 25 मई 2026 तक और यदि कोई प्रति-टिप्पणी हो तो 8 जून 2026 तक आमंत्रित की गई हैं।

टिप्पणियां advbbpa@trai.gov.in पर भेजी जा सकती हैं, जिसकी एक प्रति jtadvbbpa-1@trai.gov.in पर भी भेजी जानी चाहिए। किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए, ट्राई के सलाहकार (ब्रॉडबैंड और नीति विश्लेषण) डॉ. अब्दुल कयूम से +91-11 20907757 पर संपर्क किया जा सकता है।

रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्री किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करें

दिल्ली /सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल, 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बैठक के दौरान, संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्र की रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-विरोधी उपायों और एससीओ सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति के कारण उत्पन्न भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस वर्ष की एससीओ बैठक हो रही है। यह संगठन, जो क्षेत्र के सबसे प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक मंचों में से एक है, मौजूदा संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए संभावित उपायों पर विमर्श कर सकता है।

इस बैठक में रक्षा मंत्री वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के वर्तमान परिदृश्य में भारत की वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता पर चर्चा करेंगे। साथ ही, आतंकवाद और चरमपंथ के प्रति भारत के सख्त और शून्य सहिष्णुता वाले दृष्टिकोण को भी रेखांकित करेंगे। बैठक के दौरान, राजनाथ सिंह कुछ भागीदार देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी कर सकते हैं।

एससीओ एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को शंघाई में हुई थी। इसके सदस्यों में भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। भारत वर्ष 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना और वर्ष 2023 में इसकी अध्यक्षता संभाली।

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पीके/केसी/बीयू/एसएस

(रिलीज़ आईडी: 2255806) आगंतुक पटल : 117

इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English Urdu Marathi Gujarati

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सस्पेंड DIG भुल्लर पर ED का शिकंजा: चंडीगढ़ समेत 11 ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा

पंजाब डेस्क : भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं,। सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत भुल्लर और उनके सहयोगियों से जुड़े 11 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह छापेमारी चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य बेनामी संपत्तियों और अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता लगाना है।

सीबीआई की जांच में मिला था कुबेर का खजाना : इससे पहले सीबीआई (CBI) द्वारा की गई छापेमारी में भुल्लर के ठिकानों से चौंकाने वाली बरामदगी हुई थी। जांच एजेंसी को लगभग ₹7.36 करोड़ कैश, 2.5 किलो सोना, और ₹2.32 करोड़ के चांदी के आभूषण मिले थे। इसके अलावा, उनके पास से 26 लग्जरी घड़ियां (रोलेक्स और राडो), मर्सिडीज और ऑडी जैसी कारें, और 108 विदेशी शराब की बोतलें बरामद की गई थीं। दस्तावेजों के अनुसार, उनके परिवार के नाम पर 50 से अधिक अचल संपत्तियां दर्ज हैं।

क्या है पूरा मामला? डीआईजी भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को एक कबाड़ कारोबारी से 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और 5 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया है। फिलहाल वे चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। हाल ही में, 10 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद : चंडीगढ़ की विशेष अदालत ने सीबीआई को अन्य अज्ञात लोक सेवकों और बिचौलियों के खिलाफ नई जांच की अनुमति दे दी है। जांच के दौरान मिली एक डायरी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से संकेत मिले हैं कि पंजाब के कई अन्य वरिष्ठ आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारी भी इस संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

अमृतपाल सिंह होंगे CM चेहरा, 2 डिप्टी CM बनाने का ऐलान: अकाली दल वारिस पंजाब दे

लुधियाना/सत्ता संदेश

अकाली दल “वारिस पंजाब दे” की ओर से सांसद भाई अमृतपाल सिंह को वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा और दो उपमुख्यमंत्री भी बनाए जाएंगे। यह घोषणा पार्टी के सरपरस्त बापू तरसेम सिंह ने लुधियाना में आयोजित विशाल पंथक एकत्रता को संबोधित करते हुए की।

आज पार्टी को लुधियाना में भारी समर्थन मिला, जब बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ लुधियाना के मुंडियां कला, 33 फुटा रोड पर एक विशाल पंथक एकत्रता का आयोजन किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुरप्रीत सिंह सोनू द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के सरपरस्त बापू तरसेम सिंह मुख्य अतिथि रहे। भारी भीड़ यह संकेत दे रही थी कि राज्य के लोग 2027 विधानसभा चुनावों में एक पंथक सरकार चाहते हैं।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए, बापू तरसेम सिंह ने कहा कि भाई अमृतपाल सिंह पार्टी की ओर से विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, जो हिंदू और दलित समुदाय से होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी समाज के सभी वर्गों की भागीदारी में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे, गैंगस्टरवाद, लूटपाट और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए अकाली दल “वारिस पंजाब दे” को सत्ता में लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोग सांसद भाई अमृतपाल सिंह की अगुवाई में राज्य में अगली सरकार बनते देखना चाहते हैं।

इस दौरान उन्होंने लोकलुभावने वादे करके सत्ता में आने वाली पार्टियों पर भी तंज कसते हुए कहा कि अब लोगों का उनसे मोहभंग हो चुका है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक गुरप्रीत सिंह सोनू और स्थानीय नेतृत्व की भी सराहना की।

वहीं पर, अपने संबोधन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं परमजीत सिंह जौहल, प्रिथीपाल सिंह बटाला, राजीव कुमार लवली, संदीप सिंह रुपालों और गुरप्रीत सिंह सोनू आदि ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों की भीड़ साफ तौर पर दिखा रही है कि 2027 विधानसभा चुनावों में पंजाब में पंथक पार्टी की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि लोग भाई अमृतपाल सिंह को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, जिन्होंने नशे की गंभीर समस्या समेत अन्य सामाजिक मुद्दों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। इसी कारण बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें वोट देकर सांसद बनाया। उन्होंने कहा कि सरकारों की कोशिशों के बावजूद लोगों का अकाली दल “वारिस पंजाब दे” के प्रति समर्थन लगातार बढ़ रहा है।

इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा, एडवोकेट इंदरजीत सिंह, जसबीर सिंह लुधियाना, शुभम शर्मा, जसवंत सिंह चीमा, रोशन सिंह सागर, संदीप रुपालो, सुरजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, परमिंदर सिंह, कमलजीत सिंह, जुगराज सिंह, नरेंद्र सिंह, मनजिंदर पाल सिंह, गुरलाल सिंह, लखविंदर सिंह, जगरूप सिंह, किरपाल सिंह, प्रगट सिंह और अवतार सिंह भी मौजूद रहे।

राष्ट्रीय चिंतन शिविर संपन्न: डॉ. वीरेंद्र कुमार बोले—2047 तक समावेशी विकसित भारत के लिए ठोस रोडमैप तैयार

दिल्ली/सत्ता संदेश

  1. चंडीगढ़ में सामाजिक न्याय पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर समयबद्ध रूपरेखा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें वर्ष 2047 तक अंत्योदय से प्रेरित विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया गया
  2. छात्रवृत्ति से लेकर सुलभता और ट्रांसजेंडर कल्याण तक, इस चिंतन शिविर का ध्यान केवल नीतिगत इरादों पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित रहा: केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार
  3. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अंत्योदय से आत्मनिर्भरता, जागरूकता-पहचान-एकीकरण, आर्थिक सशक्तिकरण, सुलभता और दिव्यांगजनों के प्रमाणीकरण पर कार्रवाई योग्य सिफारिशें स्वीकार कीं
  4. जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों को शामिल करने, एसईईडी योजना को मजबूत करने, अनुसूचित जाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए व्यापक समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया
  5. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सामाजिक न्याय विभाग (डीओएसजेई) योजनाओं में “जागरूकता से सुगमता” और प्रक्रियाओं के सरलीकरण के लिए ठोस उपायों पर सहमति व्यक्त की
  6. तीन दिवसीय शिविर ने सामाजिक न्याय वितरण में कल्याणकारी इरादों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों की ओर बढ़ने के साझा संकल्प को मजबूत किया

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीयराष्ट्रीय चिंतन शिविर आज चंडीगढ़ में संपन्न हो गया। राज्योंऔर केंद्र शासित प्रदेशों ने “अंत्योदय का संकल्प, अमृतकाल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” विषय केअनुरूप सामाजिक न्याय योजनाओं के देश के प्रत्येक क्षेत्रतक प्रभावी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए समयबद्धऔर व्यावहारिक अनुशंसाओं के एक समूह पर सहमति व्यक्तकी। 24 से 26 अप्रैल 2026 तक तीन दिनों तक आयोजितइस शिविर की शुरुआत दृष्टि, गरिमा और सुलभता परकेंद्रित सत्र से हुई, जिसके बाद दूसरे और तीसरे दिनविषयवार गहन विचार-विमर्श हुआ। समापन सत्र में प्राप्तपरिणामों को एक दूरदर्शी रूपरेखा में समेकित किया गया।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्रकुमार ने अपने समापन भाषण में कहा कि तीन दिवसीयराष्ट्रीय चिंतन शिविर ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशोंको इस बात पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने के लिएएक गंभीर और परिणाम के अनुकूल मंच प्रदान किया किसामाजिक न्याय के कार्यान्वयन को कैसे अधिक सुलभ, उत्तरदायी और कार्यान्वयन के अनुकूल बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श “अंत्योदय का संकल्प, अमृतकाल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” के व्यापकराष्ट्रीय संकल्प पर आधारित था। उन्होंने इस बात की पुष्टिकी कि सामाजिक न्याय का आधार कतार में खड़े प्रत्येकव्यक्ति के लिए भी गरिमा, सुलभता और निरंतरता होनाचाहिए।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि शिविर के दौरान हुई चर्चाएँव्यापक नीतिगत उद्देश्यों से आगे जाकर छात्रवृत्ति वितरण, नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सुलभता, दिव्यांगजनोंके लिए प्रमाणन और कमजोर समुदायों के लिएसमावेशन-आधारित सहायता प्रणालियों जैसे क्षेत्रों मेंव्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित थीं। उद्घाटन सत्र के दौरानशुरू किए गए प्लेटफार्म और अनुप्रयोगों सहित मंत्रालय कीवर्तमान में जारी डिजिटल और संस्थागत पहलों का उल्लेखकरते हुए, उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ पात्रलाभार्थियों तक बिना किसी देरी के पहुँचें। डॉ. वीरेंद्र कुमार नेयह सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम सुशासन, प्रक्रिया सरलीकरण, बेहतर निगरानी और केंद्र तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मजबूत समन्वय के महत्व परबल दिया।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विषयगत भोज, सत्रऔर समूह प्रस्तुतियों से प्राप्त सिफारिशें सामाजिक न्यायक्षेत्र में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने मेंसहायक होंगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ घनिष्ठ साझेदारी में चिंतन शिविर केपरिणामों को आगे बढ़ाएगा, जिसमें समाज के गरीब, वंचितऔर कमजोर वर्गों के लिए समावेशन, सशक्तिकरण औरजमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों पर निरंतर ध्यान दिया जाएगा।

तीसरे दिन की शुरुआत भी योग सत्र से हुई, जिसके बाद”जागरूकता से सुलभता – सामाजिक न्याय कार्यक्रम केअंतर्गत सुलभता के प्रति जागरूकता” विषय पर नाश्ते काआयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने योजना-केंद्रितसोच से हटकर अधिकार-आधारित, सार्वभौमिक डिजाइनदृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर चर्चा की, जोसुलभता को सभी सार्वजनिक अवसंरचनाओं, सेवाओं औरडिजिटल प्लेटफार्म का अभिन्न अंग मानता है। राज्यों औरकेंद्र शासित प्रदेशों ने निरंतर जागरूकता, इंजीनियरों औरवास्तुकारों की क्षमता विकास, प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोगऔर निर्मित वातावरण, परिवहन, सूचना एवं संचारप्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवाओं को विकलांग व्यक्तियोंसहित सभी के लिए सुलभ बनाने में स्थानीय निकायों कीमजबूत भूमिका के महत्व पर बल दिया।

सुबह के सत्र में, पाँच विषयगत समूहों ने विकसित भारत @ 2047 ढांचे के अंतर्गत विस्तृत चर्चा और प्रस्तुति के लिएअपने दूसरे विषय-समूहों पर विचार-विमर्श किया।

समूह I ने “अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: क्षेत्र-आधारितहस्तक्षेपों के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजीलाना” विषय पर ध्यान केंद्रित किया और पीएम-अजय केअंतर्गत अनुकूलन, ग्राम विकास योजनाएँ, अनुसूचित जातिसमुदायों के लिए कौशल विकास और आजीविका सहायता, तथा ग्राम, जिला और राज्य स्तर पर परिणाम-उन्मुख निगरानीकी आवश्यकता जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

समूह II ने “समावेश, पहचान और एकीकरण” विषय परविचार-विमर्श किया, जिसमें विशेष रूप से गैर-अधिसूचित, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियों (डीएनटीएस/एनटीएस/एसएनटीएस) के आर्थिक सशक्तिकरण के लिएएसईईडी योजना और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़ेसमुदायों के लिए सटीक गणना, प्रमाणीकरण औरसंवेदनशील प्रशासनिक पहुंच के महत्व पर ध्यान केंद्रितकिया गया।

समूह III ने “आर्थिक सशक्तिकरण: ऋण पहुंच और वित्तीयसशक्तिकरण का लोकतंत्रीकरण” विषय पर चर्चा की, जिसमें अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचितवर्गों के लिए ऋण, कौशल विकास, उद्यमिता सहायता औरवित्तीय समावेशन तक पहुंच में सुधार के तरीकों की जांच कीगई, जिसमें वर्तमान वित्तीय और आजीविका योजनाओं केसाथ बेहतर तालमेल भी शामिल है।

समूह IV ने “सुगमता से समावेश: पहुंच” विषय पर चर्चा की, जिसमें पहुंच संबंधी प्रस्तुतियों के आधार पर वर्ष 2027-28 तक अपरिवर्तनीय पहुंच मानकों, केंद्र सरकार के बाधा-मुक्तप्रयासों के अनुरूप राज्य स्तरीय योजनाओं, निर्धारितनिधियों, पैनल में शामिल पहुंच लेखा परीक्षकों औरव्यवस्थित क्षमता विकास की मांग की गई।

समूह V ने “पहचान से सम्मान: दिव्यांगजनों के लिएप्रमाणन” विषय पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें समय पर, प्रौद्योगिकी-आधारित दिव्यांगता प्रमाणन, लाभों तक सुगमपहुंच और विभागों के बीच डेटा के बेहतर एकीकरण कीआवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।

सभी समूहों में प्रतिभागियों ने जनगणना-2027 मेंदिव्यांगजन-प्रतिरोधी समुदायों को शामिल करने, एसईईडीयोजना के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने, पीएम-एजेएवाई औरअन्य एससी/ओबीसी कार्यक्रमों के अंतर्गत आजीविका औरसामाजिक सुरक्षा उपायों को बढ़ाने औरएसएमआईएलई-टीजी उप-योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडरव्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास जैसे विशिष्ट मुद्दों पर भी चर्चाकी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने दिव्यांगजन-प्रतिरोधीभूमि अधिकारों, छात्रवृत्ति वितरण, ट्रांसजेंडर कल्याण (जिसमेंगरिमा गृह, संरक्षण प्रकोष्ठ और कल्याण बोर्ड शामिल हैं), वरिष्ठ नागरिकों के लिए समुदाय-आधारित सहायता और पहुंच में नवाचारों पर सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता कीकहानियों को प्रस्तुत किया, ताकि इन्हें दोहराया औरविस्तारित किया जा सके।

“प्रक्रिया सरलीकरण (डीओएसजेई योजनाओं में प्रक्रियाओंका सरलीकरण)” विषय पर एक भोज का आयोजन कियागया, जिसमें प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, दस्तावेज़ीकरण कोसुव्यवस्थित करने, शिकायत निवारण को सुदृढ़ करने औरनिधि प्रवाह एवं उपयोग में सुधार के लिए ठोस कदमनिर्धारित किए गए। चर्चाओं में इस बात पर बल दिया गयाकि छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास सहायता, सुलभता अनुदान औरअन्य लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी देरी याप्रक्रियात्मक बाधाओं के पहुँचें, इसके लिए प्रक्रियासरलीकरण, डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्पष्ट समयसीमाएँआवश्यक हैं।

राष्ट्रीय चिंतन शिविर का समापन इस साझा सहमति के साथहुआ कि मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथघनिष्ठ साझेदारी में, संशोधित दिशा-निर्देशों, सुदृढ़ निगरानी, ​​व्यापक पहुँच और सतत क्षमता निर्माण के माध्यम सेविचार-विमर्श के परिणामों को एक सुव्यवस्थित तरीके सेआगे बढ़ाएगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम ने इस सामूहिकसंकल्प को और मजबूत किया है कि सामाजिक न्याय कोकेवल इरादों तक सीमित न रखकर, सबसे गरीब और सबसेकमजोर लोगों के जीवन में ठोस सुधार लाना चाहिए, जिससेवर्ष 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगतविकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में योगदान मिले।

24 घंटे में 3 देशों का दौरा: आखिर क्यों इतने ‘एक्टिव’ हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची?

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान, ओमान और रूस का ताबड़तोड़ दौरा कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अरागची की यह दौड़-भाग ऐसे समय में हो रही है जब होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद है और अमेरिका के साथ शांति वार्ता रुकी हुई है।

पाकिस्तान में ‘रेड लाइन’ और नया प्रस्ताव: अरागची ने रविवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने वहां एक ‘रेड लाइन’ (Red Line) दस्तावेज सौंपा, जिसमें परमाणु मुद्दे और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की स्पष्ट शर्तें और समाधान का एक नया प्लान शामिल है।

ओमान में सुरक्षा और टोल बूथ की चर्चा : इसके बाद वे ओमान पहुंचे, जहां सुल्तान हैथम बिन तारिक से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर चर्चा हुई। चर्चाओं के अनुसार, ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज में एक टोल बूथ बनाने पर विचार कर रहे हैं ताकि वहां से गुजरने वाले जहाजों से मिलने वाला पैसा साझा किया जा सके। ईरान को अंदेशा है कि अमेरिका ओमान में अपना बेस बना सकता है।

रूस में पुतिन से मुलाकात: ताजा जानकारी के अनुसार, अरागची सोमवार को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से होनी है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर चर्चा की जाएगी।

ईरान चाहता है जल्द समाधान : वर्तमान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रखी है। अरागची के ये लगातार दौरे बताते हैं कि ईरान इस तनावपूर्ण स्थिति का जल्द से जल्द समाधान चाहता है।

रिलीज से पहले कानूनी झमेले में फंसी इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’, पेमेंट विवाद के बाद अरेस्ट वारंट जारी

मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘आवारापन 2’ अपनी रिलीज से पहले ही बड़े कानूनी संकट में घिर गई है। खबरों के अनुसार, फिल्म की शूटिंग के दौरान थाईलैंड में स्थानीय क्रू और सर्विस प्रोवाइडर्स के पेमेंट का भुगतान न करने के कारण मामला अदालत तक पहुंच गया है।

क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट के मुताबिक, फिल्म की प्रोडक्शन टीम ने थाईलैंड में ली गई सेवाओं का बकाया पैसा नहीं चुकाया है। इस मामले में थाईलैंड की एक अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) भी जारी कर दिया है। वायरल पोस्ट में यह भी पूछा गया है कि क्या इस भुगतान विवाद के आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जा सकती है।

रिलीज की तारीख और स्टार कास्ट: यह फिल्म साल 2007 में आई सुपरहिट फिल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल है, जिसमें इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट 14 अगस्त 2026 तय की गई है। हालांकि, इस विवाद के कारण अब शूटिंग शेड्यूल और रिलीज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मेकर्स इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि फिल्म समय पर सिनेमाघरों में दस्तक दे सके।