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आखिरकार सुनी गई आधी आबादी की आवाज़
  • आर. विमला, आईएएस

नारी शक्ति वंदन अधिनियमऔर भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं का न्यायोचित स्थान’

जब महिलाएँ सशक्त होती हैं, तो भारत मजबूत होता है। घर की गरिमा से लेकर संसद में समान आवाज़ तक, यह एक नए और आत्मविश्वास से भरे भारत की परिकल्पना है।” प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

भारत की महिलाएँ सदैव महान कार्यों में सक्षम रही हैं। वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी ने बड़े-बड़े दार्शनिकों को निरुत्तर कर दिया था। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ने जिस न्यायपूर्ण तरीके से अपने राज्य का शासन चलाया, उसकी बराबरी उनके समकालीन शासक नहीं कर सके। रानी लक्ष्मीबाई साहस की एक अमर मिसाल बन गईं। फिर भी, स्वतंत्र भारत—जो समानता के सिद्धांत पर आधारित एक संवैधानिक गणराज्य है ने इन महान महिलाओं की उत्तराधिकारियों को अपनी विधायिकाओं में शायद ही कोई जगह दी। पहली लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या मात्र 4.4 प्रतिशत थी। सात दशक बाद, 17वीं लोकसभा में भी यह आंकड़ा बढ़कर केवल 14.4 प्रतिशत तक ही पहुँच पाया। व्यक्तिगत प्रतिभा ने तो अपनी जगह बना ली थी, लेकिन व्यवस्थागत बदलाव अभी भी नहीं आया था। असल में, महिलाएं अपने ही लोकतंत्र में एक तरह से ‘मेहमान’ बनकर ही रह गईं।

हमारे संविधान ने पहले ही दिन से यह स्वीकार किया था कि जब सदियों से ढांचागत विसंगतियां जड़ जमाए बैठी हों, तो केवल औपचारिक समानता पर्याप्त नहीं होती। ‘संरक्षणात्मक भेदभाव’ के सिद्धांत के तहत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और बाद में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गईं। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था सफल रही है: 24 मार्च 2026 तक, निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में से लगभग 49.75 प्रतिशत महिलाएँ हैं। जिन जगहों पर महिलाएँ शासन करती हैं, वहाँ पानी की आपूर्ति सुचारू होती है, साफ़-सफ़ाई की स्थिति बेहतर होती है और लड़कियाँ स्कूल जाना जारी रखती हैं। इसके बावजूद, संसद में भी इसी सिद्धांत को लागू करने के उद्देश्य से जो विधेयक पेश किए गए थे, वे राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में दशकों तक बार-बार निष्प्रभावी होते रहे।

वह क्षण जिसने सब कुछ बदल दिया –

वह अधूरी कड़ी 19 सितंबर 2023 को पूरी हुई। भारत के नए संसद भवन में आयोजित कामकाज के पहले ही सत्र में, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद के दोनों सदनों में, प्रत्येक राजनीतिक दल के सर्वसम्मत समर्थन से पारित किया गया। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विधेयक पेश करते हुए दोनों सदनों को बताया: “यह कानून केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक भारतीय महिला की शक्ति, त्याग और सामर्थ्य के प्रति एक श्रद्धांजलि है।”

यह अधिनियम लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-कोटा भी शामिल है। नए संसद भवन का यह पहला अधिनियम होना अपने आप में एक घोषणा थी: अमृत काल के लोकतंत्र की संरचना पूरे भारत के लिए और सभी की भागीदारी के साथ निर्मित की जाएगी।

इस अधिनियम में बदलाव लाने की अपार क्षमता है, क्योंकि इसके लागू होने से संसद में महिला सदस्यों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। महिला विधायक निरंतर स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं—ये वही क्षेत्र हैं, जहाँ भारत में लैंगिक असमानता सबसे अधिक है। एक ऐसी संसद, जिसमें एक-तिहाई सदस्य महिलाएँ होंगी, वह अलग तरह के प्रश्न पूछेगी और अलग तरह के विचार सुनेगी। इससे भारतीय लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार होगा, न कि केवल उसकी बाहरी छवि में।

गरिमा से लोकतंत्र तक की यात्रा

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह समझा है कि ज़मीनी स्तर पर सशक्तिकरण के बिना राजनीतिक सशक्तिकरण खोखला होता है। उनके द्वारा शुरू की गई यह यात्रा अत्यंत बुनियादी गरिमा से लेकर सर्वोच्च लोकतांत्रिक भागीदारी तक एक सुविचारित पथ पर आगे बढ़ती है। इसकी शुरुआत एक शौचालय से हुई। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए 10 करोड़ घरेलू शौचालयों ने उन महिलाओं को सुरक्षा और आत्म-सम्मान लौटाया, जिन्हें लंबे समय से इन दोनों से वंचित रखा गया था। जल जीवन मिशन ने 15 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण घरों तक नल का पानी पहुँचाया। महिलाओं को मीलों पैदल चलकर पानी ढो कर लाने से मुक्ति मिली जिससे उनका सुबह का कीमती समय जाया हो जाता था।

‘पीएम उज्ज्वला योजना’ के 10.56 करोड़ एलपीजी कनेक्शनों ने महिलाओं को धुएं से भरी रसोई से मुक्ति दिलाई। पीएम आवास योजना के तहत महिलाओं के नाम पर घर बनाए गए। 55 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के स्वामित्व वाले जन धन खातों ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान की। ‘मुद्रा’  योजना के ऋण, स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी, सखी, वन स्टॉप सेंटर और तीन तलाक का उन्मूलन: प्रत्येक योजना उसी सीढ़ी का अगला पायदान थी, जो उन्हें केवल गुज़ारा करने की स्थिति से गरिमा की ओर, गरिमा से सामर्थ्य की ओर, और सामर्थ्य से नेतृत्व की ओर निरंतर बढ़ाती गई।

आधुनिक भारत के लिए एक दृष्टिकोण –

भारत को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को तुरंत लागू करने की आवश्यकता है। यह हमारे दौर के सबसे अधिक परिवर्तनकारी संभावित सुधारों में से एक है। महिलाओं के विधायी प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर, यह हर स्तर पर नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी को बढ़ाएगा: चाहे वे बजट हों जो मातृ स्वास्थ्य के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, वे कानून हों जो पीड़ितों की रक्षा करते हैं, या वे नीतियां हों जो लड़कियों को स्कूल में बनाए रखती हैं और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ (2047 तक एक विकसित भारत) का दृष्टिकोण इस दृढ़ विश्वास पर आधारित है कि कोई भी राष्ट्र अपनी पूरी क्षमता तक तब तक नहीं पहुँच सकता, जब तक उसके आधे नागरिक उन जगहों से बाहर रहें जहाँ सत्ता का संचालन होता है। जैसा कि उन्होंने हमेशा कहा है: “भारत तभी एक विकसित राष्ट्र बनेगा जब इसकी महिलाएँ न केवल अपने घरों में, बल्कि अपनी संसद में भी पूरी तरह सशक्त होंगी।” नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय महिलाओं के लिए कुछ नया सृजन नहीं करता है। इसने उस विद्वत्ता, साहस और नेतृत्व करने की इच्छाशक्ति के लिए एक संस्थागत स्थान सुनिश्चित कर दिया है, जो महिलाओं में पहले से ही मौजूद है।

शौचालय की गरिमा से लेकर संसद में समान आवाज़ तक, यह मात्र एक विधायी यात्रा नहीं है। यह एक ऐसे राष्ट्र की कहानी है जिसने अंततः पूर्णता की ओर बढ़ने का निर्णय लिया है।

“आधी आबादी को आखिरकार सुना गया। नज़रिया साफ़ है। ये मुहीम जारी रहेगी।”

(लेखिका महाराष्ट्र सरकार में रेजिडेंट कमिश्नर एवं सचिव पद पर कार्यरत हैं और आईआईटी बॉम्बे से पीएचडी कर रही हैं)

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा ‘जे कॉम टेबल 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल’ का उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा जे कॉम टेबल 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल का शुभारंभ स्थानीय होटल महाराजा रिजेंसी में किया गया। यह पहल युवाओं के बिज़नेस, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

इस अवसर पर जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के अध्यक्ष एडवोकेट सिमरनप्रीत सिंह ने बताया कि जे कॉम लुधियाना 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल युवाओं में उद्यमिता कौशल विकसित करने के साथ-साथ उनके बीच नेटवर्किंग को मजबूत करेगा। इससे बिजनेसमैनों को अपने व्यवसाय में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य सभी को साथ लेकर तरक्की की दिशा में आगे बढ़ना है।

उन्होंने यह भी कहा कि जे सी आई लुधियाना सेंट्रल समय-समय पर अपने सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रयास करता रहा है और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा।

कार्यक्रम में जोन के चेयरमैन संजय शर्मा, जे कॉम नेशनल डायरेक्टर डॉ. राजीव अग्रवाल, हेड कोच महेश अरोड़ा, असिस्टेंट कोच परमजीत सिंह, जे कॉम टेबल 4.0 के चेयरमैन अमित गुलाटी, जे कॉम टेबल 1.0 के चेयरमैन दमनजीत सिंह, वाइस प्रेसिडेंट गुरप्रीत सिंह रियात, कुलजीत सिंह, आशीष चोपड़ा, तेजस्वी धीमान, रोहित जिंदल, एडवोकेट बलविंदर सिंह, राहुल भारद्वाज, नरेश कुमार शर्मा, जगप्रीत सिंह सहित टेबल 1.0 और 4.0 के सदस्य मौजूद रहे।

नए साल में नई आशा: एक भारत की भावना
  •  श्री सी. पी. राधाकृष्णन

मुझे अत्यंत हर्ष है कि मैं भारत और विश्वभर के सभी लोगों को बैसाखी, रोंगाली बिहू, महा बिषुबा पना संक्रांति, पोइला बोइशाख, विषु और तमिल पुथांडु के अवसर पर अपनी पारंपरिक नववर्ष की शुभकामनाएँ देता हूं, जो ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाते हैं। ये सभी शुभ अवसर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएं।

चिथिरई का महीना कृषि की तैयारियों का समय होता है। किसान अपनी ज़मीन को उपजाऊ बनाने के लिए उस पर काम करना शुरू कर देते हैं। चूंकि हमारे लोग मानते हैं कि मेहनत से ही प्रगति होती है, इसलिए वे श्रम की शुरुआत का जश्न मनाते हैं। पूरे देश में, हमें इसी तरह के उत्सव देखने को मिलते हैं, जो भारत में एकता और साझा संस्कृति के उदाहरण हैं।

उत्तर भारत में, विशेषकर पंजाब में, लोग बैसाखी को फसल उत्सव के रूप में मनाते हैं। दक्षिण में, केरल में विशु मनाया जाता है, जहां शुभ वस्तुओं (कानी) को देखना एक महत्वपूर्ण रिवाज है। असम में लोग बिहू मनाते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में पोइला बोइशाख को उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

इसी प्रकार मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में भी लोग इस अवधि को विभिन्न पारंपरिक रूपों में नववर्ष के रूप में मनाते हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु गंगा में पवित्र स्नान करने के लिए एकत्र होते हैं, जो इस अवसर की पवित्रता को दर्शाता है।

तेलुगु भाषी लोगों ने हाल ही में अपना नववर्ष उगादी के रूप में मनाया, जबकि मराठी और कोंकणी समुदाय अपना नववर्ष गुड़ी पड़वा के रूप में मनाते हैं। हम एक प्राचीन सभ्यता से संबंधित हैं, जिसका प्रमाण हमारे पूर्वजों के वैज्ञानिक ज्ञान से मिलता है। ब्रह्मांड के प्रति उनकी सटीक समझ इन नववर्ष उत्सवों में झलकती  है।

इसी प्रकार, तमिल नववर्ष एक अत्यंत विशेष अवसर है, जो हमारे पूर्वजों की बुद्धिमत्ता का उत्सव मनाता है। यह एक ऐसा पर्व है जो परंपरा, परिवार, आध्यात्मिकता और अनुशासित जीवन शैली को एक साथ जोड़ता है। यह एक नई शुरुआत का संकेत देता है और हमें पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए नई आशा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

आज हम वैश्विक कैलेंडर का पालन करते हैं, लेकिन हमें अपने तमिल कैलेंडर को भी याद रखना चाहिए, जो अपनी विशेषता के कारण केवल दिनों और महीनों को ही नहीं, बल्कि वर्षों को भी नाम देता है। ऐसे कुल 60 वर्ष-नाम होते हैं, और इस वर्ष का नाम “पराभव” है, जो इस चक्र का 40वां वर्ष है।

‘खगोल विज्ञान’शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है, जिसका अर्थ है तारों के नियमों का अध्ययन। तमिल में इसे “वाणियल” कहा जाता है। हजारों वर्ष पहले ही तमिल विद्वानों ने यह समझ लिया था कि पृथ्वी गोल है और उन्होंने खगोलीय पिंडों की गति तथा उनके प्रभाव का अध्ययन किया था।

प्राचीन तमिल साहित्य, जैसे कि पतिरुप्पट्टू, ब्रह्मांड की प्रकृति और गति का वर्णन करता है। श्लोकों में बताया गया है कि संसार पाँच तत्वों से बना है और आकाशीय शक्तियों से शासित है। सिरुपनरुप्पदई जैसी अन्य रचनाएं ग्रहों की गति का उल्लेख करती हैं।

संगम साहित्य में ग्रहों और तारों के संदर्भ मिलते हैं। उदाहरण के लिए, पुराणनुरु में शनि को काला (मैम्मीन) बताया गया है। आकाशीय प्रभावों के अध्ययन की परंपरा “कनियान” कहलाने वाले विद्वानों से जुड़ी थी। माना जाता है कि कवि कनियान पूंगुंद्रनार ने अपना नाम इसी परंपरा से लिया है। यहां तक ​​कि तोलकाप्पियम जैसे प्राचीन ग्रंथ भी ऐसे विद्वानों को “अरीवर” कहते हैं। ‘अकनानुरु’ जैसे साहित्य से पता चलता है कि विवाह जैसे शुभ आयोजन उचित तिथियों और समय का चुनाव करके संपन्न किए जाते थे।यह परंपरा आज भी तमिलनाडु में जारी है। चिथिरई के पहले दिन मंदिरों में पंचांग पढ़ा जाता है और लोग इसे सुनने के लिए एकत्रित होते हैं।

पंचांग में पाँच तत्व होते हैं: वार (दिन), तिथि, करण, नक्षत्र और योग। इनके आधार पर वर्षा, कृषि और वर्ष से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में भविष्यवाणी की जाती है। हमारे पूर्वज समय को मापने के लिए सौर और चंद्र दोनों प्रणालियों का उपयोग करते थे। आज आधुनिक विज्ञान उन्नत उपकरणों से ग्रहण की गणना करता है, लेकिन पहले भी इन घटनाओं का अध्ययन कर उन्हें सटीक रूप से बताया जाता था।

हमारे पूर्वजों से मिला ज्ञान हमारी धरोहर है। हमें इसे सुरक्षित रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए। मंदिरों में पंचांग का पाठ सुनना इस परंपरा का सम्मान करने का एक तरीका है। नववर्ष का एक और पहलू यह दिखाता है कि हमारे लोग प्रकृति की समृद्धि का कितना सम्मान करते थे। घरों में फल और फूल जैसी शुभ वस्तुओं को सजाया जाता है और सुबह सबसे पहले उन्हें देखा जाता है।

वसंत ऋतु वह समय है, जब प्रकृति खुद को नया रूप देती है। पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो जाते हैं और फूल-फल खिलते हैं। प्रकृति के साथ तालमेल में रहने वाले तमिल लोग “कणी कणल” की परंपरा के जरिए इस समृद्धि को देखकर वर्ष की शुरुआत करते हैं।

इसी तरह, इस दिन बनने वाले पारंपरिक भोजन में सभी स्वाद शामिल होते हैं, यहाँ तक कि कड़वा भी। यह हमें सिखाता है कि जीवन में सुख और दुख दोनों तरह के अनुभव होते हैं, और हमें उन्हें संतुलन के साथ स्वीकार करना चाहिए।

इन त्योहारों में पूरे देश में और दुनिया के उन हिस्सों में भी, जहां भारतीय समुदाय रहते हैं, एक समानता दिखाई देती है। ये उत्सव हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और विविधता की याद दिलाते हैं, साथ ही देश की एकता को भी दिखाते हैं। ये हमें मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा देते हैं।

मैं युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे नए साल को सकारात्मक सोच, विश्वास और समर्पण के साथ मनाएं  और अपने पूर्वजों के दिखाए रास्ते पर चलें। आइए हम देश की प्रगति में योगदान देने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

हमारा भारत हमेशा से अपनी सभ्यता के मूल्यों में एक रहा है और आगे भी एक बना रहेगा। बड़ों के आशीर्वाद से युवा पीढ़ी ‘एक भारत’ की भावना के साथ आगे बढ़े और 2047 तक ‘श्रेष्ठ भारत’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सफल हो।

(लेखक भारत के उपराष्ट्रपति हैं)

मंत्रिमंडल मंत्री संजीव अरोरा ने श्री गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल में खेल मैदान का उद्घाटन किया

अरोरा ने युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित और नशे से दूर रखने के लिए खेलों को एक शक्तिशाली साधन बताया

लुधियाना / सत्ता संदेश

रविवार को मंत्रिमंडल मंत्री संजीव अरोरा ने श्री गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल में नवनिर्मित खेल मैदान का उद्घाटन किया, जो क्षेत्र में खेल अवसंरचना और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और कुलवंत सिंह सिद्धू सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए अरोरा ने युवाओं में शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि खेलों में सक्रिय भागीदारी युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक और उत्पादक मार्ग की ओर निर्देशित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा, “खेल युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करते हैं। यह न केवल अनुशासन और टीम वर्क का निर्माण करता है, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी मदद करता है।”

मंत्रिमंडल मंत्री ने आगे घोषणा की कि पंजाब सरकार राज्य भर के गांवों में खेल के मैदानों के विकास पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य दोपहर 3 बजे के बाद खेल अवसंरचना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामुदायिक पहल गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाओं तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाती हैं।
अरोरा ने यह भी बताया कि नवउद्घाटित मैदान वॉलीबॉल, क्रिकेट, फुटबॉल और पिकलबॉल सहित कई खेलों के लिए सुविधाओं से सुसज्जित है, जो उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए एक व्यापक स्थान प्रदान करता है।

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने शोक संतप्त परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की

समयबद्ध जांच और लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने का आह्वान किया, परिवारों को पूर्ण सरकारी सहायता का आश्वासन दिया

लुधियाना / सत्ता संदेश

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के साथ रविवार को लुधियाना में वृंदावन नौका दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की।

संजीव अरोड़ा ने राकेश गुलाटी और उनकी पत्नी अंजू गुलाटी के घर और मीनु बंसल और उनकी बेटी दिंकी बंसल के घर अलग-अलग जाकर शोक संतप्त परिवारों को इस बेहद कठिन समय में अपनी संवेदना और समर्थन दिया।

मंत्री अरोड़ा परिवार के सदस्यों के साथ बैठे और उनके दुख में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसी प्रियजन को खोने के दर्द को शब्दों से कम नहीं किया जा सकता, और वे न केवल एक मंत्री के रूप में, बल्कि एक इंसान के रूप में उनके दुख में साथ देने आए हैं। उन्होंने इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लापरवाही की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि लापरवाही का नतीजा है और नाव चलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने उच्च स्तरीय और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।

अरोरा ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समन्वय करेगी ताकि न्याय शीघ्रता से मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों को सरकार और स्वयं की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने परिवारों से कहा कि वे किसी भी समय मदद के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं और इस कठिन समय में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

इस दौरे में मौजूद विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने मंत्री के बयानों का समर्थन किया और स्थानीय स्तर पर सभी आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने का वादा किया।

रविवार को मीनु बंसल की बेटी दिंकी बंसल का शव भी यमुना नदी से बरामद किया गया। उनके पार्थिव शरीर के देर रात तक पहुंचने की उम्मीद है।

संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बुद्धा दरिया और कवि दरबार

लुधियाना / सत्ता संदेश

आइए धरती, जल, वायु और पंजाबियत को बचाएं – प्रो. गुरभजन सिंह गिल

बैसाखी के पवित्र दिन को समर्पित तीसरा कवि दरबार लुधियाना के ताजपुर रोड स्थित केंद्रीय जेल के संगत घाट (बेस कैंप) के पास पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कवि दरबार में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आइए हम गुरु नानक पातशाह से जुड़ी इस पवित्र नदी की पवित्रता को बहाल करने के लिए चल रहे कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लें और इन ऐतिहासिक क्षणों के प्रत्यक्षदर्शी बनें। प्रख्यात साहित्यकार प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल ने संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा किए जा रहे महान कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आइए हम पंजाबी अपने जल, वायु, भूमि, संस्कृति, स्वच्छ गीतों और पंजाबियत को बचाने का प्रयास करें। आइए हम उच्च और शुद्ध कर्म योगी बनें। आइए हम अपने गांवों और शहरों को एक नई दिशा दें। श्रीमती नीरू कत्याल गुप्ता (आईएएस) कमिश्नर निगम लुधियाना ने भी बुड्ढा नदी की सफाई में लुधियाना निवासियों को सहयोग का संदेश दिया। नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने भी बुड्ढा नदी शुद्धिकरण अभियान को लुधियाना के लिए वरदान बताया। मंच का संचालन करते हुए, राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कवि करमजीत सिंह ग्रेवाल ने कवि दरबार में कवियों की उपस्थिति सुनिश्चित की। प्रख्यात लेखिका डॉ. गुरचरण कौर कोचर द्वारा श्री गुरु गोविंद सिंह जी की स्तुति में पढ़ी गई रचना ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। अपने स्वच्छ और अर्थपूर्ण गायन के लिए जाने जाने वाले, गायक पाली देतवालिया ने ‘गिव अस बैक रंगला पंजाब’, ‘चली गोलम दी जमीन लुधियाना खा गए’ और ‘मावां गीत’ सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल, अमरजीत सिंह शेरपुरी, जगपाल सिंह जग्गा जमालपुरी, करमजीत ग्रेवाल, सुखबीर संधे, दविंदर सिंह खासी कलां जेई और दलबीर कलेर ने ऊंची आवाज में गीत और कविताएं सुनाकर रचनात्मक संदेश दिया। संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल और संत सुखजीत सिंह सीचेवाल ने कवियों और सेवकों को पौध, सिरोपा, पगड़ी और अन्य कई सम्मान देकर उनका आदर और आशीर्वाद किया। बुढ़ा नदी के किनारे आयोजित इस सफल कवि सम्मेलन ने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी। इस अवसर पर सेवक सुखजीत सिंह सीचेवाल, हरदेव सिंह दाउधर, पाल सिंह नौली, क्षेत्र के पंचायत सदस्य और कई अन्य प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे।

पंजाब की महिलाओं के लिए खुशखबरी: ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ के लिए 15 अप्रैल से पंजीकरण; SC महिलाओं को मिलेंगे ₹1500

पंजाब डेस्क: पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

रजिस्ट्रेशन की नई तारीख: योजना के लिए पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) अब 15 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा। पहले इसके लिए बैसाखी (13 अप्रैल) का दिन तय किया गया था, लेकिन विधानसभा के विशेष सत्र के कारण इसे टाल दिया गया है।कितनी मिलेगी राशि: 18 साल से ऊपर की पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने एक बड़ा ऐलान करते हुए SC वर्ग की महिलाओं को ₹500 अतिरिक्त यानी कुल ₹1500 देने का निर्णय लिया है।

आदमपुर से आगाज: मुख्यमंत्री भगवंत मान 14 अप्रैल को जालंधर के आदमपुर में एक बड़ी रैली के जरिए इस योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे।पहले चरण के जिले: योजना के पहले चरण में 7 जिलों—मुक्तसर, रोपड़, पटियाला, संगरूर, मोगा, जालंधर और फरीदकोट—की 9 विधानसभा सीटों को शामिल किया गया है। इनमें मालवा क्षेत्र की 5 और दोआबा की 2 सीटें शामिल हैं।

पात्रता और दस्तावेज: लाभ पाने के लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और उसके पास पंजाब का वोटर कार्ड और आधार कार्ड होना अनिवार्य है। दूसरे राज्यों से ब्याह कर पंजाब आई बहुएं भी, जिनके पास ये दस्तावेज हैं, योजना का लाभ ले सकेंगी।

किसे नहीं मिलेगा लाभ: पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, सरकारी कर्मचारी, महिला पेंशनभोगी और टैक्स भरने वाली महिलाओं को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

पंजीकरण की प्रक्रिया: महिलाएं अपने जिले के सेवा केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बिल्कुल मुफ्त रजिस्ट्रेशन करा सकेंगी। पैसा सीधे बैंक अकाउंट में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजा जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए बजट में 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

अकालजोत भुलथ बास्केटबॉल लीग

पंजाब / सत्ता संदेश


पंजाब बास्केटबॉल एसोसिएशन (पीबीए) द्वारा आयोजित "अकालजोत भुलथ बास्केटबॉल लीग" के लिए ट्रायल्स सफलतापूर्वक संपन्न हुए और लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला।

पीबीए के महासचिव एस. तेजा सिंह धालीवाल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने ट्रायल्स में भाग लिया। जूनियर पुरुष वर्ग के लिए कुल 330 खिलाड़ी उपस्थित थे, जबकि महिला (अंडर-21) वर्ग में 110 खिलाड़ियों ने भाग लिया।

उन्होंने आगे बताया कि चयन प्रक्रिया योग्यता के आधार पर की गई। प्रतिभागियों में से जूनियर पुरुष वर्ग में 56 खिलाड़ी और महिला वर्ग में 50 खिलाड़ियों का चयन हुआ।

इस अवसर पर एस. मुखविंदर सिंह भुल्लर, एस. पिंका जर्ग, एस. गुरकिरपाल सिंह पीपीएस और कोच जयपाल सिंह भी उपस्थित थे और उन्होंने ट्रायल्स के दौरान खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।


एस. तेजा सिंह धालीवाल ने कहा कि लीग के मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किए जाएंगे और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह लीग पंजाब में बास्केटबॉल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने सभी चयनित खिलाड़ियों को बधाई दी और आशा व्यक्त की कि यह लीग युवा प्रतिभाओं के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान करेगी।
अध्यक्ष दर्शन सिंह महला और रंजीत कौर ने पंचायत समिति लुधियाना द्वितीय का कार्यभार संभाला। मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन गरिमापूर्ण ढंग से पहुंचे।
लुधियाना / सत्ता संदेश 

मंत्री मुंडियन ने कहा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपने अनुभव और परिश्रम से क्षेत्र के विकास को नई दिशा देंगे।

अध्यक्ष महला ने मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन और पार्टी उच्च कमान को धन्यवाद दिया।
लुधियाना, 11 अप्रैल: लुधियाना ब्लॉक समिति ब्लॉक 2 के नव निर्वाचित अध्यक्ष दर्शन सिंह महला और उपाध्यक्ष रंजीत कौर ने आज पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण समारोह को पूरा करने के लिए पंजाब कैबिनेट मंत्री सरदार हरदीप सिंह मुंडियां पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। मंत्री मुंडियन ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को कुर्सी पर बैठाकर पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत क्षेत्र के कई निवासी, ब्लॉक समिति के सदस्य, सरपंच, ब्लॉक अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पार्टी नेता अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने के समय उपस्थित थे। इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए, अध्यक्ष सरदार दर्शन सिंह महला और उपाध्यक्ष समिति लुधियाना ने कार्यभार संभाला। मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने कहा कि अध्यक्ष अपने अनुभव और परिश्रम से क्षेत्र के विकास को नई दिशा देंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्य चल रहे हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान जी द्वारा इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर अनुदान दिया जा रहा है। ताकि किसी भी काम की कमी न हो। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब की पहली पार्टी है जिसने पहले चार वर्षों में ही पंजाब की जनता से किए गए सभी वादे पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेता हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनकी रणनीति काम नहीं कर रही है क्योंकि पंजाब का हर बच्चा आम आदमी पार्टी, भगवंत मान साहब को चाहता है। दूसरी ओर, पत्रकारों से बात करते हुए चेयरमैन महला ने कहा कि मैं जहां अरविंद केजरीवाल जी हूं, मैं पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान, मनीष सिसोदिया जी और पंजाब के मंत्रिमंडल मंत्री सरदार हरदीप सिंह मुंडियन जी को मुझे अध्यक्ष पद के योग्य समझने के लिए तहे दिल से धन्यवाद देता हूं। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी उच्च कमान को वादा करता हूं कि मैं पार्टी का अध्यक्ष बनूंगा। उन्होंने कहा कि गांव के विकास कार्य बड़े पैमाने पर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के दौरान किए गए सभी वादे पूरे किए हैं और जब हम गांवों में सभाएं करते हैं, तो लोगों की एकमात्र उम्मीद यही होती है कि आम आदमी पार्टी 2027 से सरकार बनाएगी। क्योंकि आम आदमी पार्टी ने ऐसे काम किए हैं जो पिछले 75 वर्षों में किसी भी सरकार ने नहीं किए हैं। दर्शन सिंह महला ने उपस्थित सभी पार्टी पदाधिकारियों को हार्दिक धन्यवाद दिया।
अध्यक्ष गिल ने लुधियाना अनाज मंडी में गेहूं की खरीद की समीक्षा की।

उन्होंने किसानों को सुगम, त्वरित और परेशानी मुक्त खरीद का आश्वासन दिया।

अध्यक्ष गिल ने गेहूं के हर दाने की खरीद के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

लुधियाना, 11 अप्रैल

बाजार समिति के अध्यक्ष और पंजाब किसान विंग के राज्य सचिव एस. गुरजीत सिंह गिल ने आज लुधियाना अनाज मंडी में चल रही गेहूं खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा की और व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी आवश्यक उपाय लागू किए गए हैं। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। उन्होंने आगे कहा कि सभी मंडियों में गेहूं की खरीद सुचारू रूप से चल रही है। अध्यक्ष गिल और सचिव हरिंदर सिंह गिल ने आगे बताया कि खरीदे गए गेहूं का भुगतान ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में समय पर सीधे स्थानांतरित किया जा रहा है। कुशल प्रबंधन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों को परिवहन, भुगतान या रसद से संबंधित किसी भी समस्या से बचने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। खरीद के मौसम के दौरान किसानों को आरामदायक वातावरण प्रदान करने के लिए स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।